Nepal में 5 मार्च 2026 को देश का पहला आम चुनाव (General Election) हो रहा है, जो पिछले साल Gen‑Z आंदोलन (Gen Z-led protests) के बाद आयोजित किया गया। यह चुनाव सिर्फ़ राजनीतिक नहीं बल्कि युवा शक्ति और भविष्य की दिशा तय करने वाला मोड़ भी माना जा रहा है।
Gen‑Z Movement के बाद वोटिंग का अनुभव
देशभर में मतदान सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक जारी है। इस बार लगभग 1.89 करोड़ मतदाता (18.9 million) अपना वोट दे रहे हैं। चुनाव 275 सीटों वाली संसद के लिए हो रहा है:
- 165 सीटें प्रत्यक्ष (FPTP) प्रणाली से
- 110 सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व (Proportional Representation) से
यह चुनाव इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि Gen‑Z आंदोलन के बाद यह पहला बड़ा लोकतांत्रिक मुकाबला है। उस आंदोलन में युवाओं ने भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और पारदर्शिता की कमी के खिलाफ आवाज़ उठाई थी, जिससे प्रधानमंत्री K.P. शर्मा ओली की सरकार गिर गई थी।
Lumbini Booth Clash और फायरिंग
अधिकांश मतदान केंद्रों पर प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही, लेकिन लुंबिनी प्रांत के ओखलादूंगा जिले में एक मतदान केंद्र पर झड़प और 13 राउंड फायरिंग की घटनाएँ हुईं।
- झड़प के बाद मतदान अस्थायी रूप से रोका गया।
- स्थानीय लोग अस्पताल निर्माण और अन्य मांगों को लेकर नाराज़ थे।
- पुलिस और सेना ने स्थिति को नियंत्रित किया।
यह घटना यह दिखाती है कि चुनाव में अभी भी कुछ क्षेत्रों में स्थानीय तनाव मौजूद है, लेकिन अधिकांश स्थानों पर मतदान सुरक्षित और शांतिपूर्ण रहा।
युवा मतदाता और Gen‑Z का असर
इस चुनाव में युवा मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। युवा मतदाता इसे केवल वोटिंग नहीं बल्कि अपनी आवाज़ का माध्यम मान रहे हैं।
- शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक दोपहर तक लगभग 18% मतदान दर्ज हुआ।
- युवाओं की भागीदारी से यह चुनाव परंपरागत राजनीतिक धारणाओं और नए विचारों के बीच टक्कर बन गया है।
यह दिखाता है कि Gen‑Z आंदोलन ने नेपाल की राजनीति में नई उम्मीदें जगाई हैं।
राजनीतिक मुकाबला: पुराना बनाम नया
इस चुनाव में पारंपरिक दलों — नेपाली कांग्रेस, CPN‑UML, CPN‑Maoist Centre — के अलावा युवा‑आधारित नए राजनीतिक चेहरे भी सामने आ रहे हैं।
- सबसे चर्चित चेहरा है रैपर‑टर्न‑राजनीतिज्ञ Balendra “Balen” Shah, जो युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं।
- बालेन भ्रष्टाचार और बेरोज़गारी जैसी समस्याओं के समाधान के लिए नए दृष्टिकोण ला रहे हैं।
- पुराने नेता जैसे K.P. शर्मा ओली इस बदलाव की चुनौती का सामना कर रहे हैं।
युवा और मध्यवर्ग मतदाता बदलाव की चाह रखते हैं और यह चुनाव उनके लिए भविष्य की दिशा तय करने वाला क्षण है।
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