मध्य पूर्व (Middle East) में जारी तनाव के बीच रविवार का दिन वैश्विक राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बड़ा बयान देकर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, तो दूसरी ओर आज स्विट्जरलैंड (Switzerland) में अमेरिका और ईरान (US-Iran) के बीच होने वाली अहम वार्ता पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक का नतीजा केवल दोनों देशों के रिश्तों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, समुद्री व्यापार और पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
Trump ने क्यों दी US Toll लगाने की चेतावनी?
डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि फिलहाल लागू 60 दिनों की युद्धविराम (Ceasefire) अवधि के दौरान अमेरिका किसी भी जहाज से कोई टोल नहीं वसूलेगा। लेकिन यदि तय समय के भीतर अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी समझौता नहीं हो पाता, तो अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने पर विचार कर सकता है।
ट्रम्प का कहना है कि वर्षों से अमेरिका इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। ऐसे में सुरक्षा पर होने वाले भारी खर्च की भरपाई के लिए भविष्य में यह कदम उठाया जा सकता है।
आज Switzerland में होगी अमेरिका-ईरान की अहम बातचीत
रविवार को स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच नए दौर की बातचीत होने जा रही है। दोनों देशों के बीच यह बैठक कई मायनों में निर्णायक मानी जा रही है।
इस वार्ता में परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा, युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। यदि बातचीत सकारात्मक रहती है, तो लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।
Strait of Hormuz क्यों है दुनिया के लिए इतना अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचता है।
यही वजह है कि इस मार्ग पर किसी भी तरह का सैन्य तनाव या आवाजाही में रुकावट सीधे तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकती है।
हाल ही में ईरान की ओर से इस मार्ग को लेकर कुछ दावे किए गए थे, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि फिलहाल समुद्री यातायात सामान्य रूप से जारी है और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है।
Middle East में बढ़ता तनाव बना चिंता का विषय
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है। इजराइल, लेबनान और अन्य क्षेत्रीय देशों में जारी तनाव भी इस वार्ता को प्रभावित कर सकता है।
यदि बातचीत सफल रहती है तो पूरे मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ेगी। वहीं किसी भी तरह की असफलता से क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि स्विट्जरलैंड में होने वाली इस बैठक पर पूरी दुनिया की नजर इसलिए भी है क्योंकि इसका सीधा संबंध वैश्विक तेल आपूर्ति से जुड़ा हुआ है।
अगर दोनों देशों के बीच सकारात्मक समझौता होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता देखने को मिल सकती है। वहीं यदि वार्ता बेनतीजा रहती है और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में तेजी आने के साथ वैश्विक व्यापार भी प्रभावित हो सकता है।
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