मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में उदासीन अखाड़े से जुड़े संत ब्रजराज पुरी महाराज की संदिग्ध मौत ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।
जल्दबाजी में दी गई समाधि, उठे सवाल
संत की मौत को आश्रम के लोगों ने हार्ट अटैक बताया, लेकिन खाचरोद से आए संतों और परिजनों का कहना है कि मौत संदिग्ध है। आरोप है कि संत को जल्दबाजी में समाधि दे दी गई, जबकि परंपरा के अनुसार अन्य संतों के आने का इंतजार किया जाता है।
मौत के अलग-अलग कारण, बढ़ा शक
उदासीन अखाड़े के महंत ओंकारदास उदासीन का कहना है कि उन्हें फांसी लगने की जानकारी दी गई थी, जबकि आश्रम में हार्ट अटैक की बात कही गई।
इसी विरोधाभास के कारण मामला और संदिग्ध हो गया है।
गायब मिले गहने और नकदी
महंत और संत समाज ने आरोप लगाया है कि संत के गले में पहनी सोने की चेन, रुद्राक्ष माला, मोबाइल और नकदी भी गायब है।
उन्होंने मांधाता थाने में आवेदन देकर समाधि से शव निकालकर पोस्टमार्टम कराने की मांग की है।
भतीजे ने भी जताई हत्या की आशंका
संत के भतीजे संदीप रघुवंशी (निवासी धार) ने भी पुलिस को आवेदन देकर हत्या की आशंका जताई है।
उनका कहना है कि आश्रम में मौजूद लोगों के बयानों में विरोधाभास है और कुछ लोगों के शरीर पर चोट के निशान भी दिखाई दिए हैं।
73 एकड़ जमीन का विवाद आया सामने
इस पूरे मामले में 73 एकड़ जमीन का विवाद भी सामने आया है। हिंदू महासभा के पदाधिकारियों का दावा है कि जमीन को लेकर पहले से विवाद चल रहा था, जिसे अब इस घटना से जोड़कर देखा जा रहा है।
कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
मामले में कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने पुलिस अधीक्षक को जांच के निर्देश दिए हैं।
पुलिस पर उठे सवाल
वहीं मांधाता थाना पुलिस का कहना है कि अभी तक किसी नजदीकी परिजन की औपचारिक शिकायत नहीं मिली है, इसलिए कार्रवाई नहीं की गई है।
इस पर संत समाज और संगठनों ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि हत्या जैसे मामलों में आशंका के आधार पर भी जांच शुरू होनी चाहिए।
यह मामला अब तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है, जहां संत समाज, संगठन और प्रशासन आमने-सामने नजर आ रहे हैं।
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