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India vs New Zealand

India vs New Zealand: आखिरी 3 ओवर में 29 रन की जरूरत, रोमांचक मोड़ पर मैच

भारत और न्यूजीलैंड (India vs New Zealand) के बीच T20 मुकाबला अब बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। न्यूजीलैंड के 226 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने 5 विकेट के नुकसान पर 197 रन बना लिए हैं। अब जीत के लिए भारत को 18 गेंदों में 29 रन बनाने हैं। क्रीज पर श्रेयस अय्यर और नमन धीर मौजूद हैं। ऐसे में भारतीय फैंस की नजरें दोनों बल्लेबाजों पर टिकी हैं। मैच के इस मोड़ पर एक छोटी-सी गलती भी टीम की मुश्किल बढ़ा सकती है। वहीं, अगर भारतीय बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाए और विकेट बचाए रखे, तो जीत हासिल करने का मौका बना हुआ है। IND vs NZ: न्यूजीलैंड ने खड़ा किया 225 रन का स्कोर पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने 20 ओवर में 4 विकेट खोकर 225 रन बनाए। टीम की ओर से ग्लेन फिलिप्स ने शानदार बल्लेबाजी की और 40 गेंदों पर नाबाद 82 रन बनाए। उनकी आक्रामक पारी ने न्यूजीलैंड को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। कीवी बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। बड़े शॉट खेलने के साथ-साथ उन्होंने रन गति को भी धीमा नहीं पड़ने दिया। इसी वजह से भारत के सामने 226 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य आया। India vs New Zealand: लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की स्थिति 226 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को तेजी से रन बनाने थे। टीम ने स्कोर आगे बढ़ाया, लेकिन पांच विकेट गिरने के बाद मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अब श्रेयस अय्यर और नमन धीर के सामने दोहरी चुनौती है। उन्हें एक तरफ जरूरी रन बनाने हैं, तो दूसरी तरफ विकेट भी बचाकर रखना है। दोनों के बीच अच्छी साझेदारी भारत को जीत के करीब पहुंचा सकती है। आखिरी 18 गेंदों का खेल होगा निर्णायक भारत को 18 गेंदों में 29 रन चाहिए। इसका मतलब है कि टीम को बचे हुए तीन ओवरों में लगातार रन बनाने होंगे। T20 क्रिकेट में यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, लेकिन न्यूजीलैंड के गेंदबाज भी इस मौके को आसानी से हाथ से जाने नहीं देना चाहेंगे। अगर भारतीय बल्लेबाज शुरुआती गेंदों पर बाउंड्री लगाने में सफल रहते हैं, तो आखिरी ओवर का दबाव कम हो सकता है। वहीं, विकेट गिरने की स्थिति में भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्या Team India हासिल कर पाएगी जीत? मैच का रुख अब काफी हद तक श्रेयस अय्यर और नमन धीर की बल्लेबाजी पर निर्भर करेगा। भारतीय टीम को जीत के लिए बड़े शॉट खेलने के साथ समझदारी से स्ट्राइक भी बदलनी होगी। न्यूजीलैंड की टीम अपने स्कोर का बचाव करने की पूरी कोशिश करेगी। ऐसे में अंतिम तीन ओवर में गेंदबाजों और बल्लेबाजों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। फिलहाल मुकाबला रोमांचक स्थिति में है और भारत के पास लक्ष्य हासिल करने का मौका मौजूद है। अब देखना होगा कि भारतीय बल्लेबाज आखिरी गेंदों में टीम को जीत दिला पाते हैं या न्यूजीलैंड मुकाबले पर कब्जा जमा लेता है। IND vs NZ Live Score: मैच की ताजा स्थिति हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Neha Bora

Neha Bora High Court: ‘न हमने कॉल दिया, न वहां गए’, CJP प्रदर्शन से किया किनारा

दिल्ली में CJP प्रदर्शन को लेकर विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। 22 अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नेहा बोरा (Neha Bora) ने साफ कहा कि उन्होंने कनॉट प्लेस में हुए प्रदर्शन के लिए न तो कोई कॉल दिया और न ही वह वहां गई थीं। उनके इस बयान के बाद CJP प्रदर्शन और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। Neha Bora की ओर से अदालत में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए। उनका कहना है कि जिस प्रदर्शन से उन्हें जोड़कर कार्रवाई की गई, उसमें उनकी भूमिका को लेकर लगाए गए आरोप सही नहीं हैं। अब इस मामले में सबकी नजर हाईकोर्ट की सुनवाई और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर है। Delhi High Court में नेहा बोरा ने क्या कहा? दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नेहा बोरा की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में होने वाले प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया था। उन्होंने यह भी कहा कि वह वहां मौजूद नहीं थीं। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष के मुताबिक, नेहा को हिरासत में लेने की प्रक्रिया और उसके बाद जारी किए गए नोटिस के लिए पर्याप्त आधार नहीं बताया गया। नेहा बोरा ने अदालत में पुलिस की ओर से जारी उस नोटिस को भी चुनौती दी है, जिसमें शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी मुचलका और एक जमानतदार देने की शर्त रखी गई थी। क्या है Neha Bora और CJP प्रदर्शन का पूरा मामला? यह पूरा विवाद 16 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से जुड़ा है। इस मार्च के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विरोध दर्ज कराने की योजना थी। नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। बाद में उन्हें शांति बनाए रखने के लिए मुचलका देने से संबंधित नोटिस जारी किया गया। नेहा की ओर से अदालत में कहा गया कि मंडी हाउस में प्रस्तावित सभा और कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में होने वाले प्रदर्शन को एक ही मामला मानकर कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने पुलिस के कदम को चुनौती देते हुए नोटिस की वैधता पर सवाल उठाए हैं। CJP Leaders Update: सौरव दास और आशुतोष रांका को भी मिली राहत CJP प्रदर्शन से जुड़े मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका का नाम भी चर्चा में है। दोनों नेताओं को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद 21 अक्टूबर को दोनों की रिहाई का आदेश दिया गया। इसके लिए उन्हें निजी और जमानती मुचलके भरने तथा निर्धारित शर्तों का पालन करने को कहा गया। दोनों नेताओं की हिरासत और नेहा बोरा की याचिका ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। SIR Controversy: क्यों हो रहा है विरोध? मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उससे जुड़े विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी जारी है। CJP से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है। इसी बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों से मुचलका भरवाने जैसे मुद्दे अदालत तक पहुंच गए हैं। अब आगे क्या होगा? दिल्ली हाईकोर्ट में नेहा बोरा की ओर से पुलिस के नोटिस और हिरासत की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। अब इस मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही अहम होगी। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि हाईकोर्ट ने नेहा बोरा को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है या पुलिस का नोटिस रद्द कर दिया है। मामले में अंतिम आदेश की पुष्टि होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold Price Today: सोने के दाम में बड़ी गिरावट, 10 ग्राम का भाव ₹1.43 लाख पर

