मध्य प्रदेश की लोकतांत्रिक यात्रा का अहम दिन, 17 दिसंबर 2025, विधानसभा के 69वें स्थापना दिवस (69 Years of MP Legislative Assembly) के रूप में मनाया गया। यह दिन न केवल इतिहास में दर्ज है, बल्कि राज्य के विकास और भविष्य की योजनाओं की दिशा तय करने का भी अवसर है।
स्थापना की पृष्ठभूमि
मध्य प्रदेश (MP) का गठन 1 नवंबर 1956 को हुआ और उसी वर्ष 17 दिसंबर को राज्य विधानसभा का पहला सत्र आयोजित किया गया। तब से लेकर आज तक यह विधानसभा राज्य की कानून बनाने और विकास की दिशा निर्धारित करने वाली मुख्य संस्था रही है।
विशेष सत्र का आयोजन
69वें स्थापना दिवस पर, MP Assembly Special Session का आयोजन किया गया। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य राज्य के विकसित और समृद्ध भविष्य (Developed Madhya Pradesh Vision) पर चर्चा करना था।
सत्र की मुख्य बातें
- सरकार ने “विकसित मध्य प्रदेश” के विज़न और आगामी योजनाओं को पेश किया।
- विपक्ष ने रोजगार, कानून व्यवस्था और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों को उठाया।
- सत्र में सभी सदस्य इस बात पर सहमत हुए कि राज्य का भविष्य समान अवसर, विकास और समृद्धि पर आधारित होना चाहिए।
नेताओं की प्रतिक्रिया
- स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि 17 दिसंबर का दिन मध्य प्रदेश के लोकतंत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
- उन्होंने इसे राज्य के विकास की नई दिशा निर्धारित करने वाला सत्र बताया।
- विपक्ष ने भी इस अवसर का उपयोग सरकार की कमजोरियों और सुधारों की आवश्यकता को उजागर करने के लिए किया।
मध्य प्रदेश (MP) की विधानसभा न केवल कानून बनाने वाली संस्था है, बल्कि यह राज्य के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सुधारों की दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभाती है। यह 69वां स्थापना दिवस राज्य के नागरिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है कि लोकतंत्र और विकास साथ-साथ चलते हैं।
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