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Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया।

सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया।

कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन?

लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई।

बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई।

मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा।

2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई।

जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ।

यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी।

₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute

लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी।

संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है।

सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया।

हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं।

भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में

उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई।

15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई।

इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है।

सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व?

लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है।

सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है।

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Yogi Adityanath

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Rahul Gandhi

Rahul Gandhi Rally: दिवाली से पहले रैली टालने की मांग, दिल्ली के कारोबारियों को ₹10,000 करोड़ के नुकसान का डर

दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही दिल्ली के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। दुकानदारों को उम्मीद है कि त्योहारों के दौरान खरीदारी तेज होगी और कारोबार को अच्छा फायदा मिलेगा। इसी बीच कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को लेकर व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। दिल्ली के व्यापारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राहुल गांधी से 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली की तारीख आगे बढ़ाने की अपील की है। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली से पहले बाजारों में ग्राहकों की भारी भीड़ रहती है। ऐसे में बड़ी रैली के कारण ट्रैफिक डायवर्जन, रास्तों पर बैरिकेडिंग और आवाजाही में परेशानी हुई, तो कारोबार प्रभावित हो सकता है। CTI ने आशंका जताई है कि इससे करीब 10,000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है। यह संगठन का अनुमान है, वास्तविक नुकसान का आंकड़ा नहीं। Rahul Gandhi को क्यों लिखी गई चिट्ठी? CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से रैली की तारीख बदलने का अनुरोध किया है। व्यापारी संगठन चाहता है कि कार्यक्रम 10 नवंबर यानी भैया दूज के बाद आयोजित किया जाए, ताकि त्योहारों के दौरान बाजारों में खरीदारी और कारोबार सामान्य रूप से चलता रहे। