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Bihar Politics: तेज प्रताप यादव पर केस से भड़के तेजस्वी, सरकार को दी चेतावनी- अब आर-पार की लड़ाई

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बिहार की राजनीति में एक बार फिर सियासी गर्मी बढ़ गई है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने अपने भाई तेज प्रताप यादव पर दर्ज केस को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला है। तेजस्वी यादव ने कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताते हुए इसे तानाशाही करार दिया और सरकार को जल्द कदम उठाने का अल्टीमेटम दिया है।

तेजस्वी यादव का कहना है कि तेज प्रताप यादव के खिलाफ गंभीर धाराओं में दर्ज मामला राजनीतिक दबाव का नतीजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्षी नेताओं को कमजोर करने के लिए जांच एजेंसियों और प्रशासन का इस्तेमाल कर रही है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दी गई है कि नहीं, यह मामले की आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।

Tej Pratap Yadav Case को लेकर RJD हमलावर

तेज प्रताप यादव से जुड़े मामले के सामने आने के बाद आरजेडी ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

तेजस्वी यादव ने कहा कि लोकतंत्र में कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विपक्ष में होने की वजह से नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है? उन्होंने साफ किया कि आरजेडी इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी।

तेजस्वी यादव का सरकार को अल्टीमेटम

तेजस्वी यादव ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मामले में निष्पक्षता नहीं दिखाई गई तो पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से इसका विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब देगी।

उनके इस बयान के बाद बिहार की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। आरजेडी कार्यकर्ता भी इस मुद्दे को लेकर सक्रिय नजर आ रहे हैं।

विपक्ष बनाम सरकार की नई सियासी लड़ाई

बिहार में पहले से ही राजनीतिक माहौल काफी सक्रिय है और ऐसे में तेज प्रताप यादव का मामला विपक्ष और सरकार के बीच नई बहस का कारण बन गया है। जहां आरजेडी इसे राजनीतिक कार्रवाई बता रही है, वहीं सरकार का पक्ष है कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी भी मामले में कार्रवाई तथ्यों के आधार पर होती है।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि तेज प्रताप यादव मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या यह मुद्दा बिहार की राजनीति में बड़ा चुनावी मुद्दा बनता है या नहीं।

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Yukta

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हरियाणा में 6 HCS अधिकारियों के तबादले, शिक्षा और आयुष विभाग में मिली नई जिम्मेदारी

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 6 HCS अधिकारियों के तबादले और नई नियुक्तियों के आदेश जारी किए हैं। तबादला सूची के अनुसार, कुछ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जबकि कुछ को वर्तमान कार्यभार के साथ अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। डॉ. शिल्पी पात्र दत्त को एलिमेंट्री एजुकेशन की जिम्मेदारी महिला HCS अधिकारी डॉ. शिल्पी पात्र दत्त को एलिमेंट्री एजुकेशन विभाग में जॉइंट डायरेक्टर (एडमिनिस्ट्रेशन एवं मिड-डे मील) नियुक्त किया गया है। वहीं, डॉ. निर्मल नगर को एलिमेंट्री एजुकेशन विभाग में एडिशनल डायरेक्टर (एडमिनिस्ट्रेशन) की जिम्मेदारी दी गई है। सुरेंद्र सिंह और कुलधीर सिंह को अतिरिक्त प्रभार HCS अधिकारी सुरेंद्र सिंह को उनके वर्तमान कार्यभार के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग में एडिशनल डायरेक्टर (एडमिनिस्ट्रेशन) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इसी तरह, HCS अधिकारी कुलधीर सिंह को वर्तमान जिम्मेदारियों के साथ आयुष विभाग में एडिशनल डायरेक्टर (एडमिनिस्ट्रेशन) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। दीपक कुमार को महेंद्रगढ़ में जिम्मेदारी HCS अधिकारी दीपक कुमार को जिला परिषद महेंद्रगढ़ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (DRDA), महेंद्रगढ़ से संबंधित अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। डॉ. इंद्रजीत शुगर मिल के मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त सरकार ने HCS अधिकारी डॉ. इंद्रजीत को कॉरपोरेशन शुगर मिल का मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। इन प्रशासनिक बदलावों के जरिए विभिन्न विभागों में अधिकारियों की जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को आदेशों के अनुसार नई जिम्मेदारियां संभालनी होंगी।

हरियाणा में गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों पर सख्ती, 2 नवंबर तक रिपोर्ट देने के निर्देश

