देश में आस्था और परंपराओं से जुड़े मामलों पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सबरीमाला मंदिर से जुड़े केस की सुनवाई के दौरान सरकार ने Supreme Court में एक अहम बात कही है।
सरकार ने अदालत को बताया कि देश के कई मंदिरों में प्रसाद के रूप में शराब भी चढ़ाई जाती है और यह वहां की परंपरा का हिस्सा है। ऐसे में कोर्ट यह नहीं कह सकता कि वहां शराब का इस्तेमाल बंद कर दिया जाए।
यह सुनवाई केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर से जुड़ी है, जहां महिलाओं के प्रवेश और धार्मिक परंपराओं को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इस दौरान धार्मिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों की सीमा को लेकर भी चर्चा हो रही है।
सरकार ने कहा कि भारत में अलग-अलग जगहों पर धार्मिक परंपराएं अलग होती हैं। कुछ मंदिरों में शराब को भी प्रसाद के रूप में स्वीकार किया जाता है। यह सदियों पुरानी मान्यता है, जिसे अदालत बदलने का निर्देश नहीं दे सकती।
सरकार का यह भी कहना है कि कोर्ट को धार्मिक परंपराओं में दखल देने से बचना चाहिए, क्योंकि यह लोगों की आस्था से जुड़ा मामला है।
सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठा कि क्या अदालत को धार्मिक परंपराओं की समीक्षा करने का अधिकार है। इस पर कोर्ट ने कहा कि उसे संविधान के तहत रिव्यू करने का पूरा अधिकार है।
यह मामला सिर्फ सबरीमाला मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में धार्मिक स्वतंत्रता और परंपराओं के अधिकार से जुड़ा हुआ है। आने वाला फैसला यह तय कर सकता है कि धार्मिक मामलों में कोर्ट की सीमा कहां तक है।
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