सोना (Gold) और चांदी (Silver) खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। पिछले तीन दिनों में दोनों कीमती धातुओं के भाव में अच्छी-खासी गिरावट आई है। सोना करीब ₹3,000 और चांदी लगभग ₹9,000 तक सस्ती हुई है। ऐसे में शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने या निवेश की योजना बना रहे लोगों की नजर अब बाजार के अगले रुख पर है। 22 अक्टूबर 2026 के बाजार अपडेट के मुताबिक, 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1.43 लाख और चांदी का भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो बताया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग बाजारों में कीमतों का अंतर हो सकता है। Gold Rate Today: ₹1.43 लाख पर पहुंचा 10 ग्राम सोना Gold Price में आई गिरावट से खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है। बीते तीन दिनों में भाव करीब ₹3,000 नीचे आने से उन लोगों के लिए खरीदारी का मौका बन सकता है, जो लंबे समय से कीमतें कम होने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, सोना खरीदने से पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर पता कर लें। 24 कैरेट सोने की कीमत और गहने बनाने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने के भाव में अंतर होता है। इसके अलावा ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और GST भी देना पड़ता है। Silver Rate Today: चांदी ₹9,000 तक हुई सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। पिछले तीन दिनों में चांदी करीब ₹9,000 तक सस्ती हुई है और इसका भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो के स्तर पर बताया जा रहा है। चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर उन ग्राहकों पर भी पड़ता है, जो त्योहारों पर चांदी के सिक्के, बर्तन या दूसरे सामान खरीदते हैं। हालांकि, खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार में चांदी का ताजा भाव और शुद्धता की जानकारी लेना जरूरी है। सोना-चांदी के दाम क्यों गिर रहे हैं? Gold or Silver की कीमतें केवल घरेलू मांग से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव, डॉलर की चाल, रुपये की स्थिति और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें भी इनके भाव पर असर डालती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें कमजोर होती हैं, तो भारतीय बाजार में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा मुनाफावसूली के कारण भी कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, बाजार में आई गिरावट की किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। कीमतों की चाल कई आर्थिक और वैश्विक कारकों पर निर्भर करती है। क्या अभी सोना और चांदी खरीदना सही रहेगा? अगर आप शादी या त्योहार के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा गिरावट आपके लिए राहत की बात हो सकती है। लेकिन केवल तीन दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना ठीक नहीं है कि आगे भी भाव लगातार कम होंगे। खरीदारी से पहले अलग-अलग ज्वेलर्स के रेट की तुलना करें। सोने पर हॉलमार्क और शुद्धता की जांच करें तथा बिल में मेकिंग चार्ज और GST का पूरा विवरण देखें। निवेश के लिहाज से भी जल्दबाजी करने के बजाय अपने बजट और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर है। आगे Gold-Silver Price में क्या बदलाव हो सकता है? आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों से जुड़ी खबरें और रुपये की चाल सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में भाव में फिर तेजी आने या गिरावट जारी रहने, दोनों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, तीन दिनों में सोने और चांदी के दाम में आई गिरावट ने खरीदारों को थोड़ी राहत दी है। अगर आप आज खरीदारी करने जा रहे हैं, तो पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर जांच लें, क्योंकि बाजार भाव और ज्वेलरी की अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Amit Shah

Amit Shah Statement: धरने से कुछ नहीं होगा, जनता के बीच जाएं- विपक्ष को शाह की सलाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ धरना-प्रदर्शन करने से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता। अगर विपक्ष को राजनीति में आगे बढ़ना है, तो उसे जनता के बीच जाकर काम करना होगा। शाह ने कांग्रेस को लेकर दावा किया कि पार्टी अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं लौट पाएगी। उन्होंने अपने बयान में राहुल गांधी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी राजनीति और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाए। अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और कथित वोट चोरी को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच सियासी टकराव जारी है। कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग से जवाब मांग रही है, जबकि भाजपा विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक हताशा से जोड़ रही है। Amit Shah Statement: कांग्रेस पर क्यों बरसे गृह मंत्री? अमित शाह ने अपने संबोधन में कांग्रेस की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए केवल विरोध प्रदर्शन करना काफी नहीं है। राजनीतिक दलों को जनता की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए काम करना चाहिए। शाह के मुताबिक, विपक्ष को अपनी चुनावी हार की वजहों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर निशाना साधते हुए दावा किया कि पार्टी की मौजूदा राजनीति उसे लंबे समय तक सत्ता से दूर रख सकती है। हालांकि, कांग्रेस के अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं आने का बयान अमित शाह का राजनीतिक दावा है। इसे किसी निश्चित चुनावी नतीजे के तौर पर नहीं देखा जा सकता। Rahul Gandhi का नाम लिए बिना क्या बोले अमित शाह? अमित शाह ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना विपक्ष के धरने और प्रदर्शनों पर टिप्पणी की। उनके बयान को कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ उठाए जा रहे सवालों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। शाह का कहना है कि विपक्ष को जनता के बीच जाकर अपना समर्थन बढ़ाना चाहिए। केवल आरोप लगाने या सड़कों पर उतरने से चुनावी राजनीति में सफलता नहीं मिलती। दूसरी तरफ, कांग्रेस का तर्क है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। पार्टी और INDIA गठबंधन के नेता मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। Vote Chori और SIR पर भाजपा-विपक्ष में टकराव देश की राजनीति में वोट चोरी और SIR यानी Special Intensive Revision का मुद्दा लगातार चर्चा में है। राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि इन मामलों में स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। वहीं, भाजपा इन आरोपों को खारिज करती रही है और विपक्ष पर चुनावी हार के बाद संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाती है। इस विवाद में दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। मतदाता सूची से जुड़े आरोपों की सच्चाई समझने के लिए आधिकारिक आंकड़ों, चुनाव आयोग के जवाब और उपलब्ध प्रमाणों को देखना जरूरी है। चुनाव आयोग को लेकर भी जारी है सियासी लड़ाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों का विरोध पहले भी सामने आ चुका है। विपक्ष ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर जवाब मांगा है। वहीं, भाजपा का कहना है कि चुनावी नतीजों को लेकर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय विपक्ष को अपनी रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। इस मुद्दे ने भाजपा और INDIA गठबंधन के बीच राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले समय में यह विवाद चुनावी भाषणों और विपक्षी अभियानों में भी अहम भूमिका निभा सकता है। Amit Shah ने AAP पर भी साधा निशाना अमित शाह ने अपने संबोधन में आम आदमी पार्टी (AAP) की राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने विपक्षी दलों को सलाह दी कि वे आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जनता के लिए काम करें। दिल्ली की राजनीति में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच लंबे समय से टकराव रहा है। ऐसे में शाह का बयान विपक्ष पर राजनीतिक दबाव बनाने के साथ-साथ भाजपा के चुनावी संदेश को मजबूत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। आगे क्या होगा? कांग्रेस के सामने क्या चुनौती है? अमित शाह के बयान से साफ है कि भाजपा कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। दूसरी ओर, कांग्रेस चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांगने की अपनी रणनीति पर कायम है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में क्या तथ्य सामने रखता है और चुनाव आयोग इन सवालों पर क्या जवाब देता है। साथ ही, यह भी देखना होगा कि इन मुद्दों का आने वाले चुनावों में मतदाताओं पर कितना असर पड़ता है। फिलहाल, अमित शाह का 30 साल वाला बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। लेकिन आखिरकार चुनाव में किसे जनता का समर्थन मिलेगा, इसका फैसला मतदाता ही करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ranbir Kapoor

