मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है। US ने लगातार नौवीं रात भी ईरान के कई अहम सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले (Airstrike) किए। इन हमलों के बाद उत्तर-पश्चिमी शहर तबरीज (Tabriz) के मिसाइल क्षेत्र में आग लगने की खबर सामने आई है। इसी बीच इराक में एक अमेरिकी सैनिक की मौत ने हालात को और गंभीर बना दिया है। दोनों घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और दुनिया की नजर इस संघर्ष पर टिकी हुई है।
Tabriz Missile Field में धमाके के बाद लगी आग
ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तबरीज स्थित मिसाइल फील्ड के आसपास देर रात तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं। कुछ ही देर में इलाके से धुएं का बड़ा गुबार उठता दिखाई दिया। स्थानीय प्रशासन ने आग लगने की पुष्टि की है, हालांकि नुकसान कितना हुआ है, इसे लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
रिपोर्टों के अनुसार, तबरीज के अलावा दक्षिणी ईरान के कुछ अन्य सैन्य और रणनीतिक इलाकों में भी हमलों की सूचना मिली है। कई स्थानों पर एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट पर हैं।
अमेरिका ने क्यों बढ़ाए हमले?
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि हाल के ऑपरेशन का मकसद ईरान की मिसाइल क्षमता, ड्रोन नेटवर्क और सैन्य ढांचे को कमजोर करना है। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य अपने सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
हालांकि ईरान ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
Iraq में अमेरिकी सैनिक की मौत से बढ़ा तनाव
इस बीच उत्तरी इराक से आई एक घटना ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। अमेरिकी सेना के मुताबिक, एक सैनिक की मौत उस समय हुई जब वह एक गिराए गए ड्रोन के विस्फोटक अवशेष को निष्क्रिय करने के मिशन में शामिल था। इस हादसे में एक अन्य सैनिक घायल भी हुआ है।
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इस घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा खतरा और बढ़ गया है। इसके तुरंत बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की नई श्रृंखला शुरू कर दी।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ी सुरक्षा, दुनिया की नजर Middle East पर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव का असर अब पूरे खाड़ी क्षेत्र में दिखाई देने लगा है। कई देशों ने अपने सैन्य ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा दी है। वहीं, दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
कूटनीतिक समाधान की राह अब भी मुश्किल
संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए फिलहाल तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। लगातार हो रहे हमले और जवाबी कार्रवाई यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश तनाव कम करने की दिशा में कोई कदम उठाएंगे या फिर यह संघर्ष और व्यापक रूप लेगा।
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