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली उनके लिए साल का सबसे अहम कारोबारी समय होता है। इस दौरान केवल दिल्ली के ग्राहक ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों से भी लोग थोक खरीदारी करने पहुंचते हैं। अगर सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई, तो दुकानदारों के साथ ग्राहकों को भी परेशानी हो सकती है। दिवाली पर Delhi में कितने करोड़ का कारोबार? दिल्ली के बाजारों में दिवाली के दौरान कपड़े, सोना-चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मिठाई, ड्राई फ्रूट्स, गिफ्ट आइटम और सजावटी सामान की मांग बढ़ जाती है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल और प्रॉपर्टी जैसे क्षेत्रों में भी खरीदारी होती है। CTI के अनुमान के मुताबिक, धनतेरस के दौरान दिल्ली में करीब 25,000 करोड़ रुपये का कारोबार हो सकता है। व्यापारियों को डर है कि अगर त्योहार के व्यस्त दिनों में यातायात बाधित हुआ, तो दुकानों तक पहुंचने वाले ग्राहकों की संख्या कम हो सकती है। यही वजह है कि संगठन चाहता है कि राजनीतिक कार्यक्रमों की तारीख तय करते समय व्यापारियों की परेशानी को भी ध्यान में रखा जाए। रामलीला मैदान के आसपास के बाजारों पर असर की आशंका रामलीला मैदान के आसपास और मध्य दिल्ली में कई बड़े कारोबारी इलाके हैं। चांदनी चौक, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, भागीरथ पैलेस, खारी बावली और दरियागंज जैसे बाजारों में त्योहारों के समय काफी भीड़ रहती है। इन बाजारों में दिल्ली के अलावा दूसरे शहरों से भी व्यापारी सामान खरीदने आते हैं। ऐसे में ट्रैफिक डायवर्जन या रास्तों पर पाबंदियां लगने से माल की ढुलाई और ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, रैली के कारण किन रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्जन होगा या किन इलाकों में विशेष पाबंदियां लगेंगी, इस बारे में आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। पहले भी कारोबार प्रभावित होने का दावा CTI ने दावा किया है कि अक्टूबर में दिल्ली के कुछ इलाकों में रैलियों, मार्च और यातायात संबंधी व्यवधानों के कारण कारोबारियों को करीब 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। संगठन ने आशंका जताई है कि दिवाली के दौरान ऐसी स्थिति दोबारा बनी, तो व्यापारियों को और परेशानी हो सकती है। हालांकि, इस नुकसान के आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसे व्यापारी संगठन के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। 2025 में दिवाली पर हुई थी ₹75,000 करोड़ की बिक्री पिछले साल भी दिवाली के मौके पर दिल्ली के बाजारों में बड़े कारोबार की उम्मीद जताई गई थी। व्यापारिक संगठनों के अनुसार, 2025 में दिल्ली में दिवाली की बिक्री करीब 75,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान था। इसी वजह से इस साल भी व्यापारी त्योहारों के दौरान बाजारों में अच्छी बिक्री की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि दिवाली जैसे बड़े त्योहार के समय बाजारों तक आसान पहुंच बनाए रखना जरूरी है, ताकि ग्राहकों को खरीदारी में परेशानी न हो। 1 नवंबर की Rally को लेकर अब क्या होगा? कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के मुद्दे उठा रहा है। दूसरी ओर, व्यापारी संगठन चाहता है कि राजनीतिक कार्यक्रम और त्योहारों के कारोबार के बीच ऐसा संतुलन बनाया जाए, जिससे किसी भी पक्ष को अनावश्यक परेशानी न हो। फिलहाल, CTI ने राहुल गांधी से रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने की अपील की है। रैली की तारीख बदली जाएगी या कार्यक्रम 1 नवंबर को ही होगा, इस पर कांग्रेस के आधिकारिक फैसले का इंतजार है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कांग्रेस व्यापारियों की अपील पर क्या फैसला लेती है। अगर रैली की तारीख में बदलाव होता है, तो इससे दिवाली के दौरान दिल्ली के बाजारों में आवाजाही और कारोबार को लेकर व्यापारियों की चिंता कम हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Stock Market Update 4 दिन की गिरावट से निवेशकों को झटका, ₹20 लाख करोड़ से ज्यादा घटा मार्केट कैप

