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Bihar Flood: 50 लाख लोग बाढ़ की चपेट में, Uttarakhand में Landslide; MP-Rajasthan Alert

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मानसून की बारिश का असर देश के कई राज्यों में अब भी देखने को मिल रहा है। कहीं नदियां उफान पर हैं तो कहीं पहाड़ों से मलबा गिरने के कारण रास्ते बंद हो रहे हैं। Bihar में करीब 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में नदी के तेज कटाव से 7 मकान बह गए हैं। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में Landslide ने भी लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। इसके अलावा मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी मौसम को लेकर Alert जारी किया गया है।

Bihar Flood ने बढ़ाई चिंता

बिहार के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति अभी भी बनी हुई है। नदियों का जलस्तर बढ़ने से गांवों और निचले इलाकों में पानी पहुंच गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

कई जगहों पर सड़क संपर्क प्रभावित होने के कारण लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं। लोगों को नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

UP में नदी के कटाव से 7 मकान बहे

उत्तर प्रदेश में भी बाढ़ और नदी के बढ़ते जलस्तर ने कई इलाकों में मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। लखीमपुर खीरी में नदी के तेज कटाव के कारण 7 मकान बहने की खबर है।

नदी का कटाव लगातार बढ़ने से आसपास रहने वाले परिवारों में डर का माहौल है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और स्थिति पर नजर रखने का काम किया जा रहा है।

Pithoragarh में Landslide, रास्ते पर मलबा

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बारिश के बीच Landslide की घटनाएं सामने आ रही हैं। पिथौरागढ़ में भूस्खलन के कारण सड़क मार्ग प्रभावित हुआ है।

पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के दौरान अचानक मलबा आने और सड़क बंद होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में यात्रियों को मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही सफर करने की सलाह दी जा रही है।

MP में फिर बारिश का दौर

मध्य प्रदेश में भी बारिश से राहत पूरी तरह नहीं मिली है। मौसम में बदलाव के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

बारिश के साथ कुछ इलाकों में तेज हवाएं और गरज-चमक भी देखने को मिल सकती है। ऐसे में खासकर निचले और जलभराव वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।

Rajasthan में भी Weather Alert

राजस्थान के कई जिलों में भी बारिश को लेकर Alert जारी किया गया है। मानसून के अंतिम दौर में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना बनी हुई है।

मौसम विभाग की चेतावनी के बीच प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जा रही है। लोगों को आंधी, बिजली और तेज बारिश के दौरान खुले स्थानों से बचने की सलाह दी गई है।

कई राज्यों में Monsoon की मार

इस समय बिहार की बाढ़, उत्तर प्रदेश में नदी का कटाव और उत्तराखंड में Landslide ने मानसून की चुनौती को बढ़ा दिया है। वहीं MP और Rajasthan में भी बारिश को लेकर लोगों और प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है।

मानसून का दौर धीरे-धीरे अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, लेकिन कई इलाकों में मौसम अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। ऐसे में स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर रखना और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना सबसे जरूरी है।

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Yukta

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Sensex-Nifty

Sensex-Nifty में Recovery: 400 अंक चढ़ा Sensex, 23,200 के ऊपर Nifty; FMCG Shares चमके

