भोपाल मेट्रो के यात्रियों के लिए जल्द ही बड़ी राहत मिलने वाली है। मेट्रो की रफ्तार बढ़ाने और संचालन को अधिक सुगम बनाने के लिए लगाए गए नए सिग्नलिंग सिस्टम की जांच शुरू हो गई है। इसी सिलसिले में कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम भोपाल पहुंची और बुधवार को ट्रैक पर उतरकर विस्तृत निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान एक दिलचस्प नजारा भी देखने को मिला, जब रानी कमलापति स्टेशन और एमपी नगर स्टेशन के बीच पहली बार दो मेट्रो ट्रेनें एक ही ट्रैक पर आमने-सामने खड़ी नजर आईं। करीब 30 मिनट तक विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जांच की गई।

सिग्नलिंग सिस्टम की हुई कड़ी परीक्षा
मेट्रो अधिकारियों के अनुसार यह पूरा अभ्यास सिग्नलिंग सिस्टम की सुरक्षा और कार्यक्षमता परखने का हिस्सा था। जांच टीम ने देखा कि यदि दो ट्रेनें आमने-सामने आ जाएं तो सिस्टम किस तरह प्रतिक्रिया देता है।
इसके अलावा अचानक ब्रेक लगने, गति नियंत्रण, ट्रेन के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने और आपातकालीन परिस्थितियों में सिस्टम के व्यवहार की भी जांच की गई।
निरीक्षण के बाद मिलेगी ‘ओके’ रिपोर्ट
मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि निरीक्षण पूरा होने के बाद CMRS की टीम अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। यदि रिपोर्ट संतोषजनक रही तो नए सिग्नलिंग सिस्टम को शुरू करने की मंजूरी मिल जाएगी।
इसके बाद मेट्रो का नया संचालन शेड्यूल और टाइमिंग जारी की जाएगी। संभावना है कि जुलाई से यात्रियों को बेहतर और तेज सेवा मिलना शुरू हो जाएगी।
26 जून से सामान्य समय पर चलेगी मेट्रो
मेट्रो प्रबंधन के मुताबिक परीक्षण कार्य पूरा होने के बाद 26 जून से मेट्रो अपने निर्धारित समय पर संचालन शुरू कर देगी।
सुभाष नगर से एम्स तक लगभग 7 किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का कार्य पूरा हो चुका है।
अभी एक ही ट्रैक पर चल रही है मेट्रो
फिलहाल भोपाल और इंदौर मेट्रो में आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह लागू नहीं होने के कारण ट्रेनों का संचालन केवल एक ट्रैक पर किया जा रहा है।
यही वजह है कि भोपाल मेट्रो की फ्रिक्वेंसी करीब 75 मिनट है और यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। वर्तमान में ट्रेन जिस ट्रैक से जाती है, उसी ट्रैक से वापस भी लौटती है।

800 करोड़ रुपये की परियोजना
मेट्रो की परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से सिग्नलिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है। यह करीब 30 किलोमीटर लंबे नेटवर्क के लिए तैयार किया जा रहा है, जिसका पहला चरण अब पूरा हो चुका है।
भोपाल मेट्रो में वही अत्याधुनिक सिग्नलिंग तकनीक लागू की जा रही है, जिसका उपयोग Delhi Metro में किया जाता है।
दिल्ली मेट्रो जैसी आधुनिक तकनीक
इस तकनीक के लागू होने के बाद ट्रेनें दोनों ट्रैक पर संचालित हो सकेंगी, ट्रेनों के बीच का अंतर कम होगा और यात्रियों को कम समय में मेट्रो उपलब्ध हो सकेगी।
यात्रियों को क्या होगा फायदा?
नए सिग्नलिंग सिस्टम के शुरू होने के बाद:
- मेट्रो दोनों ट्रैक पर संचालित होगी।
- 75 मिनट का लंबा अंतराल कम होगा।
- ट्रेनों की संख्या और फेरे बढ़ेंगे।
- सुबह और शाम के ऑफिस टाइम में बेहतर सुविधा मिलेगी।
- यात्रियों का इंतजार कम होगा।
- पूरी क्षमता के साथ मेट्रो संचालन संभव हो सकेगा।
भोपाल मेट्रो के इस तकनीकी अपग्रेड को शहर के सार्वजनिक परिवहन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे आने वाले समय में हजारों यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा।
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