कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर अचानक धरना देकर केंद्र सरकार पर छात्रों के मुद्दे को लेकर निशाना साधा। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई पर सरकार जवाब देने से बच रही है। करीब तीन घंटे से अधिक समय तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं को हटाकर धरना समाप्त कराया।
छात्रों के मुद्दे पर कांग्रेस का बदला रुख
20 जून से जंतर-मंतर पर चल रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के आंदोलन से कांग्रेस शुरुआती दौर में दूरी बनाए हुए थी। हालांकि, मानसून सत्र के दौरान छात्रों के मुद्दे और पुलिस कार्रवाई के बाद पार्टी ने अपना रुख बदलते हुए आंदोलन का खुलकर समर्थन करना शुरू किया।
20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सरकार की आलोचना की। प्रियंका गांधी ने छात्रों पर बल प्रयोग को निंदनीय बताया, जबकि राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री पर सवाल उठाए।

गुप्त तरीके से बनाई गई धरने की योजना
रिपोर्ट्स के अनुसार, कांग्रेस ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन की योजना बेहद गोपनीय रखी। पार्टी नेताओं को मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर बुलाया गया, जहां से दोपहर करीब 3:30 बजे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेता पैदल पीएम आवास की ओर बढ़े और वहीं धरने पर बैठ गए।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी मौके पर पहुंचे। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी से बातचीत की कोशिश की, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शन समाप्त कराते हुए नेताओं को वहां से हटाया।
राहुल गांधी ने सरकार से मांगा जवाब
धरने के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कहा कि वे प्रधानमंत्री से छात्रों के साथ हुई कार्रवाई पर जवाब मांगने पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संसद में इस मुद्दे पर चर्चा से बच रही है और छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों पर जवाबदेही तय नहीं कर रही।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस अब छात्रों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर अपनी राजनीतिक रणनीति को नई दिशा देने की कोशिश कर रही है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस आंदोलन का केंद्र छात्रों के मुद्दे को बनाए रखना चाहती है, जबकि अन्य का मानना है कि इससे विपक्ष की राजनीति और आंदोलन दोनों की दिशा प्रभावित हो सकती है।
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