शेयर बाजार में मंगलवार की बड़ी गिरावट के बाद बुधवार को निवेशकों को थोड़ी राहत मिली। Stock Market Today की शुरुआत मजबूती के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में Sensex करीब 400 अंक चढ़कर 74,400 के आसपास पहुंच गया, वहीं Nifty भी 100 अंक से ज्यादा की बढ़त के साथ 23,200 के पार निकल गया। बाजार की इस तेजी में खासतौर पर FMCG Stocks में खरीदारी देखने को मिली। ITC और HUL जैसे शेयरों में मजबूती ने बाजार के sentiment को सहारा दिया। हालांकि, दूसरी तरफ कुछ IT Stocks में दबाव भी नजर आया। मंगलवार की गिरावट के बाद लौटी खरीदारी मंगलवार का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए काफी कमजोर रहा था। Sensex करीब 778 अंक टूटकर 74,003 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि Nifty में भी करीब 280 अंकों की गिरावट दर्ज की गई थी। एक दिन की तेज गिरावट के बाद बुधवार को बाजार खुलते ही खरीदारी देखने को मिली। Sensex शुरुआती कारोबार में करीब 425 अंक तक चढ़ गया और 74,428 के स्तर को छुआ। वहीं Nifty भी बढ़त के साथ 23,250 के आसपास पहुंच गया। यानी पिछले सत्र की चिंता के बाद बाजार ने फिलहाल recovery का संकेत दिया है। FMCG Shares में सबसे ज्यादा हलचल बुधवार को FMCG Sector निवेशकों की नजर में रहा। ITC और Hindustan Unilever जैसे बड़े FMCG शेयरों में खरीदारी से सेक्टर को मजबूती मिली। इसके अलावा SBI, Axis Bank, Bharat Electronics और Reliance Industries जैसे प्रमुख शेयरों में भी बढ़त देखने को मिली। दूसरी ओर TCS, Infosys और Tech Mahindra जैसे कुछ IT Stocks दबाव में रहे। Crude Oil बना बड़ी चिंता बाजार में तेजी के बावजूद निवेशकों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। Crude Oil की ऊंची कीमतें भारतीय बाजार के लिए अहम जोखिम बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने पर महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि Sensex और Nifty की शुरुआती तेजी के बावजूद बाजार में सावधानी नजर आ रही है। US Fed के फैसले पर भी नजर अब निवेशकों की निगाह US Federal Reserve की monetary policy पर है। ब्याज दरों को लेकर अमेरिकी केंद्रीय बैंक का रुख global markets की दिशा पर असर डाल सकता है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के संकेत भी भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। FIIs की बिकवाली से दबाव घरेलू बाजार में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी लगातार चर्चा में हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 15 सितंबर को Foreign Institutional Investors (FIIs) ने करीब ₹2,978 करोड़ की net selling की। वहीं Domestic Institutional Investors (DIIs) ने करीब ₹2,686 करोड़ की खरीदारी की। घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे रही है, लेकिन विदेशी पूंजी की निकासी से sentiment पर दबाव बना हुआ है। Midcap-Smallcap में तस्वीर अलग जहां Sensex और Nifty में तेजी दिखाई दी, वहीं broader market में उतनी मजबूती नहीं रही। शुरुआती कारोबार में Midcap और Smallcap indices पर दबाव देखने को मिला। इससे साफ है कि बाजार में हर सेक्टर और हर शेयर में एक जैसी buying नहीं हो रही। निवेशक फिलहाल चुनिंदा बड़े शेयरों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल? बुधवार की तेजी से बाजार को मंगलवार की गिरावट के बाद थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन आगे की दिशा कई factors पर निर्भर करेगी। Crude Oil Price, US Fed का फैसला, FII-DII activity, रुपये की चाल और global market trends पर निवेशकों की नजर रहेगी। फिलहाल Sensex का 74,400 के आसपास पहुंचना और Nifty का 23,200 के ऊपर जाना बाजार में recovery की तस्वीर दिखाता है। हालांकि, global uncertainty के बीच आने वाले कारोबारी सत्रों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Tariff

Russia Oil पर US का बड़ा दबाव: भारत पर 100% Tariff का खतरा, Export से लेकर Trade तक असर

