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अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए Apple ने जल्दी में भेजे 600 टन iPhones, भारत बना अहम निर्यातक केंद्र

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नई दिल्ली, 11 अप्रैल 2025 | देश हरपल
दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों में से एक Apple ने अमेरिका के नए टैरिफ नियमों से बचने के लिए तेज़ी से कदम उठाते हुए हाल ही में 600 टन iPhones भारत और चीन से अमेरिका भेज दिए। अमेरिका की ओर से चीन से आयातित स्मार्टफोन्स पर 145% तक का नया टैरिफ शुल्क लागू करने की तैयारी के बीच Apple ने यह बड़ा लॉजिस्टिक ऑपरेशन अंजाम दिया।

📦 क्या है मामला?

अमेरिकी राष्ट्रपति प्रशासन ने हाल ही में घोषणा की कि चीन से आयात किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स पर भारी टैरिफ लगाया जाएगा। इसके लागू होने से पहले ही Apple ने लगभग 600 टन iPhones को तेज़ी से शिप करवा दिया, ताकि उन्हें भारी टैक्स के दायरे में आने से पहले अमेरिकी बाजार में पहुँचा दिया जाए।

🌏 भारत की बड़ी भूमिका

इस बार खास बात यह रही कि Apple ने सिर्फ चीन पर निर्भर न रहते हुए भारत के प्लांट्स से भी बड़ी संख्या में iPhones का एक्सपोर्ट किया। बताया जा रहा है कि भारत के तमिलनाडु स्थित Foxconn प्लांट और कर्नाटक के नए निर्माण केंद्र से सीधे iPhones को एयर कार्गो के ज़रिए अमेरिका भेजा गया।

✈️ इतनी जल्दी कैसे हुआ शिपमेंट?

जानकारी के मुताबिक, Apple ने DHL और FedEx जैसी बड़ी लॉजिस्टिक कंपनियों की मदद से दर्जनों एयर कार्गो फ्लाइट्स बुक कीं। अनुमान है कि एक हफ्ते के अंदर 50 से अधिक फ्लाइट्स के ज़रिए इन 600 टन फोन्स को अमेरिका रवाना किया गया।

💰 टैरिफ का असर कितना बड़ा होता?

अगर Apple ये डिवाइसेज़ समय रहते अमेरिका न भेज पाता, तो कंपनी को हर iPhone पर औसतन 100 से 200 डॉलर का अतिरिक्त टैक्स भरना पड़ता। यानी कुल मिलाकर सैकड़ों मिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता था, जिससे कंपनी के मुनाफे और मार्केट प्राइस दोनों पर असर पड़ता।

🇮🇳 भारत बना नया विनिर्माण और निर्यात हब

Apple का यह कदम इस ओर भी संकेत करता है कि कंपनी चीन से अपने निर्माण आधार को धीरे-धीरे भारत की ओर शिफ्ट कर रही है। “Make in India” अभियान के तहत भारत सरकार की योजनाओं से प्रेरित होकर Apple अब भारत में अपने प्रोडक्शन को और विस्तार देने की तैयारी में है।

📊 बाजार पर असर

Apple की इस तेज़ चाल के बाद कंपनी के शेयर में हल्की बढ़त देखी गई है, जबकि बाजार विश्लेषकों का मानना है कि भारत भविष्य में Apple और अन्य वैश्विक कंपनियों के लिए एक मजबूत विकल्प बन सकता है।

निष्कर्ष:
Apple ने अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए जो रणनीति अपनाई, वह न सिर्फ कंपनी के लिए फायदेमंद रही, बल्कि भारत के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि साबित हुई। भारत अब सिर्फ एक उपभोक्ता बाजार ही नहीं, बल्कि iPhones जैसे हाई-टेक प्रोडक्ट्स का वैश्विक निर्यातक भी बनता जा रहा है।

रिपोर्ट: देश हरपल

Nikhil

catalystbpl@gmail.com https://deshharpal.com/

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