राजस्थान की जोजरी नदी में औद्योगिक प्रदूषण और जल स्रोतों की बिगड़ती स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से पर्यावरणीय नुकसान पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है। साथ ही मुख्य सचिव को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
प्रदूषित पानी से वन्यजीवों पर भी असर
सुप्रीम कोर्ट में पेश हाई लेवल इको-सिस्टम ओवरसाइट कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया कि जोधपुर के तनावड़ा स्थित एक तालाब का पानी गुलाबी हो गया है और वह मानव व पशुओं के उपयोग के लिए अनुपयुक्त है। रिपोर्ट के मुताबिक यदि यह स्थिति बनी रही तो भूजल, कृषि भूमि, वन्यजीव और जनस्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
कमेटी ने जोधपुर की मेलबा, धवा, झंवर और लूणी क्षेत्र में प्रदूषण के कारण चिंकारा, काला हिरण और नीलगाय जैसे वन्यजीवों की संख्या प्रभावित होने की बात भी कही है।
वन क्षेत्र विकसित करने की सिफारिश
कमेटी ने मेलबा और मोडाथली की कुछ भूमि वन विभाग को सौंपकर उसे वन और चारागाह के रूप में विकसित करने की सिफारिश की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
औद्योगिक अपशिष्ट के निस्तारण की बनेगी योजना
कोर्ट ने सांगारिया स्थित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) में जमा औद्योगिक अपशिष्टयुक्त पानी के सुरक्षित उपचार और वैज्ञानिक निस्तारण के लिए राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तकनीकी कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है। यह पूरी प्रक्रिया हाई लेवल कमेटी की निगरानी में होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल बंद औद्योगिक इकाइयों को दोबारा शुरू करने के लिए नहीं किया जा सकेगा।
बिना ट्रीटमेंट के अपशिष्ट छोड़ने पर भी मांगा जवाब
अदालत ने राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि बिना उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट जल स्रोतों में छोड़ने वाले मामलों में गंभीर आपराधिक धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं। इस संबंध में भी विस्तृत जवाब मांगा गया है।
2025 में लिया था स्वतः संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट ने 16 सितंबर 2025 को इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। उस समय जोधपुर, पाली और बालोतरा क्षेत्र की नदियों में औद्योगिक कचरे और सीवरेज से बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई गई थी। कोर्ट ने माना था कि लंबे समय से प्रशासनिक लापरवाही के कारण करीब 20 लाख लोगों, पशुधन और पर्यावरण पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।