Ranbir Kapoor Controversy: सच्चाई और अच्छाई पर गलत बोल गए रणबीर, अब मांगी माफी

बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। दशहरे के मौके पर कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सच्चाई और अच्छाई को लेकर कुछ ऐसा कह दिया, जिस पर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे। वीडियो वायरल हुआ तो लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। अब रणबीर कपूर ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी है। उन्होंने सफाई दी कि बोलते समय उनकी जुबान फिसल गई थी और वह कुछ और कहना चाहते थे। दशहरे पर क्या बोल गए रणबीर कपूर? दरअसल, दशहरे के मौके पर Ranbir Kapoor कोलकाता में एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस दौरान वह बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश के बारे में बात कर रहे थे। लेकिन अपनी बात रखते समय वह ‘सच्चाई और अच्छाई की जीत’ की जगह उनके अंत होने जैसी बात कह गए। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसके बाद कई यूजर्स ने उनके शब्दों पर सवाल उठाए, तो कुछ ने मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी। मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि रणबीर कपूर अपनी आगामी फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं। ट्रोलिंग के बाद Ranbir Kapoor ने मांगी माफी बयान को लेकर विवाद बढ़ने के बाद रणबीर कपूर ने चेन्नई में आयोजित ‘रामायण’ के म्यूजिकल इवेंट में इस पर सफाई दी। उन्होंने माना कि उस समय बोलते हुए उनकी जुबान फिसल गई थी। Ranbir ने बताया कि वह कहना चाहते थे कि बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, आखिरकार जीत सच्चाई और अच्छाई की ही होती है। लेकिन शब्दों के गलत इस्तेमाल के कारण उनकी बात का अर्थ बदल गया। उन्होंने अपनी गलती के लिए माफी भी मांगी। अभिनेता ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी समझाया कि कभी-कभी वह कहना कुछ चाहते हैं, लेकिन उनके मुंह से कुछ और निकल जाता है। उनकी इस सफाई के बाद यह साफ हुआ कि उनका इरादा दशहरे के संदेश के उलट बात कहने का नहीं था। Social Media पर क्यों होने लगे Ranbir Kapoor ट्रोल? Ranbir Kapoor का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने इसे जुबान फिसलने की सामान्य गलती बताया, जबकि कुछ यूजर्स ने सार्वजनिक मंच पर बोलते समय ज्यादा सावधानी बरतने की बात कही। फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम का किरदार निभाने की वजह से भी यह बयान लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, रणबीर ने ज्यादा देर तक इस मामले पर चुप रहने के बजाय अपनी बात स्पष्ट की और गलती स्वीकार कर ली। Ranbir Kapoor की अपकमिंग फिल्म Ramayana भी चर्चा में रणबीर कपूर इन दिनों निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ को लेकर भी सुर्खियों में हैं। फिल्म में साई पल्लवी माता सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म के पहले भाग की रिलीज 5 नवंबर 2026 को तय बताई गई है। ऐसे में फिल्म के प्रमोशन के दौरान रणबीर कपूर के बयान ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। Ranbir Kapoor Controversy: क्या है पूरा मामला? इस पूरे विवाद की शुरुआत दशहरे के कार्यक्रम में बोले गए गलत शब्दों से हुई। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद रणबीर कपूर को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनकी जुबान फिसल गई थी और वह अच्छाई व सच्चाई की जीत की बात कर रहे थे। फिलहाल, रणबीर कपूर की माफी के बाद इस मामले में उनकी सफाई सामने आ चुकी है। अब दर्शकों की नजर उनकी फिल्म ‘रामायण’ पर है, जिसे लेकर पहले से ही काफी उत्सुकता बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Akhilesh Yadav

