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Khamenei Funeral: 13 देशों ने अंतिम संस्कार से बनाई दूरी, क्या Trump के दबाव का असर? जानिए पूरा मामला

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ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 13 देशों ने इस समारोह में अपने शीर्ष प्रतिनिधि नहीं भेजे, जिसके बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या इसके पीछे अमेरिका और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति या कूटनीतिक दबाव का असर है।

हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि इन देशों ने केवल अमेरिकी दबाव की वजह से दूरी बनाई।

क्यों चर्चा में है यह मामला?

रिपोर्ट्स के अनुसार, कई देशों ने अंतिम संस्कार में उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजा। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि अमेरिका की ईरान नीति और पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों का इस फैसले पर असर पड़ा हो सकता है।

क्या वाकई Trump का दबाव था?

अब तक अमेरिका की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिसमें यह कहा गया हो कि देशों पर अंतिम संस्कार में शामिल न होने का दबाव बनाया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश का प्रतिनिधिमंडल भेजना या न भेजना उसके अपने कूटनीतिक, सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े निर्णयों पर भी निर्भर करता है। इसलिए इसे केवल एक कारण से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।

किन देशों ने दूरी बनाई?

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि 13 देशों ने उच्च-स्तरीय प्रतिनिधि नहीं भेजे। हालांकि, सभी देशों की आधिकारिक सूची और उनके फैसले के कारण अलग-अलग हो सकते हैं। कई देशों ने अभी तक इस विषय पर सार्वजनिक रूप से विस्तृत टिप्पणी नहीं की है।

मध्य पूर्व की राजनीति पर असर

ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। ऐसे में खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कूटनीतिक संकेतों को भी वैश्विक राजनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में विभिन्न देशों की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं इस मुद्दे को और स्पष्ट कर सकती हैं।

Manya

manyajadoun42@gmail.com

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UPI

UPI Charges Update: ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% फीस, दिवाली तक टला फैसला

UPI Transaction Charges में डिजिटल पेमेंट करने वाले दुकानदारों और कारोबारियों के लिए UPI चार्ज से जुड़ा अहम अपडेट सामने आया है। ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस लगाने की व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होनी थी, लेकिन त्योहारी सीजन को देखते हुए इसे दिवाली तक टालने की जानकारी सामने आई है। इससे त्योहारों के दौरान डिजिटल पेमेंट करने वाले कारोबारियों को फिलहाल राहत मिल सकती है। हालांकि, इस फैसले से जुड़ी नई तारीख और लागू होने वाली शर्तों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। इसलिए ग्राहकों और दुकानदारों को किसी भी बदलाव से पहले संबंधित दिशानिर्देशों पर ध्यान देना चाहिए। UPI Payment Charges: क्या है पूरा मामला? आज देश में छोटी दुकानों से लेकर बड़े शोरूम तक UPI के जरिए भुगतान किया जाता है। सब्जी खरीदने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग और बड़े बिलों का भुगतान करने तक, QR कोड स्कैन करना लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है। इसी बीच ₹2,000 से ज्यादा के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की चर्चा है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने वाली थी, लेकिन दिवाली के दौरान बाजार में बढ़ने वाली खरीदारी और डिजिटल लेनदेन को देखते हुए इसे आगे बढ़ाने की बात कही गई है। यहां समझना जरूरी है कि MDR का संबंध कारोबारी भुगतान से है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर UPI यूजर को पैसे भेजने या प्राप्त करने पर अतिरिक्त फीस देनी होगी। क्या PhonePe और Google Pay से पेमेंट करना होगा महंगा? UPI चार्ज की खबर सामने आने के बाद कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या PhonePe, Google Pay और दूसरे UPI ऐप से भुगतान करने पर अब अतिरिक्त पैसे देने होंगे। फिलहाल आम ग्राहकों को यह समझना चाहिए कि प्रस्तावित मर्चेंट चार्ज और व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI ट्रांसफर अलग-अलग हैं। सामान्य P2P ट्रांजैक्शन पर इस तरह का MDR लागू नहीं होता। इसी तरह, निर्धारित नियमों के तहत आने वाले छोटे मूल्य के मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी इस चार्ज से बाहर रह सकते हैं। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि ₹2,000 से अधिक का हर UPI पेमेंट महंगा हो जाएगा। दुकानदारों को क्यों मिल सकती है राहत? दिवाली के समय बाजारों में ग्राहकों की भीड़ बढ़ जाती है। कपड़े, मिठाई, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल और घरेलू सामान की दुकानों पर डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ता है। ऐसे में ट्रांजैक्शन चार्ज से जुड़े फैसले को आगे बढ़ाने से कारोबारियों को त्योहार के दौरान भुगतान व्यवस्था में बदलाव के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है। खासकर छोटे दुकानदारों के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके कारोबार में UPI पेमेंट की बड़ी भूमिका होती है। हालांकि, चार्ज किस पर और किन शर्तों के तहत लागू होगा, यह संबंधित आधिकारिक नियमों पर निर्भर करेगा। UPI Transaction Fee: कब लागू होगा नया नियम? ₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस से जुड़े फैसले को दिवाली तक टालने की खबर सामने आई है। लेकिन नई लागू तारीख और अंतिम नियमों की पुष्टि आधिकारिक घोषणा से ही की जानी चाहिए। इसलिए ग्राहकों और कारोबारियों को फिलहाल किसी भी अपुष्ट जानकारी के आधार पर यह नहीं मानना चाहिए कि सभी UPI पेमेंट पर चार्ज लगने वाला है। UPI यूजर्स के लिए जरूरी सलाह UPI ने देश में डिजिटल भुगतान को आसान और तेज बनाया है। ऐसे में चार्ज से जुड़ी किसी भी नई व्यवस्था का असर समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि नियम किस प्रकार के ट्रांजैक्शन पर लागू होता है। आम यूजर्स को अपने सामान्य डिजिटल पेमेंट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। वहीं, दुकानदारों को किसी भी संभावित चार्ज के बारे में अपने बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर से जानकारी लेनी चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
SIR

