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नवरात्रि पर रायपुर सेंट्रल जेल में सेवा की मिसाल, काली माता सेवा समिति ने 1300 बंदियों को बांटे फल

नवरात्रि के अवसर पर काली माता सेवा समिति ने रायपुर सेंट्रल जेल में करीब 1300 बंदियों को फल वितरित किए। समिति ने यह पहल उन बंदियों के लिए की, जो नवरात्रि में उपवास रखकर माता रानी की आराधना कर रहे हैं। इस आयोजन के जरिए समिति ने सेवा, करुणा और मानवीय संवेदना का संदेश दिया। समिति के अध्यक्ष दीपक भारद्वाज (पोल्ले) ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की गलती या अपराध से उसके सुधरने और बेहतर जीवन जीने की संभावनाएं समाप्त नहीं हो जातीं। बंदियों के सुधार और पुनर्वास पर दिया जोर दीपक भारद्वाज ने कहा कि समाज को न्याय के प्रति सम्मान बनाए रखने के साथ-साथ सुधार और पुनर्वास की भावना को भी महत्व देना चाहिए। बंदियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने से समाज में मानवीय मूल्यों को मजबूती मिलती है। समिति का मानना है कि जेल में बंद लोगों के साथ भी सम्मानजनक और मानवीय व्यवहार होना चाहिए, ताकि उनमें सकारात्मक बदलाव की भावना विकसित हो सके। पहले भी जेल में कर चुके हैं फल वितरण काली माता सेवा समिति के अनुसार, वह पहले भी कई बार जेल में बंदियों को फल वितरित कर चुकी है। समिति का कहना है कि नवरात्रि केवल पूजा-पाठ और उपवास तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह सेवा, करुणा और सद्भावना को जीवन में अपनाने का अवसर भी है। इसी भावना के साथ समिति के सदस्यों ने उपवास रखने वाले बंदियों तक फल पहुंचाए। आगे भी जारी रहेंगे सेवा कार्य समिति ने समाज में सेवा, सद्भावना और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजन आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में अशोक त्रिपाठी, गुड्डू, सुनील प्रमुख, राजू भाई तारवानी और रामकृष्ण धीवर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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संजय मांजरेकर बोले- टी-20 में 300 रन बनाने के लिए पिचें और फ्लैट हों, बाउंड्री भी छोटी की जाए

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी और कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने टी-20 क्रिकेट में बल्लेबाजों को और ज्यादा मदद देने की बात कही है। उनका मानना है कि पिचों को और फ्लैट बनाया जाना चाहिए, बाउंड्री छोटी होनी चाहिए और गेंदबाजों के खिलाफ नियमों को और सख्त किया जा सकता है, ताकि टी-20 में नियमित रूप से 20 ओवर में 300 रन बन सकें। मांजरेकर ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर यह बात कही। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारतीय क्रिकेट में फ्लैट पिचों और बल्लेबाजों को मिल रही मदद को लेकर बहस चल रही है। गौतम गंभीर और युजवेंद्र चहल समेत कई क्रिकेटर पिचों को गेंदबाजों के अनुकूल बनाने की मांग कर चुके हैं। एक दिन पहले चेतन शर्मा ने की थी गेंदबाजों के अनुकूल पिचों की मांग मांजरेकर की टिप्पणी से एक दिन पहले भारतीय टीम के पूर्व मुख्य चयनकर्ता चेतन शर्मा ने टी-20 क्रिकेट में बल्लेबाजी के अनुकूल पिचों पर सवाल उठाए थे। नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि ऐसी पिचों से बल्ले और गेंद के बीच संतुलन बिगड़ रहा है। चेतन शर्मा के मुताबिक, गेंदबाज रन देने के लिए मैदान पर उतरते हैं, लेकिन उन्हें इतनी मार नहीं पड़नी चाहिए कि वे दोबारा मैदान पर उतरना ही न चाहें। उनका कहना था कि क्रिकेट में बल्लेबाजों और गेंदबाजों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। गौतम गंभीर भी फ्लैट पिचों पर उठा चुके हैं सवाल भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर भी हाल में पिचों को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं। इन बयानों के बाद क्रिकेट में बल्लेबाजी और गेंदबाजी के बीच संतुलन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। संजय मांजरेकर का क्रिकेट करियर संजय मांजरेकर भारतीय क्रिकेट के पूर्व खिलाड़ी और कमेंटेटर हैं। वे अपने बेबाक विचारों और तकनीकी रूप से मजबूत बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। वे क्रिकेट खिलाड़ियों को विशेष बल्लेबाजी प्रशिक्षण भी देते हैं। मांजरेकर ने अपने टेस्ट करियर में 37 मैच खेले और 2,043 रन बनाए। इसमें चार शतक और नौ अर्धशतक शामिल हैं। वहीं, 74 वनडे मैचों में उन्होंने 1,994 रन बनाए, जिसमें एक शतक शामिल है। टी-20 क्रिकेट में संतुलन पर बहस तेज मांजरेकर की टिप्पणी और गेंदबाजों के अनुकूल पिचों की मांग के बीच क्रिकेट जगत में दो अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं। एक ओर बड़े स्कोर और आक्रामक बल्लेबाजी को टी-20 की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जाता है, वहीं दूसरी ओर गेंदबाजों को पर्याप्त अवसर देने और मुकाबले को संतुलित बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। अब देखना होगा कि पिचों और खेल के नियमों को लेकर यह बहस आने वाले समय में क्रिकेट के स्वरूप पर कितना असर डालती है।
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तलाक के बाद शराब की लत बढ़ गई थी, 26 दिन रिहैब में रहे युजवेंद्र चहल; पैनिक अटैक में बोलना भी हो जाता था मुश्किल