Akhilesh Yadav Rampur Visit: रामपुर जेल पहुंचे अखिलेश, आजम खान से करेंगे मुलाकात

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) गुरुवार, 22 अक्टूबर को रामपुर जिला जेल पहुंचे। यहां उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात होनी है। इस दौरे पर राजनीतिक गलियारों की नजरें टिकी हैं। इसकी वजह सिर्फ दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बदलते राजनीतिक समीकरण भी हैं। Akhilesh Yadav के रामपुर पहुंचने के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि आजम खान से बातचीत के बाद वह क्या कहते हैं और इस मुलाकात से पार्टी के भीतर क्या संदेश जाता है। Akhilesh Yadav कैसे रामपुर पहुंचे ? निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) लखनऊ से निजी विमान के जरिए बरेली पहुंचे। इसके बाद हेलीकॉप्टर से रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय पहुंचे और वहां से जिला जेल के लिए रवाना हुए। कार्यक्रम में आजम खान से मुलाकात के साथ उनके परिवार से मिलने की योजना भी शामिल है। आजम खान की तबीयत और उनके हालात जानने को इस दौरे की अहम वजह बताया गया है। Azam Khan से मुलाकात क्यों है खास? आजम खान समाजवादी पार्टी के पुराने और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। रामपुर और आसपास के इलाकों में उनकी राजनीतिक पहचान लंबे समय से रही है। ऐसे में अखिलेश यादव का उनसे मिलने पहुंचना पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ समय से आजम खान और सपा नेतृत्व के संबंधों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं। उनकी पत्नी तजीन फातिमा की अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद रामपुर आने का कार्यक्रम भी चर्चा में रहा। अब दोनों नेताओं की मुलाकात से यह देखने की उत्सुकता है कि उनके बीच किन मुद्दों पर बात होती है और आगे पार्टी की ओर से क्या संदेश दिया जाता है। UP Politics: 2027 चुनाव से पहले बढ़ी हलचल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सभी प्रमुख दल अपने राजनीतिक समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे समय में आजम खान से अखिलेश यादव की मुलाकात को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के नजरिए से भी देखा जा रहा है। हालांकि, इस मुलाकात में चुनावी रणनीति या संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे किसी बड़े राजनीतिक फैसले से जोड़कर देखना अभी जल्दबाजी होगी। Asaduddin Owaisi के दौरे के बाद चर्चा तेज रामपुर में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के दौरे और समाजवादी पार्टी पर उनकी राजनीतिक टिप्पणियों के बाद भी इस मुलाकात को लेकर चर्चा हो रही है। ओवैसी मुस्लिम राजनीति और सपा के नेतृत्व को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में अखिलेश यादव और आजम खान की मुलाकात पर राजनीतिक दलों की नजर होना स्वाभाविक है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच बातचीत का वास्तविक एजेंडा सामने आने के बाद ही इसके राजनीतिक मायने स्पष्ट होंगे। Om Prakash Rajbhar के बयान से भी गरमाई सियासत उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी अखिलेश यादव के रामपुर दौरे को लेकर टिप्पणी की है। इस बयानबाजी के बीच सपा प्रमुख का आजम खान से मिलना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल, इस दौरे को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लेकिन अखिलेश यादव और आजम खान की बातचीत के बाद ही यह साफ होगा कि मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद क्या होगा अगला कदम? अखिलेश यादव के रामपुर पहुंचने के बाद अब आजम खान से मुलाकात और उनके परिवार से बातचीत पर सबकी नजर है। समर्थकों को उम्मीद है कि इस मुलाकात से दोनों नेताओं के बीच संवाद को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल, किसी नई चुनावी रणनीति या बड़े फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव का बयान और समाजवादी पार्टी की आगे की गतिविधियां इस दौरे की अहमियत को समझने में मदद करेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Saudi Arabia

Saudi Arabia Attack: एयरपोर्ट और Oil Field पर हमला, 3 की मौत; भारतीय समेत 10 घायल

सऊदी अरब (Saudi Arabia) में एयरपोर्ट और तेल ठिकाने पर हुए हमलों ने एक बार फिर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बुधवार, 21 अक्टूबर को दम्माम के किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और शायबाह ऑयल फील्ड के पास अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 10 लोग घायल हुए। घायलों में एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। इन घटनाओं के बाद अमेरिका ने सऊदी अरब में तैनात अपने गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली। लगातार बढ़ते हमलों ने सऊदी अरब की सुरक्षा, हवाई सेवाओं और तेल आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। Dammam Airport Attack: एयरपोर्ट पर हमले में एक की मौत सऊदी अरब के पूर्वी शहर दम्माम स्थित किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को 21 अक्टूबर की शाम निशाना बनाया गया। सऊदी अरब के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के मुताबिक, इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई और आठ लोग घायल हो गए। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि एयरपोर्ट की संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन शुरू किया गया। घटना के बाद हवाई यातायात पर असर पड़ा और कुछ विमानों को दूसरे एयरपोर्ट की ओर डायवर्ट करना पड़ा। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। यात्रियों को अपनी उड़ान की ताजा स्थिति संबंधित एयरलाइन से जांचने की सलाह दी गई है। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब सऊदी अरब के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। Shaybah Oil Field Attack: ड्रोन का मलबा गिरने से दो लोगों की मौत सऊदी अरब के शायबाह ऑयल फील्ड को निशाना बनाने की कोशिश भी की गई। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, तेल सुविधा की ओर आ रहे ड्रोन को एयर डिफेंस ने रोक दिया। इसके बाद गिरे मलबे से दो लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। मारे गए लोगों में नेपाल और फिलीपींस के नागरिक शामिल हैं। वहीं, घायलों में एक भारतीय और एक पाकिस्तानी नागरिक बताया गया है। मलबा गिरने से तेल ठिकाने के बाहर एक ठेकेदार के वाहन में आग भी लग गई। शायबाह ऑयल फील्ड सऊदी अरब की प्रमुख तेल उत्पादन सुविधाओं में से एक है। राहत की बात यह रही कि शुरुआती आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस घटना से तेल उत्पादन पर असर नहीं पड़ा। Indian Citizen Injured: भारतीय दूतावास ने क्या कहा? शायबाह ऑयल फील्ड के पास हुई घटना में भारतीय नागरिक के घायल होने के बाद रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने सऊदी अधिकारियों से संपर्क किया। दूतावास ने घायल भारतीय को जरूरी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। फिलहाल उसकी स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने का इंतजार है। सऊदी अरब में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं। ऐसे में एयरपोर्ट और तेल सुविधाओं पर हमलों की खबरों से वहां रहने वाले भारतीय परिवारों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। भारतीय नागरिकों को स्थानीय प्रशासन और दूतावास की आधिकारिक सलाह पर ध्यान देना चाहिए। US Diplomats Exit: अमेरिका ने कर्मचारियों को देश छोड़ने को कहा सऊदी अरब में बढ़ते सुरक्षा खतरे के बीच अमेरिका ने अपने गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का निर्देश दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट के अनुसार, यह फैसला सऊदी अरब में नागरिक ठिकानों पर बढ़ते हमलों और उनसे पैदा हुए सुरक्षा जोखिम को देखते हुए लिया गया। अमेरिकी अधिकारियों ने क्षेत्र में संभावित नए हमलों की आशंका भी जताई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका दूसरे खाड़ी देशों में स्थित अपने कुछ मिशनों से भी परिवार के सदस्यों को वापस बुलाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, सऊदी अरब के लिए जारी आदेश और दूसरे देशों में संभावित कदम अलग-अलग हैं। इस फैसले से संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति को गंभीरता से ले रहा है। हूती विद्रोहियों पर शक, पश्चिम एशिया में क्यों बढ़ रहा तनाव? यमन में सक्रिय हूती विद्रोही लंबे समय से सऊदी अरब और उसकी समर्थित यमनी सरकार के साथ संघर्ष में शामिल रहे हैं। हाल के दिनों में समूह ने सऊदी अरब के एयरपोर्ट और तेल से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने की धमकियां दी हैं। हूतियों ने पहले रियाद में हुए कुछ हमलों की जिम्मेदारी भी ली थी। हालांकि, 21 अक्टूबर को दम्माम एयरपोर्ट और शायबाह ऑयल फील्ड से जुड़ी दोनों घटनाओं के लिए तत्काल कोई स्पष्ट सार्वजनिक जिम्मेदारी सामने नहीं आई थी। क्षेत्र में जारी व्यापक संघर्ष ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। सऊदी अरब के लिए चुनौती केवल अपने महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा करना नहीं, बल्कि आम नागरिकों, विदेशी कर्मचारियों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। Saudi Arabia News: पहले भी रियाद एयरपोर्ट पर हो चुके हैं हमले दम्माम की घटना से पहले राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी कई हमले हुए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, अक्टूबर के शुरुआती दिनों में हुए हमलों में बड़ी संख्या में लोग मारे गए और 300 से अधिक लोग घायल हुए। इन घटनाओं के बाद हवाई सेवाएं प्रभावित हुईं और कई एयरलाइंस ने अपनी उड़ानों में बदलाव किए। हवाई अड्डों पर लगातार हमलों से यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कारोबार और पर्यटन पर भी असर पड़ने की आशंका है। सऊदी अरब अपनी अर्थव्यवस्था को तेल के अलावा दूसरे क्षेत्रों में विस्तार देने की कोशिश कर रहा है, ऐसे में सुरक्षा संबंधी घटनाएं उसके लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकती हैं। Crude Oil Price: हमलों के बाद कच्चा तेल महंगा सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में शामिल है। इसलिए उसके तेल ठिकानों पर हमलों की खबर का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ता है। रॉयटर्स की 22 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.82 डॉलर बढ़कर 111.64 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। अमेरिकी WTI क्रूड भी 2.24 डॉलर बढ़कर 99.39 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा। बाजार में तेजी की एक प्रमुख वजह यह चिंता है कि अगर हमले बढ़ते हैं या तेल उत्पादन और परिवहन बाधित होता है, तो वैश्विक आपूर्ति पर असर...
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Kedarnath

