रसोई में इस्तेमाल होने वाली चीनी की कीमतों में तेजी ने त्योहारों से पहले आम परिवारों का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। बाजार में बढ़ते दामों को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीनी की कीमतों और घरेलू स्टॉक को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं।
खड़गे (Kharge ) ने सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि जब भारत दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है, तो घरेलू जरूरतों के लिए Sugar Import की नौबत क्यों आई? उन्होंने इसे सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दावे से जोड़ते हुए कई सवाल उठाए।
तीन महीने में चीनी के दाम में बड़ा उछाल
Kharge का दावा है कि पिछले तीन महीनों में चीनी की कीमत करीब 40 फीसदी तक बढ़ी है। हाल के दिनों में भी खुदरा बाजार में कीमतों में तेजी देखी गई है। त्योहारों के नजदीक आने के साथ चीनी की मांग बढ़ने की संभावना है, ऐसे में आम लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
चीनी की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ चाय की प्याली तक सीमित नहीं है। मिठाई, बेकरी और कई खाद्य उत्पादों की लागत भी इससे प्रभावित होती है। यही वजह है कि कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी सीधे घरेलू बजट पर असर डालती है।
Kharge ने सरकार से पूछे 3 बड़े सवाल
मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीनी की उपलब्धता और कीमतों को लेकर सरकार से तीन अहम सवाल किए हैं।
पहला सवाल: भारत में चीनी का स्टॉक नौ साल के निचले स्तर तक कैसे पहुंच गया?
दूसरा सवाल: जब देश चीनी का प्रमुख उत्पादक है, तो सरकार को निर्यात पर रोक लगाने और 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति क्यों देनी पड़ी?
तीसरा सवाल: अगर घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता को लेकर दबाव है, तो E20 और Ethanol Policy की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही?
खड़गे का तर्क है कि अगर गन्ने और उससे जुड़े संसाधनों का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में बढ़ रहा है, तो इसका असर चीनी की उपलब्धता पर भी देखा जाना चाहिए।
सरकार ने Ethanol Policy को बताया जिम्मेदार नहीं
विपक्ष के आरोपों के बीच केंद्र सरकार ने चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए एथेनॉल उत्पादन को मुख्य वजह मानने से इनकार किया है। सरकार का कहना है कि मौजूदा तेजी के पीछे कई दूसरे कारण हैं।
सरकार के मुताबिक इस साल चीनी उत्पादन में कमी की आशंका है। खराब मौसम और गन्ने की पैदावार पर पड़े असर ने भी स्थिति को प्रभावित किया है। इसके अलावा त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में बदलाव का असर घरेलू बाजार पर पड़ा है।
10 लाख टन Raw Sugar Import का फैसला
बढ़ती कीमतों पर काबू पाने और घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र ने 10 लाख टन Raw Sugar के Duty-Free Import की अनुमति दी है।
सरकार की कोशिश है कि अतिरिक्त सप्लाई बाजार में पहुंचे और कीमतों पर दबाव कम हो। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब घरेलू स्टॉक और उत्पादन को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।
Stock Limit से जमाखोरी पर भी नजर
चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार ने Stock Limit से जुड़े कदम भी उठाए हैं। इसका उद्देश्य बाजार में जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा करने और कृत्रिम कमी पैदा होने की संभावना को कम करना है।
सरकार की नजर खास तौर पर त्योहारों से पहले बाजार की स्थिति पर है। मांग बढ़ने के दौरान अगर सप्लाई सामान्य रहती है, तो कीमतों पर दबाव कम किया जा सकता है।
खराब मौसम और कम उत्पादन भी बड़ी वजह
सरकार के मुताबिक इस साल चीनी उत्पादन पर मौसम का असर पड़ा है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में परिस्थितियों का प्रभाव उत्पादन पर पड़ा है।
यही वजह है कि केंद्र और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। विपक्ष जहां कीमतों और Import को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार उत्पादन में कमी और बाजार की परिस्थितियों को मुख्य वजह बता रही है।
आम आदमी के लिए सबसे बड़ा सवाल—चीनी कब सस्ती होगी?
इस पूरे विवाद के बीच आम लोगों की नजर एक ही बात पर है—चीनी की कीमत आखिर कब नीचे आएगी?
त्योहारों का मौसम सामने है और मिठाई से लेकर घर की रोजमर्रा की चाय तक, चीनी की जरूरत हर परिवार में है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती सिर्फ राजनीतिक आरोपों का जवाब देना नहीं, बल्कि बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखते हुए कीमतों को काबू में रखना भी है।
फिलहाल Sugar Price Hike, Duty-Free Import और Ethanol Policy को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। आने वाले दिनों में आयातित चीनी की सप्लाई और सरकारी कदमों का बाजार पर असर इस कहानी की अगली तस्वीर तय करेगा।
हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
