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Patna में TRE-4 Protest तेज: छात्रों और पुलिस में झड़प, Water Cannon का इस्तेमाल; परीक्षा Pattern पर विवाद

बिहार की राजधानी पटना में TRE-4 Exam को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई दे रहा है। शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों का कहना है कि परीक्षा के नियमों में बदलाव से उनकी परेशानी बढ़ गई है। अपनी मांगों को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रदर्शन कर रहे हैं। मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब छात्रों ने आगे बढ़ने की कोशिश की और पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। हालात बिगड़ने पर Water Cannon का इस्तेमाल किया गया। प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा के घायल होने की भी खबर सामने आई है। TRE-4 Exam Pattern को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी अभ्यर्थियों का मुख्य विरोध BPSC TRE-4 परीक्षा के Pattern को लेकर है। छात्रों की मांग है कि परीक्षा को एक चरण में कराया जाए और भर्ती प्रक्रिया को पहले की तरह सरल एवं स्पष्ट रखा जाए। छात्रों का कहना है कि परीक्षा के नियमों में बदलाव से उनकी तैयारी प्रभावित हो रही है। उनका यह भी कहना है कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में उम्मीदवार महीनों मेहनत करते हैं, इसलिए परीक्षा से जुड़े नियमों में किसी भी बदलाव की जानकारी पहले से स्पष्ट होनी चाहिए। Single Stage Exam और No Negative Marking की मांग प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी Single Stage Examination की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही वे No Negative Marking की व्यवस्था चाहते हैं। छात्रों का तर्क है कि Negative Marking होने से परीक्षा में प्रश्न हल करने की रणनीति बदल जाएगी। उनका कहना है कि अगर परीक्षा का पैटर्न बदला जा रहा है तो BPSC को अभ्यर्थियों की चिंताओं को भी गंभीरता से सुनना चाहिए। Patna में प्रदर्शन के दौरान बढ़ा तनाव TRE-4 अभ्यर्थियों का प्रदर्शन पटना के गर्दनीबाग इलाके में लंबे समय से चल रहा है। मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए Water Cannon का इस्तेमाल किया। इस दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि चोट की परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दावे हैं, इसलिए इस मामले में आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है। BPSC के बयान से भी नाराज हुए छात्र TRE-4 परीक्षा को लेकर विवाद केवल परीक्षा Pattern तक सीमित नहीं है। हाल में BPSC के परीक्षा नियंत्रक की एक टिप्पणी को लेकर भी अभ्यर्थियों में नाराजगी देखने को मिली थी। विवाद बढ़ने के बाद संबंधित अधिकारी की ओर से बयान पर खेद जताया गया। लेकिन छात्रों की नाराजगी पूरी तरह खत्म नहीं हुई। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी असली चिंता परीक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया को लेकर है। आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन TRE-4 अभ्यर्थियों के आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। विपक्षी नेताओं ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से उनकी समस्याओं का समाधान करने की अपील की है। RJD नेता तेजस्वी यादव ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की। छात्रों की मांग साफ, अब सरकार के फैसले का इंतजार प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि वे किसी टकराव के लिए सड़क पर नहीं आए हैं। उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि TRE-4 Exam Pattern को लेकर स्थिति साफ की जाए और उम्मीदवारों के हित में फैसला लिया जाए। अब निगाहें बिहार सरकार और BPSC के अगले कदम पर हैं। अगर छात्रों की मांगों पर जल्द कोई स्पष्ट फैसला नहीं आता है, तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल पटना का TRE-4 Protest बिहार में सरकारी शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं की चिंता को सामने ला रहा है। छात्रों के लिए यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि उनके लंबे समय से देखे जा रहे सरकारी नौकरी के सपने से जुड़ा मामला है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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B1/B2 Visa

Trump का बड़ा Immigration Action: 2 लाख तक B1/B2 Visa होंगे रद्द, Asylum वालों पर नजर

अमेरिका जाने का सपना देख रहे लोगों के लिए इमिग्रेशन से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। Trump Administration अब उन विदेशी नागरिकों पर सख्ती बढ़ाने की तैयारी में है, जो Tourist या Business Visa पर अमेरिका पहुंचे और बाद में वहां Asylum (शरण) के लिए आवेदन कर दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, ऐसे 2 लाख तक B1/B2 Visa रद्द किए जा सकते हैं। अगर यह योजना बड़े स्तर पर लागू होती है, तो एक साथ इतने वीजा रद्द किए जाने की कार्रवाई अमेरिका की इमिग्रेशन पॉलिसी में असाधारण कदम मानी जाएगी। हालांकि, फिलहाल 2 लाख का आंकड़ा संभावित संख्या है, अंतिम सरकारी आंकड़ा नहीं। Tourist Visa पर अमेरिका गए, फिर Asylum मांगा अमेरिका में B1 और B2 Visa मुख्य रूप से अस्थायी यात्राओं के लिए जारी किए जाते हैं। B1 Visa का इस्तेमाल आमतौर पर Business Travel के लिए होता है, जबकि B2 Visa Tourism, रिश्तेदारों से मिलने या कुछ मेडिकल यात्राओं के लिए दिया जाता है। अमेरिकी प्रशासन की चिंता उन मामलों को लेकर है, जहां कोई व्यक्ति Visitor Visa के जरिए अमेरिका पहुंचने के बाद वहां Asylum Application दाखिल कर देता है। सरकार का मानना है कि कुछ मामलों में अस्थायी यात्रा के लिए मिले वीजा का इस्तेमाल लंबे समय तक अमेरिका में रहने के रास्ते के तौर पर किया जा रहा है। 2 लाख Visa Cancel होने की खबर कितनी सही? यहां सबसे जरूरी बात समझना जरूरी है। 2 लाख वीजा रद्द किए जाने की बात अभी एक संभावित आंकड़ा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, मामलों की समीक्षा जारी है और वास्तविक संख्या इससे कम या ज्यादा हो सकती है। यानी फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि अमेरिका ने 2 लाख लोगों के वीजा तुरंत रद्द कर दिए हैं। बल्कि प्रशासन ऐसे मामलों की पहचान और जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। Visa Cancel होने का मतलब Deportation नहीं Visa cancellation को लेकर लोगों के बीच एक बड़ा भ्रम भी है। वीजा रद्द होना और Deportation एक ही बात नहीं है। किसी व्यक्ति का B1/B2 Visa रद्द होने का मतलब यह है कि वह उस वीजा के आधार पर अमेरिका की यात्रा नहीं कर पाएगा। लेकिन अगर उसका Asylum Case पहले से किसी प्रक्रिया में है, तो उसकी इमिग्रेशन स्थिति अलग नियमों के तहत देखी जा सकती है। इसलिए प्रभावित लोगों के लिए आगे की कानूनी और इमिग्रेशन प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होगी। Trump Administration क्यों कर रहा है इतनी सख्ती? राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन ने इमिग्रेशन को अपने प्रमुख एजेंडे में रखा है। सरकार लगातार यह संदेश दे रही है कि अमेरिका में प्रवेश और रहने के नियमों का गलत इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। Administration का फोकस खास तौर पर उन मामलों पर है, जहां Visitor Visa लेकर अमेरिका पहुंचने के बाद व्यक्ति ऐसी प्रक्रिया शुरू करता है जिससे वह लंबे समय तक देश में रह सके। सरकार का तर्क है कि Asylum System का इस्तेमाल वास्तविक शरण की जरूरत वाले लोगों के लिए होना चाहिए, न कि इमिग्रेशन नियमों से बचने के वैकल्पिक रास्ते के तौर पर। पहले भी हजारों Visa हो चुके हैं Cancel यह कार्रवाई अचानक शुरू हुई प्रक्रिया नहीं है। Trump Administration पहले से ही Visa और Immigration System की जांच कड़ी कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, पिछले करीब 18 महीनों में अलग-अलग कारणों से 1.75 लाख से ज्यादा Visa रद्द किए जा चुके हैं। इनमें आपराधिक मामलों और वीजा नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले भी शामिल हैं। अब अगर B1/B2 Visa वाले Asylum Applicants पर प्रस्तावित कार्रवाई आगे बढ़ती है, तो यह अभियान और बड़ा रूप ले सकता है। आगे क्या होगा? आने वाले समय में अमेरिकी State Department और Department of Homeland Security की जांच और समीक्षा के बाद तस्वीर ज्यादा साफ हो सकती है। प्रभावित लोगों की संख्या भी इसी प्रक्रिया के बाद सामने आएगी। फिलहाल इतना साफ है कि America Visa Rules को लेकर Trump Administration का रुख पहले से ज्यादा सख्त हो चुका है। Tourist और Business Visa पर अमेरिका जाने वालों के लिए यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भविष्य में Visa Screening और Immigration Checks और कड़े होने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UPI