Kedarnath Snowfall: पहाड़ों पर बर्फबारी, मध्य प्रदेश में बारिश और केरल में Landslide का खतरा

देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल रहा है। उत्तराखंड के केदारनाथ (Kedarnath) में कड़ाके की ठंड पड़ रही है और तापमान -8°C तक पहुंचने का अनुमान है। मध्य प्रदेश में भी अक्टूबर के आखिरी दिनों में बारिश और आंधी का दौर जारी है। वहीं, केरल में भारी बारिश को लेकर मौसम विभाग ने कई जिलों में अलर्ट जारी किया है। लगातार बारिश के कारण भूस्खलन और जलभराव का खतरा भी बढ़ गया है। Kedarnath Weather Update: केदारनाथ में माइनस में पहुंचा तापमान उत्तराखंड के Kedarnath में ठंड लगातार बढ़ रही है। 22 अक्टूबर के मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, यहां न्यूनतम तापमान करीब -8°C तक रहने का अनुमान है। ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड का असर ज्यादा महसूस किया जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के चारधाम मौसम अपडेट के मुताबिक, 22 अक्टूबर को रुद्रप्रयाग से केदारनाथ मार्ग पर हल्की बारिश और हल्की बर्फबारी की संभावना जताई गई थी। ऐसे में पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वालों को मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही आगे बढ़ना चाहिए। ठंड बढ़ने के साथ सुबह और शाम के समय तापमान में गिरावट महसूस हो सकती है। यात्रियों को गर्म कपड़े रखने और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने की जरूरत है। MP Weather Alert: मध्य प्रदेश के 11 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी कई इलाकों में बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम में इस बदलाव के पीछे सक्रिय मौसमी प्रणालियों का असर बताया जा रहा है। प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग के 21 अक्टूबर को जारी पूर्वानुमान के अनुसार, 22 अक्टूबर को पश्चिमी मध्य प्रदेश में गरज-चमक और आंधी से जुड़ी चेतावनी जारी की गई थी। हालांकि, पूर्वी मध्य प्रदेश के लिए उसी दिन ऐसी चेतावनी नहीं थी। इससे पहले इंदौर, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, गुना, राजगढ़, शिवपुरी और मुरैना समेत कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई गई थी। अलग-अलग दिनों में अलर्ट वाले जिलों की सूची बदल सकती है। बारिश के कारण कुछ जगहों पर सड़कों पर पानी भरने, यातायात प्रभावित होने और बिजली आपूर्ति में परेशानी की आशंका है। किसानों और खुले इलाकों में काम करने वाले लोगों को भी मौसम पर नजर रखनी चाहिए। Kerala Rain Alert: तिरुवनंतपुरम समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट केरल में लगातार बारिश के कारण हालात पर नजर रखी जा रही है। भारतीय मौसम विभाग ने 21 अक्टूबर को जारी चेतावनी में तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथनमथिट्टा, अलप्पुझा और कोट्टायम सहित पांच जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। इन इलाकों में कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की आशंका जताई गई थी। इसके अलावा इडुक्की, एर्नाकुलम, त्रिशूर, पलक्कड़ और मलप्पुरम के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया था। मौसम विभाग ने बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना भी बताई। तिरुवनंतपुरम में 21 अक्टूबर को सुबह तक के पिछले 24 घंटों में 46.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। 22 अक्टूबर के पूर्वानुमान में भी भारी बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी हुई थी। भारी बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, निचले इलाकों में जलभराव और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी का खतरा रहता है। हालांकि, तिरुवनंतपुरम में लैंडस्लाइड की किसी विशिष्ट घटना की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं हो सकी है। अगले दिनों में कैसा रहेगा मौसम? मौसम विभाग के उपलब्ध पूर्वानुमानों के मुताबिक, मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में 23 अक्टूबर तक गरज-चमक से जुड़ी गतिविधियां रह सकती हैं। इसके बाद जारी चेतावनियों में कमी दिखाई गई है। दूसरी ओर, केरल के कई जिलों में 23 से 25 अक्टूबर तक भी भारी बारिश की संभावना जताई गई थी। केदारनाथ और आसपास के ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड और हल्की बर्फबारी की संभावना को देखते हुए यात्रियों को सतर्क रहने की जरूरत है। मौसम खराब होने पर इन बातों का रखें ध्यान कुल मिलाकर, 22 अक्टूबर को देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम की अलग-अलग परिस्थितियां देखने को मिल रही हैं। केदारनाथ में कड़ाके की ठंड, मध्य प्रदेश में आंधी-बारिश की संभावना और केरल में भारी बारिश की चेतावनी के बीच लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CJP