भारतीय स्पिनर युजवेंद्र चहल ने अपनी निजी जिंदगी, धनश्री वर्मा से तलाक के बाद के दौर, शराब की लत और पैनिक अटैक को लेकर खुलकर बात की है। आकाश चोपड़ा के पॉडकास्ट में चहल ने बताया कि तलाक के बाद उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और शराब पीने की आदत हद से ज्यादा बढ़ गई थी। उन्होंने बताया कि वह 26 दिन रिहैब सेंटर में भी रहे। चहल के मुताबिक, पैनिक अटैक के दौरान उनके चेहरे पर भी असर दिखाई देता था। उनका चेहरा सिकुड़कर एक तरफ खिंच जाता था और उन्हें बोलने में परेशानी होती थी। उन्हें यह चिंता भी रहती थी कि लोग उनकी स्थिति को देखकर क्या सोचेंगे और सोशल मीडिया पर किस तरह की बातें होंगी। पैनिक अटैक के दौरान चेहरा एक तरफ खिंच जाता था पॉडकास्ट में चहल ने पैनिक अटैक के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि एंग्जायटी के दौरान उनके दिल की धड़कन तेज हो जाती थी और चेहरे पर असामान्य बदलाव महसूस होते थे। चहल ने कहा कि उस समय वह ठीक से बोल भी नहीं पाते थे। उनके होंठ कसकर एक तरफ खिंच जाते थे। उनके मुताबिक, चेहरे पर दिखने वाले इन बदलावों से आसपास के लोगों को अंदाजा हो जाता था कि उनके साथ कुछ ठीक नहीं है। चहल ने बताया कि उन्हें सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं का भी डर था। ऐसे समय में उन्होंने क्रिकेट और IPL पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया। तलाक के बाद बढ़ गई थी शराब पीने की आदत आकाश चोपड़ा ने चहल से पूछा कि शराब पीने की शुरुआत कैसे हुई और इसके पीछे क्या वजह थी। जवाब में चहल ने बताया कि शुरुआत में वह युवा थे और दोस्तों के साथ पार्टियों में शामिल होते थे। उन्होंने 2011 में अपना पहला IPL खेला था। चहल ने पूर्व दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेटर एबी डिविलियर्स की एक सलाह का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, डिविलियर्स ने उनसे कहा था कि जिंदगी में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। चहल ने माना कि यह बात सुनने में आसान लगती है, लेकिन इसे अपनी जिंदगी में अपनाना उतना आसान नहीं होता। चहल ने बताया कि तलाक के बाद शराब पीने की आदत काफी बढ़ गई थी और उस दौरान उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। उन्हें महसूस हुआ कि अगर वह इसी रास्ते पर चलते रहे, तो क्रिकेट को नुकसान पहुंचा सकते हैं। क्रिकेट को नुकसान पहुंचने का होने लगा था डर चहल ने कहा कि क्रिकेट वह चीज है, जिससे उन्हें सबसे ज्यादा प्यार है। उन्हें एहसास हुआ कि शराब की लत जारी रहने पर उनका खेल और करियर प्रभावित हो सकता है। इसी एहसास ने उन्हें अपनी स्थिति पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि मुश्किल दौर से बाहर निकलने के लिए उन्हें मदद की जरूरत महसूस हुई और वह 26 दिन रिहैब सेंटर में रहे। टीम इंडिया से लंबे समय से बाहर हैं चहल युजवेंद्र चहल भारतीय टीम के प्रमुख लेग स्पिनरों में शामिल रहे हैं। उन्होंने अपना पिछला टी-20 इंटरनेशनल मुकाबला अगस्त 2023 में खेला था। वह लंबे समय से भारतीय टीम से बाहर हैं। दी गई जानकारी के मुताबिक, उन्होंने हाल ही में फर्स्ट क्लास क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला भी किया है। चहल का यह खुलासा उनके क्रिकेट करियर के साथ-साथ निजी जीवन में आए मुश्किल दौर की झलक देता है। उनके अनुभव से यह भी सामने आता है कि मानसिक परेशानी और नशे की समस्या से जूझते समय मदद लेना महत्वपूर्ण हो सकता है।
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छत्तीसगढ़ में MBBS के बाद ग्रामीण सेवा का बॉन्ड खत्म करने की तैयारी, 25 लाख जुर्माने से भी मिलेगी राहत

