राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक लाल किला इस समय एक खास आयोजन का गवाह बन रहा है – विक्रमोत्सव 2025।
यह तीन दिवसीय भव्य आयोजन 12 अप्रैल से 14 अप्रैल तक चलेगा, जिसका उद्देश्य है मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सम्राट विक्रमादित्य के योगदान को राष्ट्रीय मंच पर लाना।
पहले दिन का भव्य शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत शनिवार शाम को हुई, जहां उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इसका शुभारंभ किया। उनके साथ मौजूद थे:
- मप्र के राज्यपाल मंगू भाई पटेल
- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता
- केन्द्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत
इसके अलावा मध्यप्रदेश और दिल्ली सरकार के कई मंत्री, भाजपा नेता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।
सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य की प्रस्तुति
पहले दिन मंचन हुआ ‘सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य’ का, जिसमें उनके जन्म से लेकर सम्राट बनने तक की कहानी को भव्य रूप में पेश किया गया।
- 125 कलाकारों ने लिया हिस्सा
- 50 से अधिक सहायक दल
- रथ, पालकी, घोड़े, ऊँट, LED ग्राफिक्स और तीन स्टेज के प्रयोग से नाटक को जीवंत रूप दिया गया।
यह नाट्य सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि हमारे गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का जरिया है।
उपराष्ट्रपति धनखड़ का भावुक संबोधन
अपने भाषण में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा:
“मेरा मन प्रफुल्लित है, भारत एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। जब भारत तेजी से विकसित हो रहा है, तो हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ना और भी जरूरी हो गया है।”
उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने इस आयोजन को “मनमोहक” बना दिया।
आगे क्या है?
13 और 14 अप्रैल को भी लाल किले पर यह महानाट्य जारी रहेगा।
प्रस्तुतियां हर दिन शाम को होंगी, जिसमें सम्राट विक्रमादित्य के विक्रम संवत, राजनीतिक योगदान और धार्मिक दृष्टिकोण को दर्शाया जाएगा।
क्यों खास है Vikramotsav?
आज के युवा को अपने अतीत से जोड़ने का प्रयास है।
यह आयोजन राष्ट्रीय गौरव, इतिहास और परंपरा को जोड़ने की कोशिश है।
दिल्ली जैसे राष्ट्रीय मंच पर मध्यप्रदेश की लोक संस्कृति को जगह मिल रही है।