Patna SIR Protest: पटना में छात्रों का हंगामा, बैरिकेडिंग तोड़ी; छात्राओं को खींचकर ले जाने का आरोप

बिहार की राजधानी पटना (Patna) में SIR (Special Intensive Revision) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में सड़क पर उतरे छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की खबर सामने आई। वहीं, पुलिस की गाड़ी की चाबी लेकर भागने और प्रदर्शन कर रही छात्राओं को खींचकर ले जाने के आरोपों ने भी इस मामले को चर्चा में ला दिया है। प्रदर्शन की इन घटनाओं के बीच अब पुलिस की कार्रवाई और SIR की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर सबकी नजर है। Patna में SIR के खिलाफ प्रदर्शन, सड़क पर उतरे छात्र पटना में SIR के विरोध में छात्रों और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की नाराजगी मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलती से मतदाता सूची से न हटे। SIR यानी Special Intensive Revision का उद्देश्य मतदाता सूची की विशेष जांच और उसे अपडेट करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। Protest के दौरान टूटी बैरिकेडिंग, पुलिस से टकराव प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी। इसके बाद मौके पर तनाव बढ़ गया और पुलिस के साथ टकराव की स्थिति बन गई। इसी दौरान पुलिस की गाड़ी की चाबी लेकर भागने की घटना भी सामने आई है। हालांकि, इस घटना की परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों के बारे में आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। छात्राओं को खींचकर ले जाने का आरोप पटना में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि प्रदर्शन कर रही कुछ छात्राओं को पुलिसकर्मी खींचकर वहां से ले गए। इस घटना को लेकर प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार पर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, छात्राओं की संख्या, उन्हें हिरासत में लिए जाने की स्थिति और इस मामले में पुलिस का पक्ष स्पष्ट होने के बाद ही घटनाक्रम की पूरी जानकारी सामने आएगी। क्या है SIR और क्यों हो रहा है इसका विरोध? SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision है। यह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाताओं के विवरण की जांच की जाती है और सूची को अपडेट किया जाता है। इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे संगठनों की प्रमुख चिंता यह है कि जांच के दौरान किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए। उनका जोर पारदर्शिता, सही दस्तावेजों और मतदाताओं को अपनी शिकायत दर्ज कराने का उचित अवसर देने पर है। वहीं, मतदाता सूची को अपडेट करना चुनावी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। ऐसे में इस मुद्दे पर स्पष्ट दिशा-निर्देश और शिकायतों का समय पर समाधान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Patna Protest के बाद पुलिस की कार्रवाई पर नजर पटना में SIR के खिलाफ हुए इस प्रदर्शन के बाद अब पुलिस की कार्रवाई और घटनास्थल से सामने आने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी। बैरिकेडिंग तोड़ने, पुलिस की गाड़ी की चाबी लेकर भागने और छात्राओं को खींचकर ले जाने के आरोपों की पुष्टि के लिए आधिकारिक बयान और उपलब्ध वीडियो अहम होंगे। फिलहाल, इस घटना से जुड़ी सभी जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष और हिरासत से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Today: सेंसेक्स 600 अंक उछला, Nifty में 200 अंकों की तेजी; IT और Banking Stocks में खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में मंगलवार, 13 अक्टूबर को कारोबार के दौरान अच्छी तेजी देखने को मिली। शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स ने जोरदार वापसी की और 600 अंकों से ज्यादा की बढ़त दर्ज की। वहीं, निफ्टी भी करीब 200 अंक चढ़ गया। IT और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी बढ़ने से बाजार को सहारा मिला। सुबह करीब 