छत्तीसगढ़ में MBBS के बाद एक साल की अनिवार्य ग्रामीण सेवा की व्यवस्था खत्म करने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही ग्रामीण सेवा नहीं करने पर लगने वाला 25 लाख रुपए तक का जुर्माना और डिग्री रोकने की बाध्यता भी समाप्त हो सकती है। चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग इस संबंध में प्रस्ताव का ड्राफ्ट तैयार कर रहे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ग्रामीण अस्पतालों में उन्हीं डॉक्टरों की पोस्टिंग की जाएगी, जो अपनी इच्छा से वहां सेवा देना चाहेंगे। अन्य खाली पदों को भर्ती के जरिए भरने की योजना पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। PG के बाद ग्रामीण सेवा का बॉन्ड रहेगा लागू फिलहाल छत्तीसगढ़ में MBBS के बाद एक साल और पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) के बाद दो साल की ग्रामीण सेवा का बॉन्ड अनिवार्य है। तय अवधि तक सेवा नहीं देने पर MBBS डॉक्टरों को 25 लाख रुपए और PG डॉक्टरों को 50 लाख रुपए तक का जुर्माना देना पड़ता है। आरक्षित वर्ग के डॉक्टरों के लिए यह राशि क्रमशः 20 लाख और 40 लाख रुपए है। जुर्माना जमा नहीं करने पर डिग्री रोकने का प्रावधान है। डिग्री नहीं मिलने से छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराने में परेशानी होती है और डॉक्टर प्रैक्टिस नहीं कर पाते। फिलहाल प्रस्ताव केवल MBBS के बाद अनिवार्य ग्रामीण सेवा समाप्त करने से जुड़ा है। PG के बाद दो साल की ग्रामीण सेवा की बाध्यता खत्म करने को लेकर अभी कोई संकेत नहीं मिले हैं। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के बाद शुरू हुई कवायद ग्रामीण सेवा के बॉन्ड में राहत देने की मांग जूनियर डॉक्टरों की राज्यव्यापी हड़ताल के दौरान उठाई गई थी। हड़ताल के दौरान डॉक्टरों ने इस व्यवस्था में बदलाव की मांग की थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जूनियर डॉक्टरों से चर्चा के दौरान उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया था। इसके बाद चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग ने अनिवार्य ग्रामीण सेवा की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव को लेकर ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की। हर सत्र में 800 से ज्यादा डॉक्टरों की होती है पोस्टिंग रिपोर्ट के मुताबिक, हर सत्र में 800 से अधिक डॉक्टर अनिवार्य ग्रामीण सेवा के तहत अस्पतालों में पदस्थ किए जाते हैं। इसके बावजूद दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, कई डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्रों में पोस्टिंग मिलने के बाद अलग-अलग तरीकों से अपना तबादला करवा लेते हैं। विभागीय स्तर पर भी इस समस्या की जानकारी है। ऐसे में अब अस्थायी व्यवस्था के बजाय ग्रामीण अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के स्थायी विकल्प पर विचार किया जा रहा है। खाली पद भरने की व्यवस्था पर मंथन अनिवार्य ग्रामीण सेवा की बाध्यता समाप्त होने की स्थिति में ग्रामीण अस्पतालों के खाली पदों को किस तरह भरा जाएगा, इस पर अभी विचार चल रहा है। विभागों का जोर भर्ती प्रक्रिया के जरिए इन पदों को भरने पर है। प्रस्तावित बदलाव से MBBS के बाद ग्रामीण सेवा नहीं करने वाले डॉक्टरों को बॉन्ड और जुर्माने से राहत मिल सकती है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए सरकार क्या व्यवस्था लागू करेगी, यह अंतिम निर्णय और विभागीय योजना सामने आने के बाद स्पष्ट होगा।
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पेट्रोल एक्सपोर्ट पर 5 गुना बढ़ा टैक्स, डीजल पर विंडफॉल टैक्स घटाया; घरेलू कीमतों पर असर नहीं

कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला टैक्स पांच गुना बढ़ा दिया है। वहीं, डीजल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स को करीब आधा कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, नई दरें 16 अक्टूबर से लागू हो गई हैं और अगले दो सप्ताह तक प्रभावी रहेंगी। सरकार के इस फैसले का असर विदेशों में बेचे जाने वाले पेट्रोल-डीजल पर पड़ेगा। देश के पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में इस बदलाव से सीधे किसी परिवर्तन की घोषणा नहीं की गई है। हर 15 दिन में तय होती हैं टैक्स की दरें सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन टैक्स दरों की समीक्षा करती है। आमतौर पर हर 15 दिन में दरों में बदलाव किया जाता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने पर तेल कंपनियों को निर्यात से ज्यादा मुनाफा मिल सकता है। ऐसे में सरकार टैक्स के जरिए निर्यात और घरेलू आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करती है। मिडिल ईस्ट तनाव से तेल बाजार में उतार-चढ़ाव मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और समुद्री मार्गों पर जहाजों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। इस स्थिति का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ रहा है। तेल बाजार से जुड़ी कुछ अन्य गतिविधियां भी कीमतों को प्रभावित कर रही हैं। इन घटनाक्रमों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। विंडफॉल टैक्स क्या होता है? विंडफॉल टैक्स वह विशेष कर है, जो सरकार कंपनियों के असाधारण मुनाफे पर लगाती है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो तेल कंपनियों को कुछ परिस्थितियों में सामान्य से ज्यादा मुनाफा मिल सकता है। ऐसे अतिरिक्त मुनाफे के एक हिस्से को सरकारी राजस्व के रूप में हासिल करने के लिए विंडफॉल टैक्स लगाया जाता है। पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाला यह टैक्स सरकार को घरेलू जरूरतों और निर्यात से होने वाले मुनाफे के बीच संतुलन बनाने में भी मदद करता है। फिलहाल नई दरें दो सप्ताह के लिए लागू की गई हैं। आगे अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और घरेलू ईंधन आपूर्ति को ध्यान में रखकर इनमें फिर बदलाव किया जा सकता है।
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बिलासपुर में म्यूल अकाउंट से 5 राज्यों में साइबर ठगी का लिंक, कमीशन के लालच में बैंक खाता दिया किराए पर

