देश में Voter List Revision को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी वोटर लिस्ट की विशेष गहन समीक्षा प्रक्रिया को अवैध नहीं माना जा सकता। कोर्ट के इस फैसले के बाद चुनाव आयोग को बड़ी राहत मिली है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चुनाव आयोग को संविधान के तहत मतदाता सूची को सही और अपडेट रखने का अधिकार है। यदि किसी व्यक्ति का नाम गलत तरीके से जुड़ा है, दो जगह दर्ज है या वह पात्र नहीं है, तो आयोग उसे हटाने की कार्रवाई कर सकता है।
चुनाव आयोग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में चलाए गए अभियान के दौरान करीब 7.41 करोड़ नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। इनमें मृत मतदाता, डुप्लीकेट एंट्री और स्थान बदल चुके लोगों के नाम शामिल बताए गए हैं।
हालांकि, इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने सवाल भी उठाए हैं। कई नेताओं का कहना है कि बड़े पैमाने पर नाम हटने से असली मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। वहीं चुनाव आयोग का दावा है कि पूरी प्रक्रिया नियमों और जांच के बाद ही की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वोटर लिस्ट का सही और पारदर्शी होना लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है। इससे चुनाव प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और विश्वसनीय बनती है।