CJP Leaders Update: सौरव दास और आशुतोष रांका को फिर समन, Jantar Mantar केस में जांच तेज

CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल से रिहा हुए अभी एक दिन भी नहीं बीता था कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उन्हें पूछताछ के लिए बुला लिया। बुधवार शाम, 21 अक्टूबर को जेल से बाहर आए दोनों नेताओं को गुरुवार, 22 अक्टूबर को क्राइम ब्रांच के सामने पेश होने के लिए समन जारी किया गया। इस मामले में पार्टी के एक अन्य नेता अजिंक्य शिंदे का नाम भी सामने आया है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामलों की जांच अब क्राइम ब्रांच कर रही है। ऐसे में दोनों नेताओं की रिहाई के तुरंत बाद आया समन इस पूरे घटनाक्रम का नया मोड़ माना जा रहा है। रिहाई के अगले दिन Police का Summon सौरव दास और आशुतोष रांका को करीब सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद 21 अक्टूबर की शाम रिहा किया गया था। रिहाई के लिए दोनों को निजी मुचलके और जमानतदारों से जुड़े बॉन्ड की शर्तें पूरी करनी पड़ीं। रिहाई के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दोनों को पूछताछ के लिए बुलाया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में 22 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे पहुंचने के लिए कहा गया था। पुलिस जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े मामलों में घटनाक्रम और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। हालांकि, समन जारी होने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप साबित हो गए हैं। Jantar Mantar Protest से कैसे शुरू हुआ विवाद? CJP नेताओं ने 13 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश की थी। पार्टी की मांग थी कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर उठे सवालों पर जवाब दिया जाए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने निर्धारित प्रदर्शन क्षेत्र से बाहर जाने वाले प्रतिबंधित हिस्से में प्रवेश करने की कोशिश की और बैरिकेड पार किए। इस घटनाक्रम के बाद सौरव दास, आशुतोष रांका और अन्य CJP सदस्यों को हिरासत में लिया गया। बाद में दोनों प्रमुख नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। CJP की ओर से इस प्रदर्शन को चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाने की कोशिश के रूप में पेश किया गया। वहीं, पुलिस ने कानून-व्यवस्था और निर्धारित प्रतिबंधों के उल्लंघन से जुड़े पहलुओं पर कार्रवाई की। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगी। दो FIR की जांच कर रही है Crime Branch जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े दो मामलों की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है। ये मामले कनॉट प्लेस और संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR से जुड़े बताए गए हैं। जांच में कथित तौर पर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश, सरकारी आदेशों की अवहेलना और पुलिस के काम में बाधा डालने जैसे आरोप शामिल हैं। क्राइम ब्रांच अब इन घटनाओं से जुड़े तथ्यों और संबंधित लोगों के बयान की जांच कर रही है। सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पूछताछ के लिए बुलाए जाने की खबर इसी जांच से जुड़ी है। सात दिन बाद कैसे मिली जेल से रिहाई? दोनों नेताओं को 14 अक्टूबर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई। इसके बाद रिहाई के लिए कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी। 21 अक्टूबर को दोनों नेताओं की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट का भी रुख किया गया था। बाद में उनकी याचिका वापस लिए जाने की खबर सामने आई। इसके बाद विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत ने बॉन्ड और लिखित आश्वासन से जुड़ी शर्तें पूरी होने पर उनकी रिहाई का आदेश दिया। रिहाई के दौरान दोनों नेताओं को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानतदारों से जुड़े बॉन्ड की शर्तें पूरी करनी पड़ीं। उन्होंने शांति बनाए रखने और कानून के दायरे में रहकर प्रदर्शन करने का आश्वासन भी दिया। उन्हें जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित किए जाने तक वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करने की शर्त से भी जोड़ा गया। रिहाई का अर्थ यह नहीं है कि प्रदर्शन से जुड़े सभी मामले समाप्त हो गए हैं। Abhijeet Dipke का बयान भी चर्चा में CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई पर प्रतिक्रिया देते हुए दोनों नेताओं की तारीफ की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि दोनों उनसे बड़े नेता हैं और वह उनका अनुसरण करते हैं। दीपके के इस बयान को पार्टी के भीतर दोनों नेताओं के प्रति समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। जेल से रिहाई के बाद अब क्राइम ब्रांच का समन मिलने से दोनों नेताओं से जुड़ा मामला फिर चर्चा में आ गया है। अब आगे क्या होगा? 22 अक्टूबर को पूछताछ के लिए जारी समन के बाद अब नजर क्राइम ब्रांच की जांच पर है। पुलिस प्रदर्शन के दौरान हुए घटनाक्रम और दर्ज मामलों से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करने की कोशिश करेगी। आगे की कार्रवाई पूछताछ में सामने आने वाली जानकारी और जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी। फिलहाल, मामले में किसी भी आरोप को अंतिम रूप से साबित हुआ नहीं माना जा सकता। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sonia Gandhi

Sonia Gandhi Instagram Debut: पहली पोस्ट में नई किताब की झलक, 3 घंटे में 59 हजार Likes