अमेरिका और भारत के बीच रूस से तेल खरीदने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में एक ऐसा Russia Sanctions Bill आगे बढ़ा है, जिसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक अतिरिक्त Tariff लगाने का रास्ता खुल सकता है। भारत भी इस प्रस्ताव के दायरे में आने वाले देशों में शामिल है। हालांकि, अभी इसे लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि भारत पर 100% टैरिफ लागू नहीं हुआ है। फिलहाल अमेरिकी संसद में बिल को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। अगर आगे चलकर यह प्रावधान कानून बनता है और इसका इस्तेमाल किया जाता है, तभी भारत के कारोबार पर सीधा असर देखने को मिलेगा। Russia Oil को लेकर क्यों बढ़ा तनाव? भारत पिछले कुछ वर्षों में रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है। रूस से मिलने वाला Crude Oil भारतीय कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण source बन चुका है। यही खरीद अमेरिका के साथ बातचीत में बार-बार बड़ा मुद्दा बनती रही है। अमेरिका रूस की Energy Earnings को कम करने के लिए उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना चाहता है। इसी कड़ी में रूस से Oil और Gas खरीदने वाले देशों पर Secondary Tariff लगाने का प्रस्ताव सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्तावित कानून में 100% तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान रखा गया है। इसका मतलब यह है कि अगर अमेरिकी प्रशासन इस शक्ति का इस्तेमाल करता है, तो संबंधित देशों से अमेरिका आने वाले कुछ सामान पर भारी अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। भारत ने रूस से कितना Crude Oil खरीदा? भारत के लिए Russian Oil की अहमियत आंकड़ों से भी समझी जा सकती है। रिपोर्टों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने रूस से करीब 40.8 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा। यह भारत के कुल Crude Oil Imports का लगभग 30 फीसदी हिस्सा बताया गया है। यानी रूस से तेल खरीदना भारत की Energy Strategy का एक बड़ा हिस्सा है। ऐसे में अचानक इस सप्लाई में बड़ा बदलाव करना आसान नहीं होगा। अगर 100% Tariff लगा तो भारत पर क्या असर पड़ेगा? अगर अमेरिकी प्रशासन भविष्य में भारत पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाता है, तो इसका सबसे सीधा असर Indian Exporters पर पड़ सकता है। अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगा हो सकता है। इससे वहां भारतीय कंपनियों की Price Competitiveness प्रभावित हो सकती है। Exporters को या तो कीमत बढ़ाने, या अपने Profit Margin को कम करने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। खासकर वे कारोबारी क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं, जिनका अमेरिकी बाजार में बड़ा कारोबार है। हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम कानून में किन Products और किन परिस्थितियों पर टैरिफ लागू किया जाता है। क्या भारत को Russia Oil खरीदना कम करना पड़ेगा? अगर अमेरिका की ओर से दबाव काफी बढ़ता है, तो भारत के सामने Energy और Trade दोनों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती हो सकती है। रूस से मिलने वाले तेल की जगह भारत को दूसरे देशों से Crude Oil खरीदना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में Oil की कीमत, Shipping Cost, Insurance और Global Supply जैसे factors महत्वपूर्ण होंगे। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि भारत तुरंत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। कोई भी फैसला भारत की Energy Security, कीमत और राष्ट्रीय हित जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखकर लिया जाएगा। India-US Trade पर भी पड़ सकता है असर भारत और अमेरिका के बीच अरबों डॉलर का व्यापार है। ऐसे में अगर 100% अतिरिक्त टैरिफ वास्तव में लागू होता है, तो इसका असर केवल Oil तक सीमित नहीं रहेगा। दोनों देशों के बीच चल रहे Trade Relations पर भी इसका असर पड़ सकता है। भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिका एक बड़ा Export Market है। इसलिए किसी भी बड़े अतिरिक्त शुल्क से व्यापार की लागत और बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। US का Russia पर दबाव बढ़ाने का प्लान अमेरिकी प्रस्ताव का बड़ा उद्देश्य रूस की Economy और Energy Sector पर दबाव बढ़ाना है। रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई को कम करने के लिए अमेरिका लंबे समय से अलग-अलग Sanctions और Trade Restrictions का इस्तेमाल करता रहा है। प्रस्तावित कानून में रूस से जुड़े Energy Trade और प्रतिबंधों से बचने वाले नेटवर्क पर भी कार्रवाई के प्रावधान बताए गए हैं। इसी संदर्भ में रूस की कथित Shadow Fleet भी अमेरिकी कार्रवाई के दायरे में आ सकती है। अभी भारत के लिए क्या स्थिति है? फिलहाल भारत के लिए स्थिति Wait and Watch वाली है। 100% Tariff का खतरा चर्चा में जरूर है, लेकिन इसे अभी लागू शुल्क समझना सही नहीं होगा। आगे अमेरिकी संसद में Bill की प्रक्रिया और उसके बाद अमेरिकी प्रशासन के फैसले से तस्वीर साफ होगी। भारत भी इस पूरे मामले पर अपनी Energy जरूरतों और Trade Interests को ध्यान में रखते हुए प्रतिक्रिया दे सकता है। अगर भविष्य में 100% Tariff लागू होता है, तो इसका असर भारतीय Exporters, अमेरिका के साथ व्यापार और रूस से होने वाली Oil Purchases—तीनों पर पड़ सकता है। फिलहाल इस पूरे मामले में अगले अमेरिकी फैसले पर नजर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
America में कवरेज के दौरान NBC का न्यूज हेलिकॉप्टर क्रैश, 3 लोगों की मौत