10 बजे BSE Sensex 72,500 के ऊपर कारोबार कर रहा था, जबकि NSE Nifty 50 भी 22,500 के पार पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों को राहत मिली। हालांकि, कई शेयरों में बिकवाली जारी रहने से बाजार की तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं रही। Sensex-Nifty में तेजी, निवेशकों को मिली राहत शेयर बाजार में मंगलवार को खरीदारी का माहौल मजबूत होता दिखाई दिया। सेंसेक्स करीब 660 अंक चढ़कर 72,585 के आसपास पहुंच गया। दूसरी ओर, निफ्टी में लगभग 202 अंकों की बढ़त दर्ज की गई और यह 22,565 के स्तर के करीब कारोबार करता नजर आया। पिछले सत्रों में बाजार पर दबाव देखने को मिला था। ऐसे में प्रमुख सूचकांकों में आई इस तेजी ने निवेशकों को कुछ राहत दी। हालांकि, बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। IT Stocks में सबसे ज्यादा हलचल मंगलवार को IT सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। HCL Technologies और Tata Consultancy Services (TCS) के शेयरों में मजबूत बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा Infosys और Tech Mahindra के शेयरों पर भी निवेशकों की नजर रही। IT कंपनियों के तिमाही नतीजों और कारोबार से जुड़े अपडेट का असर शेयरों पर दिखाई दिया। खासकर HCLTech के नतीजों से जुड़ी सकारात्मक खबरों ने सेक्टर में खरीदारी को बढ़ावा दिया। IT शेयरों में आई तेजी ने सेंसेक्स और निफ्टी को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई। Banking Stocks ने भी दिया बाजार का साथ IT शेयरों के साथ बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में भी निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई। HDFC Bank, State Bank of India (SBI), Bajaj Finance और Bajaj Finserv जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। बैंकिंग शेयरों में बढ़त का असर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर भी पड़ा। हालांकि, सभी सेक्टरों में एक जैसी तेजी नहीं रही। कुछ शेयरों में कमजोरी बनी रही, जिससे पता चलता है कि निवेशक चुनिंदा कंपनियों में ही पैसा लगा रहे थे। रुपये की मजबूती से बाजार को सहारा शेयर बाजार के अलावा मुद्रा बाजार में भी हलचल देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती से निवेशकों की धारणा को कुछ समर्थन मिला। रुपये की चाल पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कदमों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और डॉलर की वैश्विक स्थिति का असर पड़ता है। हालांकि, आने वाले दिनों में रुपये की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक हालात पर निर्भर करेगी। महंगाई और कच्चे तेल पर भी रहेगी नजर बाजार में तेजी के बावजूद निवेशकों की चिंताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। खुदरा महंगाई, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे समय में कंपनियों के तिमाही नतीजे भी महत्वपूर्ण हैं। बेहतर नतीजे पेश करने वाली कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाले शेयरों पर दबाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? सेंसेक्स और निफ्टी में आई तेजी बाजार के लिए राहत की खबर है, लेकिन इसे लगातार तेजी की गारंटी नहीं माना जा सकता। बाजार में निवेश करने से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, शेयर की कीमत और उससे जुड़े जोखिमों को समझना जरूरी है। कुल मिलाकर, 13 अक्टूबर को IT और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के दम पर भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती दिखाई। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि बाजार अपनी बढ़त को कितना बरकरार रखता है और आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेत किस तरह असर डालते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold Rate

Gold Rate Today: सोने की कीमत में बड़ी गिरावट, 10 ग्राम का भाव ₹1.48 लाख; ₹1.55 लाख तक जाने का अनुमान

