मध्य प्रदेश में NEET री-एग्जाम के दौरान सामने आई एक घटना ने पूरे परीक्षा सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिर्फ 30 सेकंड की देरी की वजह से कई छात्रों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिला और उनकी परीक्षा छूट गई। गेट के बाहर घंटों तक रोते-बिलखते छात्र और परेशान परिजन प्रशासन से गुहार लगाते रहे, लेकिन नियमों के आगे किसी की एक नहीं चली।
Madhya Pradesh के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर यह मामला सामने आने के बाद माहौल काफी तनावपूर्ण और भावुक हो गया।
30 सेकंड की देरी बनी जिंदगी का बड़ा झटका
रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ छात्र परीक्षा केंद्र पर तय समय से बेहद मामूली—सिर्फ 30 सेकंड—देरी से पहुंचे थे। लेकिन गेट पहले ही बंद कर दिया गया था। नियमों के अनुसार, एक बार प्रवेश बंद होने के बाद किसी भी अभ्यर्थी को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।
इस सख्ती के चलते कई छात्रों को बिना परीक्षा दिए ही लौटना पड़ा, जिससे उनका भविष्य और मानसिक स्थिति दोनों पर गहरा असर पड़ा है।
गेट के बाहर दर्दनाक दृश्य, परिजनों की आखिरी कोशिश
परीक्षा केंद्रों के बाहर जो दृश्य देखने को मिला, वह बेहद भावुक कर देने वाला था। छात्र गेट के सामने हाथ जोड़कर अंदर जाने की गुहार लगाते रहे। कई परिजन सुरक्षा कर्मियों और अधिकारियों से आखिरी उम्मीद के साथ अनुरोध करते रहे।
लेकिन परीक्षा नियमों की सख्ती के चलते किसी को भी अंदर प्रवेश नहीं मिला।
नंगे पैर परीक्षा और धार्मिक प्रतीकों पर विवाद
कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि सुरक्षा जांच के दौरान उन्हें जूते-चप्पल उतारकर नंगे पैर परीक्षा हॉल में जाना पड़ा। वहीं कुछ मामलों में कलावा हटवाने जैसी बातें भी सामने आईं, जिससे अभ्यर्थियों में नाराजगी और बढ़ गई।
इन घटनाओं ने परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सख्त नियम या मानवीय दृष्टिकोण? शुरू हुई बहस
इस घटना के बाद एक नई बहस तेज हो गई है कि क्या राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में इतनी सख्ती जरूरी है या फिर कुछ मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
प्रशासन का कहना है कि NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त नियम अनिवार्य हैं। वहीं दूसरी ओर, अभिभावकों का कहना है कि इतनी छोटी सी देरी पर छात्रों का भविष्य दांव पर लगना उचित नहीं है।
सोशल मीडिया पर भी उठा तूफान
यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। कई लोगों ने छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई है और नियमों में थोड़ी लचीलापन की मांग की है। वहीं कुछ लोग इसे परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं।
हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

