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Akhilesh Yadav

Akhilesh Yadav Rampur Visit: रामपुर जेल पहुंचे अखिलेश, आजम खान से करेंगे मुलाकात

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) गुरुवार, 22 अक्टूबर को रामपुर जिला जेल पहुंचे। यहां उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात होनी है। इस दौरे पर राजनीतिक गलियारों की नजरें टिकी हैं। इसकी वजह सिर्फ दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बदलते राजनीतिक समीकरण भी हैं। Akhilesh Yadav के रामपुर पहुंचने के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि आजम खान से बातचीत के बाद वह क्या कहते हैं और इस मुलाकात से पार्टी के भीतर क्या संदेश जाता है। Akhilesh Yadav कैसे रामपुर पहुंचे ? निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) लखनऊ से निजी विमान के जरिए बरेली पहुंचे। इसके बाद हेलीकॉप्टर से रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय पहुंचे और वहां से जिला जेल के लिए रवाना हुए। कार्यक्रम में आजम खान से मुलाकात के साथ उनके परिवार से मिलने की योजना भी शामिल है। आजम खान की तबीयत और उनके हालात जानने को इस दौरे की अहम वजह बताया गया है। Azam Khan से मुलाकात क्यों है खास? आजम खान समाजवादी पार्टी के पुराने और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। रामपुर और आसपास के इलाकों में उनकी राजनीतिक पहचान लंबे समय से रही है। ऐसे में अखिलेश यादव का उनसे मिलने पहुंचना पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ समय से आजम खान और सपा नेतृत्व के संबंधों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं। उनकी पत्नी तजीन फातिमा की अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद रामपुर आने का कार्यक्रम भी चर्चा में रहा। अब दोनों नेताओं की मुलाकात से यह देखने की उत्सुकता है कि उनके बीच किन मुद्दों पर बात होती है और आगे पार्टी की ओर से क्या संदेश दिया जाता है। UP Politics: 2027 चुनाव से पहले बढ़ी हलचल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सभी प्रमुख दल अपने राजनीतिक समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे समय में आजम खान से अखिलेश यादव की मुलाकात को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के नजरिए से भी देखा जा रहा है। हालांकि, इस मुलाकात में चुनावी रणनीति या संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे किसी बड़े राजनीतिक फैसले से जोड़कर देखना अभी जल्दबाजी होगी। Asaduddin Owaisi के दौरे के बाद चर्चा तेज रामपुर में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के दौरे और समाजवादी पार्टी पर उनकी राजनीतिक टिप्पणियों के बाद भी इस मुलाकात को लेकर चर्चा हो रही है। ओवैसी मुस्लिम राजनीति और सपा के नेतृत्व को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में अखिलेश यादव और आजम खान की मुलाकात पर राजनीतिक दलों की नजर होना स्वाभाविक है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच बातचीत का वास्तविक एजेंडा सामने आने के बाद ही इसके राजनीतिक मायने स्पष्ट होंगे। Om Prakash Rajbhar के बयान से भी गरमाई सियासत उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी अखिलेश यादव के रामपुर दौरे को लेकर टिप्पणी की है। इस बयानबाजी के बीच सपा प्रमुख का आजम खान से मिलना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल, इस दौरे को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लेकिन अखिलेश यादव और आजम खान की बातचीत के बाद ही यह साफ होगा कि मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद क्या होगा अगला कदम? अखिलेश यादव के रामपुर पहुंचने के बाद अब आजम खान से मुलाकात और उनके परिवार से बातचीत पर सबकी नजर है। समर्थकों को उम्मीद है कि इस मुलाकात से दोनों नेताओं के बीच संवाद को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल, किसी नई चुनावी रणनीति या बड़े फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव का बयान और समाजवादी पार्टी की आगे की गतिविधियां इस दौरे की अहमियत को समझने में मदद करेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Saudi Arabia

Saudi Arabia Attack: एयरपोर्ट और Oil Field पर हमला, 3 की मौत; भारतीय समेत 10 घायल

सऊदी अरब (Saudi Arabia) में एयरपोर्ट और तेल ठिकाने पर हुए हमलों ने एक बार फिर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बुधवार, 21 अक्टूबर को दम्माम के किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और शायबाह ऑयल फील्ड के पास अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 10 लोग घायल हुए। घायलों में एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। इन घटनाओं के बाद अमेरिका ने सऊदी अरब में तैनात अपने गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली। लगातार बढ़ते हमलों ने सऊदी अरब की सुरक्षा, हवाई सेवाओं और तेल आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। Dammam Airport Attack: एयरपोर्ट पर हमले में एक की मौत सऊदी अरब के पूर्वी शहर दम्माम स्थित किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को 21 अक्टूबर की शाम निशाना बनाया गया। सऊदी अरब के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के मुताबिक, इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई और आठ लोग घायल हो गए। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि एयरपोर्ट की संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन शुरू किया गया। घटना के बाद हवाई यातायात पर असर पड़ा और कुछ विमानों को दूसरे एयरपोर्ट की ओर डायवर्ट करना पड़ा। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। यात्रियों को अपनी उड़ान की ताजा स्थिति संबंधित एयरलाइन से जांचने की सलाह दी गई है। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब सऊदी अरब के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। Shaybah Oil Field Attack: ड्रोन का मलबा गिरने से दो लोगों की मौत सऊदी अरब के शायबाह ऑयल फील्ड को निशाना बनाने की कोशिश भी की गई। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, तेल सुविधा की ओर आ रहे ड्रोन को एयर डिफेंस ने रोक दिया। इसके बाद गिरे मलबे से दो लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। मारे गए लोगों में नेपाल और फिलीपींस के नागरिक शामिल हैं। वहीं, घायलों में एक भारतीय और एक पाकिस्तानी नागरिक बताया गया है। मलबा गिरने से तेल ठिकाने के बाहर एक ठेकेदार के वाहन में आग भी लग गई। शायबाह ऑयल फील्ड सऊदी अरब की प्रमुख तेल उत्पादन सुविधाओं में से एक है। राहत की बात यह रही कि शुरुआती आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस घटना से तेल उत्पादन पर असर नहीं पड़ा। Indian Citizen Injured: भारतीय दूतावास ने क्या कहा? शायबाह ऑयल फील्ड के पास हुई घटना में भारतीय नागरिक के घायल होने के बाद रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने सऊदी अधिकारियों से संपर्क किया। दूतावास ने घायल भारतीय को जरूरी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। फिलहाल उसकी स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने का इंतजार है। सऊदी अरब में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं। ऐसे में एयरपोर्ट और तेल सुविधाओं पर हमलों की खबरों से वहां रहने वाले भारतीय परिवारों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। भारतीय नागरिकों को स्थानीय प्रशासन और दूतावास की आधिकारिक सलाह पर ध्यान देना चाहिए। US Diplomats Exit: अमेरिका ने कर्मचारियों को देश छोड़ने को कहा सऊदी अरब में बढ़ते सुरक्षा खतरे के बीच अमेरिका ने अपने गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का निर्देश दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट के अनुसार, यह फैसला सऊदी अरब में नागरिक ठिकानों पर बढ़ते हमलों और उनसे पैदा हुए सुरक्षा जोखिम को देखते हुए लिया गया। अमेरिकी अधिकारियों ने क्षेत्र में संभावित नए हमलों की आशंका भी जताई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका दूसरे खाड़ी देशों में स्थित अपने कुछ मिशनों से भी परिवार के सदस्यों को वापस बुलाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, सऊदी अरब के लिए जारी आदेश और दूसरे देशों में संभावित कदम अलग-अलग हैं। इस फैसले से संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति को गंभीरता से ले रहा है। हूती विद्रोहियों पर शक, पश्चिम एशिया में क्यों बढ़ रहा तनाव? यमन में सक्रिय हूती विद्रोही लंबे समय से सऊदी अरब और उसकी समर्थित यमनी सरकार के साथ संघर्ष में शामिल रहे हैं। हाल के दिनों में समूह ने सऊदी अरब के एयरपोर्ट और तेल से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने की धमकियां दी हैं। हूतियों ने पहले रियाद में हुए कुछ हमलों की जिम्मेदारी भी ली थी। हालांकि, 21 अक्टूबर को दम्माम एयरपोर्ट और शायबाह ऑयल फील्ड से जुड़ी दोनों घटनाओं के लिए तत्काल कोई स्पष्ट सार्वजनिक जिम्मेदारी सामने नहीं आई थी। क्षेत्र में जारी व्यापक संघर्ष ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। सऊदी अरब के लिए चुनौती केवल अपने महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा करना नहीं, बल्कि आम नागरिकों, विदेशी कर्मचारियों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। Saudi Arabia News: पहले भी रियाद एयरपोर्ट पर हो चुके हैं हमले दम्माम की घटना से पहले राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी कई हमले हुए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, अक्टूबर के शुरुआती दिनों में हुए हमलों में बड़ी संख्या में लोग मारे गए और 300 से अधिक लोग घायल हुए। इन घटनाओं के बाद हवाई सेवाएं प्रभावित हुईं और कई एयरलाइंस ने अपनी उड़ानों में बदलाव किए। हवाई अड्डों पर लगातार हमलों से यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कारोबार और पर्यटन पर भी असर पड़ने की आशंका है। सऊदी अरब अपनी अर्थव्यवस्था को तेल के अलावा दूसरे क्षेत्रों में विस्तार देने की कोशिश कर रहा है, ऐसे में सुरक्षा संबंधी घटनाएं उसके लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकती हैं। Crude Oil Price: हमलों के बाद कच्चा तेल महंगा सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में शामिल है। इसलिए उसके तेल ठिकानों पर हमलों की खबर का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ता है। रॉयटर्स की 22 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.82 डॉलर बढ़कर 111.64 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। अमेरिकी WTI क्रूड भी 2.24 डॉलर बढ़कर 99.39 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा। बाजार में तेजी की एक प्रमुख वजह यह चिंता है कि अगर हमले बढ़ते हैं या तेल उत्पादन और परिवहन बाधित होता है, तो वैश्विक आपूर्ति पर असर...
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Kedarnath