UPI के 10 साल पूरे: ₹1.78 करोड़ से हजारों करोड़ तक पहुंचा सफर, PM Modi ने किया याद

भारत में आज मोबाइल से चंद सेकंड में पैसे भेजना जितना आसान लगता है, दस साल पहले इसकी कल्पना भी इतनी आम नहीं थी। UPI यानी Unified Payments Interface ने इसी बदलाव को संभव बनाया। साल 2016 में शुरू हुआ UPI अब अपने 10 साल पूरे कर चुका है और इस दौरान इसने भारत के Digital Payment सिस्टम की पूरी तस्वीर बदल दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने UPI की 10वीं वर्षगांठ पर सोशल मीडिया के जरिए इस खास सफर को याद किया। उन्होंने UPI को भारत की डिजिटल तरक्की की एक बड़ी मिसाल बताते हुए इससे जुड़े लोगों के योगदान की सराहना की। ₹1.78 करोड़ से शुरू होकर ₹24,162 करोड़ तक पहुंचा UPI UPI की शुरुआत के समय इसके जरिए होने वाले लेनदेन बेहद कम थे। शुरुआती दौर में इसका सालाना ट्रांजैक्शन करीब ₹1.78 करोड़ था। लेकिन अगले कुछ वर्षों में स्मार्टफोन, इंटरनेट और Digital Banking के बढ़ते इस्तेमाल ने UPI को तेजी से आगे बढ़ाया। आज यही आंकड़ा बढ़कर करीब ₹24,162 करोड़ सालाना ट्रांजैक्शन तक पहुंच गया है। यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि बताता है कि भारतीयों ने डिजिटल पेमेंट को कितनी तेजी से अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाया। चाय की दुकान से बड़े कारोबार तक पहुंचा QR Payment UPI की असली ताकत उसकी सादगी रही। सड़क किनारे चाय बेचने वाला हो या बड़ा कारोबारी, QR Code ने सभी के लिए डिजिटल भुगतान का रास्ता आसान कर दिया। अब किसी दुकान पर कैश नहीं है तो परेशानी नहीं। मोबाइल निकाला, QR Code स्कैन किया और Payment पूरा। यही सुविधा UPI को आम लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय बनाने में अहम रही। Cashless India की दिशा में बड़ा कदम UPI ने भारत में Cashless Economy को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। छोटे भुगतान से लेकर बड़े लेनदेन तक, डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। खास बात यह है कि इसके लिए ग्राहक को अलग से कोई जटिल प्रक्रिया अपनाने की जरूरत नहीं पड़ती। बैंक अकाउंट और मोबाइल के जरिए भुगतान करना काफी आसान हो गया है। PM Modi ने UPI के सफर को बताया खास UPI के 10 साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक खास पोस्ट साझा किया। उन्होंने इस डिजिटल पेमेंट सिस्टम के विकास को भारत की तकनीकी क्षमता और Innovation से जोड़ते हुए इससे जुड़े लोगों की तारीफ की। UPI ने न केवल देश के भीतर भुगतान को आसान बनाया, बल्कि भारत के Digital Public Infrastructure की चर्चा को भी दुनिया तक पहुंचाया है। भारत से बाहर भी बढ़ी UPI की पहचान पिछले कुछ वर्षों में UPI की चर्चा भारत के बाहर भी बढ़ी है। अलग-अलग देशों के साथ Digital Payment Connectivity बढ़ने से भारतीय यात्रियों और कारोबारियों के लिए भी भुगतान के नए रास्ते खुले हैं। इससे भारत के उस मॉडल को भी मजबूती मिली है, जिसमें Technology को आम लोगों की जरूरतों से जोड़कर बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाता है। 10 साल बाद भी UPI की कहानी जारी 2016 में शुरू हुआ UPI आज करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। ₹1.78 करोड़ से ₹24,162 करोड़ तक पहुंचा इसका सफर भारत में Digital Payment Revolution की तस्वीर सामने रखता है। आने वाले समय में UPI को और सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक बनाने की दिशा में काम जारी रहने की उम्मीद है। फिलहाल, UPI के 10 साल पूरे होना इस बात का प्रमाण है कि सही Technology जब आम आदमी के हाथ में पहुंचती है, तो बदलाव बहुत बड़े स्तर पर दिखाई देता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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TMC

TMC vs Rebel MPs: 20 सांसदों की Disqualification पर Supreme Court का बड़ा कदम

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों की सदस्यता को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। पार्टी की ओर से दायर याचिका पर शीर्ष अदालत ने संबंधित सांसदों को नोटिस जारी किया है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। मामला केवल सांसदों की सदस्यता तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में दल-बदल कानून, लोकसभा स्पीकर के अधिकार और अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में हो रही देरी जैसे अहम सवाल भी हैं। 20 सांसदों की Disqualification का क्या है मामला? TMC का आरोप है कि उसके टिकट पर चुनाव जीतने वाले 20 सांसदों ने बाद में पार्टी से अलग रुख अपनाया और दूसरे राजनीतिक संगठन के साथ जाने की कोशिश की। पार्टी ने इसे संविधान की दसवीं अनुसूची यानी Anti-Defection Law के तहत कार्रवाई योग्य बताया है। TMC की ओर से इन सांसदों की सदस्यता खत्म करने की मांग करते हुए लोकसभा स्पीकर के समक्ष अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की गई थीं। पार्टी का कहना है कि इन याचिकाओं पर अपेक्षित तेजी से फैसला नहीं हुआ। हालांकि, बागी सांसदों की ओर से अलग दलील रखी गई है। उनका कहना है कि उनका कदम कानूनी राजनीतिक विलय के दायरे में आता है और इसलिए उन्हें दल-बदल कानून के तहत अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। Abhishek Banerjee ने उठाया मामला इस मामले को लेकर TMC के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने पहले लोकसभा स्पीकर से भी जल्द फैसला लेने की मांग की थी। पार्टी की ओर से कहा गया कि अयोग्यता याचिकाओं को लंबे समय तक लंबित रखना उचित नहीं है। जब मामला आगे नहीं बढ़ा तो TMC ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पार्टी की प्रमुख मांग है कि अयोग्यता याचिकाओं पर Time-Bound Decision लिया जाए। SC के Notice से क्या बदलेगा? सुप्रीम कोर्ट का नोटिस जारी होना फिलहाल यह नहीं बताता कि 20 सांसदों को अयोग्य घोषित कर दिया गया है। अदालत अब संबंधित पक्षों का जवाब सुनकर मामले की कानूनी स्थिति पर विचार करेगी। यही वजह है कि इस मामले में अगली सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है। अदालत के सामने यह सवाल भी रहेगा कि अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में देरी की स्थिति में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा क्या हो सकती है। Anti-Defection Law पर भी नजर भारत में दल-बदल रोकने के लिए संविधान की दसवीं अनुसूची में प्रावधान किए गए हैं। किसी सांसद के पार्टी बदलने या पार्टी के निर्देशों के खिलाफ जाने की स्थिति में अयोग्यता का सवाल उठ सकता है। हालांकि, कानून में कुछ अपवाद भी मौजूद हैं। TMC और बागी सांसदों के बीच विवाद इसी कानूनी ढांचे की अलग-अलग व्याख्या से जुड़ा हुआ है। इसलिए मामला सिर्फ राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि संसदीय कानून के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बन गया है। आगे क्या होगा? अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है। 20 बागी सांसदों को नोटिस मिलने के बाद मामले में सभी पक्षों की दलीलें सामने आएंगी। इसके बाद अदालत यह तय कर सकती है कि अयोग्यता याचिकाओं को लेकर आगे किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जाए। फिलहाल इतना साफ है कि TMC के 20 Rebel MPs का Disqualification Case अब संसद से निकलकर देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में इस मामले का राजनीतिक असर जितना महत्वपूर्ण होगा, उतना ही इसकी कानूनी दिशा पर भी नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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America

America vs Iran: ईरान की कमाई पर बड़ा हमला, इन 5 Sectors में कारोबार पर बढ़ा खतरा