शेयर बाजार (Stock Market) में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए बीते चार कारोबारी दिन काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे। भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति के बाजार मूल्य में करीब ₹20.79 लाख करोड़ की कमी आई। Sensex और Nifty में कमजोरी के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को बाजार एक बार फिर गिरावट के साथ बंद हुआ। बाजार में इस कमजोरी के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया में तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसी वजहें बताई जा रही हैं। ऐसे माहौल में निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं। Sensex-Nifty में गिरावट से निवेशकों की बढ़ी चिंता शुक्रवार को BSE Sensex 125.56 अंक गिरकर 73,123.83 पर बंद हुआ। वहीं NSE Nifty 50 में 87.65 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,600 के आसपास बंद हुआ। बाजार में गिरावट का असर केवल बड़ी कंपनियों के शेयरों तक सीमित नहीं रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। इससे उन निवेशकों की चिंता बढ़ गई, जिन्होंने इन शेयरों में पैसा लगा रखा है। लगातार गिरावट के कारण बाजार की धारणा कमजोर हुई है। हालांकि, बाजार में आगे तेजी आएगी या गिरावट जारी रहेगी, इसका अनुमान केवल मौजूदा स्थिति के आधार पर लगाना सही नहीं होगा। 4 दिन में ₹20.79 लाख करोड़ की संपत्ति घटी शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा असर कंपनियों के कुल मार्केट कैप पर दिखाई दिया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य 16 अक्टूबर को करीब ₹472.62 लाख करोड़ था। 23 अक्टूबर तक यह घटकर लगभग ₹451.83 लाख करोड़ रह गया। इस तरह चार कारोबारी दिनों में करीब ₹20,78,774 करोड़ की कमी दर्ज की गई। यानी लगभग ₹20.79 लाख करोड़ का बाजार मूल्य घट गया। यहां एक बात समझना जरूरी है। मार्केट कैप में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि निवेशकों ने इतनी रकम नकद गंवा दी। शेयरों की कीमत घटने से कंपनियों का कुल बाजार मूल्य कम हुआ है। इसी वजह से इस आंकड़े को निवेशकों की संपत्ति के बाजार मूल्य में आई कमी के तौर पर समझना ज्यादा सही होगा। आखिर क्यों गिर रहा है Share Market? कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई का दबाव भी बढ़ने की आशंका रहती है। इसका असर कंपनियों की लागत और मुनाफे पर पड़ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को शेयर बाजार के लिए अहम संकेत माना जाता है। पश्चिम एशिया में तनाव से बढ़ी अनिश्चितता पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ाई है। अगर इस क्षेत्र में हालात बिगड़ते हैं, तो तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव आने की आशंका रहती है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं। इसका असर शेयरों की खरीद-बिक्री और बाजार की चाल पर दिखाई दे सकता है। Foreign Investors की बिकवाली विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की गतिविधियां भी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं। जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। हालांकि, बाजार की चाल केवल विदेशी निवेशकों पर निर्भर नहीं करती। घरेलू निवेश, कंपनियों के नतीजे और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी अहम भूमिका निभाती हैं। Midcap और Smallcap शेयरों में ज्यादा दबाव गिरावट के दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। इन शेयरों में उतार-चढ़ाव अक्सर अधिक हो सकता है, इसलिए बाजार में घबराहट बढ़ने पर इनमें बिकवाली तेज हो जाती है। ऐसे में जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयर ज्यादा हैं, उन्हें अपने निवेश के जोखिम को समझना जरूरी है। आगे कैसा रहेगा शेयर बाजार? अब निवेशकों की नजर अगले कारोबारी सप्ताह पर रहेगी। बाजार की दिशा तय करने में कई कारक अहम होंगे, जिनमें कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया के हालात, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिकी बाजारों के संकेत और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर होने वाले फैसले भी भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। अगर वैश्विक हालात में सुधार होता है और निवेशकों का भरोसा लौटता है, तो बाजार को सहारा मिल सकता है। दूसरी ओर, तनाव बढ़ने और बिकवाली जारी रहने पर उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। फिलहाल किसी निश्चित दिशा का दावा करना जल्दबाजी होगी। Investors के लिए क्या है जरूरी? शेयर बाजार में गिरावट देखकर घबराना स्वाभाविक है, खासकर तब जब पोर्टफोलियो की वैल्यू लगातार कम हो रही हो। लेकिन ऐसे समय में जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय निवेश से जुड़े बुनियादी पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। निवेशकों को अपनी वित्तीय जरूरतों, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। केवल बाजार की मौजूदा गिरावट देखकर किसी शेयर को खरीदने या बेचने का फैसला करना उचित नहीं है। निष्कर्ष: भारतीय शेयर बाजार में चार कारोबारी दिनों के दौरान करीब ₹20.79 लाख करोड़ के बाजार मूल्य में आई कमी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां फिलहाल बाजार के लिए अहम संकेत हैं। आने वाले दिनों में बाजार किस दिशा में जाएगा, यह इन परिस्थितियों और कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
IND vs NZ

