दिल्ली की चर्चित शराब नीति (Excise Policy) मामले में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। Delhi High Court ने इस केस में पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal, पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia और अन्य आरोपियों सहित कुल 23 लोगों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने इन सभी से जांच एजेंसी की अपील पर जवाब दाखिल करने को कहा है।
यह मामला दिल्ली की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है और अब एक बार फिर अदालत में इसकी सुनवाई से राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है।
कैसे फिर से अदालत पहुंचा Delhi Liquor Policy Case
दरअसल, इस मामले में पहले दिल्ली की Rouse Avenue Court ने फरवरी 2026 में बड़ा फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था कि आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं, इसलिए केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य आरोपियों को डिस्चार्ज (आरोपों से मुक्त) किया जाता है।
लेकिन जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) इस फैसले से संतुष्ट नहीं थी। एजेंसी का मानना है कि ट्रायल कोर्ट ने सबूतों का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया। इसी वजह से CBI ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
High Court की सुनवाई में क्या हुआ
CBI की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कुछ अहम कदम उठाए:
- केजरीवाल, सिसोदिया सहित 23 आरोपियों को नोटिस जारी किया
- उनसे अदालत में अपना पक्ष रखने के लिए जवाब मांगा
- ट्रायल कोर्ट द्वारा CBI अधिकारियों पर की गई कुछ कड़ी टिप्पणियों पर फिलहाल रोक लगा दी
अब अदालत अगली सुनवाई में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे का फैसला करेगी।
क्या है पूरा Delhi Excise Policy Controversy
यह विवाद दिल्ली सरकार की 2021-22 की नई शराब नीति से जुड़ा है। उस समय सरकार ने शराब की बिक्री से जुड़े नियमों में कई बदलाव किए थे।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि:
- नीति बनाते समय कुछ नियमों में बदलाव कर कुछ कारोबारियों को फायदा पहुंचाया गया
- लाइसेंस देने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं हुईं
- सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा
इस मामले की जांच Central Bureau of Investigation के साथ-साथ Enforcement Directorate (ED) भी कर रही है।
क्यों अहम है यह मामला
दिल्ली की राजनीति में यह केस सिर्फ एक कानूनी विवाद नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा भी बन चुका है। पिछले कुछ सालों में इस मामले को लेकर कई बार गिरफ्तारी, पूछताछ और अदालत में सुनवाई हुई है।
अब जब हाई कोर्ट ने दोबारा नोटिस जारी किया है, तो यह साफ है कि मामला अभी खत्म नहीं हुआ है और आने वाले समय में अदालत का फैसला इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।
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