India और रूस के रिश्ते इन दिनों फिर से चर्चा में हैं। तेल (Oil) से लेकर खाद (Fertilizer) तक, दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग यह दिखाता है कि यह दोस्ती सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि जरूरत और रणनीति का मजबूत मेल है।
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर पश्चिमी देशों के कई प्रतिबंध लगे, जिसके चलते उसे नए भरोसेमंद साझेदारों की तलाश थी। ऐसे में भारत एक बड़े और स्थिर बाजार के रूप में सामने आया। भारत ने भी सस्ते कच्चे तेल और उर्वरकों के लिए रूस की ओर रुख किया, जिससे दोनों देशों को फायदा मिला।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि Vladimir Putin के इस बढ़ते झुकाव के पीछे ‘डबल फियर’ काम कर रहा है। पहला डर है पश्चिमी देशों के लगातार बढ़ते दबाव और प्रतिबंधों का, और दूसरा डर वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ कमजोर पड़ने का।
रूस के लिए भारत न सिर्फ एक बड़ा खरीदार है, बल्कि एक ऐसा साझेदार भी है जो मुश्किल समय में साथ खड़ा दिखाई देता है। वहीं भारत के लिए रूस ऊर्जा सुरक्षा और कृषि जरूरतों को पूरा करने का एक अहम स्रोत बन चुका है।
हालांकि, इस बढ़ती नजदीकी के बीच भारत संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, ताकि पश्चिमी देशों के साथ उसके संबंधों पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में India-Russia partnership और मजबूत हो सकती है, लेकिन इसके पीछे की रणनीति और वैश्विक दबाव दोनों ही अहम भूमिका निभाते रहेंगे।