America में कवरेज के दौरान NBC का न्यूज हेलिकॉप्टर क्रैश, 3 लोगों की मौत

America के लॉस एंजिल्स में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां खबर की कवरेज कर रहा NBC का न्यूज हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में हेलिकॉप्टर में सवार पत्रकार एलियाना मोरेनो और पायलट जॉर्ज मार्सिनिव की मौत हो गई। जमीन पर मौजूद एक अन्य व्यक्ति की भी जान चली गई। यह हादसा मंगलवार शाम लॉस एंजिल्स के चैट्सवर्थ इलाके में हुआ। NBC4 की टीम इलाके में एक सड़क हादसे की कवरेज कर रही थी। इसी दौरान हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया और आग की चपेट में आ गया। हादसे में एक अन्य व्यक्ति घायल हुआ, जिसे अस्पताल ले जाया गया। जिस हादसे की कवरेज कर रहा था हेलिकॉप्टर, उसमें भी गई थी जान NBC का हेलिकॉप्टर जिस घटना की रिपोर्टिंग कर रहा था, उसमें एक SUV की मेट्रो बस से टक्कर हुई थी। इस हादसे में भी कम से कम दो लोगों की मौत हुई और छह लोग घायल हुए थे। इसी दुर्घटना की हवाई कवरेज के दौरान कुछ दूरी पर NBC का हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। NBC4 की एंकर कोलीन विलियम्स ने लाइव प्रसारण के दौरान भावुक होकर हेलिकॉप्टर के क्रैश होने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि चैनल का अपने हेलिकॉप्टर में मौजूद कर्मचारियों से संपर्क टूट गया था। बाद में दो कर्मचारियों की मौत की पुष्टि हुई। हादसे के कारण इलाके में अफरा-तफरी मच गई। दमकल और राहत दल ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। फिलहाल हेलिकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की वजह स्पष्ट नहीं है। NTSB और FAA हादसे की जांच कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Pakistan

Arabian Sea में India-Pakistan Warships की टक्कर, 15 साल पुरानी घटना फिर चर्चा में

भारत (India) और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच रिश्तों में तनाव के बीच अरब सागर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने दोनों देशों की नौसेनाओं को फिर चर्चा में ला दिया है। 15 सितंबर 2026 की शाम उत्तरी अरब सागर में पाकिस्तानी नौसेना के एक जहाज की भारतीय नौसेना के युद्धपोत से टक्कर हो गई। घटना के बाद भारत ने इसे गंभीरता से लेते हुए नई दिल्ली में पाकिस्तान के Charge d’Affaires को तलब किया और औपचारिक विरोध दर्ज कराया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, टक्कर में किसी बड़े नुकसान या भारतीय नौसैनिक के घायल होने की खबर नहीं है। Surveillance Mission पर था भारतीय युद्धपोत रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय नौसेना का युद्धपोत समुद्र में अपने नियमित surveillance mission पर था। इसी दौरान पाकिस्तानी नौसेना का जहाज भारतीय युद्धपोत के करीब पहुंचा। भारतीय पक्ष के अनुसार, पाकिस्तानी जहाज तेज गति से आगे बढ़ रहा था और उसके maneuver के दौरान दोनों नौसैनिक जहाज आपस में टकरा गए। घटना अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में हुई। टक्कर के बाद भारतीय युद्धपोत ने अपना मिशन जारी रखा। शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े structural damage की जानकारी सामने नहीं आई है। भारत ने Pakistan के सामने जताया Strong Protest घटना के बाद विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के Charge d’Affaires को तलब किया। भारत ने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों के व्यवहार को “unacceptable and unprofessional” बताया। भारत की ओर से कहा गया कि समुद्र में सैन्य जहाजों को अंतरराष्ट्रीय maritime safety practices और दोनों देशों के बीच लागू समझौतों का ध्यान रखना चाहिए। भारत ने इस्लामाबाद में मौजूद अपने Charge d’Affaires को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने यह मामला उठाने का निर्देश दिया है। 1991 के Agreement का भी हुआ जिक्र इस पूरे मामले में 1991 India-Pakistan Agreement का भी जिक्र सामने आया है। भारत ने समझौते के Article 10 का हवाला देते हुए सैन्य गतिविधियों के दौरान जरूरी सावधानी और निर्धारित नियमों के पालन पर जोर दिया है। इस घटना को लेकर अब दोनों देशों के अधिकारियों के बीच diplomatic level पर बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ सकता है। 15 साल पहले भी टकराए थे दोनों देशों के Warships भारत और पाकिस्तान के युद्धपोतों के बीच समुद्र में ऐसी घटना पहले भी हो चुकी है। करीब 15 साल पहले 2011 में Gulf of Aden में भारतीय नौसेना के INS Godavari और पाकिस्तानी नौसेना के PNS Babur के बीच भी टक्कर की घटना सामने आई थी। उस समय दोनों देशों के जहाज MV Suez से जुड़े anti-piracy operation के दौरान क्षेत्र में मौजूद थे। घटना के बाद भारत ने पाकिस्तान के सामने विरोध दर्ज कराया था। 2011 की घटना में INS Godavari के helicopter deck की safety net को मामूली नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। 2011 से 2026 तक फिर वही समुद्री तनाव करीब डेढ़ दशक बाद दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों से जुड़ी ऐसी घटना का सामने आना ध्यान खींच रहा है। हालांकि, दोनों घटनाओं की परिस्थितियां एक जैसी नहीं थीं और इनके बीच सीधे तौर पर समानता निकालना उचित नहीं होगा। फिलहाल 2026 की घटना में सबसे अहम बात यह है कि भारत ने राजनयिक स्तर पर पाकिस्तान के सामने आपत्ति दर्ज करा दी है। अरब सागर रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है। ऐसे में वहां भारतीय और पाकिस्तानी नौसैनिक जहाजों की गतिविधियों के दौरान छोटी-सी घटना भी diplomatic discussion का विषय बन सकती है। अब आगे क्या? ताजा मामले में भारत की ओर से विरोध दर्ज कराया जा चुका है। अब आगे दोनों देशों के संबंधित अधिकारी इस घटना से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों पर चर्चा कर सकते हैं। फिलहाल किसी बड़े नुकसान की जानकारी नहीं है, लेकिन यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि India-Pakistan के बीच समुद्री क्षेत्र में communication, navigation और safety protocols कितने महत्वपूर्ण हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Jantar Mantar