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में म्यूल बैंक अकाउंट के जरिए पांच राज्यों में साइबर ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि बलौदाबाजार के एक युवक ने कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता और ATM कार्ड साइबर ठगों को दे दिया था। इस खाते के जरिए ठगी की रकम जमा करने, निकालने और दूसरे खातों में ट्रांसफर करने का काम किया जा रहा था। केंद्र सरकार से मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया है। JMIS पोर्टल पर मिलीं पांच साइबर शिकायतें डीएसपी क्राइम सुदीप सरकार के मुताबिक, पुलिस मुख्यालय रायपुर से मिले निर्देश के बाद एक संदिग्ध म्यूल बैंक खाते की जांच शुरू की गई। भारत सरकार के समन्वय (JMIS) पोर्टल पर खाते की जानकारी खंगालने के दौरान पांच साइबर शिकायतें सामने आईं। जांच में बैंक ऑफ महाराष्ट्र के एक खाते में संदिग्ध लेनदेन का पता चला। बैंक स्टेटमेंट की पड़ताल से जानकारी मिली कि इस खाते में पांच साइबर अपराधों से जुड़ी रकम जमा कराई गई थी। ये शिकायतें देश के पांच राज्यों के पीड़ितों से संबंधित थीं। UPI और ATM से तुरंत निकालते थे रकम पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी की रकम खाते में जमा होने के बाद खाताधारक और उसके साथी सक्रिय हो जाते थे। UPI और ATM के जरिए कुछ ही मिनटों में रकम निकाल ली जाती थी या दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी। जांच में खाते में साइबर ठगी की रकम के अलावा अन्य राशि जमा होने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस को आशंका है कि तेजी से लेनदेन करने का उद्देश्य रकम को आगे पहुंचाना और बैंक या पुलिस की कार्रवाई से पहले खाते में मौजूद पैसा निकाल लेना था। कमीशन के लालच में सौंपा बैंक खाता और ATM कार्ड पुलिस जांच के मुताबिक, बलौदाबाजार के परसाडीह वार्ड-4 निवासी बलवन घृतलहरे ने कथित तौर पर कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता और ATM कार्ड साइबर ठगों को सौंप दिया था। आरोप है कि वह ठगी की रकम को छिपाने और उसे ठिकाने लगाने में मदद कर रहा था। मस्तूरी थाने के मल्हार पुलिस सहायता केंद्र में जांच के बाद आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। मामले में आगे की जांच की जा रही है।
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शेयर बाजार में हेरफेर: ED की 6 शहरों में 29 ठिकानों पर छापेमारी, 1 लाख से ज्यादा निवेशकों को नुकसान

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दो लिस्टेड कंपनियों RM ड्रिप एंड स्प्रिंकलर्स सिस्टम्स लिमिटेड और R&B डेनिम्स लिमिटेड के शेयरों में कथित हेरफेर के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने शुक्रवार को मुंबई, नासिक और अहमदाबाद समेत छह शहरों में 29 ठिकानों पर छापेमारी की। जांच में सामने आया है कि फर्जी वॉट्सऐप ग्रुप्स के जरिए शेयर खरीदने की टिप्स देकर एक लाख से ज्यादा खुदरा निवेशकों को कथित तौर पर नुकसान पहुंचाया गया। छापेमारी के दौरान एजेंसी ने कई संदिग्ध दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, शेयर लेनदेन के रिकॉर्ड और संपत्तियों से जुड़े कागजात जब्त किए हैं। कंपनियों के दफ्तरों और प्रमोटरों के ठिकानों पर छापे ED की कार्रवाई के दायरे में दोनों कंपनियों के कॉर्पोरेट कार्यालय, प्रमोटरों के आवास और कम कीमत पर शेयर हासिल करने वाले कुछ लोगों के ठिकाने शामिल रहे। इसके अलावा स्टॉक-ब्रोकिंग और फाइनेंस कंपनियों के कार्यालयों की भी तलाशी ली गई। एजेंसी ने उन लोगों के ठिकानों पर भी जांच की, जिन पर प्रमोटरों से जुड़े वॉट्सऐप ग्रुप चलाने का संदेह है। जांच का उद्देश्य शेयरों के आवंटन, लेनदेन और निवेशकों को दिए गए कथित भ्रामक सुझावों के बीच संबंधों का पता लगाना है। 3.5 करोड़ से ज्यादा शेयर और कन्वर्टिबल वारंट जारी किए गए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की जा रही जांच में पता चला कि अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के बीच दोनों कंपनियों ने चुनिंदा व्यक्तियों और संस्थाओं को 3.5 करोड़ से ज्यादा शेयर और कन्वर्टिबल वारंट जारी किए थे। जांच के मुताबिक, इन शेयरों के भुगतान का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर आपस में जुड़े व्यक्तियों, फर्मों और कुछ लेंडर्स के सीमित समूह से आया था। इसके बाद के महीनों में दोनों कंपनियों के शेयरों के भाव लगातार बढ़े, जबकि शेयरों का बड़ा हिस्सा उन्हीं लोगों के पास बना रहा। भावनगर से चलाए जा रहे थे फर्जी वॉट्सऐप ग्रुप ED की जांच के अनुसार, दिसंबर 2025 के अंतिम दिनों से फरवरी 2026 के बीच ‘मल्टीबैगर स्टॉक्स’ जैसे नामों से कई वॉट्सऐप कम्युनिटी बनाई गई थीं। इन ग्रुप्स के जरिए खुदरा निवेशकों को रोजाना दोनों कंपनियों के शेयर खरीदने की सलाह दी जाती थी। जांच में यह भी सामने आया कि इन ग्रुप्स को चलाने के लिए हरियाणा और मुंबई के अन्य लोगों के नाम पर जारी सिम कार्ड इस्तेमाल किए जा रहे थे। हालांकि, इनका संचालन गुजरात के भावनगर से किए जाने का संदेह है। खरीदारों की संख्या 3,400 से बढ़कर एक लाख के पार जांच के मुताबिक, वॉट्सऐप ग्रुप्स पर लगातार शेयर खरीदने की टिप्स मिलने के बाद दोनों कंपनियों के शेयरों में निवेश करने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी। शुरुआत में खरीदारों की संख्या करीब 3,400 थी, जो बाद में बढ़कर एक लाख से ज्यादा हो गई। एजेंसी को संदेह है कि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए शेयरों को लेकर भ्रामक संदेश और खरीदारी के सुझाव प्रसारित किए गए। वॉट्सऐप ग्रुप डिलीट होने के बाद शेयरों में 70% तक गिरावट ED सूत्रों के मुताबिक, 25 फरवरी 2026 को सभी संबंधित वॉट्सऐप ग्रुप अचानक डिलीट कर दिए गए। इसके तुरंत बाद दोनों कंपनियों के शेयर लोअर सर्किट में पहुंच गए और कुछ ही दिनों में उनकी कीमतों में करीब 70% तक गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट से एक लाख से ज्यादा छोटे निवेशकों को नुकसान होने की बात सामने आई है। आरोप है कि कई निवेशक ऐसे शेयरों में फंस गए, जिन्हें बाजार में बेचना भी मुश्किल हो गया था। फिलहाल ED मामले में शेयरों के आवंटन, कथित हेरफेर, वॉट्सऐप ग्रुप्स के संचालन और निवेशकों को हुए नुकसान से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।
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कमजोर मानसून से नर्मदा के बांधों में 1 लाख करोड़ लीटर पानी कम, इंदौर की जरूरत के हिसाब से 5 साल 8 महीने के बराबर