चंडीगढ़। हरियाणा के शिक्षा विभाग ने प्रदेश में संचालित गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को ऐसे स्कूलों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करने और 2 नवंबर 2026 तक पूरी जानकारी निदेशालय को भेजने के निर्देश दिए हैं। शिक्षा विभाग की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (DEEO) को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। विभाग के मुताबिक, पहले भी इन स्कूलों के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन संबंधित कार्यालयों से निर्धारित जानकारी नहीं मिली। गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों पर होगी कार्रवाई शिक्षा विभाग ने अपने पत्र में कहा है कि राज्य के सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के खिलाफ तत्काल कड़ा प्रशासनिक संज्ञान लें। अधिकारियों को विभागीय आदेश क्रमांक 7/21-2017 PS (3), दिनांक 24 अप्रैल 2025 के तहत जारी निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों के अनुसार कार्रवाई में देरी नहीं होनी चाहिए। स्कूल बंद कराकर निदेशालय को भेजनी होगी सूची जारी पत्र के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों को गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों को तत्काल प्रभाव से बंद कराने की कार्रवाई करनी होगी। इसके साथ ही बंद किए गए स्कूलों की सूची निदेशालय को भेजना भी सुनिश्चित करना होगा। विभाग ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि पहले निर्देश दिए जाने के बावजूद संबंधित कार्यालयों से अब तक आवश्यक जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। इसी कारण अधिकारियों को 2 नवंबर 2026 तक हर हाल में रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर भी नजर शिक्षा विभाग ने संकेत दिया है कि निर्देशों का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है। विभागीय कामकाज में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर नजर रखी जा रही है। जारी पत्र की प्रतियां राज्य के सभी अतिरिक्त जिला उपायुक्तों (ADC) और पुलिस अधीक्षकों (SP) को भी भेजी गई हैं, ताकि संबंधित स्तर पर समन्वय के साथ कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। अब जिला स्तर के अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों की जानकारी उपलब्ध कराने और नियमानुसार कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

दिल्ली में छठ पूजा के लिए बनेंगे 1400 से ज्यादा घाट, 6 नवंबर तक तैयारियां पूरी करने के निर्देश

नई दिल्ली। दिल्ली में छठ महापर्व की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार राजधानी में 1400 से अधिक छठ घाट विकसित किए जाने की संभावना है, जबकि पिछले साल 1326 घाट बनाए गए थे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को तैयारियों की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को 6 नवंबर तक घाटों पर बुनियादी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि तय समय सीमा तक सभी प्रमुख काम पूरे कर लिए जाएं, ताकि बाद में केवल पानी भरने, टेंट लगाने और अंतिम सफाई जैसे कार्य शेष रहें। इस वर्ष छठ पूजा 13 से 16 नवंबर तक मनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने छठ पूजा के अवसर पर अवकाश रहने की भी जानकारी दी। ठंड से बचाव के लिए घाटों पर लगेंगे कवर वाले टेंट नवंबर में संभावित ठंड को देखते हुए मुख्यमंत्री ने बड़े और मध्यम आकार के घाटों पर पर्याप्त कवर वाले टेंट लगाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य पूजा स्थल, मंच के पीछे और अन्य जरूरी स्थानों पर भी टेंट की व्यवस्था की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त शौचालय, चेंजिंग रूम, पेयजल और साफ-सफाई का इंतजाम करने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि तैयारियां केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी नियमित रूप से घाटों का निरीक्षण करें और मौके पर मिलने वाली कमियों को समय रहते दूर कराएं, ताकि श्रद्धालुओं को पूजा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। भीड़भाड़ वाले घाटों पर CCTV से होगी निगरानी छठ पूजा के दौरान बड़े और अधिक भीड़ वाले घाटों पर CCTV कैमरों के जरिए निगरानी की जाएगी। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए फायर टेंडर तैनात करने के निर्देश भी दिए गए हैं। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए ट्रैफिक पुलिस स्थानीय आयोजकों के साथ समन्वय करेगी। पार्किंग, ट्रैफिक डायवर्जन और संभावित सड़क बंदी की जानकारी पहले से साझा करने को कहा गया है, ताकि श्रद्धालुओं को घाटों तक पहुंचने में परेशानी न हो। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कई विभागों के अधिकारी बैठक में रहे मौजूद छठ पूजा की तैयारियों को लेकर हुई समीक्षा बैठक में कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा, विधायक अभय वर्मा, चंदन कुमार चौधरी और संदीप सहरावत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में दिल्ली पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, नगर निगम (MCD), दिल्ली जल बोर्ड, लोक निर्माण विभाग (PWD) और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

बिलासपुर NSUI नियुक्तियों में देवेंद्र यादव समर्थक खेमे का दबदबा, रंजीत सिंह को लगा झटका