Jantar Mantar Case Update: सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी बदलने की मांग ठुकराई, जांच रहेगी जारी

जंतर-मंतर (Jantar Mantar) से जुड़े छात्र प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाई-पावर्ड कमेटी को लेकर तस्वीर साफ कर दी है। अदालत ने कमेटी के पुनर्गठन और उसके सदस्यों में बदलाव की मांग को स्वीकार नहीं किया। इसका मतलब है कि पहले से बनाई गई पांच सदस्यीय कमेटी ही अब मामले की जांच आगे बढ़ाएगी। इस मामले में प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। इन्हीं पहलुओं की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को High-Powered Inquiry Committee का गठन किया था। जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में बनी है कमेटी सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित कमेटी की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। कमेटी में कुल पांच सदस्य हैं, जिन्हें मामले से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जांच की जिम्मेदारी दी गई है। हाल की सुनवाई में कमेटी के एक सदस्य को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई। याचिकाकर्ता की ओर से सदस्य की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए हितों के टकराव की आशंका जताई गई और कमेटी में बदलाव की मांग की गई। हालांकि, अदालत ने इस मांग को मंजूरी नहीं दी। अब मौजूदा कमेटी ही अपनी तय जिम्मेदारियों के अनुसार जांच करेगी। Protest के दौरान हुई घटनाओं की होगी पड़ताल High-Powered Committee को जंतर-मंतर समेत अन्य स्थानों पर हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े घटनाक्रम की जांच करनी है। प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, पुलिस कार्रवाई और सामने आई शिकायतों से जुड़े तथ्यों को जांच के दायरे में रखा गया है। कमेटी संबंधित लोगों की बात सुन सकती है और मामले से जुड़े दस्तावेज या अन्य सामग्री भी देख सकती है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी जाएगी। 17 Metro Stations बंद करने का मामला भी उठा सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में दिल्ली के 17 मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने का मुद्दा भी सामने आया। प्रदर्शन के दौरान इन स्टेशनों को बंद रखने के फैसले पर सवाल उठाए गए। इस मुद्दे पर अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। ऐसे में अब जांच और आगे की सुनवाई में मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के फैसले से जुड़े कारणों पर भी चर्चा हो सकती है। नाबालिगों की सुरक्षा पर भी हुई बात मामले में सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े दो नाबालिगों की सुरक्षा का मुद्दा भी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा गया। उनकी ओर से कथित धमकियों और पुलिस कार्रवाई को लेकर चिंता जताई गई। अदालत ने मामले से जुड़े लोगों की सुरक्षा के पहलू पर भी ध्यान देने की बात कही है। इससे साफ है कि सुनवाई में केवल प्रदर्शन की घटना ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े दूसरे मानवीय पहलुओं पर भी गौर किया जा रहा है। अब कमेटी की Report का इंतजार सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद हाई-पावर्ड कमेटी में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। कमेटी अपने मौजूदा स्वरूप में जांच जारी रखेगी और अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपेगी। अब सबकी नजर कमेटी की जांच और उसकी रिपोर्ट पर रहेगी। रिपोर्ट सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट मामले में आगे के निर्देश दे सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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