Gold Rate में गिरावट से उन लोगों को थोड़ी राहत मिली है, जो गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं। पिछले दो दिनों में सोना करीब ₹1,750 सस्ता हुआ है। इसके बाद 10 ग्राम सोने का भाव लगभग ₹1.48 लाख पर आ गया है। हालांकि, कीमतों में इस गिरावट के बीच बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले समय में सोना फिर महंगा हो सकता है और इसका भाव ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। ऐसे में सोना खरीदने वालों के मन में सवाल है कि क्या मौजूदा गिरावट खरीदारी का सही मौका है या आने वाले दिनों में कीमतें और नीचे जा सकती हैं? आइए जानते हैं सोने के ताजा भाव और आगे की संभावनाओं के बारे में। Gold Rate Today: दो दिन में ₹1,750 की गिरावट Gold Rate में पिछले दो दिनों के दौरान करीब ₹1,750 की कमी आई है। इससे 10 ग्राम सोने का भाव लगभग ₹1.48 लाख रह गया है। कीमतों में इस बदलाव का असर उन लोगों के बजट पर पड़ सकता है, जो शादी-ब्याह या किसी खास मौके के लिए सोने के गहने खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, खरीदारी से पहले यह समझना जरूरी है कि बाजार में सोने का भाव उसकी शुद्धता और शहर के हिसाब से अलग हो सकता है। 24 कैरेट सोना आमतौर पर निवेश के लिए खरीदा जाता है, जबकि गहने बनाने में 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल अधिक होता है। इसके अलावा, गहनों की अंतिम कीमत में मेकिंग चार्ज और लागू टैक्स भी शामिल होते हैं। इसलिए केवल सोने का बाजार भाव देखकर खरीदारी का बजट तय करना पर्याप्त नहीं है। Gold Price Prediction: ₹1.55 लाख तक पहुंच सकता है सोना सोने की कीमतों में आई गिरावट के बावजूद बाजार में आगे तेजी की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, आने वाले समय में 10 ग्राम सोने का भाव ₹1.55 लाख तक पहुंच सकता है। हालांकि, यह एक अनुमान है, निश्चित भविष्यवाणी नहीं। सोने की कीमतों में तेजी या गिरावट कई कारकों पर निर्भर करती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति, अमेरिकी डॉलर की चाल, ब्याज दरों से जुड़ी नीतियां और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता सोने के भाव को प्रभावित कर सकती हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग बढ़ती है, तो इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। दूसरी ओर, बाजार की परिस्थितियां बदलने पर कीमतों में और गिरावट भी संभव है। Gold Price का आम लोगों के बजट पर क्या असर पड़ेगा? भारत में सोना खरीदना केवल निवेश का मामला नहीं है। शादियों, त्योहारों और पारिवारिक समारोहों में भी सोने के गहनों की खास जगह होती है। ऐसे में कीमतों में होने वाला बदलाव सीधे खरीदारों के बजट को प्रभावित करता है। दो दिनों में ₹1,750 की गिरावट उन लोगों के लिए राहत की खबर हो सकती है, जो लंबे समय से सोने के भाव कम होने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, खरीदारी का फायदा कितना होगा, यह खरीदे जाने वाले सोने की मात्रा, शुद्धता और गहनों के मेकिंग चार्ज पर भी निर्भर करेगा। यही वजह है कि सोना खरीदने से पहले अलग-अलग दुकानों के भाव की तुलना करना और बिल में सभी शुल्कों की जानकारी लेना जरूरी है। क्या अभी Gold खरीदना सही रहेगा? अगर आप शादी या किसी जरूरी पारिवारिक कार्यक्रम के लिए सोना खरीदने वाले हैं, तो अपनी जरूरत और बजट को प्राथमिकता दें। केवल इस उम्मीद में खरीदारी टालना कि कीमतें और गिरेंगी, हमेशा सही फैसला नहीं हो सकता। वहीं, निवेश के लिए सोना खरीदने वालों को बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव को समझना चाहिए। एक-दो दिन की गिरावट को कीमतों में लगातार कमी का संकेत मानना ठीक नहीं है। इसी तरह, भविष्य में भाव बढ़ने के अनुमान के आधार पर जल्दबाजी में निवेश करना भी जोखिम भरा हो सकता है। खरीदारी के समय इन बातों का ध्यान रखें: आगे क्या होगा सोने की कीमतों का? फिलहाल सोने का भाव करीब ₹1.48 लाख प्रति 10 ग्राम पर आने से खरीदारों को कुछ राहत मिली है। वहीं, कीमतों के ₹1.55 लाख तक पहुंचने का अनुमान यह संकेत देता है कि बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। आने वाले दिनों में सोना सस्ता होगा या महंगा, यह अंतरराष्ट्रीय बाजार और आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। ऐसे में खरीदारों के लिए बेहतर यही है कि वे ताजा कीमतों पर नजर रखें और अपनी जरूरत के मुताबिक फैसला लें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rahul Gandhi

