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RBI On Plastic Currency: ₹10-₹20 के Plastic Notes को लेकर सामने आया नया Update

अगर आपके बटुए में रखे ₹10 और ₹20 के नोट कुछ ही दिनों में पुराने और मुड़े-तुड़े नजर आने लगते हैं, तो आने वाले समय में इसमें बदलाव देखने को मिल सकता है। ₹10 और ₹20 के Plastic यानी Polymer Notes को लेकर RBI की तैयारी एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से इन नोटों को लाने की बात चल रही है और अब इसके संभावित लॉन्च को लेकर भी जानकारी सामने आई है। हालांकि, यहां एक बात साफ समझना जरूरी है कि Polymer Notes को लेकर प्रक्रिया अभी चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी। पहले इनका ट्रायल और जरूरी तकनीकी जांच होगी। इसके बाद ही इन्हें बड़े स्तर पर बाजार में उतारने का फैसला किया जाएगा। क्यों जरूरी महसूस हो रहे हैं Plastic Notes? भारत में ₹10 और ₹20 के नोटों का इस्तेमाल रोजमर्रा की छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए खूब होता है। चाय की दुकान से लेकर ऑटो का किराया और छोटे-मोटे सामान की खरीदारी तक, इन नोटों का इस्तेमाल लगातार होता रहता है। यही वजह है कि ये नोट अपेक्षाकृत जल्दी खराब भी हो जाते हैं। Polymer Notes इसी समस्या का एक संभावित समाधान माने जा रहे हैं। ये कागजी नोटों के मुकाबले ज्यादा टिकाऊ होते हैं और पानी या नमी के संपर्क में आने पर भी बेहतर तरीके से टिक सकते हैं। ₹10 और ₹20 के नोटों से क्यों हो सकती है शुरुआत? Plastic Currency को लेकर शुरुआती फोकस ₹10 और ₹20 denomination पर रहने की संभावना है। इन दोनों मूल्यवर्ग के नोटों का सर्कुलेशन काफी ज्यादा है। ऐसे में इनके Polymer Version को इस्तेमाल में लाकर इसकी व्यावहारिकता को बेहतर तरीके से परखा जा सकता है। अगर ट्रायल सफल रहता है और लोगों के इस्तेमाल से जुड़े पहलू संतोषजनक पाए जाते हैं, तो आगे चलकर दूसरे मूल्यवर्ग की करेंसी पर भी विचार हो सकता है। कब लॉन्च होंगे Polymer Notes? सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ₹10 और ₹20 के Plastic Notes आम लोगों के हाथ में कब पहुंचेंगे? उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पहले field trial और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद RBI इनके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को लेकर फैसला करेगा। इसलिए अभी इसे ऐसी योजना नहीं माना जा सकता जिसमें कोई निश्चित तारीख तय हो चुकी हो। यानी लोगों को फिलहाल पुराने ₹10 और ₹20 के नोटों को लेकर किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। मौजूदा नोट सामान्य रूप से चलन में बने रहेंगे, जब तक RBI की तरफ से कोई अलग निर्देश जारी नहीं किया जाता। नकली नोटों पर भी लग सकती है लगाम Polymer Currency का एक अहम फायदा इसकी security features से भी जुड़ा है। इन नोटों में ऐसे सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं, जिन्हें कॉपी करना नकली नोट बनाने वालों के लिए मुश्किल हो। हालांकि, किसी नए नोट को जारी करने से पहले RBI को उसकी सुरक्षा के साथ-साथ ATM, cash counting machines और दूसरे banking systems के साथ compatibility भी जांचनी होती है। क्या पुराने ₹10 और ₹20 के नोट बंद हो जाएंगे? नहीं। Polymer Notes आने का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा कागजी नोट तुरंत बंद कर दिए जाएंगे। अगर नए नोट जारी होते हैं तो RBI की ओर से उनकी वैधता और पुराने नोटों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट जानकारी दी जाएगी। इसलिए अभी सोशल मीडिया पर चलने वाली ऐसी किसी भी खबर पर भरोसा करने से बचें जिसमें पुराने ₹10 या ₹20 के नोटों को अचानक बंद किए जाने का दावा किया जा रहा हो। भारत में Currency का बदलता रूप भारत में समय के साथ करेंसी में कई बदलाव हुए हैं। सुरक्षा फीचर्स को मजबूत करने से लेकर नोटों के डिजाइन और आकार में बदलाव तक, RBI लगातार करेंसी सिस्टम को बेहतर बनाने पर काम करता रहा है। अब अगर Polymer Notes का प्रयोग सफल रहता है, तो यह भारतीय करेंसी के क्षेत्र में एक और बड़ा बदलाव हो सकता है। खासकर