Kedarnath Snowfall: पहाड़ों पर बर्फबारी, मध्य प्रदेश में बारिश और केरल में Landslide का खतरा

देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल रहा है। उत्तराखंड के केदारनाथ (Kedarnath) में कड़ाके की ठंड पड़ रही है और तापमान -8°C तक पहुंचने का अनुमान है। मध्य प्रदेश में भी अक्टूबर के आखिरी दिनों में बारिश और आंधी का दौर जारी है। वहीं, केरल में भारी बारिश को लेकर मौसम विभाग ने कई जिलों में अलर्ट जारी किया है। लगातार बारिश के कारण भूस्खलन और जलभराव का खतरा भी बढ़ गया है। Kedarnath Weather Update: केदारनाथ में माइनस में पहुंचा तापमान उत्तराखंड के Kedarnath में ठंड लगातार बढ़ रही है। 22 अक्टूबर के मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, यहां न्यूनतम तापमान करीब -8°C तक रहने का अनुमान है। ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड का असर ज्यादा महसूस किया जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के चारधाम मौसम अपडेट के मुताबिक, 22 अक्टूबर को रुद्रप्रयाग से केदारनाथ मार्ग पर हल्की बारिश और हल्की बर्फबारी की संभावना जताई गई थी। ऐसे में पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वालों को मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही आगे बढ़ना चाहिए। ठंड बढ़ने के साथ सुबह और शाम के समय तापमान में गिरावट महसूस हो सकती है। यात्रियों को गर्म कपड़े रखने और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने की जरूरत है। MP Weather Alert: मध्य प्रदेश के 11 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी कई इलाकों में बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम में इस बदलाव के पीछे सक्रिय मौसमी प्रणालियों का असर बताया जा रहा है। प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग के 21 अक्टूबर को जारी पूर्वानुमान के अनुसार, 22 अक्टूबर को पश्चिमी मध्य प्रदेश में गरज-चमक और आंधी से जुड़ी चेतावनी जारी की गई थी। हालांकि, पूर्वी मध्य प्रदेश के लिए उसी दिन ऐसी चेतावनी नहीं थी। इससे पहले इंदौर, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, गुना, राजगढ़, शिवपुरी और मुरैना समेत कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई गई थी। अलग-अलग दिनों में अलर्ट वाले जिलों की सूची बदल सकती है। बारिश के कारण कुछ जगहों पर सड़कों पर पानी भरने, यातायात प्रभावित होने और बिजली आपूर्ति में परेशानी की आशंका है। किसानों और खुले इलाकों में काम करने वाले लोगों को भी मौसम पर नजर रखनी चाहिए। Kerala Rain Alert: तिरुवनंतपुरम समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट केरल में लगातार बारिश के कारण हालात पर नजर रखी जा रही है। भारतीय मौसम विभाग ने 21 अक्टूबर को जारी चेतावनी में तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथनमथिट्टा, अलप्पुझा और कोट्टायम सहित पांच जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। इन इलाकों में कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की आशंका जताई गई थी। इसके अलावा इडुक्की, एर्नाकुलम, त्रिशूर, पलक्कड़ और मलप्पुरम के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया था। मौसम विभाग ने बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना भी बताई। तिरुवनंतपुरम में 21 अक्टूबर को सुबह तक के पिछले 24 घंटों में 46.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। 22 अक्टूबर के पूर्वानुमान में भी भारी बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी हुई थी। भारी बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, निचले इलाकों में जलभराव और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी का खतरा रहता है। हालांकि, तिरुवनंतपुरम में लैंडस्लाइड की किसी विशिष्ट घटना की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं हो सकी है। अगले दिनों में कैसा रहेगा मौसम? मौसम विभाग के उपलब्ध पूर्वानुमानों के मुताबिक, मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में 23 अक्टूबर तक गरज-चमक से जुड़ी गतिविधियां रह सकती हैं। इसके बाद जारी चेतावनियों में कमी दिखाई गई है। दूसरी ओर, केरल के कई जिलों में 23 से 25 अक्टूबर तक भी भारी बारिश की संभावना जताई गई थी। केदारनाथ और आसपास के ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड और हल्की बर्फबारी की संभावना को देखते हुए यात्रियों को सतर्क रहने की जरूरत है। मौसम खराब होने पर इन बातों का रखें ध्यान कुल मिलाकर, 22 अक्टूबर को देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम की अलग-अलग परिस्थितियां देखने को मिल रही हैं। केदारनाथ में कड़ाके की ठंड, मध्य प्रदेश में आंधी-बारिश की संभावना और केरल में भारी बारिश की चेतावनी के बीच लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CJP

CJP Leaders Update: सौरव दास और आशुतोष रांका को फिर समन, Jantar Mantar केस में जांच तेज

CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल से रिहा हुए अभी एक दिन भी नहीं बीता था कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उन्हें पूछताछ के लिए बुला लिया। बुधवार शाम, 21 अक्टूबर को जेल से बाहर आए दोनों नेताओं को गुरुवार, 22 अक्टूबर को क्राइम ब्रांच के सामने पेश होने के लिए समन जारी किया गया। इस मामले में पार्टी के एक अन्य नेता अजिंक्य शिंदे का नाम भी सामने आया है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामलों की जांच अब क्राइम ब्रांच कर रही है। ऐसे में दोनों नेताओं की रिहाई के तुरंत बाद आया समन इस पूरे घटनाक्रम का नया मोड़ माना जा रहा है। रिहाई के अगले दिन Police का Summon सौरव दास और आशुतोष रांका को करीब सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद 21 अक्टूबर की शाम रिहा किया गया था। रिहाई के लिए दोनों को निजी मुचलके और जमानतदारों से जुड़े बॉन्ड की शर्तें पूरी करनी पड़ीं। रिहाई के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दोनों को पूछताछ के लिए बुलाया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में 22 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे पहुंचने के लिए कहा गया था। पुलिस जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े मामलों में घटनाक्रम और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। हालांकि, समन जारी होने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप साबित हो गए हैं। Jantar Mantar Protest से कैसे शुरू हुआ विवाद? CJP नेताओं ने 13 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश की थी। पार्टी की मांग थी कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर उठे सवालों पर जवाब दिया जाए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने निर्धारित प्रदर्शन क्षेत्र से बाहर जाने वाले प्रतिबंधित हिस्से में प्रवेश करने की कोशिश की और बैरिकेड पार किए। इस घटनाक्रम के बाद सौरव दास, आशुतोष रांका और अन्य CJP सदस्यों को हिरासत में लिया गया। बाद में दोनों प्रमुख नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। CJP की ओर से इस प्रदर्शन को चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाने की कोशिश के रूप में पेश किया गया। वहीं, पुलिस ने कानून-व्यवस्था और निर्धारित प्रतिबंधों के उल्लंघन से जुड़े पहलुओं पर कार्रवाई की। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगी। दो FIR की जांच कर रही है Crime Branch जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े दो मामलों की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है। ये मामले कनॉट प्लेस और संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR से जुड़े बताए गए हैं। जांच में कथित तौर पर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश, सरकारी आदेशों की अवहेलना और पुलिस के काम में बाधा डालने जैसे आरोप शामिल हैं। क्राइम ब्रांच अब इन घटनाओं से जुड़े तथ्यों और संबंधित लोगों के बयान की जांच कर रही है। सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पूछताछ के लिए बुलाए जाने की खबर इसी जांच से जुड़ी है। सात दिन बाद कैसे मिली जेल से रिहाई? दोनों नेताओं को 14 अक्टूबर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई। इसके बाद रिहाई के लिए कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी। 21 अक्टूबर को दोनों नेताओं की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट का भी रुख किया गया था। बाद में उनकी याचिका वापस लिए जाने की खबर सामने आई। इसके बाद विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत ने बॉन्ड और लिखित आश्वासन से जुड़ी शर्तें पूरी होने पर उनकी रिहाई का आदेश दिया। रिहाई के दौरान दोनों नेताओं को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानतदारों से जुड़े बॉन्ड की शर्तें पूरी करनी पड़ीं। उन्होंने शांति बनाए रखने और कानून के दायरे में रहकर प्रदर्शन करने का आश्वासन भी दिया। उन्हें जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित किए जाने तक वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करने की शर्त से भी जोड़ा गया। रिहाई का अर्थ यह नहीं है कि प्रदर्शन से जुड़े सभी मामले समाप्त हो गए हैं। Abhijeet Dipke का बयान भी चर्चा में CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई पर प्रतिक्रिया देते हुए दोनों नेताओं की तारीफ की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि दोनों उनसे बड़े नेता हैं और वह उनका अनुसरण करते हैं। दीपके के इस बयान को पार्टी के भीतर दोनों नेताओं के प्रति समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। जेल से रिहाई के बाद अब क्राइम ब्रांच का समन मिलने से दोनों नेताओं से जुड़ा मामला फिर चर्चा में आ गया है। अब आगे क्या होगा? 22 अक्टूबर को पूछताछ के लिए जारी समन के बाद अब नजर क्राइम ब्रांच की जांच पर है। पुलिस प्रदर्शन के दौरान हुए घटनाक्रम और दर्ज मामलों से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करने की कोशिश करेगी। आगे की कार्रवाई पूछताछ में सामने आने वाली जानकारी और जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी। फिलहाल, मामले में किसी भी आरोप को अंतिम रूप से साबित हुआ नहीं माना जा सकता। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sonia Gandhi

Sonia Gandhi Instagram Debut: पहली पोस्ट में नई किताब की झलक, 3 घंटे में 59 हजार Likes

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने सोशल मीडिया की दुनिया में नई शुरुआत की है। उन्होंने पहली बार Instagram पर अपना अकाउंट बनाया और अपनी आने वाली किताब Belonging: A Journey of Love का वीडियो शेयर किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी पहली पोस्ट को महज 3 घंटे में करीब 59 हजार लाइक्स मिले, जबकि उनके अकाउंट पर लगभग 13 हजार फॉलोअर्स हो गए। सोनिया गांधी की इस एंट्री ने राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींचा है। खास बात यह है कि सोनिया गांधी ने अपने Instagram डेब्यू के लिए किसी राजनीतिक मुद्दे को नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी और अनुभवों से जुड़ी किताब को चुना। उनकी पोस्ट में परिवार, रिश्तों और जीवन के सफर की झलक देखने को मिली। पहली पोस्ट में दिखी नई किताब की झलक Sonia Gandhi ने अपने पहले Instagram वीडियो में अपनी किताब Belonging: A Journey of Love के बारे में बताया। वीडियो में वह एक लाइब्रेरी में किताब के पन्ने और तस्वीरें देखती नजर आती हैं। उनकी बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा भी इस दौरान उनके साथ दिखाई देती हैं। किताब का जिक्र करते हुए सोनिया गांधी ने प्यार, जिम्मेदारी, अपनों को खोने और जिंदगी में अपनेपन की तलाश जैसे अनुभवों पर बात की। उनकी पहली पोस्ट ने लोगों को उनके निजी जीवन के एक अलग पहलू से रूबरू कराया। 10 नवंबर को रिलीज होगी ‘Belonging: A Journey of Love’ सोनिया गांधी की किताब 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित होने वाली है। HarperCollins India भारत में इसका प्रकाशन करेगा। किताब में सोनिया गांधी के बचपन से लेकर भारत आने और राजनीतिक जीवन तक के अनुभवों को जगह दी गई है। इटली में जन्मीं Sonia Gandhi की मुलाकात राजीव गांधी से कैम्ब्रिज में हुई थी। बाद में दोनों ने शादी की और वह भारत आ गईं। इसके बाद उनका जीवन गांधी परिवार और भारतीय राजनीति से जुड़ता चला गया। किताब में उनके पारिवारिक जीवन, निजी अनुभवों और सार्वजनिक जिम्मेदारियों से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा की गई है। पाठकों को यह जानने का मौका मिलेगा कि सोनिया गांधी ने अपने जीवन के अलग-अलग दौर को किस तरह देखा और अनुभव किया। राजीव गांधी से शादी और राजनीति तक का सफर सोनिया गांधी की जिंदगी में कई ऐसे मोड़ आए, जिन्होंने उन्हें व्यक्तिगत और राजनीतिक रूप से प्रभावित किया। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या जैसी घटनाओं के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। शुरुआत में सक्रिय राजनीति से दूर रहने वाली सोनिया गांधी ने बाद में कांग्रेस की जिम्मेदारी संभाली। वह लंबे समय तक पार्टी की अध्यक्ष रहीं और भारतीय राजनीति में उनकी अहम भूमिका रही। साल 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत के बाद भी उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं किया। इसके बजाय मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। उनके राजनीतिक सफर से जुड़े अनुभव भी इस किताब को चर्चा में बनाए हुए हैं। किताब के प्रकाशन को लेकर भी हुआ था विवाद सोनिया गांधी की इस किताब का प्रकाशन पहले Penguin Random House India से होना था, लेकिन बाद में यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। मीडिया रिपोर्ट्स में पांडुलिपि के कुछ हिस्सों और संपादकीय बदलावों को लेकर मतभेद की बात सामने आई थी। इस मामले में कुछ कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया था कि किताब के कुछ अंशों को लेकर प्रकाशक पर दबाव था। वहीं, Penguin Random House India ने इन दावों से असहमति जताई थी और संपादकीय प्रक्रिया को सामान्य प्रकाशन प्रक्रिया का हिस्सा बताया था। इसके बाद HarperCollins India ने किताब के प्रकाशन की जिम्मेदारी ली। अब 10 नवंबर को इसके आने का इंतजार किया जा रहा है। Instagram पर सोनिया गांधी की एंट्री क्यों है खास? सोनिया गांधी लंबे समय से भारतीय राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन Instagram पर उनका अकाउंट शुरू करना उनके सार्वजनिक संवाद का एक नया माध्यम है। उनकी पहली पोस्ट में किताब और परिवार से जुड़े पलों को जगह देना इसे और खास बनाता है। शुरुआती घंटों में पोस्ट पर मिले लाइक्स और फॉलोअर्स से पता चलता है कि उनकी सोशल मीडिया एंट्री को लेकर लोगों में दिलचस्पी है। हालांकि, ये आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं। अब सबकी नजर 10 नवंबर को किताब के प्रकाशन पर रहेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि सोनिया गांधी के जीवन और राजनीतिक सफर से जुड़े कौन-से अनुभव किताब के जरिए पाठकों के सामने आते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Shashi Tharoor