Rahul Gandhi Meeting: CEC के खिलाफ Protest तेज, INDIA ब्लॉक की नई रणनीति

चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच जारी विवाद अब और तेज होता नजर आ रहा है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। इसी बीच राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के नेताओं को चाय पर चर्चा के लिए अपने आवास पर बुलाया है। इस बैठक में चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों, SIR प्रक्रिया और आगे के विरोध प्रदर्शन की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। इससे पहले सोमवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया था। प्रदर्शन के बाद पुलिस कार्रवाई और FIR दर्ज होने को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी और वोटरों के नाम हटाए जाने से जुड़े सवालों का जवाब मिलना चाहिए। वहीं, चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया का बचाव किया है। Rahul Gandhi की High Tea Meeting में क्या होगा? Rahul Gandhi ने INDIA ब्लॉक के सांसदों और अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों को बैठक के लिए आमंत्रित किया है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार विरोध दर्ज करा रहा है। बैठक में SIR यानी Special Intensive Revision, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर चर्चा हो सकती है। विपक्षी दल आगे आंदोलन जारी रखने या कानूनी रास्ते से अपनी मांग उठाने को लेकर भी रणनीति बना सकते हैं। हालांकि, बैठक में कौन-कौन से फैसले लिए जाएंगे, यह चर्चा पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। Supreme Court March: राहुल गांधी के साथ कई विपक्षी नेता सड़क पर उतरे सोमवार, 12 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के कई नेताओं ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। इस प्रदर्शन में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और दूसरे विपक्षी नेताओं के शामिल होने की खबरें सामने आईं। प्रदर्शन के दौरान विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। नेताओं ने मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने और SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की। विपक्ष का कहना है कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच जरूरी है। मार्च के बाद विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त याचिका भी दाखिल की। इसमें चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को उठाया गया है। SIR Controversy: मतदाता सूची को लेकर क्यों बढ़ा विवाद? SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision है। इसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची की जांच और संशोधन की प्रक्रिया चलाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना है, लेकिन इसे लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर सवाल हैं। उनका कहना है कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम सूची से नहीं हटना चाहिए और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। आयोग के अनुसार, मतदाता सूची में नाम जोड़ने या संशोधन कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया मौजूद है। ऐसे में SIR को लेकर जारी विवाद अब राजनीतिक मंच के साथ-साथ कानूनी स्तर पर भी पहुंच गया है। Opposition Protest पर FIR, पुलिस की कार्रवाई से बढ़ी हलचल सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले गए मार्च के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़े मामलों में FIR दर्ज की हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग, सड़क पर नारे लिखने और प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन जैसे आरोपों की जांच की जा रही है। अलग-अलग रिपोर्ट्स में FIR की संख्या को लेकर अंतर सामने आया है। इसलिए सभी मामलों की संख्या और उनमें लगाए गए आरोपों को अलग-अलग समझना जरूरी है। विपक्ष ने इन प्रदर्शनों के जरिए चुनाव आयोग से जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग की है। वहीं, पुलिस का पक्ष है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई। FIR दर्ज होना अपने आप में किसी आरोप को साबित नहीं करता; मामलों का निपटारा कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा। आठ दिनों में कई प्रदर्शन, दिल्ली में जारी है सियासी हलचल CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। विपक्षी दलों के अलावा सामाजिक और छात्र संगठनों के कुछ प्रतिनिधियों ने भी अपनी आवाज उठाई है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर भी पुलिस की कार्रवाई चर्चा में रही। 13 अक्टूबर को प्रदर्शन से जुड़े कुछ नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। इनमें आशुतोष रांका और सौरव दास के नाम भी रिपोर्ट किए गए हैं। वहीं, दिल्ली में प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों और अनुमति से जुड़े नियमों को लेकर भी बहस जारी है। विपक्ष का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, जबकि प्रशासन ने कानून-व्यवस्था और निर्धारित नियमों के पालन पर जोर दिया है। अब आगे क्या करेगा INDIA ब्लॉक? राहुल गांधी की बैठक को मौजूदा विवाद के अगले चरण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्षी दलों के सामने एक ओर सड़कों पर विरोध जारी रखने का विकल्प है, तो दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाने का रास्ता भी है। बैठक के बाद विपक्ष की रणनीति क्या होगी और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सबकी नजर रहेगी। फिलहाल SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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