अमेरिका (America) ने ईरान (Iran) के खिलाफ आर्थिक दबाव को एक और कदम आगे बढ़ा दिया है। ट्रंप प्रशासन ने “Operation Economic Outcast” नाम से एक नई मुहिम शुरू की है, जिसके तहत ईरान की अर्थव्यवस्था से जुड़े पांच अहम सेक्टरों पर Secondary Sanctions का खतरा बढ़ाया गया है। इनमें Digital Assets, Technology, Gold, Aviation और Shipping शामिल हैं। इस फैसले की खास बात यह है कि अमेरिका का निशाना सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। जो विदेशी कंपनियां या संस्थाएं ईरान से जुड़े इन क्षेत्रों में कारोबार या सेवाएं जारी रखेंगी, उनके खिलाफ भी अमेरिकी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान के साथ कारोबार करने वाले हर देश पर तुरंत प्रतिबंध लगा दिया गया है। अमेरिका ने कई मामलों में पहले चेतावनी और कार्रवाई के लिए समयसीमा तय करने की बात कही है। अमेरिका ने क्यों उठाया इतना बड़ा कदम? अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के मुताबिक इस अभियान का मकसद ईरान की उन आर्थिक “lifelines” को काटना है, जिनसे उसे अंतरराष्ट्रीय कारोबार और राजस्व हासिल होता है। अमेरिकी सरकार का आरोप है कि ईरान तेल की बिक्री, प्रतिबंधों से बचने वाले नेटवर्क और दूसरे वित्तीय रास्तों के जरिए अपनी गतिविधियों को जारी रखता है। नई रणनीति में अमेरिका ईरान से जुड़े कारोबारी नेटवर्क के साथ-साथ उन विदेशी संस्थाओं पर भी दबाव बनाना चाहता है, जो इन गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद करती हैं। Gold और Digital Assets पर खास नजर नई कार्रवाई में Gold और Digital Assets को भी प्रमुखता दी गई है। अमेरिकी ट्रेजरी का कहना है कि ईरान अपनी कमजोर होती औपचारिक वित्तीय व्यवस्था के बीच सोने का इस्तेमाल अपनी मुद्रा को सहारा देने और महंगाई के असर से बचने के लिए कर रहा है। वहीं, Digital Assets यानी क्रिप्टो से जुड़े नेटवर्क को भी प्रतिबंधों से बचने और वित्तीय लेनदेन के लिए इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई गई है। Technology सेक्टर भी अमेरिकी निशाने पर ईरान को उन्नत तकनीक तक पहुंच से रोकना भी इस अभियान का अहम हिस्सा है। अमेरिका का दावा है कि ईरान ऐसी तकनीक और उपकरण हासिल करने की कोशिश करता है, जिनका इस्तेमाल उसके मिसाइल और अन्य संवेदनशील कार्यक्रमों में हो सकता है। इसी वजह से नई कार्रवाई में Technology से जुड़े नेटवर्क और खरीद गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। Aviation और Shipping पर भी शिकंजा ईरान की Aviation और Shipping गतिविधियां भी इस अभियान के केंद्र में हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक कुछ ईरानी एयरलाइंस और शिपिंग नेटवर्क का इस्तेमाल संवेदनशील सामान, तकनीक और तेल की आवाजाही के लिए किया जाता है। Shipping के मामले में अमेरिका ने ईरान से जुड़े Shadow Fleet नेटवर्क पर विशेष कार्रवाई की है। ट्रेजरी ने अलग-अलग देशों में मौजूद ब्रोकरों, कंपनियों और जहाजों पर कार्रवाई करते हुए ईरानी तेल की ढुलाई और उससे होने वाली कमाई के नेटवर्क को निशाना बनाया है। करीब 60 Entities, Individuals और Vessels पर कार्रवाई अमेरिका ने इस अभियान के शुरुआती चरण में करीब 60 Entities, Individuals और Vessels को प्रतिबंधों के दायरे में लिया है। इनमें कथित तेल नेटवर्क, तकनीकी खरीद, साइबर गतिविधियों और अन्य वित्तीय चैनलों से जुड़े लोग और संस्थाएं शामिल हैं। अमेरिकी कार्रवाई का नेटवर्क काफी बड़ा है और इसमें UAE, Hong Kong, China, Singapore, Switzerland और यूरोप जैसे अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े कारोबारी नेटवर्क शामिल बताए गए हैं। दूसरे देशों के लिए क्यों बढ़ी चिंता? अमेरिका का यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि Secondary Sanctions का असर ईरान की सीमाओं से बाहर भी पड़ सकता है। अगर कोई विदेशी संस्था ईरान से जुड़े ऐसे कारोबार में शामिल होती है जिसे अमेरिका प्रतिबंधों के दायरे में लाता है, तो उस संस्था के अमेरिकी वित्तीय सिस्टम तक पहुंच पर खतरा बढ़ सकता है। यानी अब ईरान के साथ कारोबार करने वाली कंपनियों को सिर्फ तेहरान के साथ अपने रिश्ते नहीं देखने होंगे, बल्कि अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित असर को भी ध्यान में रखना पड़ेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sri Lanka vs India

Sri Lanka vs India: 503 रन के पहाड़ के सामने श्रीलंका की जुझारू पारी, Pasindu और Kamindu का कमाल

India vs Sri Lanka 2nd Test: कोलंबो टेस्ट में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बड़ा स्कोर खड़ा कर श्रीलंका पर दबाव बना दिया है। भारत ने अपनी पहली पारी 503 रन पर 9 विकेट के स्कोर पर घोषित की। इसके बाद श्रीलंका की शुरुआत लड़खड़ाई, लेकिन अब पसिंदु सूरियाबंदरारा और कामिंदु मेंडिस की साझेदारी ने मेजबान टीम को थोड़ी राहत दी है। भारत ने खड़ा किया 503 रन का पहाड़ भारत की पहली पारी की कहानी कई शानदार बल्लेबाजी पारियों से बनी। देवदत्त पडिक्कल ने 117 रन की बेहतरीन पारी खेलकर टीम को मजबूत आधार दिया। इसके बाद ध्रुव जुरेल ने नाबाद 115 रन बनाकर पारी को शानदार अंदाज में आगे बढ़ाया। जुरेल का यह टेस्ट क्रिकेट में दूसरा शतक और विदेश में पहला टेस्ट शतक है। वहीं ऋषभ पंत ने 63 रन की तेज पारी खेलकर भारतीय स्कोर को रफ्तार दी। कप्तान शुभमन गिल ने भी 50 रन बनाए। इन पारियों के दम पर भारत 500 रन के आंकड़े को पार करने में सफल रहा। जुरेल का शतक बना बड़ी कहानी ध्रुव जुरेल की बल्लेबाजी इस पारी की सबसे खास बात रही। वह मुश्किल परिस्थितियों में भी लगातार धैर्य के साथ बल्लेबाजी करते रहे। बारिश और खराब रोशनी के कारण मुकाबला कई बार रुका, लेकिन जुरेल ने अपना फोकस नहीं खोया। जुरेल ने 115 रन की नाबाद पारी में नौ चौके और दो छक्के लगाए। उनकी इस पारी ने भारत को निचले क्रम में एक मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। श्रीलंका की शुरुआत रही खराब 503 रन के विशाल स्कोर का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम को शुरुआत में ही झटके लगे। प्रसिद्ध कृष्णा और मानव सुथार ने शुरुआती विकेट लेकर मेजबान टीम पर दबाव बना दिया। दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक श्रीलंका 8/2 पर था और भारत से 495 रन पीछे था। हालांकि तीसरे दिन श्रीलंका ने अपनी पारी को संभालने की कोशिश की। मौजूदा स्थिति में पसिंदु सूरियाबंदरारा और कामिंदु मेंडिस क्रीज पर टिके हुए हैं। दोनों के बीच अर्धशतकीय साझेदारी ने श्रीलंका को शुरुआती संकट से बाहर निकलने का मौका दिया है। भारत की नजर बड़े दबाव पर भारत के पास अभी भी बड़ी बढ़त है। 503 रन का स्कोर श्रीलंका के सामने बड़ी चुनौती है और भारतीय गेंदबाज लगातार दबाव बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। अगर टीम इंडिया जल्दी विकेट निकालने में सफल रहती है तो श्रीलंका पर फॉलोऑन का खतरा भी बढ़ सकता है। बारिश से प्रभावित इस टेस्ट में मौसम भी अहम भूमिका निभा रहा है। इसके बावजूद भारतीय टीम ने अब तक मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत रखी है। सीरीज में भारत पहले ही 1-0 से आगे है, इसलिए दूसरे टेस्ट में भी टीम की नजर जीत के साथ सीरीज अपने नाम करने पर होगी। IND vs SL 2nd Test की मौजूदा तस्वीर साफ है—भारत के पास 503 रन का मजबूत स्कोर है, जबकि श्रीलंका को अब पसिंदु और कामिंदु की साझेदारी से बड़ी पारी की उम्मीद है। मुकाबला जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, यह साझेदारी श्रीलंका के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gurugram