कमजोर मानसून के कारण मध्य प्रदेश में नर्मदा बेसिन के करीब 15 जिलों में इस बार कम बारिश हुई है। इसका असर नदी के बहाव क्षेत्र में बने बांधों के जल भंडारण पर पड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस साल बांधों में करीब 1,000 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) यानी एक लाख करोड़ लीटर पानी कम जमा हुआ है। यह मात्रा कुल जल संग्रहण क्षमता का लगभग 10 प्रतिशत बताई जा रही है। नर्मदा बेसिन में पानी की उपलब्धता 25% तक घटने का अनुमान नर्मदा बेसिन में उपयोग योग्य पानी की उपलब्धता में भी 21.4 से 25 प्रतिशत तक कमी आने का अनुमान है। सामान्य तौर पर बेसिन क्षेत्र में हर साल नर्मदा नदी से करीब 28 मिलियन एकड़ फीट पानी का उपयोग होता है। इस बार कैचमेंट एरिया में 40 प्रतिशत तक कम बारिश होने के कारण उपलब्ध पानी की मात्रा घटकर 21 से 22 मिलियन एकड़ फीट रहने का अनुमान है। इससे सिंचाई और बिजली उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि मालवा क्षेत्र में जल संकट की स्थिति को गंभीर होने से रोकने के लिए इंदिरा सागर बांध से गुजरात को दिए जाने वाले 800 MCM पानी की मात्रा कम करने के विकल्प पर विचार किया जाना चाहिए। इंदौर की जरूरत के हिसाब से 5 साल 8 महीने का पानी एक हजार MCM पानी करीब एक लाख करोड़ लीटर के बराबर होता है। यदि इंदौर की आबादी 35 लाख मानकर प्रति व्यक्ति रोजाना 135 लीटर पानी की खपत का हिसाब लगाया जाए, तो इतनी मात्रा शहर की जरूरत के लिए लगभग 5 साल 8 महीने तक पर्याप्त हो सकती है। हालांकि, यह गणना केवल अनुमानित आबादी और प्रति व्यक्ति खपत पर आधारित है। वास्तविक जरूरत और पानी की उपलब्धता समय के साथ बदल सकती है। प्रदेश को नर्मदा से मिलती है करीब 2,400 मेगावाट बिजली नर्मदा नदी की कुल लंबाई करीब 1,312 किलोमीटर है। इसमें लगभग 1,112 किलोमीटर हिस्सा मध्य प्रदेश से होकर गुजरता है। इंदौर, भोपाल, जबलपुर, नर्मदापुरम और देवास सहित कई शहरों में नर्मदा से जलापूर्ति होती है। नदी पर बरगी, इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर और सरदार सरोवर जैसे बड़े बांध बने हैं। दी गई जानकारी के अनुसार, इन परियोजनाओं से जुड़े बिजली उत्पादन का विवरण इस प्रकार है: इन तीनों परियोजनाओं की बताई गई क्षमता का कुल योग 2,380 मेगावाट है, जिसे करीब 2,400 मेगावाट बताया गया है। जल प्रबंधन की चुनौती बढ़ने की आशंका नर्मदा बेसिन में पानी की उपलब्धता कम होने से पेयजल, सिंचाई और बिजली उत्पादन के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में बांधों में उपलब्ध जल भंडार और अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखकर जल वितरण की योजना बनाना जरूरी होगा। फिलहाल गुजरात को दिए जाने वाले पानी की मात्रा घटाने को लेकर विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है। इस संबंध में किसी अंतिम निर्णय की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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दिल्ली में ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली से पहले CJP फाउंडर अभिजीत दीपके हिरासत में, 150 प्रदर्शनकारी पकड़े गए