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने सोशल मीडिया की दुनिया में नई शुरुआत की है। उन्होंने पहली बार Instagram पर अपना अकाउंट बनाया और अपनी आने वाली किताब Belonging: A Journey of Love का वीडियो शेयर किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी पहली पोस्ट को महज 3 घंटे में करीब 59 हजार लाइक्स मिले, जबकि उनके अकाउंट पर लगभग 13 हजार फॉलोअर्स हो गए। सोनिया गांधी की इस एंट्री ने राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींचा है। खास बात यह है कि सोनिया गांधी ने अपने Instagram डेब्यू के लिए किसी राजनीतिक मुद्दे को नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी और अनुभवों से जुड़ी किताब को चुना। उनकी पोस्ट में परिवार, रिश्तों और जीवन के सफर की झलक देखने को मिली। पहली पोस्ट में दिखी नई किताब की झलक Sonia Gandhi ने अपने पहले Instagram वीडियो में अपनी किताब Belonging: A Journey of Love के बारे में बताया। वीडियो में वह एक लाइब्रेरी में किताब के पन्ने और तस्वीरें देखती नजर आती हैं। उनकी बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा भी इस दौरान उनके साथ दिखाई देती हैं। किताब का जिक्र करते हुए सोनिया गांधी ने प्यार, जिम्मेदारी, अपनों को खोने और जिंदगी में अपनेपन की तलाश जैसे अनुभवों पर बात की। उनकी पहली पोस्ट ने लोगों को उनके निजी जीवन के एक अलग पहलू से रूबरू कराया। 10 नवंबर को रिलीज होगी ‘Belonging: A Journey of Love’ सोनिया गांधी की किताब 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित होने वाली है। HarperCollins India भारत में इसका प्रकाशन करेगा। किताब में सोनिया गांधी के बचपन से लेकर भारत आने और राजनीतिक जीवन तक के अनुभवों को जगह दी गई है। इटली में जन्मीं Sonia Gandhi की मुलाकात राजीव गांधी से कैम्ब्रिज में हुई थी। बाद में दोनों ने शादी की और वह भारत आ गईं। इसके बाद उनका जीवन गांधी परिवार और भारतीय राजनीति से जुड़ता चला गया। किताब में उनके पारिवारिक जीवन, निजी अनुभवों और सार्वजनिक जिम्मेदारियों से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा की गई है। पाठकों को यह जानने का मौका मिलेगा कि सोनिया गांधी ने अपने जीवन के अलग-अलग दौर को किस तरह देखा और अनुभव किया। राजीव गांधी से शादी और राजनीति तक का सफर सोनिया गांधी की जिंदगी में कई ऐसे मोड़ आए, जिन्होंने उन्हें व्यक्तिगत और राजनीतिक रूप से प्रभावित किया। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या जैसी घटनाओं के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। शुरुआत में सक्रिय राजनीति से दूर रहने वाली सोनिया गांधी ने बाद में कांग्रेस की जिम्मेदारी संभाली। वह लंबे समय तक पार्टी की अध्यक्ष रहीं और भारतीय राजनीति में उनकी अहम भूमिका रही। साल 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत के बाद भी उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं किया। इसके बजाय मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। उनके राजनीतिक सफर से जुड़े अनुभव भी इस किताब को चर्चा में बनाए हुए हैं। किताब के प्रकाशन को लेकर भी हुआ था विवाद सोनिया गांधी की इस किताब का प्रकाशन पहले Penguin Random House India से होना था, लेकिन बाद में यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। मीडिया रिपोर्ट्स में पांडुलिपि के कुछ हिस्सों और संपादकीय बदलावों को लेकर मतभेद की बात सामने आई थी। इस मामले में कुछ कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया था कि किताब के कुछ अंशों को लेकर प्रकाशक पर दबाव था। वहीं, Penguin Random House India ने इन दावों से असहमति जताई थी और संपादकीय प्रक्रिया को सामान्य प्रकाशन प्रक्रिया का हिस्सा बताया था। इसके बाद HarperCollins India ने किताब के प्रकाशन की जिम्मेदारी ली। अब 10 नवंबर को इसके आने का इंतजार किया जा रहा है। Instagram पर सोनिया गांधी की एंट्री क्यों है खास? सोनिया गांधी लंबे समय से भारतीय राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन Instagram पर उनका अकाउंट शुरू करना उनके सार्वजनिक संवाद का एक नया माध्यम है। उनकी पहली पोस्ट में किताब और परिवार से जुड़े पलों को जगह देना इसे और खास बनाता है। शुरुआती घंटों में पोस्ट पर मिले लाइक्स और फॉलोअर्स से पता चलता है कि उनकी सोशल मीडिया एंट्री को लेकर लोगों में दिलचस्पी है। हालांकि, ये आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं। अब सबकी नजर 10 नवंबर को किताब के प्रकाशन पर रहेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि सोनिया गांधी के जीवन और राजनीतिक सफर से जुड़े कौन-से अनुभव किताब के जरिए पाठकों के सामने आते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बिलासपुर केंद्रीय जेल से 19 बंदी रिहा, 15 से 16 साल की सजा काटने के बाद मिली मुक्ति

बिलासपुर केंद्रीय जेल में लंबे समय से बंद 19 पुरुष बंदियों को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया। ये बंदी 15 से 16 साल तक जेल में सजा काट चुके थे। सजा की अवधि पूरी होने के बावजूद शासन स्तर से माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई लंबित थी। जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता के निरीक्षण के दौरान यह मामला सामने आया था। इसके बाद संबंधित बंदियों के प्रकरणों की समीक्षा की गई और रिहाई का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। स्वीकृति मिलने के बाद सभी 19 बंदियों को जेल से रिहा कर दिया गया। बंदियों से बातचीत में सामने आई थी समस्या केंद्रीय जेल के निरीक्षण के दौरान जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बंदियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी थीं। इस दौरान कुछ बंदियों ने बताया कि वे अपनी सजा की अवधि पूरी कर चुके हैं, लेकिन माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो पा रही है। मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित बंदियों के आचरण और जेल के अभिलेखों की जांच कराई गई। परीक्षण के दौरान अच्छे आचरण वाले और अधिक उम्र के बंदियों के प्रकरणों पर विचार करते हुए रिहाई के प्रस्ताव तैयार किए गए और शासन को भेजे गए। परिवार के बीच लौटकर नई शुरुआत का अवसर शासन से स्वीकृति मिलने के बाद शुक्रवार को 19 पुरुष बंदियों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब ये बंदी अपने परिवारों के बीच लौट सकेंगे और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नई शुरुआत कर सकेंगे। रिहाई के दौरान केंद्रीय जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी, जेलर विजयानंद सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार, सभी 19 बंदियों को शासन के निर्देश पर रिहा किया गया है।

ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे पर कार्रवाई की मांग, 4 दिन में तालाबंदी का अल्टीमेटम