छोटे नोटों की durability बढ़ाने में इसका फायदा मिल सकता है। RBI के फैसले पर टिकी नजर फिलहाल ₹10 और ₹20 के Plastic Notes को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रक्रिया अभी आगे बढ़ रही है और अंतिम लॉन्च से पहले ट्रायल व जरूरी जांच पूरी की जाएगी। इसलिए निश्चित लॉन्च डेट को लेकर RBI की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना ही सही रहेगा। आम लोगों के लिए फिलहाल राहत की बात यही है कि मौजूदा ₹10 और ₹20 के नोट चलते रहेंगे। Polymer Notes आते हैं तो RBI उनकी उपलब्धता, इस्तेमाल और पुराने नोटों को लेकर पूरी जानकारी सार्वजनिक करेगा।
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बिलासपुर के अस्पताल में महिला की मौत के बाद हंगामा, परिजनों ने लगाया इलाज में लापरवाही का आरोप

बिलासपुर। नेहरू नगर स्थित श्रीराम केयर हॉस्पिटल में रविवार को एक महिला की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि महिला कान में दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची थी। जांच के दौरान डॉक्टरों ने उनके हार्ट में ब्लॉकेज बताया। इसके बाद एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की गई। उपचार के दौरान महिला की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। हंगामे की सूचना मिलते ही सिविल लाइन सीएसपी और थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत कर स्थिति संभाली। वहीं, अस्पताल प्रबंधन ने इलाज में किसी तरह की लापरवाही होने से इनकार किया है। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। कान में दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची थी महिला परिजनों के मुताबिक, मस्तूरी क्षेत्र के ठाकुरदेवा निवासी सुखम बाई साहू के कान में दर्द था। उन्हें इलाज के लिए पहले श्रीराम केयर हॉस्पिटल लाया गया। यहां से उन्हें कोनी स्थित सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल रेफर किया गया। परिजनों का कहना है कि वहां कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक कुमार ने जांच के बाद उनके हार्ट में ब्लॉकेज होने की जानकारी दी। इसके बाद एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी कराने की सलाह दी गई। वापस श्रीराम केयर हॉस्पिटल लाने के बाद हुई मौत परिजनों के अनुसार, सुखम बाई को वापस श्रीराम केयर हॉस्पिटल लाया गया, जहां डॉ. अभिषेक कुमार ने एंजियोप्लास्टी की। उनका आरोप है कि उपचार के दौरान ही सुखम बाई की मौत हो गई। महिला की मौत की खबर मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए और अस्पताल परिसर में विरोध जताने लगे। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। बेटी बोली- इलाज में लापरवाही से गई मां की जान सुखम बाई की बेटी संगीता साहू ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वे अपनी मां को इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे थे, लेकिन उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। संगीता ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने की भी मांग उठाई है। अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों से किया इनकार दूसरी ओर, अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों की ओर से लगाए गए लापरवाही के आरोपों को गलत बताया है। प्रबंधन का कहना है कि इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं की गई। फिलहाल, महिला की मौत के कारणों और उपचार के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया की जांच की जा रही है। सिविल लाइन थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद ही मौत के कारणों और लगाए गए आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सोना

Gold-Silver Rate Today: सोना ₹2,282 सस्ता, चांदी में भी गिरावट