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में आयोजित ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली से पहले पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। आसपास के इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने के कारण प्रदर्शनकारियों को वहां जाने की अनुमति नहीं दी गई। जानकारी के मुताबिक, दीपके दिल्ली में NCP-SP के एक प्रवक्ता के घर रुके हुए थे। वहां से बाहर निकलते ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। वहीं, AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को मंडी हाउस से कस्टडी में लिया गया। इस कार्रवाई में कुल 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। छह दिन में दूसरी बार हिरासत में लिए गए दीपके अभिजीत दीपके को छह दिनों के भीतर दूसरी बार हिरासत में लिया गया है। इससे पहले 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले उन्हें विमान से हिरासत में लिया गया था। अगले दिन उन्हें छोड़ दिया गया था। इस बार CJP ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली आयोजित करने का आह्वान किया था। हालांकि, इलाके में लागू प्रतिबंधों के चलते पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से रोक दिया। हिरासत से पहले वीडियो जारी कर उठाए सवाल हिरासत में लिए जाने से पहले अभिजीत दीपके ने एक वीडियो संदेश जारी किया। इसमें उन्होंने दावा किया कि दिल्ली पुलिस के सात से आठ जवान उनके पास आए और उन पर लोगों को भड़काने का आरोप लगाया। दीपके ने वीडियो में कहा कि उन्हें तिरंगा लहराने के लिए वहां जाने से रोका जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अपने ही देश में तिरंगा लहराने से क्यों रोका जा रहा है। धारा 163 के तहत लागू थे प्रतिबंध कनॉट प्लेस और आसपास के इलाके में धारा 163 लागू होने के कारण रैली में शामिल होने के लिए पहुंच रहे प्रदर्शनकारियों को रोका गया। पुलिस की कार्रवाई के दौरान अभिजीत दीपके और नेहा बोरा समेत करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। फिलहाल इस मामले में हिरासत में लिए गए सभी लोगों की आगे की स्थिति और पुलिस की विस्तृत प्रतिक्रिया को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आने का इंतजार है।
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इंदौर में 175 डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के अटैचमेंट खत्म, मूल पदस्थापना पर जॉइनिंग के बाद ही मिलेगा अक्टूबर का वेतन

स्वास्थ्य विभाग में मूल पदस्थापना के बजाय दूसरी जगह काम कर रहे 175 डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों के अटैचमेंट समाप्त कर दिए गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने 16 अक्टूबर को आदेश जारी कर सभी अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए। आदेश के बाद संबंधित कर्मचारियों को अपने मूल पदस्थापना स्थल पर वापस जाकर जॉइनिंग देनी होगी। ऐसा करने के बाद ही उन्हें अक्टूबर महीने का वेतन मिल सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। तत्काल कार्यमुक्त कर मूल पदस्थापना पर भेजने के निर्देश CMHO के आदेश के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों को अटैचमेंट पर काम कर रहे कर्मचारियों को उसी दिन कार्यमुक्त कर उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजना होगा। इसकी जानकारी CMHO कार्यालय को भी उपलब्ध करानी होगी। वेतन आहरण केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों की मूल पदस्थापना पर उपस्थिति सुनिश्चित होने के बाद ही अक्टूबर का वेतन जारी किया जाए। इससे कर्मचारियों को अपने निर्धारित कार्यस्थल पर लौटना अनिवार्य होगा। अटैचमेंट जारी मिला तो जिम्मेदार अधिकारी पर होगी कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग ने आदेश के पालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। CMHO ने स्पष्ट किया है कि आदेश जारी होने के बाद भी कोई कर्मचारी या अधिकारी अटैचमेंट पर काम करता पाया गया, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था के प्रभारी की होगी। विभाग ने अधिकारियों को निर्देशों का पालन कराने और इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं को भेजा गया आदेश यह आदेश सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, देपालपुर, मानपुर, सांवेर और हातोद के खंड चिकित्सा अधिकारियों, महू सहित विभिन्न अस्पतालों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों, शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक के प्रभारियों को भेजा गया है। आदेश में भोपाल में हुई बैठकों और 16 अक्टूबर को मुख्यालय स्तर से मिले निर्देशों का भी हवाला दिया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से आदेश लागू कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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किरेन रिजिजू का आरोप- भारत में भी हिंसा भड़काने की रची गई थी साजिश, बोले- सत्ता परिवर्तन सिर्फ चुनाव से होगा