Shashi Tharoor on Rahul Gandhi: विदेश यात्रा पर सवाल पूछने वालों से बोले- मैं Travel Agent नहीं हूं

राहुल गांधी की विदेश यात्रा को लेकर सियासत गर्म है। BJP के सवालों और मीडिया की चर्चा के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) से जब इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “मैं कोई ट्रैवल एजेंट नहीं हूं।” उनके इस जवाब के बाद राहुल गांधी की विदेश यात्रा को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई। राहुल गांधी की विदेश यात्रा पर Shashi Tharoor ने क्या कहा? विदेश यात्रा को लेकर पत्रकारों ने शशि थरूर से सवाल किया। इस पर Shashi Tharoor ने कहा कि वह कोई ट्रैवल एजेंट नहीं हैं और उनसे इस तरह का सवाल पूछने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारियां होती हैं और वह इस मामले पर टिप्पणी नहीं कर सकते। थरूर के जवाब से साफ था कि वह राहुल गांधी के दौरे के बारे में जानकारी देने या उसकी वजह बताने के पक्ष में नहीं थे। हालांकि, उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं। Vietnam जाने की खबर के बीच BJP ने उठाए सवाल मीडिया रिपोर्ट्स में राहुल गांधी के वियतनाम जाने की बात कही गई है। उनकी यात्रा को लेकर BJP ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब विपक्ष चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध कर रहा है, तब राहुल गांधी विदेश क्यों गए हैं। BJP ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया के जरिए भी कांग्रेस नेता को घेरा। दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी की यात्रा को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर आपत्ति जताई। हालांकि, उनके दौरे के उद्देश्य और कार्यक्रम को लेकर आधिकारिक जानकारी स्पष्ट होना जरूरी है। SIR विवाद के बीच क्यों चर्चा में आई राहुल गांधी की यात्रा? राहुल गांधी की विदेश यात्रा ऐसे समय चर्चा में आई है, जब चुनाव आयोग और मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसी मुद्दे पर INDIA गठबंधन के नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया है। राहुल गांधी भी इस राजनीतिक अभियान में शामिल रहे हैं। ऐसे में उनकी विदेश यात्रा को लेकर BJP ने सवाल खड़े किए हैं। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि किसी नेता के निजी दौरे को बेवजह राजनीतिक विवाद का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने BJP के सवालों पर क्या कहा? राहुल गांधी की यात्रा को लेकर कांग्रेस नेताओं ने BJP की आलोचना पर जवाब दिया। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि किसी राजनीतिक नेता के विदेश जाने को लेकर सवाल उठाना उचित नहीं है। उनका कहना है कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति से चुनाव आयोग के मुद्दे पर विपक्ष का अभियान रुकने वाला नहीं है। इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। BJP राहुल गांधी की विदेश यात्रा पर सवाल उठा रही है, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का विरोध कर रही है। Shashi Tharoor के बयान से फिर तेज हुई सियासत शशि थरूर का बयान भले ही छोटा था, लेकिन इसने राहुल गांधी की विदेश यात्रा को लेकर चल रही बहस को फिर से सुर्खियों में ला दिया। उन्होंने न तो यात्रा के उद्देश्य की पुष्टि की और न ही उसके बारे में कोई विस्तृत जानकारी दी। फिलहाल, इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि राहुल गांधी के दौरे का उद्देश्य क्या था और इस पर आधिकारिक तौर पर क्या जानकारी सामने आती है। तब तक इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Badr Agreement