सोना और चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए एक बार फिर राहत भरी खबर है। देश के सर्राफा बाजार में सोमवार, 2 नवंबर को दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। सोना एक ही दिन में ₹2,282 सस्ता होकर करीब ₹1.38 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं, चांदी की कीमत भी ₹1,264 गिरकर करीब ₹1.80 लाख प्रति किलो रह गई। सबसे ज्यादा हैरानी चांदी की कीमतों में आई गिरावट को लेकर है। पिछले एक महीने में चांदी करीब ₹40 हजार तक सस्ती हो चुकी है। लगातार गिरते भाव के बीच अब खरीदारों के मन में सवाल है कि क्या धनतेरस और दिवाली से पहले सोना-चांदी खरीदने का अच्छा मौका मिल गया है? Gold Rate Today: आज कितना सस्ता हुआ सोना? 2 नवंबर को सोने की कीमत में अच्छी गिरावट देखने को मिली। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,282 टूटकर 10 ग्राम के लिए ₹1.38 लाख के आसपास पहुंच गया। पिछले कुछ समय से सोने के बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद कीमतों में आई गिरावट ने उन लोगों को राहत दी है, जो लंबे समय से सोना खरीदने के लिए सही समय का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, सोने का अंतिम भाव शहर, शुद्धता और ज्वेलर्स के हिसाब से अलग हो सकता है। Silver Rate Today: एक महीने में ₹40 हजार सस्ती हुई चांदी चांदी की कीमतों में गिरावट ने बाजार का ध्यान अपनी ओर खींचा है। सोमवार को चांदी करीब ₹1,264 सस्ती होकर ₹1.80 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गई। एक महीने पहले के मुकाबले चांदी की कीमत में करीब ₹40 हजार की गिरावट बताई जा रही है। इससे निवेशकों के साथ-साथ चांदी के गहने और बर्तन खरीदने की योजना बना रहे लोगों की नजर भी बाजार पर बनी हुई है। अक्टूबर में Gold-Silver Market में क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट? अक्टूबर का महीना सोने और चांदी के बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिकवाली बढ़ने से दोनों धातुओं की कीमतों पर दबाव बना। इस गिरावट के पीछे कुछ प्रमुख वजहें रही हैं: क्या धनतेरस से पहले सोना खरीदना फायदेमंद रहेगा? धनतेरस और दिवाली के मौके पर भारत में सोना-चांदी खरीदने की परंपरा काफी पुरानी है। इस बार त्योहार से पहले कीमतों में आई गिरावट ने खरीदारों को थोड़ी राहत जरूर दी है। शादी-ब्याह के लिए ज्वेलरी खरीदने वाले परिवारों के लिए भी यह गिरावट महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, केवल एक दिन की गिरावट देखकर खरीदारी का फैसला करना सही नहीं होगा। खरीदारी से पहले अपने बजट, जरूरत और स्थानीय बाजार के भाव की तुलना जरूर करें। ज्वेलरी लेते समय हॉलमार्क और HUID नंबर की जांच करना भी जरूरी है। क्या Gold-Silver Price में आगे और गिरावट आएगी? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नवंबर में सोना और चांदी और सस्ते होंगे या कीमतों में फिर तेजी आएगी। आने वाले दिनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, डॉलर की स्थिति, अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग और निवेशकों की खरीद-बिक्री का असर कीमतों पर पड़ सकता है। अगर डॉलर मजबूत बना रहता है और बाजार में बिकवाली जारी रहती है, तो सोने-चांदी के भाव पर दबाव बना रह सकता है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ने या सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने पर सोने की कीमतों में दोबारा तेजी आ सकती है। फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में खरीदारों को जल्दबाजी करने के बजाय अपने शहर के ताजा भाव की जानकारी लेकर ही फैसला करना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में एयर शो: 8 हजार फीट की ऊंचाई से 8 जवानों ने लगाई छलांग, MI-17 से स्लिथरिंग का प्रदर्शन

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के दूसरे दिन आयोजित एयर शो में भारतीय वायुसेना के जवानों ने हैरतअंगेज करतब दिखाए। आकाशगंगा टीम के 8 जवानों ने C-295 विमान से करीब 8 हजार फीट की ऊंचाई से पैराशूट के जरिए छलांग लगाई। जवानों ने हवा में संतुलन बनाते हुए सुरक्षित लैंडिंग की। इसके बाद MI-17 हेलिकॉप्टर से वायुसेना के जवानों ने स्लिथरिंग का प्रदर्शन किया। इस तकनीक में जवान रस्सी के सहारे हेलिकॉप्टर से तेजी से जमीन पर उतरते हैं। इसका इस्तेमाल विशेष अभियानों के दौरान जवानों को दुर्गम और मुश्किल जगहों पर पहुंचाने के लिए किया