पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Iran और United States के बीच टकराव का असर अब समुद्री व्यापार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में Persian Gulf में एक अमेरिकी-संबंधित तेल टैंकर पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
Persian Gulf में हमले से बढ़ा तनाव
रिपोर्टों के अनुसार, फारस की खाड़ी के पास एक तेल टैंकर को निशाना बनाया गया, जो अमेरिकी हितों से जुड़ा बताया जा रहा है। हमले में जहाज को नुकसान पहुंचा और उस पर सवार एक भारतीय क्रू सदस्य की मौत हो गई।
यह घटना ऐसे समय हुई है जब क्षेत्र में पहले से ही तनाव बढ़ा हुआ है। जहाजरानी कंपनियां और कई देश इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि यहां से रोजाना बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और अन्य सामान दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचता है।
क्यों महत्वपूर्ण है Strait of Hormuz
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में तेल इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर इस मार्ग में किसी तरह की रुकावट आती है तो उसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और व्यापार पर पड़ सकता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में होने वाली हर घटना पर पूरी दुनिया की नजर रहती है।
भारत के जहाजों को मिली राहत
तनावपूर्ण हालात के बीच भारत के लिए राहत की खबर भी सामने आई। कूटनीतिक बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय झंडे वाले जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दे दी है।
सूत्रों के अनुसार, भारत के विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar और ईरानी नेतृत्व के बीच बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया। इससे भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर बनी चिंता कुछ हद तक कम हुई है।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर नजर
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, फारस की खाड़ी और आसपास के समुद्री इलाकों में कई भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। ऐसे में सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।
भारत के दूतावास और समुद्री सुरक्षा एजेंसियां भी जहाज कंपनियों के साथ संपर्क में हैं, ताकि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा।
तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से वैश्विक बाजारों में कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
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