IND vs NZ 2nd T20: आज भारत-न्यूजीलैंड की भिड़ंत, ईशान किशन बाहर; वैभव सूर्यवंशी को मौका?

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच आज, 24 अक्टूबर को दूसरा T20 मुकाबला खेला जाएगा। पहले मैच में शानदार जीत दर्ज करने के बाद टीम इंडिया की नजरें सीरीज में अपनी बढ़त 2-0 करने पर होंगी। लेकिन मुकाबले से पहले भारतीय टीम को झटका लगा है। विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन चोट के कारण दूसरे मैच से बाहर हो गए हैं। ऐसे में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग XI में मौका मिलने की चर्चा तेज हो गई है। यह मुकाबला न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च स्थित हेगले ओवल मैदान पर खेला जाना है। भारतीय समय के अनुसार टॉस दोपहर 12 बजे और मैच दोपहर 12:30 बजे शुरू होने का कार्यक्रम है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि कप्तान सूर्यकुमार यादव किस टीम कॉम्बिनेशन के साथ मैदान पर उतरते हैं। Ishan Kishan Injury: चोट के कारण दूसरे T20 से बाहर ईशान किशन को पहले मुकाबले के दौरान दाईं जांघ के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों में चोट लगी थी। इसके बाद मेडिकल टीम ने उनकी स्थिति का आकलन किया और उन्हें दूसरे मैच से बाहर रखने का फैसला लिया गया। ईशान की गैरमौजूदगी में विकेटकीपर-बल्लेबाज कुमार कुशाग्र को कवर के तौर पर टीम में शामिल किया गया है। ईशान की चोट भारतीय टीम के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि वह बल्लेबाजी के साथ विकेटकीपिंग का भी विकल्प देते हैं। फिलहाल उनकी वापसी को लेकर निश्चित जानकारी सामने नहीं आई है। उनकी फिटनेस पर मेडिकल टीम की नजर बनी हुई है। Vaibhav Sooryavanshi: क्या आज मिलेगा डेब्यू का मौका? दूसरे T20 से पहले वैभव सूर्यवंशी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। कम उम्र में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले वैभव को मौका मिलता है, तो यह उनके करियर के लिए बड़ा पल हो सकता है। हालांकि, उनके खेलने को लेकर आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। टीम मैनेजमेंट को यह तय करना होगा कि ईशान की जगह किस खिलाड़ी को उतारा जाए और बल्लेबाजी क्रम में क्या बदलाव किए जाएं। वैभव को मौका मिलने पर भारतीय टीम की शुरुआत और भी आक्रामक हो सकती है। लेकिन अंतिम फैसला टॉस के समय घोषित होने वाली प्लेइंग XI से ही साफ होगा। IND vs NZ 1st T20: पहले मैच में भारत ने कैसे मारी बाजी? सीरीज के पहले मुकाबले में भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को चार विकेट से हराकर 1-0 की बढ़त बनाई थी। न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 225 रन बनाए थे। ग्लेन फिलिप्स ने 40 गेंदों पर नाबाद 82 रन की पारी खेली, जबकि फिन एलन ने भी तेजी से रन जोड़े। 226 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने 19.4 ओवर में छह विकेट खोकर 230 रन बना दिए। इस जीत के साथ भारत ने पुरुष T20 इंटरनेशनल में अपना सबसे बड़ा सफल रन चेज दर्ज किया। Sanju Samson और Naman Dhir ने दिलाई यादगार जीत भारत की जीत में संजू सैमसन का योगदान अहम रहा। उन्होंने 33 गेंदों पर 67 रन बनाकर टीम को मजबूत शुरुआत दी। अभिषेक शर्मा के साथ उनकी साझेदारी ने रन चेज को आसान बनाने में मदद की। इसके बाद श्रेयस अय्यर ने 42 रन बनाकर पारी को आगे बढ़ाया। आखिरी ओवरों में नमन धीर ने नाबाद 42 रन की पारी खेली और भारत को लक्ष्य तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इस जीत ने दिखाया कि भारतीय टीम बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय भी दबाव में अपना संयम बनाए रख सकती है। दूसरे T20 में टीम इंडिया के सामने क्या होंगी चुनौतियां? पहले मैच में भारतीय बल्लेबाजों ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन गेंदबाजी में सुधार की गुंजाइश रही। न्यूजीलैंड ने 225 रन बनाकर भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाया था। दूसरे मुकाबले में टीम इंडिया को शुरुआती ओवरों में विकेट लेने और डेथ ओवरों में रन रोकने पर ध्यान देना होगा। दूसरी तरफ न्यूजीलैंड की टीम घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाकर सीरीज में वापसी करना चाहेगी। अगर भारतीय गेंदबाज बेहतर प्रदर्शन करते हैं, तो बल्लेबाजों के लिए मैच जीतना आसान हो सकता है। वहीं, न्यूजीलैंड की कोशिश भारत के मजबूत बल्लेबाजी क्रम को रोकने की होगी। India vs New Zealand 2nd T20: मैच की जरूरी जानकारी आज के मैच में किस पर रहेंगी सबकी नजरें? दूसरे T20 में भारत के सामने सीरीज में बढ़त मजबूत करने का मौका है। ईशान किशन की चोट से टीम का संतुलन प्रभावित हो सकता है, जबकि वैभव सूर्यवंशी को मौका मिलने की संभावना ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। अब देखना होगा कि भारतीय टीम किस प्लेइंग XI के साथ उतरती है और क्या पहले मैच की तरह बल्लेबाज एक बार फिर बड़ा लक्ष्य हासिल करने में सफल रहते हैं। क्रिकेट प्रशंसकों को एक और रोमांचक मुकाबले की उम्मीद होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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