भारत और रूस के बीच Defence Partnership को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। रूस के Su-57 Stealth Fighter Jet को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है। खबरों के मुताबिक भारत करीब 75 Su-57 Fighter Jets लेने के विकल्प पर विचार कर सकता है। संभावित सौदे की कीमत करीब ₹1 लाख करोड़ तक बताई जा रही है। हालांकि, अभी तक 75 विमानों की खरीद और इतनी रकम की डील को लेकर कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रस्तावित मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। बातचीत के दौरान Defence Cooperation के साथ Su-57 की बिक्री और Technology Transfer पर भी चर्चा हो सकती है।
Su-57 Deal पर क्यों टिकी हैं नजरें?
भारत लंबे समय से अपनी Air Force की combat capability को मजबूत करने पर काम कर रहा है। ऐसे में रूस का पांचवीं पीढ़ी का Su-57 Fighter Jet चर्चा में आना स्वाभाविक है।
रूस की ओर से भारत को सिर्फ तैयार विमान देने के बजाय Technology Transfer और स्थानीय स्तर पर उत्पादन से जुड़े विकल्पों पर भी बातचीत के संकेत मिले हैं। अगर इस दिशा में कोई समझौता होता है, तो इसका फायदा भारत के Defence Manufacturing Sector को मिल सकता है।
75 Fighter Jets की खबर कितनी सही?
सबसे ज्यादा चर्चा 75 Su-57 Jets की संभावित खरीद को लेकर है। कुछ रिपोर्टों में इसकी अनुमानित लागत ₹1 लाख करोड़ तक बताई गई है।
लेकिन फिलहाल इसे पक्की Deal मानना सही नहीं होगा। रूस ने Su-57 की बिक्री और तकनीकी सहयोग को लेकर भारत के साथ बातचीत की बात जरूर कही है, लेकिन विमानों की अंतिम संख्या, कीमत और खरीद की शर्तों पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है।
यानी अभी कहानी बातचीत के दौर में है और आगे की तस्वीर दोनों देशों की बैठक के बाद ज्यादा साफ हो सकती है।
Technology Transfer पर भारत का जोर
भारत की Defence Procurement Policy में अब केवल विदेशी हथियार खरीदना ही मुख्य लक्ष्य नहीं है। देश की कोशिश है कि बड़े Defence Deals के साथ तकनीक और Manufacturing Capability भी भारत आए।
Su-57 के मामले में भी Technology Transfer का मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है। अगर रूस भारत में इस विमान से जुड़ी तकनीक और उत्पादन क्षमता विकसित करने में सहयोग करता है, तो इससे भारतीय Aerospace Industry को लंबी अवधि में फायदा हो सकता है।
Su-57 कितना खास है?
Su-57 रूस का Fifth Generation Fighter Aircraft है। इसे आधुनिक एवियोनिक्स, स्टील्थ डिजाइन, सेंसर और लंबी दूरी की युद्ध क्षमता को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
भारत के लिए पांचवीं पीढ़ी के Fighter Aircraft की जरूरत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय वायुसेना आने वाले वर्षों में अपने Fighter Squadron को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसके साथ ही भारत का अपना AMCA यानी Advanced Medium Combat Aircraft Programme भी आगे बढ़ रहा है।
मोदी-पुतिन Meeting पर सबकी नजर
Su-57 के अलावा भारत और रूस की बातचीत का दायरा काफी बड़ा हो सकता है। Defence Cooperation, Nuclear Energy, Trade और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच चर्चा होने की उम्मीद है।
ऐसे में अगर Su-57 को लेकर कोई बड़ा ऐलान होता है, तो यह भारत-रूस Defence Relations के लिए अहम पड़ाव साबित हो सकता है।
भारत के लिए क्या बदल सकता है?
अगर भविष्य में Su-57 की खरीद और Technology Transfer पर सहमति बनती है, तो भारत को एक तरफ आधुनिक Fighter Aircraft मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर घरेलू Defence Manufacturing को भी बढ़ावा मिल सकता है।
हालांकि, अभी 75 Su-57 Jets और ₹1 लाख करोड़ की कीमत को संभावित प्रस्ताव के तौर पर ही देखना बेहतर है। अंतिम फैसला होने तक इन आंकड़ों में बदलाव संभव है।
फिलहाल नजरें मोदी-पुतिन की बैठक पर हैं। अगर बातचीत किसी ठोस समझौते तक पहुंचती है, तो Su-57 Deal भारत की Defence Strategy और भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी दोनों के लिए बड़ी खबर बन सकती है।
हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
