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ED vs TMC: 3 Bank Accounts पर कार्रवाई बरकरार, कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले से बढ़ी ममता की मुश्किलें

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तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बैंक खातों से जुड़े मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट से राहत नहीं मिल पाई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा फ्रीज किए गए पार्टी के तीन बैंक खातों पर फिलहाल रोक जारी रहेगी। कोर्ट के इस फैसले के बाद TMC के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं और अब ED की जांच प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।

ED की कार्रवाई पर हाई कोर्ट का रुख बरकरार

मामला TMC के तीन बैंक अकाउंट्स से जुड़ा है, जिन पर ED ने कथित वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध लेन-देन की जांच के दौरान कार्रवाई की थी। जांच एजेंसी ने इन खातों को फ्रीज कर दिया था, जिसके बाद पार्टी ने इस फैसले को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती दी।

TMC की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि पार्टी के सभी फंड और लेन-देन नियमों के अनुसार दर्ज हैं। पार्टी ने कहा कि बैंक खातों के फ्रीज होने से उसके संगठनात्मक और राजनीतिक कामकाज पर असर पड़ रहा है।

TMC ने लगाए राजनीतिक दबाव के आरोप

तृणमूल कांग्रेस ने ED की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों को परेशान करने के लिए किया जा रहा है।

वहीं, ED का पक्ष है कि यह कार्रवाई जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और एजेंसी केवल वित्तीय लेन-देन से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है।

3 Bank Accounts पर क्यों है ED की नजर?

ED की जांच के तहत TMC के तीन बैंक खातों में मौजूद बड़ी रकम और उससे जुड़े लेन-देन की जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों में जमा धन का स्रोत और इस्तेमाल पूरी तरह नियमों के अनुसार हुआ है या नहीं।

कलकत्ता HC के फैसले के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

कलकत्ता हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में बयानबाजी तेज हो सकती है। TMC और केंद्र सरकार के बीच पहले से चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

फिलहाल ED की कार्रवाई जारी रहेगी और TMC को कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। अब आगे की सुनवाई और जांच की दिशा पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।

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Yukta

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Pentagon

America vs Iran: Pentagon ने पहली बार मानी 100 सैनिकों के घायल होने की बात

America-Iran War लगातार गंभीर होता जा रहा है। अब अमेरिका ने पहली बार आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि हाल के ईरानी हमलों में उसके 100 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग Pentagon ने कहा कि सुरक्षा कारणों और सैन्य अभियानों की संवेदनशीलता को देखते हुए इस जानकारी को तुरंत सार्वजनिक नहीं किया गया था। वहीं, इस खुलासे के बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई तेज करते हुए ईरान के 9 शहरों में एयरस्ट्राइक की है। इन घटनाओं ने पूरे मध्य पूर्व में तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। Pentagon ने देर से क्यों दी जानकारी? पेंटागन के मुताबिक, घायल सैनिकों की संख्या पहले इसलिए साझा नहीं की गई क्योंकि इससे चल रहे सैन्य अभियानों और क्षेत्र में तैनात जवानों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता था। अधिकारियों का कहना है कि अधिकतर सैनिकों को विस्फोटों के कारण सिर और शरीर पर हल्की चोटें आई थीं। कई जवान इलाज के बाद दोबारा अपनी ड्यूटी पर लौट चुके हैं, जबकि कुछ अभी भी मेडिकल निगरानी में हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जानकारी छिपाने का उद्देश्य नहीं था, बल्कि सैन्य सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी था। America ने Iran के 9 शहरों पर किया बड़ा हमला घायल सैनिकों की पुष्टि के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई को और तेज कर दिया। अमेरिकी सेना ने ईरान के 9 शहरों में मौजूद कई अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में मिसाइल लॉन्च साइट्स, ड्रोन बेस, हथियार भंडार, कमांड सेंटर और एयर डिफेंस सिस्टम को लक्ष्य बनाया गया। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का दावा है कि इन एयरस्ट्राइक का मकसद भविष्य में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर होने वाले हमलों को रोकना और ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है। लगातार बढ़ रहा है Middle East का तनाव पिछले कुछ दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच लगातार जवाबी हमले हो रहे हैं। ईरान समर्थित समूहों द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका ने कई चरणों में हवाई कार्रवाई की है। ताजा एयरस्ट्राइक को इसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव इसी तरह जारी रहा तो इसका असर पूरे Middle East की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। दुनिया की नजर America-Iran Conflict पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष को लेकर दुनिया भर के देशों की चिंता भी बढ़ गई है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था भी इससे प्रभावित हो सकती है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। आगे क्या हो सकता है? फिलहाल अमेरिका ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि उसके सैनिकों या सैन्य ठिकानों पर दोबारा हमला होता है तो जवाब पहले से अधिक सख्त होगा। वहीं, ईरान ने भी अमेरिकी एयरस्ट्राइक की आलोचना करते हुए उचित जवाब देने की चेतावनी दी है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में यह टकराव और बढ़ता है या फिर कूटनीतिक प्रयास दोनों देशों के बीच तनाव कम करने में सफल होते हैं। फिलहाल Middle East में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और हर नई सैन्य कार्रवाई वैश्विक राजनीति के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी असर डाल सकती है. हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sonam Wangchuk

