“उन्होंने मेरी जान बचाने के लिए अपनी जान दे दी…” – पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए सुशील नथानियल की पत्नी का दर्द
“उन्होंने मेरी जान बचाने के लिए अपनी जान दे दी…” – यह कहते हुए सुशील नथानियल की पत्नी जेनिफर की आवाज भर आई, आंखें छलक उठीं और शब्द गले में अटक गए। सुशील, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में जान गंवाने वाले इंदौर के एलआईसी अधिकारी थे।
जेनिफर ने बताया कि हमले के वक्त आतंकियों ने सुशील के सीने पर बंदूक रखकर कहा – “कलमा पढ़ो।” सुशील ने जवाब दिया – “मैं क्रिश्चियन हूं, मुझे कलमा पढ़ना नहीं आता।” इतना कहना ही था कि आतंकी ने उन्हें धक्का दिया और सीने पर गोली मार दी। सुशील की मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है।
हमले में जेनिफर के अलावा उनका बेटा ऑस्टिन और बेटी आकांक्षा भी मौजूद थे। बेटी आकांक्षा को गोली लगी, लेकिन वो बच गईं। सुशील का पार्थिव शरीर बुधवार रात श्रीनगर से दिल्ली होते हुए इंदौर लाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एयरपोर्ट पर श्रद्धांजलि दी और परिवार से मुलाकात कर हरसंभव मदद का भरोसा दिया।
बेटे ऑस्टिन ने बताया कि हमले के दौरान आतंकियों की उम्र महज़ 15 से 16 साल रही होगी। वे सिर पर कैमरे लगाकर आए थे, कुछ सेल्फी भी ले रहे थे। “वे हर किसी से पूछ रहे थे – ‘मुस्लिम हो?’ अगर जवाब ‘नहीं’ मिला तो गोली मार देते। एक युवक से कलमा पढ़ने को कहा, पढ़ने के बाद उसकी जांच की और कहा – ‘तेरा खतना नहीं हुआ है’ – फिर गोली मार दी।”

यह बर्बर हमला 22 अप्रैल को दोपहर 2:45 बजे बैसारन घाटी में हुआ था। इसमें इटली और इजराइल के नागरिकों समेत कुल 27 पर्यटक मारे गए। अन्य मृतक मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और ओडिशा से थे।
सुशील की पत्नी जेनिफर खातीपुरा के एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं। बेटी आकांक्षा सूरत में बैंक ऑफ बड़ौदा में फर्स्ट क्लास ऑफिसर है, जबकि बेटा ऑस्टिन बैडमिंटन खिलाड़ी है। परिवार मूल रूप से जोबट का रहने वाला है।