Badr Agreement: 4 मुस्लिम देशों ने मिलाया हाथ, Defence Industry में बढ़ेगा सहयोग

पाकिस्तान ने रक्षा क्षेत्र में अपनी साझेदारी बढ़ाने के लिए तुर्किये, कतर और इंडोनेशिया के साथ हाथ मिलाया है। 21 अक्टूबर 2026 को कतर की राजधानी दोहा में चारों देशों ने ‘बद्र (Badr) मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का मकसद रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाना, तकनीकी जानकारी साझा करना और रिसर्च एवं डेवलपमेंट को बढ़ावा देना है। इस समझौते के बाद पाकिस्तान की रक्षा साझेदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इसे सिर्फ हथियार बनाने तक सीमित समझना सही नहीं होगा। इसके तहत रक्षा तकनीक, प्रशिक्षण और औद्योगिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी काम करने की संभावनाएं हैं। Badr Agreement: क्या है चार देशों के बीच समझौता? Badr Agreement के जरिए पाकिस्तान, तुर्किये, कतर और इंडोनेशिया रक्षा उद्योग में आपसी सहयोग बढ़ाना चाहते हैं। इसका उद्देश्य चारों देशों की क्षमताओं का इस्तेमाल करके रक्षा क्षेत्र में तकनीकी विकास और उत्पादन को बढ़ावा देना है। रक्षा क्षेत्र में इस तरह की साझेदारी से देशों को नई तकनीक सीखने, विशेषज्ञता साझा करने और संयुक्त परियोजनाओं पर काम करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, समझौते के तहत किन हथियारों का निर्माण किया जाएगा, कितना निवेश होगा और परियोजनाएं कब शुरू होंगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। Pakistan और Turkiye की बढ़ती Defence Partnership पाकिस्तान और तुर्किये पहले भी रक्षा क्षेत्र में सहयोग करते रहे हैं। दोनों देशों के बीच सैन्य उपकरणों, तकनीकी सहयोग और रक्षा उत्पादन से जुड़े कई विषयों पर साझेदारी रही है। तुर्किये ने पिछले कुछ वर्षों में अपने रक्षा उद्योग को विकसित करने पर जोर दिया है। वहीं, पाकिस्तान भी घरेलू रक्षा उत्पादन और दूसरे देशों के साथ तकनीकी सहयोग बढ़ाने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में बद्र समझौता दोनों देशों के मौजूदा सहयोग को आगे बढ़ाने का एक और रास्ता बन सकता है। Qatar और Indonesia की क्या होगी भूमिका? इस समझौते में कतर और इंडोनेशिया की भागीदारी भी अहम है। कतर के पास निवेश की क्षमता है, जबकि इंडोनेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया का एक प्रमुख देश है और अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न देशों के साथ सहयोग करता है। चारों देश रक्षा उद्योग में अपनी जरूरतों और क्षमताओं के अनुसार सहयोग कर सकते हैं। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रत्येक देश किस परियोजना में कितना योगदान देगा। इसलिए किसी खास हथियार के संयुक्त निर्माण या बड़े निवेश को लेकर पक्के दावे करना जल्दबाजी होगी। क्या पाकिस्तान मुस्लिम देशों के साथ नया रक्षा नेटवर्क बना रहा है? पाकिस्तान लंबे समय से मुस्लिम बहुल देशों के साथ अपने राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंध मजबूत करने की कोशिश करता रहा है। तुर्किये, कतर और इंडोनेशिया के साथ यह समझौता भी इसी व्यापक सहयोग का हिस्सा माना जा सकता है। हालांकि, चार देशों के बीच रक्षा उद्योग में सहयोग का समझौता होना और एक औपचारिक सैन्य गठबंधन बनना दो अलग बातें हैं। बद्र समझौते का घोषित फोकस रक्षा क्षेत्र में साझेदारी है। इसे किसी साझा सैन्य कार्रवाई की गारंटी या किसी देश के खिलाफ गठबंधन के रूप में देखना अभी सही नहीं होगा। India के लिए इस Defence Deal के क्या मायने हैं? भारत के लिए क्षेत्रीय रक्षा सहयोग से जुड़े ऐसे घटनाक्रम पर नजर रखना स्वाभाविक है। भारत और इंडोनेशिया के बीच भी रक्षा संबंध हैं। दोनों देश विभिन्न रक्षा और सुरक्षा मुद्दों पर सहयोग करते रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान, तुर्किये, कतर और इंडोनेशिया के इस समझौते को भारत के खिलाफ बनाई गई रणनीति बताने के लिए अभी पर्याप्त सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। समझौते का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि आगे कौन-सी परियोजनाएं शुरू होती हैं और चारों देश उन्हें किस तरह लागू करते हैं। आगे क्या होगा? बद्र समझौते के बाद अब नजर इसके अगले चरण पर रहेगी। संयुक्त रक्षा परियोजनाओं, तकनीकी प्रशिक्षण, रिसर्च और उत्पादन से जुड़े फैसले यह तय करेंगे कि यह साझेदारी कितनी आगे बढ़ती है। फिलहाल, समझौते से जुड़ी सभी परियोजनाओं, निवेश और हथियारों की सूची सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। इसलिए आने वाले समय में चारों देशों की आधिकारिक घोषणाएं इस साझेदारी की दिशा समझने में अहम होंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IND vs NZ

IND vs NZ 1st T20: 7 रन बनाते ही Suryakumar Yadav का रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं ईशान किशन

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच टी-20 क्रिकेट का रोमांच एक बार फिर देखने को मिलेगा। दोनों टीमों के बीच पहला T20 मुकाबला आज, 22 अक्टूबर को खेला जाना है। भारतीय टीम जीत के साथ शुरुआत करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी, जबकि न्यूजीलैंड अपने घरेलू मैदान पर भारत को कड़ी चुनौती देना चाहेगा। इस मुकाबले में सबकी नजरें ईशान किशन पर रहेंगी, जिनके पास महज 7 रन बनाकर सूर्यकुमार यादव का एक बड़ा रिकॉर्ड तोड़ने का मौका है। India vs New Zealand 1st T20: मैच में क्या होगा खास? भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाला यह मुकाबला बल्लेबाजी और गेंदबाजी, दोनों लिहाज से दिलचस्प रहने की उम्मीद है। भारतीय टीम के पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो कुछ ही ओवरों में मैच का रुख बदल सकते हैं। वहीं, न्यूजीलैंड की टीम भी अपने मैदान पर किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहेगी। भारतीय फैंस को उम्मीद होगी कि टीम के बल्लेबाज शुरुआत से ही लय हासिल करें और गेंदबाज विपक्षी टीम पर दबाव बनाए रखें। सीरीज के पहले मुकाबले में जीत हासिल करना दोनों टीमों के लिए अहम होगा। Ishan Kishan Record: 7 रन बनाते ही रच सकते हैं इतिहास इस मैच की सबसे बड़ी चर्चा ईशान किशन को लेकर है। भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज के पास टी-20 इंटरनेशनल में एक कैलेंडर वर्ष में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाज बनने का मौका है। इसके लिए उन्हें सिर्फ 7 रन की जरूरत बताई जा रही है। फिलहाल सूर्यकुमार यादव इस मामले में भारतीय रिकॉर्ड के धारक हैं। उन्होंने साल 2022 में टी-20 इंटरनेशनल में 1,164 रन बनाए थे। ईशान किशन अगर जरूरी रन बना लेते हैं, तो वह इस रिकॉर्ड को अपने नाम कर सकते हैं। ईशान के लिए यह सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि टीम के लिए भी अच्छी खबर होगी। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी भारत को तेज शुरुआत दिलाने में अहम भूमिका निभा सकती है। Team India की नजर जीत से शुरुआत करने पर भारतीय टीम इस मुकाबले में अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी के दम पर बेहतर प्रदर्शन करना चाहेगी। ईशान किशन के अलावा अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, तिलक वर्मा और शिवम दुबे जैसे खिलाड़ियों से भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी। हालांकि, न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में बल्लेबाजी करना आसान नहीं होता। यहां तेज गेंदबाजों को शुरुआती ओवरों में मदद मिल सकती है। ऐसे में भारतीय बल्लेबाजों को संभलकर शुरुआत करनी होगी और मौका मिलने पर तेजी से रन बनाने होंगे। New Zealand की टीम भी देगी कड़ी चुनौती न्यूजीलैंड को घरेलू परिस्थितियों का फायदा मिल सकता है। टीम के पास अनुभवी बल्लेबाज और उपयोगी गेंदबाज हैं, जो भारतीय खिलाड़ियों को परेशानी में डाल सकते हैं। खास तौर पर शुरुआती ओवरों में भारतीय बल्लेबाजों की परीक्षा हो सकती है। मेजबान टीम की कोशिश रहेगी कि वह भारत के मजबूत बल्लेबाजी क्रम पर दबाव बनाए और मैच में अपनी पकड़ बनाए रखे। ऐसे में मुकाबले का नतीजा इस बात पर भी निर्भर करेगा कि कौन-सी टीम दबाव के क्षणों में बेहतर प्रदर्शन करती है। India vs New Zealand 1st T20: कब और कहां देखें मैच? भारत और न्यूजीलैंड के पहले टी-20 मुकाबले से जुड़ी जानकारी नीचे दी गई है: लाइव टेलीकास्ट और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग की जानकारी के लिए आधिकारिक प्रसारणकर्ता के अपडेट जरूर देखें। अब सबकी नजर ईशान किशन पर भारत और न्यूजीलैंड के बीच पहले टी-20 मुकाबले में जीत के साथ ईशान किशन के रिकॉर्ड पर भी सबकी नजर रहेगी। अगर वह 7 रन बनाकर सूर्यकुमार यादव का रिकॉर्ड तोड़ देते हैं, तो यह उनके करियर की एक खास उपलब्धि होगी। अब देखना होगा कि ईशान इस मौके को कितनी अच्छी तरह भुनाते हैं और भारतीय टीम सीरीज की शुरुआत जीत के साथ कर पाती है या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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X पर अब लाइक बटन दबाकर भेज सकेंगे $1 की टिप, मस्क ने नए फीचर का किया ऐलान