जाता है। MI-17 से रस्सी के सहारे उतरे जवान एयर शो के दौरान MI-17 हेलिकॉप्टर से जवानों ने रस्सी के सहारे नीचे उतरने का प्रदर्शन किया। यह तकनीक विशेष परिस्थितियों में जवानों को तेजी से किसी स्थान पर पहुंचाने में उपयोगी होती है। MI-17 हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल सैन्य अभियानों के अलावा बाढ़ और अन्य आपात स्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए भी किया जाता है। सारंग टीम ने भी दिखाए थे हैरतअंगेज करतब 1 नवंबर को सारंग टीम के पांचों हेलिकॉप्टरों ने एक साथ उड़ान भरकर आसमान में अलग-अलग फॉर्मेशन बनाए थे। हेलिकॉप्टरों के बीच सटीक तालमेल, नजदीकी उड़ान और एक साथ दिशा बदलने के करतब दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहे। रंगीन धुएं के बीच हेलिकॉप्टरों ने आसमान में कई खूबसूरत आकृतियां बनाईं। इस प्रदर्शन ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। युवाओं को वायुसेना के कामकाज से परिचित कराने की पहल एयर शो के जरिए लोगों को भारतीय वायुसेना के प्रशिक्षण, तकनीक और कार्यक्षमता से परिचित कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं को वायुसेना में करियर बनाने के लिए प्रेरित करना भी है। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए 700 से 800 पुलिस जवानों की तैनाती की गई है। दर्शकों के लिए अलग-अलग पार्किंग व्यवस्था एयर शो में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए रायपुर ग्रामीण पुलिस ने यातायात और पार्किंग की विशेष व्यवस्था की है। अलग-अलग दिशाओं से आने वाले वाहनों के लिए अलग रास्ते और पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए हैं। पार्किंग स्थल से कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने के लिए 20 बसें और 55 ई-रिक्शा चलाए जाएंगे। पुलिस ने दर्शकों से की निर्धारित रूट अपनाने की अपील रायपुर ग्रामीण पुलिस ने दर्शकों से निर्धारित रूट और पार्किंग स्थलों का ही इस्तेमाल करने की अपील की है। साथ ही सड़क पर अनावश्यक रूप से वाहन खड़े नहीं करने और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करने को कहा है। पार्किंग स्थल से कार्यक्रम स्थल तक पैदल भी जाना पड़ सकता है। ऐसे में पुलिस ने दर्शकों को पर्याप्त समय लेकर घर से निकलने की सलाह दी है।

इंदौर में जल कनेक्शन बंद कराने के लिए नई SOP लागू, 30 दिन में पूरी होगी प्रक्रिया; जानें कैसे करें आवेदन

इंदौर। शहर में जिन उपभोक्ताओं को अब जल कनेक्शन की जरूरत नहीं है, उन्हें इसे स्थायी रूप से बंद कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। नगर निगम ने जल कनेक्शन हटाने और उपभोक्ता का खाता बंद करने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार की है। इसका उद्देश्य कनेक्शन बंद होने के बाद भी बिल जारी होने जैसी समस्याओं को रोकना और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल के निर्देश पर तैयार SOP के अनुसार, उपभोक्ता को संबंधित क्षेत्र के सहायक यंत्री के पास लिखित आवेदन देना होगा। आवेदन में कंज्यूमर आईडी, नाम, जल कनेक्शन का पता, मोबाइल नंबर और कनेक्शन बंद कराने का कारण बताना अनिवार्य होगा। 10 दिन में मिलेगा एस्टीमेट, भुगतान के बाद हटेगा कनेक्शन नगर निगम ने आवेदन मिलने के 10 दिन के भीतर बकाया राशि और कनेक्शन हटाने के शुल्क का एस्टीमेट देने की समय-सीमा तय की है। उपभोक्ता को बकाया जल बिल और निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। भुगतान होने के बाद संबंधित अधिकारी मौके पर जाकर जल कनेक्शन को फिजिकली हटाएंगे। प्रक्रिया पूरी होने पर सहायक यंत्री कनेक्शन हटाने का प्रतिवेदन तैयार कर असिस्टेंट रेवेन्यू ऑफिसर (ARO) को भेजेंगे। 