NEET UG 2026 की तस्वीर इस बार और भी ज्यादा कठिन और चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है। मेडिकल कॉलेजों में MBBS एडमिशन पाने के लिए देशभर के लाखों छात्रों के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है।
इस साल 22 लाख से अधिक छात्रों ने NEET UG परीक्षा में हिस्सा लिया है, जबकि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या पहले की तरह ही सीमित है। यही वजह है कि औसतन एक सरकारी MBBS सीट के लिए करीब 36 छात्र दावेदारी कर रहे हैं।सीटें कम, उम्मीदें ज्यादा
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की सीटें हमेशा से ही कम रही हैं, लेकिन इस बार मुकाबला और भी कठिन हो गया है। कम फीस और बेहतर शिक्षा सुविधाओं के कारण हर छात्र की पहली पसंद सरकारी कॉलेज ही होते हैं।
लेकिन सीमित सीटों के कारण हजारों मेहनती छात्रों को हर साल निराशा का सामना करना पड़ता है, जिससे उनके लंबे समय के सपनों पर असर पड़ता है।
छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ा
इतनी भारी प्रतिस्पर्धा का सीधा असर छात्रों की मानसिक स्थिति पर भी पड़ रहा है। कई छात्र सालों तक दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन चयन की कोई गारंटी नहीं होती।
कोचिंग और परीक्षा के इस बढ़ते प्रेशर ने मेडिकल एंट्रेंस को सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि एक मानसिक चुनौती भी बना दिया है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि देश में मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ाना अब समय की जरूरत बन गया है। अगर सीटें बढ़ाई जाती हैं, तो न केवल छात्रों को राहत मिलेगी, बल्कि देश में डॉक्टरों की कमी भी काफी हद तक पूरी हो सकती है।
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