Gurugram में बारिश बनी आफत! Waterlogging से सड़कें जाम, School-Office पर बड़ा फैसला

गुरुग्राम (Gurugram) में सोमवार को हुई तेज बारिश ने एक बार फिर शहर की तैयारियों की पोल खोल दी। कुछ घंटों की बारिश के बाद ही कई इलाकों में पानी भर गया। सड़कें तालाब जैसी नजर आने लगीं और कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की रफ्तार थम गई। हालात ऐसे बने कि लोगों को घंटों ट्रैफिक में फंसे रहना पड़ा। बारिश और जलभराव को देखते हुए प्रशासन ने मंगलवार, 25 अगस्त को स्कूलों में Online Classes चलाने और सरकारी व निजी संस्थानों के कर्मचारियों को Work From Home (WFH) की सलाह दी। तेज बारिश के बाद सड़कें बनीं जलमग्न गुरुग्राम में बारिश के बाद राजीव चौक, IFFCO चौक, रेलवे रोड, ओल्ड दिल्ली रोड, मेहरौली रोड, बसई रोड और नरसिंहपुर समेत कई इलाकों में जलभराव की शिकायतें सामने आईं। कुछ अंडरपास और निचले इलाकों में भी पानी जमा होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई। दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे समेत कई व्यस्त सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। ऑफिस से लौट रहे लोगों और जरूरी काम से बाहर निकले लोगों को काफी समय तक जाम का सामना करना पड़ा। School Buses फंसीं, Parents की बढ़ी चिंता बारिश का सबसे ज्यादा असर उस समय दिखाई दिया जब कई स्कूल बसें जलभराव वाले रास्तों में फंस गईं। बच्चों के देर से घर पहुंचने की खबरों के बाद अभिभावकों की चिंता बढ़ गई। ऐसे हालात को देखते हुए अगले दिन स्कूलों में ऑफलाइन पढ़ाई के बजाय Online Classes कराने का फैसला लिया गया। इससे बच्चों और शिक्षकों को जलभराव वाले रास्तों से आने-जाने की परेशानी से बचाने की कोशिश की गई। Offices के लिए WFH Advisory गुरुग्राम प्रशासन ने 25 अगस्त के लिए Work From Home Advisory जारी की। कॉरपोरेट, सरकारी और निजी संस्थानों से कर्मचारियों को संभव हो तो घर से काम कराने की अपील की गई। इस फैसले का मकसद सिर्फ कर्मचारियों की परेशानी कम करना नहीं है। प्रशासन के मुताबिक, अगर कम लोग सड़कों पर निकलेंगे तो ट्रैफिक का दबाव घटेगा और जलभराव वाले इलाकों में राहत एवं निकासी का काम तेजी से किया जा सकेगा। बारिश ने फिर उठाए Drainage System पर सवाल गुरुग्राम देश के बड़े कॉरपोरेट और IT हब में गिना जाता है। यहां रोजाना हजारों लोग काम के लिए अलग-अलग इलाकों से आते-जाते हैं। ऐसे में बारिश के बाद सड़कों पर पानी भरना और ट्रैफिक व्यवस्था का बिगड़ना सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि शहर के Urban Infrastructure के लिए भी बड़ी चुनौती है। हर साल मानसून के दौरान जलभराव की तस्वीरें सामने आने के बाद एक सवाल बार-बार उठता है—क्या गुरुग्राम का Drainage System तेज बारिश का सामना करने के लिए पर्याप्त है? Delhi-NCR में भी बारिश का असर गुरुग्राम के अलावा दिल्ली-NCR के कई इलाकों में भी भारी बारिश का असर देखने को मिला। कई जगह जलभराव और ट्रैफिक की समस्या सामने आई। मौसम विभाग ने भी क्षेत्र में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया था। फिलहाल प्रशासन की कोशिश जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने, ट्रैफिक को नियंत्रित करने और लोगों को सुरक्षित रखने की है। Gurugram Rain से लोगों को मिला एक और सबक गुरुग्राम में कुछ घंटों की बारिश ने शहर की चमकती तस्वीर के पीछे की एक पुरानी समस्या फिर सामने ला दी। सड़कें डूबने के बाद स्कूलों को Online और कर्मचारियों को WFH करना पड़ा। अब नजर इस बात पर है कि बारिश थमने के बाद प्रशासन सिर्फ पानी निकालने तक सीमित रहता है या अगले मानसून से पहले Drainage System को मजबूत करने की ठोस तैयारी भी होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Hijab

School में Hijab पहनने पर Allahabad HC का फैसला, मुस्लिम छात्रा को नहीं मिली राहत

स्कूल की यूनिफॉर्म और हिजाब (Hijab) को लेकर चल रही बहस के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने प्रयागराज के एक निजी स्कूल की मुस्लिम छात्रा की याचिका खारिज कर दी। छात्रा ने स्कूल की तय यूनिफॉर्म के साथ Headscarf यानी हिजाब पहनने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने कहा कि याचिका में ऐसा पर्याप्त आधार नहीं दिया गया, जिससे यह साबित हो कि स्कूल में हेडस्कार्फ पहनना इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा है। क्या है Hijab और School Uniform का पूरा मामला? मामला प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल से जुड़ा है। छात्रा ने अपनी मां के माध्यम से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसका कहना था कि वह कक्षा 6 से 10 तक इसी स्कूल में पढ़ी और इस दौरान हेडस्कार्फ पहनती रही। उस समय स्कूल की ओर से इस पर आपत्ति नहीं जताई गई थी। कक्षा 11 में पहुंचने के बाद स्कूल के ड्रेस कोड को लेकर विवाद सामने आया। छात्रा चाहती थी कि उसे निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति दी जाए। मामला बढ़ने के बाद परिवार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। School का क्या था पक्ष? स्कूल की ओर से कहा गया कि संस्थान में सभी विद्यार्थियों के लिए एक समान Dress Code लागू है। स्कूल एक निजी और CBSE से संबद्ध संस्थान है और उसकी यूनिफॉर्म नीति सभी छात्रों पर समान रूप से लागू होती है। स्कूल ने यह भी तर्क दिया कि ड्रेस कोड का मकसद विद्यार्थियों के बीच समानता और अनुशासन बनाए रखना है। किसी एक विद्यार्थी के लिए अलग नियम बनाने से यूनिफॉर्म की एकरूपता प्रभावित हो सकती है। Allahabad High Court ने क्या फैसला दिया? जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की डिविजन बेंच ने छात्रा की याचिका खारिज कर दी। अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या स्कूल में हेडस्कार्फ पहनना ऐसी Essential Religious Practice है, जिसके आधार पर छात्रा को स्कूल की निर्धारित यूनिफॉर्म से अलग पहनावे की अनुमति दी जानी चाहिए। कोर्ट ने माना कि छात्रा की ओर से इस दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त सामग्री पेश नहीं की गई। इसी आधार पर अदालत ने स्कूल के ड्रेस कोड में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। पहले हिजाब पहनती थी छात्रा, फिर विवाद क्यों हुआ? मामले में छात्रा की ओर से यह महत्वपूर्ण दलील दी गई कि वह कई सालों से स्कूल में हेडस्कार्फ पहनती आ रही थी। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने स्पष्ट किया कि अतीत में स्कूल की ओर से किसी नियम पर आपत्ति नहीं जताए जाने का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में भी उसी व्यवस्था को जारी रखना छात्रा का स्थायी कानूनी अधिकार बन जाता है। यानी स्कूल अगर बाद में अपने तय Uniform Rules को लागू करता है, तो केवल पुरानी व्यवस्था के आधार पर उसे रोकना जरूरी नहीं है। Court ने Uniform को लेकर क्या कहा? हाईकोर्ट ने स्कूल के यूनिफॉर्म नियम को भी मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा माना। अदालत के अनुसार, यदि ड्रेस कोड सभी विद्यार्थियों पर समान रूप से लागू होता है और उसके पीछे अनुशासन तथा संस्थान की पहचान जैसे उद्देश्य हैं, तो केवल व्यक्तिगत पसंद के आधार पर उसमें बदलाव की मांग स्वीकार करना जरूरी नहीं है। यही वजह रही कि इस मामले में कोर्ट ने स्कूल प्रशासन के पक्ष में फैसला दिया। Karnataka Hijab Case का भी हुआ जिक्र इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कर्नाटक हिजाब केस का भी संदर्भ दिया। 2022 में कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी हिजाब को इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा मानने से इनकार किया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उसके सामने ऐसा पर्याप्त आधार नहीं रखा गया है, जिसके चलते वह उस दृष्टिकोण से अलग निष्कर्ष पर पहुंचे। हालांकि हिजाब और धार्मिक स्वतंत्रता का संवैधानिक मुद्दा व्यापक है और अलग परिस्थितियों में अदालतों के सामने इसके अलग पहलू उठ सकते हैं। क्या हर स्कूल में अब हिजाब पर रोक लग गई? नहीं। इस फैसले को इस तरह समझना सही नहीं होगा कि देश के सभी स्कूलों में हिजाब पर एक समान रोक लगा दी गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला एक विशेष स्कूल की यूनिफॉर्म नीति और उसके सामने रखे गए तथ्यों से जुड़ा है। इसलिए अलग स्कूल, अलग ड्रेस कोड या अलग परिस्थितियों में कानूनी स्थिति अलग हो सकती है। Hijab vs Uniform: क्यों अहम है यह फैसला? इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर Religious Freedom और School Dress Code के बीच संतुलन की बहस को चर्चा में ला दिया है। एक तरफ धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत अधिकारों का सवाल है, तो दूसरी तरफ स्कूल की यूनिफॉर्म, अनुशासन और समानता का मुद्दा है। फिलहाल इस मामले में हाईकोर्ट ने छात्रा को स्कूल की निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ हेडस्कार्फ पहनने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। फैसला आने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गया है।
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Patna Airport