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में NSUI की नई नियुक्तियों के बाद कांग्रेस संगठन के भीतर गुटीय समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। नियुक्तियों में AICC सचिव और विधायक देवेंद्र यादव समर्थक खेमे का दबदबा नजर आने की बात कही जा रही है। इससे पहले यूथ कांग्रेस चुनाव के दौरान जारी नियुक्ति आदेशों पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समर्थक खेमे की आपत्तियों के बाद रोक लगा दी गई थी। बताया गया था कि चुनाव नियमों का हवाला देकर नियुक्तियों को फ्रीज कराया गया था। आरोप था कि नियुक्ति सूची में संबंधित खेमे के समर्थकों को जगह नहीं मिली थी। अब रोक हटने के बाद संशोधन के नाम पर लगभग उन्हीं नियुक्तियों को दोबारा जारी किए जाने की चर्चा है। पहली बार शहर और ग्रामीण में बांटा गया जिलाध्यक्ष का पद NSUI के प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय की ओर से जारी नियुक्ति आदेश में बिलासपुर जिलाध्यक्ष का पद रायपुर की तर्ज पर शहर और ग्रामीण, दो हिस्सों में बांटा गया है। ग्रामीण जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी रंजेश सिंह क्षत्री को सौंपी गई है, जिन्हें देवेंद्र यादव समर्थक माना जाता है। वहीं, इसी खेमे से जुड़े समर्थ मिरानी को शहर जिलाध्यक्ष बनाया गया है। समर्थ मिरानी को जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री का समर्थन हासिल बताया जाता है। नई नियुक्तियों के बाद संगठन में अलग-अलग गुटों के प्रभाव और राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। रंजीत सिंह को लगा झटका राजनीतिक प्रेक्षकों के मुताबिक, बिलासपुर जिले में पिछले कुछ वर्षों से NSUI की कमान संभाल रहे रंजीत सिंह को नई नियुक्तियों से झटका लगा है। इसके पीछे यूथ कांग्रेस चुनाव के दौरान भूपेश बघेल समर्थक खेमे का खुलकर साथ देने को एक संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि, नियुक्तियों को लेकर अलग-अलग खेमों के बीच मतभेद और उनके प्रभाव को लेकर सामने आ रही बातें राजनीतिक आकलन का हिस्सा हैं। संगठन को मजबूत करने पर रंजेश सिंह क्षत्री का जोर ग्रामीण जिलाध्यक्ष नियुक्त होने के बाद रंजेश सिंह क्षत्री ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और विद्यार्थियों के हितों के लिए काम करने की बात कही। उन्होंने कहा, “मैं किसान का बेटा हूं। मेहनत से सींचना बचपन से सीखा हूं।” रंजेश सिंह क्षत्री के मुताबिक, NSUI केवल एक छात्र संगठन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के अधिकारों, सम्मान और उज्ज्वल भविष्य के लिए संघर्ष करने वाला मंच है। जिलाध्यक्ष के रूप में उनकी प्राथमिकता संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना और कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए काम करना होगा। नई नियुक्तियों के बाद अब बिलासपुर में NSUI की संगठनात्मक गतिविधियों और अलग-अलग गुटों के बीच तालमेल पर नजर रहेगी।

ठोस कचरा प्रबंधन में छत्तीसगढ़ का बेहतर प्रदर्शन, रोजाना 2,612 टन से ज्यादा कचरे का प्रसंस्करण

रायपुर। छत्तीसगढ़ ठोस कचरा प्रबंधन के मामले में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। प्रदेश में हर दिन 2,615.14 टन ठोस कचरा पैदा होता है, जिसमें से 2,612.97 टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा रहा है। यानी उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पैदा होने वाले लगभग पूरे ठोस कचरे का प्रसंस्करण हो रहा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की वर्ष 2026 की रिपोर्ट पॉलिसी, प्रैक्टिस एंड प्लास्टिक: कॉस्ट ऑफ मैनेजिंग प्लास्टिक वेस्ट इन इंडियन सिटीज में प्रदेश की कचरा प्रबंधन व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कचरा प्रसंस्करण की दर 100% दर्ज की गई है। प्रदेश के नगरीय निकायों के सभी 3,255 वार्डों में घरों से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र किया जा रहा है। प्लास्टिक कचरे की मात्रा में आई कमी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में वर्ष 2022-23 के दौरान 21,170 टन प्लास्टिक कचरा पैदा हुआ। इससे पहले वर्ष 2021-22 में यह मात्रा 51,100 टन और 2020-21 में 47,450 टन दर्ज की गई थी। आंकड़ों में प्लास्टिक कचरे की मात्रा में उल्लेखनीय कमी दिखाई देती है। हालांकि, केवल इन आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि प्लास्टिक का इस्तेमाल या कचरे की वास्तविक मात्रा भी उसी अनुपात में कम हुई है। इसके लिए आंकड़ों के संकलन, रिपोर्टिंग और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को भी समझना जरूरी है। कचरा प्रबंधन के खर्च को सार्वजनिक करने की सिफारिश CSE की रिपोर्ट में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नगरीय निकायों को कचरा संग्रहण से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक होने वाले खर्च का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए। इसके साथ ही प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन में उत्पादक कंपनियों की जिम्मेदारी के तहत मिलने वाली राशि को वास्तविक खर्च के अनुरूप बनाने की सिफारिश की गई है। कचरे को प्रसंस्करण संयंत्र तक पहुंचाने में लगने वाली लागत को भी इसमें शामिल करने पर जोर दिया गया है। प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन में जवाबदेही जरूरी प्लास्टिक कचरे का प्रभावी प्रबंधन केवल संग्रहण और प्रसंस्करण तक सीमित नहीं है। इसके लिए लागत का सही आकलन, पारदर्शी व्यवस्था और उत्पादक कंपनियों की जिम्मेदारी तय करना भी महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ में ठोस कचरे के प्रसंस्करण और घरों से गीला-सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र करने के आंकड़े सकारात्मक तस्वीर पेश करते हैं। अब कचरा प्रबंधन पर होने वाले खर्च और प्लास्टिक कचरे के निस्तारण की व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण होगा।

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