रेलवे की लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें कन्फर्म टिकट और सीट नंबर होने के बावजूद यात्रियों को तय कोच ही नहीं मिला। यह घटना 30 नवंबर 2024 की है, लेकिन अब इस पर फैसला आया है।
क्या है पूरा मामला?
नागपुर से भोपाल जा रहे चार वरिष्ठ यात्रियों ने अमृतसर एक्सप्रेस (22125) में DL-1 कोच की सीटें पहले से बुक कराई थीं। लेकिन जब ट्रेन स्टेशन पर पहुंची, तो वह कोच ट्रेन में लगा ही नहीं था।
यात्रियों ने रेलवे स्टाफ से मदद मांगी, लेकिन उन्हें साफ कह दिया गया—“जाना है तो जनरल डिब्बे में बैठो।” मजबूरी में बुजुर्ग यात्रियों को भीड़भाड़ वाले जनरल कोच में चढ़ना पड़ा, जहां सीट न मिलने पर उन्हें टॉयलेट के पास बैठकर सफर करना पड़ा।
सफर बना परेशानी का सबब
ठंड का मौसम, भीड़भाड़ और टॉयलेट के पास बैठने की मजबूरी—इन सबके कारण यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। खासकर अस्थमा जैसी बीमारी से पीड़ित यात्रियों की तबीयत भी बिगड़ गई।
शिकायत के बाद भी नहीं मिली मदद
यात्रियों ने सफर के दौरान ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्हें सिर्फ सीट नंबर की जानकारी दी गई, कोच के बारे में कुछ स्पष्ट नहीं बताया गया। पूरे सफर में न टीटीई ने मदद की और न ही किसी अन्य स्टाफ ने।
रेलवे का दावा, लेकिन सबूत नहीं
मामला जब उपभोक्ता आयोग पहुंचा, तो रेलवे ने कहा कि उस दिन कोच लगाया गया था और सीट नंबर भी आवंटित थे। रेलवे का तर्क था कि एसएमएस के जरिए जानकारी दे दी गई थी, इसलिए सेवा में कोई कमी नहीं है।
लेकिन आयोग ने पाया कि रेलवे के पास इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं था कि DL-1 कोच वास्तव में ट्रेन में लगाया गया था।

यात्री के पक्ष में आया फैसला
फरियादी मंगलेश कुमार जोशी की ओर से पेश किए गए फोटो, एफिडेविट और अन्य दस्तावेजों से यह साफ हो गया कि कोच मौजूद नहीं था। इसके बाद भोपाल उपभोक्ता आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए रेलवे के खिलाफ फैसला सुनाया।
आयोग ने रेलवे को यात्रियों को मुआवजा देने का आदेश दिया।
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