Patna Airport पर Bird Strike से हड़कंप, 164 यात्रियों वाली फ्लाइट की Safe Landing

पटना एयरपोर्ट (Patna Airport) पर सोमवार सुबह एक बार फिर विमान की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाली घटना सामने आई। दिल्ली से पटना आ रही एक फ्लाइट लैंडिंग के दौरान पक्षी से टकरा गई। विमान में 164 यात्री सवार थे। गनीमत रही कि पायलट ने विमान को सुरक्षित रनवे पर उतार लिया और हादसे में किसी यात्री के घायल होने की खबर नहीं है। Landing के दौरान विमान से टकराया पक्षी दिल्ली से पटना पहुंची फ्लाइट जब लैंडिंग के लिए नीचे आ रही थी, तभी विमान से पक्षी टकरा गया। पायलट ने तुरंत एयरपोर्ट कंट्रोल को इसकी जानकारी दी। इसके बाद एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था को अलर्ट कर दिया गया। विमान के सुरक्षित उतरने के बाद यात्रियों को बाहर निकाला गया। इसके बाद तकनीकी टीम ने विमान की जांच की। शुरुआती जांच में किसी बड़े नुकसान की बात सामने नहीं आई। यात्रियों के लिए यह पल निश्चित तौर पर डराने वाला रहा होगा। हालांकि, क्रू की सतर्कता और समय पर उठाए गए सुरक्षा कदमों के कारण स्थिति नियंत्रण में रही। 7 दिन में Bird Hit की दूसरी घटना पटना एयरपोर्ट पर Bird Hit का यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि एक सप्ताह के भीतर यह दूसरी ऐसी घटना बताई जा रही है। इससे पहले भी दिल्ली-पटना रूट पर आने वाली फ्लाइट पक्षी से टकराई थी। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने एयरपोर्ट के आसपास पक्षियों की मौजूदगी और रनवे की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। टेक-ऑफ और लैंडिंग के दौरान Bird Strike को विमानन सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना जाता है। बारिश के मौसम में बढ़ती है चुनौती मानसून के दौरान एयरपोर्ट के आसपास हरियाली और कीड़े-मकौड़ों की संख्या बढ़ने से पक्षियों की गतिविधियां भी बढ़ सकती हैं। यही वजह है कि बारिश के मौसम में एयरपोर्ट प्रशासन को रनवे और उसके आसपास के इलाके की लगातार निगरानी करनी पड़ती है। पटना एयरपोर्ट के आसपास Bird Activity को कम करने के लिए अलग-अलग सुरक्षा उपाय किए जाते हैं। रनवे क्षेत्र में पक्षियों की गतिविधि पर नजर रखने के साथ उन्हें दूर रखने के लिए Bird Chasers जैसी व्यवस्था का इस्तेमाल भी किया जाता है। 164 यात्रियों की सुरक्षित लैंडिंग सबसे बड़ी राहत इस घटना में सबसे राहत वाली बात यही रही कि 164 यात्रियों से भरा विमान सुरक्षित पटना पहुंच गया। किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है। विमान की तकनीकी जांच के बाद ही आगे की उड़ान से जुड़े फैसले लिए जाते हैं। हालांकि, एक ही सप्ताह में Bird Hit की दो घटनाएं सामने आने के बाद एयरपोर्ट प्रशासन के सामने चुनौती साफ है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए रनवे के आसपास Bird Movement को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। क्यों गंभीर है Bird Strike? विमान के उड़ान भरते या उतरते समय पक्षी से टकराव को Bird Strike कहा जाता है। छोटे स्तर की घटना में नुकसान सीमित रह सकता है, लेकिन बड़े पक्षी या तेज गति से टकराव की स्थिति में विमान के महत्वपूर्ण हिस्से प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए एयरपोर्ट पर Bird Control System विमान सुरक्षा का अहम हिस्सा माना जाता है। फिलहाल पटना एयरपोर्ट की इस घटना में बड़ी राहत यही है कि विमान सुरक्षित उतर गया और सभी 164 यात्री सुरक्षित रहे। लेकिन लगातार हो रही Bird Hit की घटनाएं एयरपोर्ट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत जरूर दिखाती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Balen Shah