Delhi High Court on Sonam Wangchuk: Medanta Shift का आदेश, Health को लेकर बढ़ी चिंता

लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की सेहत को लेकर चल रही चिंताओं के बीच सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। अदालत ने निर्देश दिया कि उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किया जाए। पिछले चार दिनों से वांगचुक सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं और डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर उनके समर्थन में प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए नारेबाजी की और आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखने की बात कही। हाईकोर्ट ने क्यों दिया Medanta शिफ्ट करने का आदेश? Sonam Wangchuk की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टरों की राय रखी गई। इसके बाद कोर्ट ने माना कि बेहतर इलाज और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए उन्हें मेदांता अस्पताल भेजा जाना उचित होगा। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि इलाज की प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी या बाधा न आए। चार दिन से Safdarjung Hospital में भर्ती सोनम वांगचुक पिछले चार दिनों से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं। डॉक्टर लगातार उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए हैं। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, उनकी स्थिति स्थिर है, लेकिन विशेषज्ञों की सलाह को देखते हुए उन्हें अधिक उन्नत चिकित्सा सुविधा वाले अस्पताल में शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया। Jantar Mantar पर समर्थकों का प्रदर्शन जारी वांगचुक के समर्थन में जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोग जुटे हैं। प्रदर्शन में छात्रों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समूहों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है। प्रदर्शन स्थल पर कई बार पुलिस के खिलाफ नारे भी लगाए गए। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे और पूरे इलाके पर नजर रखी गई। आखिर क्यों चर्चा में हैं Sonam Wangchuk? सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख के संवैधानिक अधिकारों, पर्यावरण संरक्षण और हिमालयी पारिस्थितिकी से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं। हाल के दिनों में उनका आंदोलन और स्वास्थ्य, दोनों ही राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद कई सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने बेहतर इलाज की मांग की थी। हाईकोर्ट के ताजा आदेश को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आगे क्या होगा? हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया जाएगा, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर उनकी विस्तृत जांच और आगे का इलाज करेंगे। वहीं, जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन को लेकर प्रशासन भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में उनकी स्वास्थ्य रिपोर्ट और आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम पर सभी की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

कॉकरोच जनता पार्टी’ के समर्थन में मार्च कर रहे 8 सपा सांसद हिरासत में, 2 घंटे बाद रिहा

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के समर्थन में संसद से जंतर-मंतर तक पैदल मार्च कर रहे समाजवादी पार्टी (सपा) के 8 सांसदों को सोमवार को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए सांसदों में डिंपल यादव, इकरा हसन, प्रिया सरोज, रुचि वीरा, धर्मेंद्र यादव समेत अन्य सांसद शामिल थे। करीब दो घंटे बाद सभी को रिहा कर दिया गया। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने बताया कि सभी सांसदों को दोपहर करीब 12:30 बजे हिरासत में लेकर संसद मार्ग स्थित पार्लियामेंट थाने में बैठाया गया, जहां लगभग दो घंटे तक रखने के बाद दोपहर करीब 2:30 बजे छोड़ दिया गया। रिहा होने के बाद सांसद डिंपल यादव ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों ने छात्रों के साथ मारपीट की और उन्हें घसीटा गया। उन्होंने दावा किया कि कुछ छात्राओं ने उनके साथ अभद्र व्यवहार और कपड़े फाड़े जाने की शिकायत भी की। डिंपल यादव ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग दोहराई। समाजवादी पार्टी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों की आवाज उठाने वाले सांसदों को हिरासत में लेना और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संसद परिसर के बाहर कहा कि एक ओर सांसदों को थाने में बैठाया गया, वहीं दूसरी ओर छात्रों पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। इस बीच, उत्तर प्रदेश के कई शहरों में भी नीट पेपर लीक के विरोध और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के समर्थन में सपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। वाराणसी में सपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई, जबकि बीएचयू में छात्रों ने करीब दो घंटे तक प्रदर्शन किया। लखनऊ में विधानसभा घेराव के लिए जा रहे सपा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया। विरोध में कई कार्यकर्ता सड़क पर लेट गए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हटाकर इको गार्डन भेज दिया। वहीं आगरा में जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