150 रुपए की रसीद के बाद मुख्यालय से बंद होगा खाता सहायक यंत्री से प्रतिवेदन मिलने के बाद ARO 150 रुपए की रसीद जारी करेंगे और पूरा मामला नगर निगम मुख्यालय भेजेंगे। इसके बाद मुख्यालय स्तर पर उपभोक्ता का खाता बंद करने की कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम के अनुसार, निर्धारित शुल्क जमा होने के बाद अधिकतम 30 दिन के भीतर कनेक्शन हटाने और खाता बंद करने की प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होगा। केवल आवेदन देने से नहीं रुकेगी बिलिंग SOP में स्पष्ट किया गया है कि सिर्फ कनेक्शन बंद कराने का आवेदन देने से बिलिंग बंद नहीं होगी। जब तक जल कनेक्शन वास्तव में नहीं हटाया जाता, तब तक की देय राशि उपभोक्ता को जमा करनी होगी। कनेक्शन फिजिकली हटाने और सभी निर्धारित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही उपभोक्ता का खाता बंद किया जाएगा। इसलिए आवेदन के साथ ही बकाया राशि और कनेक्शन हटाने के शुल्क का भुगतान करना जरूरी होगा। अधिकारियों को समय-सीमा में आवेदन निपटाने के निर्देश नगर निगम ने संबंधित अधिकारियों को सभी आवेदनों का तय समय-सीमा में निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। आवेदन मिलने के बाद सहायक यंत्री बकाया जलकर और अन्य देय राशि की जांच करेंगे। इसके बाद कनेक्शन हटाने में आने वाले खर्च का एस्टीमेट तैयार कर उपभोक्ता को उपलब्ध कराया जाएगा। नई व्यवस्था से स्थायी रूप से जल कनेक्शन बंद कराने वाले उपभोक्ताओं को अनावश्यक बिलिंग और बार-बार नगर निगम कार्यालयों के चक्कर लगाने की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।
INDIA Block Rally

INDIA Block Rally: दिल्ली के कारोबारियों का दावा, ₹11,000 करोड़ का नुकसान; 2.5 लाख दुकानें बंद

दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई INDIA Block Rally अब राजनीतिक चर्चा के साथ व्यापारिक विवाद का भी कारण बन गई है। दिल्ली के व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने दावा किया है कि 1 नवंबर को हुई इस रैली के चलते राजधानी के कारोबार को करीब 11,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। संगठन के मुताबिक, दिल्ली के 20 से 25 प्रमुख बाजारों में लगभग 2.5 लाख दुकानें बंद रहीं। व्यापारियों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि यह आयोजन दिवाली से ठीक पहले हुआ। इस समय बाजारों में ग्राहकों की अच्छी आवाजाही रहती है और दुकानदारों को त्योहारी सीजन में बेहतर बिक्री की उम्मीद होती है। लेकिन कारोबारियों का कहना है कि रैली के कारण ट्रैफिक, ग्राहकों की आवाजाही और सामान की सप्लाई पर असर पड़ा। इस मामले में अब राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। राहुल गांधी ने दिल्ली में दुकानें बंद होने के लिए बीजेपी पर आरोप लगाए, जबकि कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने व्यापारियों के नुकसान के आंकड़ों पर सवाल उठाए। दूसरी तरफ CTI का कहना है कि उसका मकसद किसी राजनीतिक दल का विरोध करना नहीं, बल्कि व्यापारियों की परेशानी सामने रखना है। 2.5 लाख दुकानें बंद, दिल्ली के 25 बाजारों में कारोबार प्रभावित CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, रामलीला मैदान के आसपास लगभग 20 से 25 बड़े बाजार हैं। इन बाजारों में करीब 3 लाख दुकानें मौजूद हैं। संगठन का दावा है कि इनमें से लगभग 2.5 लाख दुकानें रैली वाले दिन बंद रहीं। प्रभावित बाजारों में चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, चावड़ी बाजार, कश्मीरी गेट, भागीरथ पैलेस, कनॉट प्लेस, करोल बाग, पहाड़गंज और दरियागंज जैसे प्रमुख व्यापारिक इलाके शामिल हैं। व्यापारियों का कहना है कि रैली के दौरान भीड़ और ट्रैफिक की आशंका के चलते कई दुकानदारों ने दुकानें नहीं खोलीं। वहीं, जो दुकानें खुली थीं, वहां भी ग्राहकों की संख्या कम रही। इससे खासतौर पर छोटे व्यापारियों और रोजाना बिक्री पर निर्भर दुकानदारों को परेशानी हुई। ₹11,000 करोड़ का नुकसान, किस कारोबार पर कितना असर? CTI ने अपने अनुमान में बताया है कि रैली के कारण सिर्फ बाजारों में बिक्री ही प्रभावित नहीं हुई, बल्कि ट्रांसपोर्ट, होटल, रेस्टोरेंट और असंगठित क्षेत्र के कामगारों की कमाई पर भी असर पड़ा। व्यापारिक संगठन के अनुसार नुकसान का अनुमान इस प्रकार है: कारोबार का क्षेत्र अनुमानित नुकसान रिटेल और होलसेल व्यापार ₹8,800 करोड़ ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स ₹1,500 करोड़ होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन ₹500 करोड़ असंगठित क्षेत्र और दिहाड़ी मजदूर ₹200 करोड़ कुल अनुमानित नुकसान ₹11,000 करोड़ CTI का कहना है कि सबसे ज्यादा असर खुदरा और थोक कारोबार पर पड़ा। हालांकि, यह पूरा आंकड़ा व्यापारिक संगठन का अनुमान है। नुकसान की स्वतंत्र आर्थिक पुष्टि सामने नहीं आई है। 