Balen Shah से मोहभंग? Nepal के Gen-Z PM के 150 दिन, उपलब्धियों से ज्यादा विवाद

नेपाल की राजनीति में बालेन शाह (Balen Shah) का नाम कभी बदलाव, युवा सोच और पुरानी व्यवस्था को चुनौती देने वाले नेता के तौर पर लिया जाता था। Gen-Z के बीच उनकी लोकप्रियता ने उन्हें अलग पहचान दिलाई और सत्ता तक पहुंचाया। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के करीब 150 दिन बाद सवाल उठने लगा है—क्या जनता का अपने इस नए नेता से मोहभंग होने लगा है? बालेन शाह के सामने अब वह चुनौती है, जो किसी भी नए नेता के लिए सबसे मुश्किल होती है। चुनावी वादों और उम्मीदों को जमीन पर उतारना। शुरुआती महीनों में सरकार ने कई फैसलों को अपनी उपलब्धि बताया है, लेकिन संसद से दूरी, राजनीतिक संवाद और जनता से जुड़े विवादों ने उनकी सरकार की छवि को झटका दिया है। Balen Shah के 150 दिन: उम्मीद बड़ी, सवाल भी बड़े बालेन शाह ने 27 मार्च 2026 को नेपाल के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। इससे पहले काठमांडू के मेयर के तौर पर उन्होंने अपनी सख्त और सीधे फैसले लेने वाली कार्यशैली से खूब सुर्खियां बटोरी थीं। यही वजह थी कि जब उनकी पार्टी RSP को चुनाव में बड़ी सफलता मिली तो युवाओं को लगा कि नेपाल की राजनीति में अब कुछ अलग होने वाला है। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें सिर्फ लोकप्रिय नेता नहीं, बल्कि एक पूरी सरकार चलाने वाले मुखिया के तौर पर खुद को साबित करना पड़ा। सरकार का दावा है कि उसके शुरुआती एजेंडे पर अच्छी प्रगति हुई है। हालांकि, विपक्ष और आलोचकों की नजर में तस्वीर इतनी आसान नहीं है। Parliament से दूरी बनी बड़ा मुद्दा बालेन शाह की कार्यशैली पर सबसे ज्यादा सवाल उनकी Parliament Attendance को लेकर उठ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, शुरुआती 39 संसदीय बैठकों में प्रधानमंत्री केवल 5 बैठकों में मौजूद रहे। विपक्षी सांसदों ने इसे गंभीर मुद्दा बनाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को संसद में उपस्थित होकर सरकार के कामकाज और नीतियों पर जवाब देना चाहिए। अब संसद के स्पीकर ने बालेन शाह को 26 अगस्त को सदन में मौजूद होकर सांसदों के सवालों का जवाब देने को कहा है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिस नेता से युवाओं ने पारदर्शिता और जवाबदेही की उम्मीद की थी, उसी की संसद में कम मौजूदगी अब राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। जनता के मुद्दों पर सरकार घिरी काठमांडू में अनौपचारिक बस्तियों और जमीन पर रहने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी सरकार को आलोचना झेलनी पड़ी। प्रभावित लोगों ने पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। जुलाई में एक राइड-शेयर ड्राइवर की मौत के बाद भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठे। इस घटना ने अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले लोगों और प्रशासन के बीच तनाव को सामने ला दिया। इन घटनाओं ने सरकार के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है—सख्त प्रशासन और संवेदनशील शासन के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए? Foreign Policy पर भी बढ़ी नजर प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह की विदेश नीति भी चर्चा में रही। भारत और चीन जैसे पड़ोसी देशों के साथ संबंध नेपाल के लिए हमेशा संवेदनशील मुद्दा रहे हैं। बालेन शाह के कुछ बयानों और राजनयिक गतिविधियों को लेकर राजनीतिक बहस हुई। हालांकि बाद में उन्होंने भारत और चीन के राजदूतों से मुलाकात भी की। RSP प्रमुख रबी लामिछाने की भारत यात्रा और वहां हुई मुलाकातों ने भी नेपाल की राजनीति में अलग चर्चा पैदा की। इससे यह सवाल उठा कि पार्टी और सरकार के बीच विदेश नीति को लेकर तालमेल कितना मजबूत है। RSP के अंदर भी सबकुछ ठीक है? बालेन शाह के लिए एक और चुनौती अपनी ही पार्टी के भीतर बेहतर तालमेल बनाए रखना है। रिपोर्टों के मुताबिक, 21 अगस्त को RSP की केंद्रीय समिति की अहम बैठक में बालेन शाह शामिल नहीं हुए। बैठक में स्थानीय चुनावों की तैयारियों समेत कई राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होनी थी। प्रधानमंत्री का बैठक में शामिल नहीं होना पार्टी के भीतर उनकी भूमिका और नेतृत्व को लेकर अटकलों का कारण बना। हालांकि, इसे सीधे तौर पर किसी बड़े राजनीतिक टकराव का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। Gen-Z का भरोसा अब सबसे बड़ी परीक्षा बालेन शाह की राजनीति की सबसे बड़ी ताकत Gen-Z और युवा मतदाताओं का समर्थन रही है। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और पुराने राजनीतिक दलों से नाराज युवाओं ने उन्हें बदलाव के चेहरे के रूप में देखा। लेकिन सरकार बनने के बाद तस्वीर बदलती है। अब सिर्फ भाषण या लोकप्रिय छवि काफी नहीं है। रोजगार, महंगाई, प्रशासन, भ्रष्टाचार और रोजमर्रा की समस्याओं पर जनता ठोस नतीजे चाहती है। यही वजह है कि बालेन शाह के लिए आने वाले महीने बेहद अहम हैं। Balen Shah का Report Card: पास या फेल? 150 दिनों के आधार पर बालेन शाह सरकार को सीधे तौर पर Fail कहना सही नहीं होगा। सरकार ने कुछ फैसलों और प्रशासनिक सुधारों को अपनी उपलब्धि बताया है। लेकिन दूसरी तरफ संसद से दूरी, जनता से जुड़े विवाद और राजनीतिक संवाद की कमी ने कई सवाल खड़े किए हैं। असल परीक्षा अब शुरू होती है। बालेन शाह को यह साबित करना होगा कि वह सिर्फ Gen-Z के लोकप्रिय नेता नहीं, बल्कि नेपाल को लंबे समय तक प्रभावी तरीके से चलाने वाले प्रधानमंत्री भी हैं। जनता ने उन्हें बदलाव के नाम पर मौका दिया है। अब जनता को नारे नहीं, Result चाहिए। यही आने वाले समय में बालेन शाह के राजनीतिक भविष्य का सबसे बड़ा पैमाना बनेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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गांधीनगर में बड़ा हादसा: निर्माणाधीन इमारत पर गिरी क्रेन, 10-15 मजदूरों के दबे होने की आशंका

गांधीनगर। गुजरात के गांधीनगर के पास कुडासन इलाके में बुधवार को एक बड़ा हादसा हो गया। निर्माणाधीन इमारत पर अचानक भारी क्रेन गिर गई। हादसे के समय नीचे काम कर रहे करीब 10 से 15 मजदूरों के मलबे और क्रेन के भारी हिस्सों के नीचे दबे होने की आशंका है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। मलबे में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है। मलबा हटाने के लिए दूसरी क्रेन बुलाई गई क्रेन और निर्माण सामग्री के भारी मलबे को हटाने के लिए मौके पर एक और क्रेन बुलाई गई है। बचाव दल मलबे के नीचे दबे मजदूरों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दमकल की चार से ज्यादा गाड़ियां मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में जुटी हैं। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस भी घटनास्थल पर तैनात की गई हैं। फिलहाल हादसे में कितने लोग घायल हुए हैं या किसी की मौत हुई है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। नगर आयुक्त और डिप्टी CM मौके पर पहुंचे हादसे की गंभीरता को देखते हुए गांधीनगर नगर आयुक्त और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों की निगरानी में राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे मजदूरों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना है। फिलहाल बचाव अभियान जारी है और हादसे से जुड़ी विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

Apple iPhone 18 Pro और Pro Max लॉन्च, A20 Pro चिप और 45 घंटे तक की बैटरी; पहली बार फोल्डेबल iPhone भी

कैलिफोर्निया। Apple ने अपने नए iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने दोनों प्रीमियम मॉडल्स में नए डिजाइन, A20 Pro चिप, बेहतर AI फीचर्स और लंबी बैटरी लाइफ पर खास जोर दिया है। लॉन्च इवेंट नए CEO जॉन टर्नस के नेतृत्व में Apple का पहला बड़ा प्रोडक्ट प्रेजेंटेशन भी रहा। दोनों मॉडल चार कलर ऑप्शन में पेश किए गए हैं—डीप ब्लैक, सिल्वर, ग्लेशियर और बरगंडी। iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,199 डॉलर और iPhone 18 Pro Max की 1,299 डॉलर रखी गई है। दोनों के बेस मॉडल में 256GB स्टोरेज दी गई है। A20 Pro चिप से मिलेगा तेज परफॉर्मेंस iPhone 18 Pro सीरीज में नया A20 Pro प्रोसेसर दिया गया है। Apple के मुताबिक यह 2nm टेक्नोलॉजी पर आधारित नई आर्किटेक्चर वाली चिप है। इसमें 6-कोर CPU और नया GPU दिया गया है, जबकि कंपनी ने GPU परफॉर्मेंस में करीब 40 फीसदी तक सुधार का दावा किया है। Apple Intelligence और Siri को भी नए हार्डवेयर के साथ ज्यादा सक्षम बनाया गया है। Siri में AI क्षमताओं और अधिक नैचुरल वॉइस अनुभव पर जोर दिया गया है। कंपनी का कहना है कि डिवाइस पर AI प्रोसेसिंग के साथ प्राइवेसी को भी प्राथमिकता दी गई है। बैटरी लाइफ में बड़ा अपग्रेड iPhone 18 Pro और Pro Max में अब तक की सबसे लंबी iPhone बैटरी लाइफ में से एक मिलने का दावा किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक iPhone 18 Pro करीब 24 घंटे और Pro Max करीब 30 घंटे तक सामान्य उपयोग में चल सकता है। वहीं वीडियो प्लेबैक में Pro मॉडल करीब 36 घंटे और Pro Max करीब 45 घंटे तक का बैकअप दे सकता है। Pro Max का 45 घंटे का वीडियो प्लेबैक इस सीरीज की सबसे बड़ी बैटरी उपलब्धियों में से एक है। नई फास्ट चार्जिंग तकनीक भी दी गई है। कंपनी के अनुसार फोन करीब 15 मिनट की चार्जिंग में 50 फीसदी तक चार्ज हो सकता है। कैमरा सिस्टम में भी बड़ा बदलाव iPhone 18 Pro सीरीज में कैमरा सिस्टम को भी अपग्रेड किया गया है। मुख्य कैमरे में 48MP सेंसर के साथ डायनेमिक/वेरिएबल अपर्चर दिया गया है, जिससे अलग-अलग रोशनी की परिस्थितियों में फोटो क्वालिटी और लो-लाइट परफॉर्मेंस बेहतर करने में मदद मिलेगी। वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए भी नए प्रो कंट्रोल और 4K Dolby Vision HDR टाइम-लैप्स जैसे फीचर्स जोड़े गए हैं। Apple का पहला फोल्डेबल iPhone भी लॉन्च Apple के इस इवेंट की सबसे बड़ी खासियत कंपनी का पहला फोल्डेबल iPhone भी रहा। यह Apple के स्मार्टफोन डिजाइन में लंबे समय बाद सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। Reuters के मुताबिक फोल्डेबल iPhone की कीमत 2,000 डॉलर से ज्यादा हो सकती है और कंपनी ने इसे लंबे समय तक इंजीनियरिंग चुनौतियों पर काम करने के बाद पेश किया है। इस साल Apple का फोकस प्रीमियम iPhone मॉडल्स और फोल्डेबल डिवाइस पर ज्यादा रहा है। बेस iPhone मॉडल के लॉन्च शेड्यूल में भी बदलाव किया गया है। नए CEO जॉन टर्नस का पहला बड़ा प्रेजेंटेशन 1 सितंबर को Tim Cook के बाद Apple के CEO बने John Ternus के लिए यह पहला बड़ा प्रोडक्ट लॉन्च प्रेजेंटेशन रहा। Ternus इससे पहले Apple के हार्डवेयर प्रमुख के तौर पर काम कर चुके हैं। Apple के इस इवेंट में iPhone के अलावा नए वियरेबल्स और अन्य प्रोडक्ट्स की घोषणाएं भी की गईं। कंपनी के लिए यह लॉन्च नए CEO के नेतृत्व में उसकी अगली प्रोडक्ट रणनीति की शुरुआत के तौर पर भी अहम माना जा रहा है।