ग्वालियर के एजी ऑफिस स्थित ‘दारुल कुरआन’ मदरसे में मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम के निरीक्षण के बाद विवाद बढ़ गया है। मदरसे में बच्चों की देखरेख, साफ-सफाई और जरूरी दस्तावेजों को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं के विरोध में राष्ट्रीय सनातन सेना ने प्रदर्शन किया। संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिन के भीतर मदरसे पर ताला नहीं लगाया गया, तो उसके कार्यकर्ता खुद तालाबंदी करेंगे। संगठन के पदाधिकारियों ने बच्चों के साथ किसी भी तरह की गलत हरकत सामने आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की। निरीक्षण के दौरान मिले थे 26 बच्चे शुक्रवार को मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता ने बाल कल्याण समिति (CWC) की टीम के साथ मदरसे का औचक निरीक्षण किया था। मौके पर 4 से 14 वर्ष की उम्र के 8 बच्चियां और 18 बच्चे मिले थे। इस तरह कुल 26 बच्चे मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि रजिस्टर्ड 15 बच्चियों में से मौके पर केवल 8 मौजूद थीं। खबर के अनुसार, कुछ बच्चियों को पिछले रास्ते से बाहर भेजे जाने की आशंका भी जताई गई। हालांकि, इस संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं। टीम के मुताबिक, मदरसा प्रबंधन मौके पर मान्यता और पंजीकरण से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। बच्चों की सुरक्षा और संस्थान के संचालन से संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है। रसोई और टॉयलेट में मिली गंदगी निरीक्षण के दौरान टीम को रसोईघर और टॉयलेट में गंदगी मिली। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ जगहों पर दरवाजे भी नहीं थे। बच्चों के सोने की व्यवस्था पर भी सवाल उठे। बताया गया कि 42 पंजीकृत बच्चों के लिए एक छोटे हॉल में पलंग के बजाय पतली चादरों पर सोने की व्यवस्था थी। इन स्थितियों को लेकर बाल अधिकारों और बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठाए गए हैं। राष्ट्रीय सनातन सेना ने की सख्त कार्रवाई की मांग राष्ट्रीय सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती शुक्ला ने मदरसे में कथित अनियमितताओं पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की मांग की। संगठन ने आरोप लगाया कि ऐसे संस्थानों में बच्चों को भड़काऊ शिक्षा दी जा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। फिलहाल, मदरसे के संचालन, निर्माण, जमीन और फंडिंग के स्रोतों से जुड़े पहलुओं की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक निष्कर्षों पर नजर रहेगी।
Vishwas Sarang

Vishwas Sarang खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे मंत्री, कॉरिडोर और दशहरा मैदान का लिया जायजा

राजधानी भोपाल के छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर को आने वाले समय में नई पहचान मिलने जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) ने रावतपुरा सरकार के साथ मंदिर में दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और छोला दशहरा मैदान का निरीक्षण कर अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना का मकसद सिर्फ मंदिर परिसर का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। योजना को ‘विरासत भी और विकास भी’ की भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। 100 करोड़ रुपये से बदलेगा खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को लगभग 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। जुलाई 2026 में प्रकाशित परियोजना संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसके निर्माण में राजस्थान के व्हाइट मार्बल और प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाना है। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। साथ ही मंदिर के पुराने गर्भगृह की मूल संरचना और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। सुंदरकांड की झलक से सजेगा भव्य कॉरिडोर हनुमान लोक कॉरिडोर की खास बात यह होगी कि इसमें सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिलेगी। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा। कॉरिडोर को पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक निर्माण के मेल से विकसित करने की योजना है। इससे मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ भोपाल की धार्मिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खासतौर पर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है। Chhola Dussehra Maidan का भी होगा विकास मंत्री विश्वास सारंग ((Vishwas Sarang)) ने छोला दशहरा मैदान का भी निरीक्षण किया। योजना के तहत मैदान के खुले स्वरूप को बनाए रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां दर्शक दीर्घा, मंच और दशहरा जैसे आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने की योजना है। इससे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का भी रखा जाएगा ध्यान निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी में दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। Bhopal की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई पहचान श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कॉरिडोर का विकास शहर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण पूरा होने की निश्चित तारीख और वर्तमान प्रगति की ताजा आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। कुल मिलाकर, श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल में आस्था और आधुनिक विकास को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है कि यह भव्य परिसर कब पूरी तरह तैयार होकर उनके लिए नई सुविधाओं के साथ खुलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Philippines

Philippines Plane Crash: ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, 4 पायलटों की गई जान

फिलीपींस (Philippines) से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां ट्रेनिंग के दौरान वायुसेना के दो सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में चार पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियात के तौर पर SF-260 ट्रेनिंग विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Philippines Plane Crash: कहां और कब हुआ हादसा? यह हादसा 23 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के बटांगस प्रांत के लिपा शहर में स्थित फर्नांडो एयर बेस के पास हुआ। वायुसेना के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:51 बजे हुई। दोनों विमान ट्रेनिंग फ्लाइट पर थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उड़ान के दौरान दोनों विमान हवा में टकरा गए, जिसके बाद वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि, टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हादसे में चार पायलटों की मौत इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार चारों पायलटों की जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद वायुसेना ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों ने परिवारों को जरूरी सहायता देने की बात भी कही है। वायुसेना के मुताबिक, हादसा एयर बेस की सीमा के भीतर हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जमीन पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। दुर्घटना के बाद SF-260 विमानों की उड़ान पर रोक हादसे के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियाती कदम उठाते हुए SF-260 ट्रेनिंग विमानों के पूरे बेड़े की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जांच के दौरान इन विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का उद्देश्य दुर्घटना की वजह का पता लगाना और विमानों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। फिलहाल तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी हो चुका है SF-260 विमान हादसा फिलीपींस में SF-260 विमान से जुड़ी दुर्घटना पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 में उत्तरी फिलीपींस के बेंगुएट प्रांत में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में दो सैन्य पायलटों की मौत हुई थी। ताजा दुर्घटना के बाद सैन्य ट्रेनिंग विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह फिलीपींस एयर फोर्स ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों विमान किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुए और क्या इसमें किसी तकनीकी समस्या की भूमिका थी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हादसे में चार पायलटों की जान चली गई है। वायुसेना ने संबंधित विमानों की उड़ान रोक दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया। सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया। कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन? लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा। 2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी। ₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी। संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई। 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई। इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है। सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व? लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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