नई दिल्ली। इलॉन मस्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को फाइनेंशियल सर्विसेज से जोड़ने की दिशा में एक और कदम उठा रहे हैं। मस्क ने ऐलान किया है कि X पर यूजर्स लाइक बटन को लॉन्ग-प्रेस करके किसी यूजर या क्रिएटर को 1 डॉलर की टिप भेज सकेंगे। यह पेमेंट कंपनी के फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म X मनी के जरिए किया जाएगा। मस्क ने X पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि X मनी के माध्यम से किसी को भी 1 डॉलर भेजने के लिए लाइक बटन पर लॉन्ग-प्रेस करने का विकल्प जोड़ा जा रहा है। कैसे काम करेगा नया टिपिंग फीचर? इस फीचर के जरिए यूजर्स किसी पोस्ट के लेखक या क्रिएटर को सीधे आर्थिक मदद दे सकेंगे। इसके लिए लाइक बटन को कुछ देर तक दबाना होगा। इसके बाद X मनी के पेमेंट सिस्टम के जरिए 1 डॉलर ट्रांसफर करने का विकल्प मिलेगा। इस व्यवस्था का मकसद क्रिएटर्स को सपोर्ट करने की प्रक्रिया आसान बनाना है, ताकि यूजर्स को अलग से पेमेंट ऐप या लंबी प्रक्रिया का सहारा न लेना पड़े। हालांकि, X ने अभी तक इस फीचर के लॉन्च की तारीख और इसकी उपलब्धता से जुड़ी शर्तों की जानकारी नहीं दी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि यूजर्स 1 डॉलर की तय रकम को बदल सकेंगे या भविष्य में अलग-अलग रकम भेजने के विकल्प भी मिलेंगे। क्या है X मनी और इसमें कौन-सी सुविधाएं हैं? X मनी, X का फाइनेंशियल सर्विस प्लेटफॉर्म है। इसके जरिए यूजर्स के बीच पैसे ट्रांसफर करने, डिपॉजिट अकाउंट और X-ब्रांडेड वीजा डेबिट कार्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसका पेमेंट और बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर क्रॉस रिवर बैंक के साथ जुड़ा है। X मनी खुद बैंक नहीं है, बल्कि बैंकिंग पार्टनर के माध्यम से वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने वाला प्लेटफॉर्म है। इससे जुड़ी सुविधाओं में पात्र डिपॉजिट पर ब्याज, खरीदारी पर कैशबैक और डेबिट कार्ड को Apple Pay से कनेक्ट करने जैसे विकल्प शामिल हैं। इन सुविधाओं की उपलब्धता यूजर की पात्रता और लागू शर्तों पर निर्भर करती है। X को ‘एवरीथिंग ऐप’ बनाना चाहते हैं मस्क इलॉन मस्क लंबे समय से X को सिर्फ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखना चाहते। उनका लक्ष्य इसे ‘एवरीथिंग ऐप’ यानी सुपर ऐप के रूप में विकसित करना है, जहां सोशल मीडिया, मैसेजिंग और वित्तीय सेवाएं एक ही जगह मिल सकें। X मनी के जरिए टिप भेजने का फीचर इसी रणनीति का हिस्सा है। अगर यह सुविधा व्यापक स्तर पर शुरू होती है, तो क्रिएटर्स को अपने कंटेंट के जरिए सीधे आर्थिक सहयोग पाने का एक और माध्यम मिल सकता है। भारत में कब शुरू होगा X मनी? X ने भारत में X मनी या नए टिपिंग फीचर को लॉन्च करने की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है। फिलहाल भारतीय यूजर्स के लिए इसकी उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। भारत में पहले से ही UPI आधारित डिजिटल पेमेंट का बड़ा नेटवर्क मौजूद है। ऐसे में X मनी को भारत में वित्तीय सेवाएं शुरू करने के लिए देश के लागू बैंकिंग, भुगतान और नियामकीय नियमों का पालन करना होगा। क्या होता है ‘एवरीथिंग ऐप’? एवरीथिंग ऐप या सुपर ऐप ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म होता है, जिसमें एक ही ऐप के जरिए कई तरह की सेवाएं इस्तेमाल की जा सकती हैं। इनमें सोशल मीडिया, मैसेजिंग, डिजिटल पेमेंट, शॉपिंग और बैंकिंग जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। चीन का WeChat इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां मैसेजिंग के साथ भुगतान और कई अन्य डिजिटल सेवाएं भी मिलती हैं। मस्क X को भी इसी तरह का बहुउद्देशीय प्लेटफॉर्म बनाना चाहते हैं।

पूर्व जज संजय किशन कौल का पूर्व CJI चंद्रचूड़ पर निशाना, बोले- जजों की नियुक्ति में सरकार के प्रति ज्यादा झुके थे