दक्षिण अफ्रीका ने नामीबिया को 99 रन से हराया, डेब्यू में जॉर्डन हरमन ने जड़ा 150 रन का तूफानी शतक

विंडहोक। दक्षिण अफ्रीका ने नामीबिया के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 99 रन से जीत लिया। दक्षिण अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 348/6 रन बनाए। जवाब में बारिश से दो बार प्रभावित नामीबिया की टीम 38 ओवर में 162/8 रन ही बना सकी। मुकाबले का फैसला DLS मेथड से हुआ। दक्षिण अफ्रीका की जीत के हीरो डेब्यू कर रहे जॉर्डन हरमन रहे, जिन्होंने शानदार 150 रन की पारी खेली। वहीं प्रेनेलन सब्रायेन ने करियर की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी करते हुए चार विकेट झटके। सीरीज का दूसरा वनडे 11 सितंबर को विंडहोक में खेला जाएगा। डेब्यू पर 150 रन, हरमन ने बनाया बड़ा रिकॉर्ड जॉर्डन हरमन वनडे डेब्यू पर 150 रन बनाने वाले संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा स्कोर करने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। इससे पहले मैथ्यू ब्रीट्जके ने भी अपने वनडे डेब्यू पर 150 रन की पारी खेली थी। हरमन दक्षिण अफ्रीका की ओर से वनडे डेब्यू पर शतक लगाने वाले पांचवें बल्लेबाज भी बन गए। उनसे पहले कॉलिन इंग्राम, टेम्बा बावुमा, रीजा हेंड्रिक्स और मैथ्यू ब्रीट्जके यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। हरमन ने टोनी डी जॉर्जी के साथ दूसरे विकेट के लिए 190 रन की साझेदारी की। डी जॉर्जी ने 84 गेंदों पर 72 रन बनाए और वनडे करियर का तीसरा अर्धशतक पूरा किया। शुरुआती 20 ओवर में 100 रन, इसके बाद बढ़ी रफ्तार दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत बहुत तेज नहीं रही। नामीबिया के गेंदबाजों को शुरुआती ओवरों में पिच से कुछ मूवमेंट मिली। रूबेन ट्रम्पेलमैन ने हरमन के बल्ले का बाहरी किनारा भी छुआ और टॉप-एज का मौका बनाया, लेकिन विकेट नहीं मिल सका। सातवें ओवर में कॉनर एस्टरहुइजन ने शॉर्ट गेंद को पुल करने की कोशिश की, लेकिन फाइन लेग पर जैक ब्रासेल ने कैच पकड़ लिया। इससे शुरुआती साझेदारी 27 रन पर टूट गई। दूसरी ओर डी जॉर्जी को भी कई बार जीवनदान मिला। उन्होंने स्लिप के बाहर एज किया और विकेटकीपर के पास भी कैच का मौका बना, लेकिन नामीबिया उसे भुना नहीं सका। एक रनआउट का मौका भी टीम ने गंवा दिया। दक्षिण अफ्रीका ने 20 ओवर में 100/1 रन बनाए। इसके बाद अगले सात ओवर में 50 रन जोड़कर टीम ने रन गति बढ़ाई। इसी दौरान हरमन ने अपना अर्धशतक पूरा किया, जबकि डी जॉर्जी ने 64 गेंदों में फिफ्टी लगाई। शतक के बाद हरमन ने बदला अंदाज हरमन ने 93 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। शतक के बाद उन्होंने आक्रामक अंदाज अपनाया और तेजी से रन बनाए। सेंचुरी के बाद उन्होंने पांच चौके और दो छक्के लगाए। हरमन ने मैदान के दोनों हिस्सों में शानदार शॉट खेले। कवर और मिडऑफ के बीच उन्होंने 59 रन बटोरे। उनके बाद क्रीज पर आए डेवाल्ड ब्रेविस ने महज दो गेंद बाद नो-लुक सिक्स लगाकर पारी को और रोमांचक बना दिया। आखिरी 10 ओवर में गिरे चार विकेट दक्षिण अफ्रीका ने आखिरी 10 ओवर की शुरुआत 266/2 के स्कोर से की थी। उस समय टीम के 350 रन के पार जाने की उम्मीद थी, लेकिन नामीबिया के गेंदबाजों ने वापसी की। हरमन ने बैक-ऑफ-द-हैंड स्लोअर गेंद को बैकवर्ड पॉइंट के ऊपर से खेलने की कोशिश की, लेकिन कैच लॉरेन स्टीनकैंप के हाथों में चला गया। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका ने केवल 58 रन के अंदर चार विकेट गंवा दिए। ट्रम्पेलमैन ने इनमें से तीन विकेट लिए। डेवाल्ड ब्रेविस डीप स्क्वायर लेग पर कैच हुए, रुबिन हरमन LBW आउट हुए और जेसन स्मिथ भी बड़ा शॉट लगाने के प्रयास में आउट हो गए। आखिर में कॉर्बिन बॉश ने 24 गेंदों पर नाबाद 39 रन बनाकर दक्षिण अफ्रीका को 348/6 तक पहुंचाया। नामीबिया की शुरुआत रही बेहद धीमी 349 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी नामीबिया की शुरुआत बेहद धीमी रही। टीम ने शुरुआती 10 ओवर में सिर्फ 24 रन बनाए। दूसरे से 12वें ओवर के बीच लगातार 10 ओवर तक कोई बाउंड्री नहीं आई। एलेक्स बुसिंग-वोल्शेंक 12 रन बनाकर फोर्टुइन की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने गए। लॉन्गऑफ पर जेसन स्मिथ के पास कैच आया, लेकिन गेंद उनके हाथ से निकल गई। हालांकि अगली ही गेंद पर बुसिंग-वोल्शेंक ने क्वेना मफाका की गेंद पर गलत लाइन में शॉट खेला और विकेटकीपर के हाथों कैच आउट हो गए। जन फ्रायलिंक भी इस मुकाबले में प्रभाव नहीं छोड़ सके। उन्होंने 16 गेंदों पर सात रन बनाए और मफाका की गेंद पर बोल्ड हो गए। 73/3 के स्कोर पर बारिश ने रोका खेल दूसरे ओपनर मालन क्रुगर का संघर्ष 19वें ओवर में खत्म हुआ। वह सब्रायेन की गेंद पर फ्लिक करने से चूक गए और LBW आउट हो गए। 22वें ओवर में नामीबिया का स्कोर 73/3 था, तभी विंडहोक में बारिश शुरू हो गई और मैच रोकना पड़ा। करीब 1 घंटे 18 मिनट बाद खेल दोबारा शुरू हुआ। बारिश के कारण नामीबिया का लक्ष्य घटाकर 38 ओवर में 301 रन कर दिया गया। टीम को बचे हुए 16.3 ओवर में 225 रन बनाने थे। दूसरी बारिश के बाद 7 ओवर में चाहिए थे 167 रन खेल दोबारा शुरू होने के कुछ ही समय बाद लॉरेन स्टीनकैंप ने बॉश की गेंद को हवा में खेल दिया। शॉर्ट कवर पर सब्रायेन ने कैच पकड़ लिया और इसके बाद नामीबिया के विकेट तेजी से गिरने लगे। गेरहार्ड इरास्मस ने कुछ अच्छे शॉट लगाते हुए दो चौके लगाए, लेकिन बारिश ने एक बार फिर मैच रोक दिया। करीब आधे घंटे बाद खेल दोबारा शुरू हुआ। उस समय नामीबिया को केवल 7 ओवर में 167 रन बनाने थे। यह लक्ष्य लगभग असंभव था। नामीबिया ने इस दौरान 67 रन के अंदर चार और विकेट गंवा दिए और 38 ओवर में 162/8 रन ही बना सकी। इस तरह दक्षिण अफ्रीका ने मुकाबला 99 रन से अपने नाम कर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली।