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया है कि फ्रांस और बांग्लादेश में हुई हिंसक घटनाओं जैसी साजिश भारत में भी रची गई थी। उन्होंने दावा किया कि कुछ नेताओं ने युवाओं को भड़काकर सड़कों पर हिंसा फैलाने की कोशिश की। रिजिजू ने कहा कि ऐसी साजिश रचने वाले यह भूल गए कि भारत न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव के जरिए ही हो सकता है, किसी बाहरी ताकत के माध्यम से नहीं। राहुल गांधी और नेहा बोरा का वीडियो किया शेयर किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करने के साथ एक वीडियो भी साझा किया। इस वीडियो में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और नेहा बोरा को दिखाया गया है। दरअसल, 14 अक्टूबर को नेहा बोरा का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह बांग्लादेश में हुए हिंसक प्रदर्शनों के समर्थन में बोलती दिखाई दी थीं। रिजिजू ने इसी संदर्भ में वीडियो साझा करते हुए भारत में हिंसा भड़काने की कथित कोशिशों का आरोप लगाया। बोले- सत्ता परिवर्तन चुनाव से, सोरोस के जरिए नहीं रिजिजू ने अपने बयान में कहा कि भारत में सरकार बदलने का अधिकार जनता के पास है और यह प्रक्रिया चुनावों के माध्यम से पूरी होती है। उन्होंने कहा, “भारत में सत्ता परिवर्तन बिल्कुल हो सकता है, लेकिन केवल चुनावों के जरिए, सोरोस के जरिए नहीं।” केंद्रीय मंत्री के बयान में विदेशी प्रभाव और देश में कथित तौर पर युवाओं को भड़काने की कोशिशों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, भारत में ऐसी किसी साजिश के आरोपों के समर्थन में इस बयान के साथ कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।

ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास भीषण हादसा, ट्रक ने श्रद्धालुओं को कुचला; 15 की मौत, 26 घायल

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शनिवार देर रात शीतला माता मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं पर तेज रफ्तार ट्रक चढ़ गया। हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि दो पुलिसकर्मियों समेत 26 लोग घायल हुए हैं। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायलों को इलाज के लिए जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ढलान पर बेकाबू हुआ धान से भरा ट्रक हादसा देर रात करीब 1:30 बजे चीनौर रोड पर ढलान के पास हुआ। श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने के लिए सड़क किनारे कतार में खड़े थे। इसी दौरान चीनौर की ओर से आ रहा धान से भरा ट्रक ढलान पर बेकाबू हो गया। बताया गया कि ट्रक करीब 90 डिग्री के तीखे ढलान से नीचे उतर रहा था। इस दौरान वह पुलिस चेकपोस्ट को तोड़ते हुए श्रद्धालुओं को कुचलता चला गया। इसके बाद ट्रक मंदिर की बाहरी दीवार और गेट से टकरा गया, जिससे दीवार ढह गई। हादसे में कई लोग मलबे में दब गए। ड्राइवर ने बताया- ब्रेक फेल हो गए थे प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ट्रक चालक गूगल मैप की मदद से रास्ते पर आगे बढ़ रहा था। हादसे के बाद चालक ने पुलिस को बताया कि ट्रक के ब्रेक फेल हो गए थे। हालांकि, दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। परिजनों ने पुलिस पर लगाया लापरवाही का आरोप हादसे के बाद मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। घटना में दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। पुलिस ने मामले में ट्रक चालक और ट्रक मालिक को गिरफ्तार कर लिया है। हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई की गई है। सिटी एसपी हटाए गए, 8 अफसर-पुलिसकर्मी सस्पेंड हादसे के बाद सरकार ने ग्वालियर के सिटी एसपी को हटा दिया है। इसके अलावा आठ अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। निलंबित किए गए लोगों में चार थाना प्रभारी (टीआई) भी शामिल हैं। फिलहाल हादसे की जांच जारी है। दुर्घटना में जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं के परिवारों में शोक का माहौल है, जबकि घायल अस्पताल में उपचार करा रहे हैं।
Breast Cancer Alert: 30 और 35 साल की महिलाओं ने गांठ को समझा सामान्य, इलाज के बाद मां बनने की उम्मीद

Breast Cancer Alert: 30 और 35 साल की महिलाओं ने गांठ को समझा सामान्य, इलाज के बाद मां बनने की उम्मीद

कम उम्र में ब्रेस्ट कैंसर का पता चलना कई महिलाओं के लिए बड़ा झटका हो सकता है। 30 और 35 साल की महिलाओं से जुड़ी इन घटनाओं में गांठ को सामान्य समझने की बात सामने आई है। हालांकि, इन दोनों महिलाओं की व्यक्तिगत मेडिकल जानकारी उपलब्ध नहीं है, इसलिए उनके इलाज और आगे की स्थिति के बारे में पक्के दावे करना सही नहीं होगा। डॉक्टरों के मुताबिक, स्तन में होने वाली हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन किसी भी नई गांठ या असामान्य बदलाव की जांच कराना जरूरी है। खासकर तब, जब गांठ बनी रहे या स्तन की त्वचा, आकार अथवा निप्पल में बदलाव दिखाई दे। Alcohol और Smoking से कैसे बढ़ सकता है खतरा? शराब का सेवन ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। शोध में यह भी संकेत मिले हैं कि धूम्रपान कई प्रकार के कैंसर का कारण बनता है और ब्रेस्ट कैंसर के साथ इसके संबंध पर भी अध्ययन जारी हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति को कैंसर होने के पीछे केवल एक ही कारण हो, यह जरूरी नहीं है। उम्र, पारिवारिक इतिहास, आनुवंशिक बदलाव और दूसरे स्वास्थ्य संबंधी कारक भी भूमिका निभाते हैं। <Cite refs={[“turn391271search0″,”turn391271search1″,”turn687346search1”]}/> क्या ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के बाद मां बन सकती हैं महिलाएं? ब्रेस्ट कैंसर का इलाज कराने के बाद भी कुछ महिलाओं के लिए गर्भधारण करना संभव होता है। हालांकि, यह कैंसर के प्रकार, उसकी अवस्था और इलाज में इस्तेमाल की गई दवाओं पर निर्भर करता है। कीमोथेरेपी और कुछ हार्मोनल उपचार प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए जिन महिलाओं को भविष्य में मां बनना है, उन्हें इलाज शुरू करने से पहले अपने कैंसर विशेषज्ञ और फर्टिलिटी विशेषज्ञ से विकल्पों पर चर्चा करनी चाहिए। जरूरत के अनुसार एग फ्रीजिंग या एम्ब्रियो फ्रीजिंग जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। <Cite refs={[“turn391271search2″,”turn687346search2”]}/> ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों को न करें नजरअंदाज स्तन में नई गांठ, बगल में सूजन, त्वचा में बदलाव, निप्पल का अंदर की ओर खिंचना या असामान्य स्राव जैसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से जांच कराएं। इन लक्षणों का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता, लेकिन जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।
भोपाल में 12 साल की बच्ची की हत्या से आक्रोश:पिता बोले- बेटी को बचा नहीं सके, आरोपी को हमारे हवाले कर दो