5,000 मालवाहक वाहनों की आवाजाही पर असर दिल्ली के बाजारों में रोजाना बड़ी मात्रा में सामान पहुंचता है। इसके लिए ट्रक, टेंपो और दूसरे मालवाहक वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है। CTI के मुताबिक, दिल्ली के 56 औद्योगिक क्षेत्रों से करीब 5,000 मालवाहक वाहन बाजारों तक सामान पहुंचाते हैं। इनमें नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी और मुंडका जैसे औद्योगिक इलाके शामिल हैं। संगठन का दावा है कि रैली के कारण कई रास्तों पर ट्रैफिक प्रभावित हुआ, जिससे सामान की लोडिंग-अनलोडिंग और डिलीवरी में परेशानी आई। दिल्ली से NCR और दूसरे शहरों में सामान पहुंचाने वाले वाहनों के संचालन पर भी असर पड़ने की बात कही गई है। कारोबारियों की चिंता यह है कि दिवाली जैसे बड़े त्योहार से पहले सप्लाई में देरी होने से दुकानों की बिक्री प्रभावित हो सकती है। दिल्ली के बाहर से खरीदारी करने नहीं पहुंचे ग्राहक दिल्ली के चांदनी चौक और सदर बाजार जैसे बाजारों में सिर्फ स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि आसपास के शहरों से भी बड़ी संख्या में ग्राहक आते हैं। CTI के अनुसार, सोनीपत, पानीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा और मेरठ सहित करीब 100 शहरों से रोजाना 3 से 4 लाख ग्राहक दिल्ली के बाजारों में पहुंचते हैं। संगठन का दावा है कि रैली के दिन ट्रैफिक और बाजारों की स्थिति को देखते हुए कई ग्राहक दिल्ली नहीं पहुंचे। इसका असर थोक और खुदरा व्यापार दोनों पर पड़ा। होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों की कमाई भी प्रभावित रैली के कारण होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन कारोबार प्रभावित होने का दावा भी CTI ने किया है। संगठन के मुताबिक, कनॉट प्लेस, करोल बाग, पहाड़गंज और चांदनी चौक जैसे इलाकों में होटल और गेस्ट हाउस की बुकिंग पर असर पड़ा। लाल किला, जामा मस्जिद और चांदनी चौक जैसे पर्यटन स्थलों पर आने वाले लोगों की संख्या कम रहने की बात भी कही गई है। इसका असर सिर्फ बड़े कारोबारियों तक सीमित नहीं रहा। ऑटो चालक, ई-रिक्शा चालक, रेहड़ी-पटरी वाले, लोडर और दिहाड़ी मजदूर भी रोजाना की कमाई के लिए ग्राहकों और बाजारों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में कारोबार प्रभावित होने से उनकी आमदनी पर भी असर पड़ने का दावा किया गया है। रैली से पहले ही तारीख बदलने की मांग कर चुके थे व्यापारी CTI ने दावा किया कि व्यापारिक संगठनों ने रैली से पहले ही कांग्रेस नेतृत्व को पत्र लिखकर आयोजन की तारीख बदलने की अपील की थी। व्यापारियों का कहना था कि दिवाली से पहले का समय कारोबार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में रामलीला मैदान में बड़ी रैली होने से पुराने दिल्ली के बाजारों में ट्रैफिक और ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। संगठन ने रैली को दिवाली के बाद आयोजित करने या किसी दूसरे स्थान पर कार्यक्रम करने का सुझाव भी दिया था। हालांकि, रैली निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 1 नवंबर को ही हुई। Rahul Gandhi ने बीजेपी पर लगाया दुकानें बंद करवाने का आरोप रैली के बाद राहुल गांधी कनॉट प्लेस पहुंचे और वहां स्थानीय बाजारों में खरीदारी करने की अपील की। उन्होंने लोगों से छोटे दुकानदारों और स्थानीय कारोबारियों का समर्थन करने को कहा। इस दौरान राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में बीजेपी ने दुकानें जबरन बंद करवाई हैं। उनका कहना था कि रैली में आए लोगों को बाजारों में खरीदारी करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। वहीं, व्यापारियों के नुकसान के दावों पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सवाल उठाए। उन्होंने कारोबार अच्छा रहने की बात कही। इस तरह बाजारों...

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