छत्तीसगढ़ कैबिनेट के बड़े फैसले: स्टार्टअप-NIPUN मिशन के लिए 500 करोड़, कर्मचारियों की उम्र सीमा 45 साल

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में हुई कैबिनेट बैठक में युवाओं, कर्मचारियों, निर्यात और न्यायिक अधोसंरचना से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। सरकार ने अगले पांच वर्षों के लिए मुख्यमंत्री स्टार्टअप और NIPUN मिशन के तहत 500 करोड़ रुपए खर्च करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा सरकारी और संबद्ध संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को दूसरी शासकीय सेवाओं और उच्च पदों के लिए आवेदन करने में बड़ी राहत दी गई है। अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। वहीं, छत्तीसगढ़ को प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30 को भी मंजूरी दी गई है। स्टार्टअप और NIPUN मिशन के लिए 500 करोड़ कैबिनेट ने युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास, उद्यमिता और नवाचार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री स्टार्टअप और NIPUN मिशन को मंजूरी दी है। इसके लिए अगले पांच वर्षों में 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। मिशन के तहत प्रदेश के सभी 33 जिलों में उद्यमिता विकास केंद्र, 100 इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब और 5 इंडस्ट्री एक्सीलेंस सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही NIPUN JOB Engine के माध्यम से उद्योगों की जरूरत के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें औपचारिक रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30 को मंजूरी राज्य को देश के प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30 को मंजूरी दी है। नीति के तहत मजबूत निर्यात इकोसिस्टम और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। प्रदेश के उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों को बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों के मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना भी नीति का प्रमुख लक्ष्य होगा। नवा रायपुर में 200 करोड़ की लागत से बनेगा NSTI कैबिनेट ने नवा रायपुर अटल नगर के ग्राम तेंदुवा में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (NSTI) की स्थापना के लिए 10 एकड़ शासकीय भूमि केंद्र सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता निदेशालय को मुफ्त उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। करीब 200 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस संस्थान में आधुनिक शैक्षणिक, प्रशासनिक और हॉस्टल सुविधाएं विकसित की जाएंगी। NSTI में हर साल दीर्घकालीन पाठ्यक्रमों के तहत करीब 1,000 प्रशिक्षुओं और अल्पकालीन कार्यक्रमों में 3,000 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण देने की क्षमता होगी। सरकारी कर्मचारियों की अधिकतम आयु सीमा 45 साल कैबिनेट ने राज्य शासन के स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों के साथ निगम-मंडल, स्वशासी संस्थाओं के कर्मचारियों, संविदाकर्मियों और नगर सैनिकों के लिए अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने को मंजूरी दी है। अब दूसरी शासकीय सेवाओं और उच्च पदों के लिए आवेदन करने की अधिकतम आयु सीमा 38 से बढ़ाकर 45 वर्ष किए जाने का फैसला लिया गया है। सरकार के इस फैसले से संबंधित कर्मचारियों को दूसरी सरकारी सेवाओं और उच्च पदों पर आवेदन करने के लिए अतिरिक्त अवसर मिल सकेंगे। इसके लिए राज्य शासन की ओर से एकीकृत स्थायी दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। दुर्ग में बनेगा नया जिला न्यायालय भवन दुर्ग जिला न्यायालय के नए भवन के निर्माण का रास्ता भी कैबिनेट के फैसले से साफ हो गया है। सरकार ने ग्राम तितुरडीह में बीआईटी कॉलेज के पास 4 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके बदले ग्राम पाहंदा, तहसील पाटन में 5.024 हेक्टेयर शासकीय भूमि भिलाई इस्पात संयंत्र को दी जाएगी। दोनों जमीनों का वर्तमान मूल्य लगभग समान बताया गया है। इस फैसले के बाद दुर्ग में आधुनिक सुविधाओं से लैस और सुव्यवस्थित जिला न्यायालय परिसर के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

हर्षित राणा अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज से हो सकते हैं बाहर, हैमस्ट्रिंग चोट से पूरी तरह नहीं उबरे

भारत के तेज गेंदबाज हर्षित राणा अफगानिस्तान के खिलाफ 13 सितंबर से शुरू होने वाली तीन मैचों की टी-20 सीरीज से बाहर हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राणा अभी अपनी हैमस्ट्रिंग चोट से पूरी तरह फिट नहीं हुए हैं और उन्हें मैदान पर वापसी के लिए थोड़ा और समय लग सकता है। हर्षित राणा को अफगानिस्तान के खिलाफ तीनों टी-20 मैचों के लिए फिटनेस के आधार पर भारतीय टीम में शामिल किया गया है। उन्हें आगामी एशियन गेम्स के लिए चुनी गई भारतीय टीम में भी जगह मिली है। BCCI के एक सूत्र के मुताबिक, राणा अभी चोट से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं और उन्हें फिट होने में और समय लगेगा। इंग्लैंड दौरे पर खेला था आखिरी मुकाबला हर्षित राणा ने भारत के लिए अपना आखिरी मुकाबला इंग्लैंड दौरे के दौरान खेला था। इसके बाद हैमस्ट्रिंग चोट के कारण वह टीम से बाहर चल रहे हैं। राणा को भी वॉशिंगटन सुंदर जैसी हैमस्ट्रिंग चोट से जूझना पड़ा है। हालांकि, सुंदर अब पूरी तरह फिट हो चुके हैं और उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज के लिए फिट घोषित किया गया है। बुमराह और नितीश भी फिटनेस के आधार पर टीम में अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज के लिए तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और ऑलराउंडर नितीश रेड्डी को भी फिटनेस के आधार पर टीम में शामिल किया गया है। बुमराह बाएं घुटने की चोट से उबर रहे हैं। वह जुलाई में इंग्लैंड दौरे के बाद से क्रिकेट से दूर हैं। वहीं, नितीश रेड्डी क्वाड्रिसेप्स की चोट से रिकवरी कर रहे हैं। BCCI सूत्र के अनुसार, बुमराह और नितीश दोनों की फिटनेस में सुधार हो रहा है और उनकी वापसी सही दिशा में है। अफगानिस्तान सीरीज के बाद एशियन गेम्स भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की टी-20 सीरीज के मुकाबले 13 सितंबर से दिल्ली में खेले जाने हैं। इसके बाद भारतीय टीम 22 सितंबर को टोक्यो में जापान के खिलाफ एकमात्र मैच खेलेगी। भारतीय टीम इसके बाद 28 सितंबर से एशियन गेम्स में अपना अभियान शुरू करेगी। हर्षित राणा को एशियन गेम्स की टीम में भी शामिल किया गया है। ऐसे में उनकी फिटनेस भारतीय टीम के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अफगानिस्तान सीरीज से पहले राणा की फिटनेस पर अंतिम फैसला उनकी रिकवरी और फिटनेस टेस्ट के आधार पर लिया जा सकता है।

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