भोपाल में 12 साल की बच्ची की हत्या से आक्रोश:पिता बोले- बेटी को बचा नहीं सके, आरोपी को हमारे हवाले कर दो

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बैरागढ़ इलाके में 12 साल की बच्ची की हत्या के बाद लोगों में भारी आक्रोश है। बेटी को खोने के गम में परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, स्थानीय लोगों ने पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन कर आरोपी को कड़ी सजा देने की मांग की। बच्ची के पिता का दर्द उनके शब्दों में साफ झलक रहा है। उन्होंने कहा कि वे अपनी बेटी को बचा नहीं सके। अब परिवार आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहता है। खंडहर में मिला बच्ची का शव यह घटना भोपाल के बैरागढ़ इलाके की है। 15 अक्टूबर की रात बच्ची घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिवार ने उसकी तलाश की और पुलिस को सूचना दी। 16 अक्टूबर की सुबह कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे एक पुराने खंडहरनुमा भवन में बच्ची का शव मिला। घटना की जानकारी सामने आने के बाद इलाके में शोक और गुस्से का माहौल बन गया। पुलिस ने घटनास्थल की जांच की और मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाए। जांच के आधार पर एक 23 वर्षीय संदिग्ध को हिरासत में लिया गया, जिसके बाद आरोपी की गिरफ्तारी की खबर भी सामने आई। थाने के बाहर प्रदर्शन, आरोपी को सौंपने की मांग बच्ची की मौत की खबर फैलने के बाद परिजन और स्थानीय लोग बैरागढ़ थाने के बाहर जुट गए। लोगों ने आरोपी को उनके हवाले करने या उसे कड़ी सजा देने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने थाने में घुसने की कोशिश भी की। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात किया। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। परिवार और स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले की गंभीरता से जांच हो और दोषी को कानून के तहत सख्त सजा मिले। पुलिस जांच में जुटी, कार्रवाई पर सबकी नजर पुलिस मामले की जांच कर रही है। घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों और अन्य जानकारियों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। बच्ची की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि जांच और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर होना जरूरी है। इस घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार के लिए यह अपूरणीय क्षति है। अब उनकी उम्मीद है कि जांच जल्द पूरी हो और उन्हें न्याय मिले। नोट: आरोपी के खिलाफ आरोपों और जांच के निष्कर्षों को अदालत के अंतिम फैसले से पहले सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
Imran Khan News: भारत छोड़ने के नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे एक्टर, OCI Card रद्द करने पर मांगा गया जवाब

Imran Khan News: भारत छोड़ने के नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे एक्टर, OCI Card रद्द करने पर मांगा गया जवाब

नई दिल्ली: अभिनेता Imran Khan ने भारत छोड़ने के नोटिस को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने इस नोटिस को गैरकानूनी बताया है। यह मामला उनके Overseas Citizen of India (OCI) कार्ड को रद्द करने की प्रक्रिया से भी जुड़ा है। अधिकारियों की ओर से इस संबंध में अभिनेता से जवाब मांगा गया है। क्या है पूरा मामला? इमरान खान को भारत छोड़ने से संबंधित नोटिस जारी किया गया है। अभिनेता ने इस नोटिस पर आपत्ति जताते हुए इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि यह नोटिस गैरकानूनी है। इस मामले में उनके OCI कार्ड को रद्द करने को लेकर भी सवाल उठे हैं। संबंधित अधिकारियों ने इस संबंध में उनसे जवाब मांगा है। अब इस मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। क्या होता है OCI Card? OCI यानी Overseas Citizen of India कार्ड भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को भारत में रहने और कई सुविधाओं का लाभ लेने के लिए दिया जाता है। हालांकि, यह भारतीय नागरिकता नहीं है। कुछ कानूनी परिस्थितियों में OCI कार्ड रद्द भी किया जा सकता है। आगे क्या होगा? इमरान खान की याचिका पर हाईकोर्ट में होने वाली कार्यवाही से इस मामले की आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, अभिनेता ने नोटिस को चुनौती दी है और OCI कार्ड रद्द करने से जुड़े मामले में जवाब मांगे जाने का मुद्दा भी सामने है। इस मामले में अदालत का रुख और संबंधित अधिकारियों की अगली कार्रवाई अहम होगी।

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