स्पेन बना फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 का चैंपियन, अर्जेंटीना को हराकर दूसरी बार जीता खिताब

Sports News: स्पेन ने फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया है। न्यूयॉर्क के न्यू जर्सी स्थित मेटलाइफ स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में स्पेन ने अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। मैच का फैसला एक्स्ट्रा टाइम में हुआ, जहां फेरान टोरेस के निर्णायक गोल ने स्पेन को ऐतिहासिक जीत दिलाई। स्पेन की जीत के बाद 23 वर्षीय मिडफील्डर पेड्री की 13 महीने पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा का विषय बन गई। उन्होंने ट्रॉफी के साथ तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “यह पहले से लिखा था! 190726… वह दिन, जब पूरे देश का सपना सच हुआ। वह दिन, जब हम वर्ल्ड चैंपियन बने।” दरअसल, 10 जून 2025 को पेड्री ने इंस्टाग्राम पर केवल “190726” पोस्ट किया था। अब फैंस इसे 19 जुलाई 2026, यानी वर्ल्ड कप फाइनल की तारीख से जोड़ रहे हैं और इसे उनकी भविष्यवाणी मान रहे हैं। पूरे टूर्नामेंट में पेड्री ने स्पेन के लिए हर मुकाबला खेला और मिडफील्ड में शानदार प्रदर्शन किया। उनकी सटीक पासिंग, खेल पर नियंत्रण और रचनात्मकता ने टीम को लगातार जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। फाइनल मुकाबले में निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमें गोल नहीं कर सकीं। अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज ने कई शानदार बचाव किए, जबकि इंजरी टाइम में एंजो फर्नांडेज़ दूसरे पीले कार्ड के बाद मैदान से बाहर हो गए, जिससे अर्जेंटीना 10 खिलाड़ियों के साथ खेलने को मजबूर हो गया। एक्स्ट्रा टाइम में पहले निको विलियम्स का गोल फाउल के कारण रद्द हुआ, लेकिन 106वें मिनट में निको विलियम्स के हेडर पर फेरान टोरेस ने शानदार फिनिश करते हुए गेंद को गोल में पहुंचा दिया। यही गोल स्पेन की जीत का कारण बना। इस जीत के साथ स्पेन ने 2010 के बाद पहली बार फुटबॉल वर्ल्ड कप जीता। कोच लुइस डे ला फुएंते के नेतृत्व में टीम ने लगातार 38वां अंतरराष्ट्रीय मैच बिना हार के पूरा कर यूरोपीय टीमों का नया रिकॉर्ड भी बनाया। UEFA यूरो 2024 जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे पेड्री ने अब अपने करियर में विश्व कप ट्रॉफी भी जोड़ ली। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

स्मार्ट मीटर और बढ़े बिजली बिलों के विरोध में कांग्रेस का 23 जुलाई को रायपुर में धरना, उपभोक्ताओं से शामिल होने की अपील

Raipur News: छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर और बढ़े हुए बिजली बिलों के मुद्दे पर कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी 23 जुलाई को रायपुर के राजीव गांधी चौक पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन करेगी। प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ स्मार्ट मीटर और बढ़े हुए बिजली बिलों से प्रभावित उपभोक्ता भी शामिल होंगे। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री कन्हैया अग्रवाल और असंगठित क्षेत्र समस्या निवारण प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद सिद्दीक ने बताया कि पार्टी की मांग है कि जिन घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, उन्हें हटाया जाए और नए स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही बढ़े हुए बिजली बिलों की निष्पक्ष जांच कर उपभोक्ताओं को राहत दी जाए। कन्हैया अग्रवाल ने कहा कि यह आंदोलन स्मार्ट मीटर और बढ़े हुए बिजली बिलों से परेशान लोगों की आवाज उठाने के लिए किया जा रहा है। उनका दावा है कि यह प्रदर्शन सरकार को जनता की समस्याओं पर ध्यान देने के लिए मजबूर करेगा। वहीं, मोहम्मद सिद्दीक ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई उपभोक्ताओं के बिजली बिल पहले की तुलना में दो से तीन गुना तक बढ़ गए हैं, जिससे आम और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर से लगातार बढ़े हुए बिजली बिलों की शिकायतें मिल रही हैं। कांग्रेस ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष के निर्देश पर स्मार्ट मीटर हटाने की मांग को लेकर घर-घर अभियान चलाया जा रहा है। कार्यकर्ता लोगों से फॉर्म भरवा रहे हैं और 23 जुलाई के धरना-प्रदर्शन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि वह स्मार्ट मीटर और बिजली बिलों के मुद्दे पर जनता की आवाज सड़क से लेकर सदन तक उठाती रहेगी। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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