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज संजय किशन कौल ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ के रवैए पर सवाल उठाए हैं। अपनी आगामी किताब ‘विदाउट फियर ऑर फेवर’ में कौल ने आरोप लगाया है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले में चंद्रचूड़ सरकार के प्रति जरूरत से ज्यादा झुके हुए थे। कौल के मुताबिक, नियुक्तियों से पहले सरकार की राय लेने की प्रवृत्ति न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए चिंता का विषय है। कौल ने किताब में कॉलेजियम की उस बैठक का जिक्र किया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की छह रिक्तियों को भरने के लिए नामों पर विचार किया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार से निपटने के तरीके को लेकर मतभेदों के कारण चंद्रचूड़ के साथ उनके संबंधों में तनाव आया। कॉलेजियम बैठक में छठे नाम को लेकर मतभेद कौल के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के छह जजों की नियुक्ति पर विचार के दौरान पांच नामों पर पहले सहमति बन चुकी थी। बैठक से ठीक पहले तत्कालीन CJI चंद्रचूड़ ने छठे उम्मीदवार का नाम उनके सामने रखा। कौल ने बताया कि चंद्रचूड़ उन्हें एक अलग कमरे में ले गए और पूछा कि क्या उन्हें सरकार का रुख जानने के लिए फोन करना चाहिए। कौल ने द वायर से बातचीत में कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह सरकार को खुश करने का मामला था, लेकिन नामों पर पहले उनके साथ चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि छठे उम्मीदवार के नाम पर उनकी सहमति नहीं थी और उन्हें लगा कि कॉलेजियम के अन्य सदस्य भी उस नाम को स्वीकार नहीं करेंगे। कौल के अनुसार, बैठक में वही हुआ और छठे नाम पर सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने आशंका जताई कि शायद चंद्रचूड़ ने इस नाम सहित अन्य नामों को लेकर सरकार से पहले ही किसी तरह की मंजूरी ले ली थी। नियुक्तियों से पहले सरकार की राय लेने पर आपत्ति जस्टिस कौल ने कहा कि कॉलेजियम की औपचारिक चर्चा से पहले सरकार के साथ नामों पर विचार-विमर्श करने की परंपरा चिंता पैदा करती है। उनके मुताबिक, सरकार से सलाह लेना और पहले से मंजूरी लेना दो अलग-अलग बातें हैं। कौल का मानना है कि कॉलेजियम को न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए सरकार के दबाव का विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर नियुक्तियों से पहले सरकार की सहमति लेने की प्रक्रिया परंपरा बन जाती है, तो भविष्य में आने वाले मुख्य न्यायाधीशों के लिए इससे अलग चलना मुश्किल हो सकता है। NJAC पर भी रखी अपनी राय किताब में कौल ने 2015 में केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गए नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट्स कमीशन (NJAC) का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि उस समय नियुक्ति व्यवस्था को लेकर आमने-सामने बैठकर चर्चा की जा सकती थी। कौल के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में सुधार और उसके तौर-तरीकों में बदलाव की गुंजाइश थी। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुधार के नाम पर नियुक्तियों से पहले सरकार की मंजूरी लेने की परंपरा को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए। PMLA मामले को दूसरी बेंच में भेजने पर भी सवाल कौल ने अपनी बेंच के एक फैसले से जुड़े मामले को दूसरी बेंच में भेजे जाने पर भी आपत्ति जताई। यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) से जुड़े फैसले के कुछ हिस्सों पर दोबारा विचार करने से संबंधित था। कौल का कहना था कि किसी मामले को इस आशंका के आधार पर एक बेंच से दूसरी बेंच में नहीं भेजा जाना चाहिए कि फैसला किस दिशा में जा सकता है। कांग्रेस ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया कौल की किताब अभी बाजार में नहीं आई है, लेकिन उनके बयानों के आधार पर कांग्रेस ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि कौल ने न्यायाधीशों की नियुक्ति में सरकार के दखल से जुड़ी चिंताएं सामने रखी हैं। रमेश के मुताबिक, इनमें कॉलेजियम की बैठकों से पहले सरकार की मंजूरी लेने की कोशिश और अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले एक न्यायाधीश की जाति को लेकर सरकार की ओर से पूछताछ का मुद्दा भी शामिल है। उन्होंने कहा कि कौल ने इन विषयों को नपे-तुले शब्दों में दर्ज किया है। कांग्रेस ने इसे न्यायपालिका को सत्ता में बैठे लोगों के दबाव से मुक्त रखने की जरूरत से जोड़कर देखा है। कौल बोले- भविष्य के CJI के लिए परंपरा बदलना मुश्किल होगा कौल ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल सीमित होता है, लेकिन उनके फैसलों से बनी परंपराएं आगे भी जारी रह सकती हैं। उनके मुताबिक, यदि नियुक्तियों से पहले सरकार से चर्चा करने की प्रक्रिया सामान्य बन जाती है, तो बाद में आने वाले मुख्य न्यायाधीशों के लिए उससे अलग रास्ता अपनाना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से उन्होंने चंद्रचूड़ को इस तरह की प्रक्रिया से बचने की सलाह देने की कोशिश की।

भोपाल में 1.50 लाख की MD ड्रग्स के साथ दो युवक गिरफ्तार, बाइक-मोबाइल समेत 3 लाख का सामान जब्त

भोपाल। राजधानी भोपाल में परवलिया सड़क थाना पुलिस ने बायपास रोड पर घेराबंदी कर दो युवकों को MD ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 12.63 ग्राम MD ड्रग्स बरामद हुई है, जिसकी कीमत करीब 1.50 लाख रुपए बताई गई है। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल बाइक और मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 3 लाख रुपए आंकी गई है। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने की घेराबंदी पुलिस के मुताबिक, 24 अक्टूबर की रात मुखबिर से सूचना मिली थी कि दो युवक बाइक से MD ड्रग्स लेकर थाना क्षेत्र से गुजरने वाले हैं। सूचना मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया। थाना प्रभारी के नेतृत्व में पांच पुलिस टीमें गठित कर बायपास रोड पर घेराबंदी की गई। रात करीब 1:40 बजे पुलिस को बाइक पर सवार दो संदिग्ध युवक दिखाई दिए। पुलिस को देखकर दोनों ने बाइक मोड़कर भागने की कोशिश की, लेकिन घेराबंदी के चलते उन्हें पकड़ लिया गया। तरुण सराठे और अखिलेश मेहरा गिरफ्तार पुलिस के अनुसार, तलाशी के दौरान तरुण सराठे (24), निवासी छावनी पठार, बिलखिरिया के पास से 12.63 ग्राम MD ड्रग्स बरामद हुई। बाइक पर उसके साथ मौजूद अखिलेश मेहरा (24), निवासी छावनी पठार को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से ड्रग्स के अलावा तस्करी में इस्तेमाल बाइक और मोबाइल फोन जब्त किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 3 लाख रुपए बताई गई है। दोनों आरोपियों पर पहले से दर्ज हैं मामले पुलिस के मुताबिक, तरुण सराठे के खिलाफ बिलखिरिया थाने में मारपीट और आर्म्स एक्ट के दो मामले दर्ज हैं। वहीं, अखिलेश मेहरा के खिलाफ मारपीट के चार प्रकरण पहले से दर्ज हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क की जांच जारी गिरफ्तारी के बाद पुलिस दोनों युवकों से पूछताछ कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि MD ड्रग्स कहां से लाई गई थी और इसे किसे सप्लाई किया जाना था। पुलिस ड्रग्स की खरीद-फरोख्त से जुड़े नेटवर्क की जानकारी भी जुटा रही है।

हरमनप्रीत और दीप्ति के शतक, भारत ने जिम्बाब्वे को दिया 329 रन का टारगेट

वडोदरा। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे वनडे मुकाबले में शानदार बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 6 विकेट पर 328 रन बनाए। वडोदरा के कोटांबी स्टेडियम में रविवार को टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की ओर से कप्तान हरमनप्रीत कौर और दीप्ति शर्मा ने शतक लगाए। दोनों के बीच छठे विकेट के लिए 153 रन की अहम साझेदारी हुई। भारत की शुरुआत खराब, 19 रन पर गिरे 2 विकेट भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। स्मृति मंधाना पारी की चौथी गेंद पर बिना खाता खोले आउट हो गईं। इसके बाद शेफाली वर्मा भी 8 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। तीसरे ओवर में भारत का स्कोर 19 रन पर 2 विकेट हो गया। मुश्किल समय में प्रतीका रावल और हरमनप्रीत कौर ने पारी को संभाला। दोनों ने संभलकर बल्लेबाजी करते हुए टीम को शुरुआती झटकों से उबारा। प्रतीका रावल ने 67 गेंदों पर 61 रन बनाए। उनकी पारी में 4 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। वह 22.2 ओवर में 143 रन के स्कोर पर आउट हुईं। हरमनप्रीत कौर ने 121 गेंदों पर बनाए 126 रन कप्तान हरमनप्रीत कौर ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 121 गेंदों पर 126 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी में 15 चौके लगाए। यह उनके वनडे करियर का आठवां शतक रहा। हालांकि, पारी के दौरान उनके तीन कैच भी छूटे। हरमनप्रीत का विकेट 46.2 ओवर में गिरा। उस समय भारतीय टीम 301 रन बना चुकी थी। पारी के बाद उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद धूप में खेलना आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि जब दूसरे छोर पर बल्लेबाज अच्छी लय में रन बना रही हो, तो स्ट्राइक बदलते रहना और साझेदारी को आगे बढ़ाना जरूरी होता है। दीप्ति शर्मा ने 86 गेंदों में जड़ा शतक छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरीं दीप्ति शर्मा ने 86 गेंदों पर 106 रन की पारी खेली। उन्होंने 15 चौके लगाए। दीप्ति ने 37 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और पारी के आखिरी ओवर में चौका लगाकर वनडे करियर का दूसरा शतक पूरा किया। दीप्ति ने हरमनप्रीत के साथ मिलकर भारतीय पारी को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 137 गेंदों पर 153 रन की साझेदारी की। इस दौरान दोनों ने विकेट बचाने के साथ रन गति भी बनाए रखी। दीप्ति शर्मा ने बनाए तीन रिकॉर्ड आखिरी 10 ओवर में बने 72 रन भारतीय टीम ने आखिरी 10 ओवर में 72 रन जोड़े और इस दौरान 2 विकेट गंवाए। हरमनप्रीत के आउट होने के बाद ऋचा घोष भी ज्यादा देर नहीं टिक सकीं। वह 9 गेंदों पर 7 रन बनाकर 47.6 ओवर में आउट हुईं। भारत ने निर्धारित 50 ओवर में 6 विकेट पर 328 रन बनाकर जिम्बाब्वे के सामने 329 रन का लक्ष्य रखा। दोनों टीमों की प्लेइंग-11 भारत: प्रतीका रावल, स्मृति मंधाना (कप्तान), शेफाली वर्मा, हरमनप्रीत कौर, तेजल हसब्निस, दीप्ति शर्मा, ऋचा घोष (विकेटकीपर), श्री चरणी, जिंतिमणि कलिता, सयाली सतघरे और वैष्णवी शर्मा। जिम्बाब्वे: मोडेस्टर मुपाचिकवा (विकेटकीपर), लोरिन फिरी, चिपो मुगेरी-तिरिपानो, बिलव्ड बिजा, जोसेफिन नकोमो (कप्तान), न्याशा ग्वांजुरा, चिएद्जा धुरुरु, मिशेल मावुंगा, नोमवेलो सिबांडा, तेंदाई मकुशा और ओलिंडर चारे।
BSF

