दक्षिण कोरिया को मिला नया नेता — ली जे-म्युंग (Lee Jae Myung)। 2025 में हुए असाधारण चुनावों में उन्होंने राष्ट्रपति पद की शपथ ली और एक नए प्रगतिशील युग की शुरुआत की। उनका चयन ऐसे समय हुआ है जब देश गहरे राजनीतिक संकट, आर्थिक सुस्ती और सामाजिक असमानता से जूझ रहा है। ली जे-म्युंग की जीत को South Korea की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
Struggle से Success तक: Lee Jae Myung की प्रेरक कहानी
ली जे-म्युंग का जन्म 1963 में South Korea के अंडोंग (Andong) गाँव में एक गरीब परिवार में हुआ था। बचपन में उन्होंने फैक्ट्रियों में मजदूरी की और एक दुर्घटना में हाथ में गंभीर चोट आई। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने Chung-Ang University से कानून की पढ़ाई की और फिर एक मजदूर अधिकार कार्यकर्ता और मानवाधिकार वकील के रूप में पहचान बनाई।
Political Career: Mayor से President तक
ली की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत 2010 में Seongnam के मेयर के रूप में हुई। इसके बाद उन्होंने Gyeonggi Province के गवर्नर के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं, आवास योजनाओं और गरीबों के लिए लाभकारी कल्याण योजनाएं लागू कीं। 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में करीबी हार के बावजूद वे राजनीति के केंद्र में बने रहे।
2025 का चुनाव और जीत की कहानी
पूर्व राष्ट्रपति Yoon Suk Yeol द्वारा दिसंबर 2024 में Martial Law की घोषणा से देश में उथल-पुथल मच गई थी। इसके बाद उन्हें महाभियोग का सामना करना पड़ा और हटाया गया। ऐसे में 2025 के विशेष चुनाव में Lee Jae Myung ने 49.42% वोटों के साथ शानदार जीत दर्ज की। देश में 79.4% वोटिंग हुई, जो हाल के वर्षों में सबसे अधिक रही।
नए राष्ट्रपति की नीतियाँ और वादे
आर्थिक सुधार (Economic Reforms):
- चार दिन का कार्य सप्ताह लागू करने की योजना
- Universal Basic Services जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन को सबके लिए मुफ़्त करना
- AI और आधुनिक तकनीकी उद्योगों को बढ़ावा देना
विदेश नीति (Foreign Policy):
- अमेरिका और जापान के साथ त्रिपक्षीय सहयोग को मजबूत करना
- उत्तर कोरिया के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखना
- व्यावसायिक हितों के अनुसार संतुलित विदेश नीति अपनाना
समाज कल्याण (Social Welfare):
- रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाना
- युवाओं के लिए रोजगार और प्रशिक्षण कार्यक्रम
Lee Jae Myung के सामने चुनौतियाँ
- देश में बढ़ता घरेलू कर्ज और जनसंख्या संकट
- बड़े औद्योगिक घरानों और परंपरागत लॉबी से टकराव
- कुछ कानूनी मामलों में जांच जारी, हालाँकि उन्होंने सभी आरोपों को नकारा है
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