BSF Action: कच्छ के Sir Creek में पकड़े गए 4 Pakistani Fishermen

गुजरात के कच्छ से भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को सर क्रीक के संवेदनशील इलाके में चार पाकिस्तानी मछुआरों को पकड़ लिया। इस दौरान उनकी फाइबर से बनी मछली पकड़ने वाली नाव भी जब्त की गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, चारों मछुआरे कथित तौर पर केकड़े पकड़ने के लिए भारतीय जलक्षेत्र में दाखिल हुए थे। यह कार्रवाई खुफिया जानकारी मिलने के बाद की गई। घटना के बाद एक बार फिर कच्छ के समुद्री सीमा क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, मछुआरों के भारतीय जलक्षेत्र में पहुंचने की परिस्थितियों और उनकी गतिविधियों की पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। BSF ने कैसे पकड़े चार पाकिस्तानी मछुआरे? India Today की 25 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, BSF को सूचना मिली थी कि कुछ पाकिस्तानी मछुआरे भारतीय जलक्षेत्र में मौजूद हैं। इसके बाद जवानों ने सर क्रीक इलाके में कार्रवाई करते हुए चारों को पकड़ लिया। पकड़े गए मछुआरों की पहचान कादिर थैमोर, मुहम्मद मूसा, अजगर थैमोर और अहसान जाट के रूप में बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, चारों पाकिस्तान के सिंध प्रांत के निवासी हैं। कार्रवाई के दौरान उनकी फाइबर की नाव भी जब्त की गई। फिलहाल, पूछताछ और आगे की कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। आखिर क्या है मछुआरों का अपराध? इस मामले में सबसे अहम सवाल है कि चारों मछुआरे भारतीय जलक्षेत्र में क्यों पहुंचे थे। शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया है कि वे केकड़े पकड़ने के लिए सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में दाखिल हुए थे। भारत के जलक्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करना या वहां अवैध रूप से मछली पकड़ना संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई का कारण बन सकता है। हालांकि, इस मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और उपलब्ध सबूतों के आधार पर तय होगी। अभी तक सामने आई रिपोर्ट में चारों मछुआरों के जासूसी या किसी अन्य गंभीर गतिविधि में शामिल होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मामले को लेकर किसी अपुष्ट दावे को तथ्य मानना सही नहीं होगा। कच्छ का Sir Creek इलाका क्यों है संवेदनशील? गुजरात का कच्छ क्षेत्र भारत और पाकिस्तान की समुद्री सीमा के पास स्थित है। सर क्रीक एक ज्वारीय जलमार्ग है, जो अपनी भौगोलिक स्थिति और दलदली इलाके के कारण सीमा पर निगरानी के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इस क्षेत्र में मछली पकड़ने के लिए नावों की आवाजाही होती है। समुद्री सीमा के आसपास होने के कारण किसी दूसरे देश की नाव का भारतीय जलक्षेत्र में प्रवेश करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए जांच का विषय बन जाता है। BSF यहां नियमित गश्त और निगरानी करती है। संदिग्ध नाव या गतिविधि दिखाई देने पर जवान संबंधित लोगों से पूछताछ करते हैं और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई की जाती है। Kutch Border पर हाल की घटनाओं से बढ़ी निगरानी कच्छ के समुद्री सीमा क्षेत्र में अक्टूबर 2026 के दौरान पाकिस्तानी नागरिकों और नावों से जुड़े दूसरे मामले भी रिपोर्ट किए गए हैं। 19 अक्टूबर को कोटेश्वर के पास क्रीक क्षेत्र में गश्त के दौरान BSF ने एक पाकिस्तानी नागरिक को नाव के साथ पकड़ा था। शुरुआती जांच में नाव से मछली पकड़ने के उपकरण मिलने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद इलाके में तलाशी अभियान चलाए जाने की खबर भी सामने आई। 20 अक्टूबर को कच्छ के लखपत और आसपास के क्रीक क्षेत्र से जुड़ी अन्य घटनाओं की भी रिपोर्ट आई थी। इन मामलों में नावों, पाकिस्तानी नागरिकों और तलाशी अभियान का जिक्र किया गया था। हालांकि, ये अलग-अलग घटनाएं हैं और इन्हें 25 अक्टूबर को पकड़े गए चार मछुआरों के मामले से अलग समझना जरूरी है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बीच समुद्री सीमा पर निगरानी का महत्व बढ़ जाता है। फिर भी, केवल इन घटनाओं के आधार पर किसी बड़ी साजिश का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। क्या पाकिस्तानी नाव से कोई संदिग्ध सामान मिला? 25 अक्टूबर की घटना से जुड़ी शुरुआती रिपोर्ट में फाइबर की नाव जब्त किए जाने की पुष्टि हुई है। हालांकि, नाव से किसी हथियार, नशीले पदार्थ या अन्य संदिग्ध सामान की बरामदगी के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए फिलहाल ऐसी किसी बरामदगी का दावा नहीं किया जा सकता। आगे की जांच में नाव, मछुआरों की गतिविधियों और भारतीय जलक्षेत्र में उनकी मौजूदगी से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा सकती है। अब आगे क्या होगा? चारों मछुआरों को पकड़े जाने के बाद अब जांच और कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण महत्वपूर्ण होंगे। संबंधित अधिकारी उनकी पहचान, भारतीय जलक्षेत्र में प्रवेश की परिस्थितियों और घटना से जुड़े दूसरे पहलुओं की जांच कर सकते हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, BSF ने गुजरात के कच्छ स्थित सर क्रीक इलाके में चार पाकिस्तानी मछुआरों को पकड़ा है और उनकी नाव जब्त की है। वे भारतीय जलक्षेत्र में किन परिस्थितियों में पहुंचे और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी, इसकी पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित इस संवेदनशील क्षेत्र में BSF की निगरानी सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है। मामले में आधिकारिक अपडेट आने पर आगे की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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