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PM Modi Schoolmate Asgar: 8 दिन बाद BJP MLA ने छोड़ा जमीन का कब्जा, Land Dispute में बड़ा Twist

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने स्कूल साथी असगर अली वोरा इन दिनों महाराष्ट्र के एक जमीन विवाद को लेकर चर्चा में हैं। करीब 15 साल से चल रहे इस मामले में उस समय बड़ा मोड़ आया, जब वोरा ने 8 सितंबर को PM मोदी (PM Modi) से मुलाकात कर अपनी जमीन से जुड़ी शिकायत उनके सामने रखी। इसके करीब आठ दिन बाद BJP विधायक नरेंद्र मेहता ने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और उससे जुड़ी निर्माण अनुमति वापस करने की बात कही है।

PM मोदी से मुलाकात के बाद बदला मामला

81 वर्षीय असगर अली वोरा और नरेंद्र मोदी ने गुजरात के वडनगर के BN School में साथ पढ़ाई की थी। वोरा ने प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में मौजूद जमीन को लेकर चल रहे विवाद की जानकारी दी।

वोरा का दावा है कि उन्होंने 1989 में करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी। उनका कहना है कि उन्होंने जमीन को न तो बेचा और न ही किसी दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर किया। बाद में जमीन से जुड़े दस्तावेजों को लेकर विवाद सामने आया।

15 साल से परेशान थे असगर

असगर अली वोरा के मुताबिक, वह पिछले करीब 15 वर्षों से अपनी जमीन के मामले को लेकर अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि 2011 में जमीन से जुड़े कथित फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।

उनका यह भी दावा है कि बाद में जमीन को अलग-अलग हिस्सों में दिखाया गया और इससे जुड़े मामलों में बिल्डरों के नाम सामने आए। हालांकि, इन आरोपों से जुड़े दस्तावेजों और कानूनी दावों की अंतिम स्थिति संबंधित जांच और रिकॉर्ड से ही तय होगी।

BJP MLA नरेंद्र मेहता ने लिया बड़ा फैसला

PM मोदी से मुलाकात के बाद महाराष्ट्र सरकार के स्तर पर भी इस मामले को लेकर बैठक हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी की अध्यक्षता में मंत्रालय में बैठक हुई।

इसके बाद BJP विधायक नरेंद्र मेहता ने Town Planning Department को पत्र देकर विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और Construction Permission वापस करने की जानकारी दी।

मेहता ने पुलिस को भी पत्र लिखकर असगर वोरा के खिलाफ पहले दर्ज कराई गई शिकायत वापस लेने की बात कही। उनके अनुसार, दोनों पक्षों के बीच इस मामले में समझौता हुआ है।

1989 में खरीदी थी जमीन, 2015 में FIR

वोरा के अनुसार, जमीन खरीदने के कई साल बाद विवाद शुरू हुआ। उन्होंने कथित फर्जीवाड़े को लेकर 2015 में FIR दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि मामले की जांच में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई गई।

वोरा ने प्रधानमंत्री के सामने इस पूरे मामले की जांच की मांग रखी थी। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने मामले में CBI जांच की मांग भी की थी।

अब जमीन विवाद में क्या होगा?

नरेंद्र मेहता की ओर से कब्जा छोड़ने और निर्माण अनुमति वापस करने की बात सामने आने के बाद इस पुराने विवाद में नया मोड़ आया है। साथ ही पुलिस शिकायत वापस लेने की जानकारी ने भी मामले को चर्चा में ला दिया है।

हालांकि, जमीन के मालिकाना हक, पुराने दस्तावेजों और कथित फर्जीवाड़े से जुड़े सवालों का अंतिम फैसला संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि PM मोदी से असगर अली वोरा की मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद विवादित जमीन को लेकर BJP विधायक की ओर से पीछे हटने की बात सामने आई है। इससे करीब डेढ़ दशक पुराने इस Land Dispute पर सबकी नजरें टिक गई हैं।

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Yukta

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Pakistan

Arabian Sea में India-Pakistan Warships की टक्कर, 15 साल पुरानी घटना फिर चर्चा में

भारत (India) और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच रिश्तों में तनाव के बीच अरब सागर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने दोनों देशों की नौसेनाओं को फिर चर्चा में ला दिया है। 15 सितंबर 2026 की शाम उत्तरी अरब सागर में पाकिस्तानी नौसेना के एक जहाज की भारतीय नौसेना के युद्धपोत से टक्कर हो गई। घटना के बाद भारत ने इसे गंभीरता से लेते हुए नई दिल्ली में पाकिस्तान के Charge d’Affaires को तलब किया और औपचारिक विरोध दर्ज कराया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, टक्कर में किसी बड़े नुकसान या भारतीय नौसैनिक के घायल होने की खबर नहीं है। Surveillance Mission पर था भारतीय युद्धपोत रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय नौसेना का युद्धपोत समुद्र में अपने नियमित surveillance mission पर था। इसी दौरान पाकिस्तानी नौसेना का जहाज भारतीय युद्धपोत के करीब पहुंचा। भारतीय पक्ष के अनुसार, पाकिस्तानी जहाज तेज गति से आगे बढ़ रहा था और उसके maneuver के दौरान दोनों नौसैनिक जहाज आपस में टकरा गए। घटना अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में हुई। टक्कर के बाद भारतीय युद्धपोत ने अपना मिशन जारी रखा। शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े structural damage की जानकारी सामने नहीं आई है। भारत ने Pakistan के सामने जताया Strong Protest घटना के बाद विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के Charge d’Affaires को तलब किया। भारत ने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों के व्यवहार को “unacceptable and unprofessional” बताया। भारत की ओर से कहा गया कि समुद्र में सैन्य जहाजों को अंतरराष्ट्रीय maritime safety practices और दोनों देशों के बीच लागू समझौतों का ध्यान रखना चाहिए। भारत ने इस्लामाबाद में मौजूद अपने Charge d’Affaires को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने यह मामला उठाने का निर्देश दिया है। 1991 के Agreement का भी हुआ जिक्र इस पूरे मामले में 1991 India-Pakistan Agreement का भी जिक्र सामने आया है। भारत ने समझौते के Article 10 का हवाला देते हुए सैन्य गतिविधियों के दौरान जरूरी सावधानी और निर्धारित नियमों के पालन पर जोर दिया है। इस घटना को लेकर अब दोनों देशों के अधिकारियों के बीच diplomatic level पर बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ सकता है। 15 साल पहले भी टकराए थे दोनों देशों के Warships भारत और पाकिस्तान के युद्धपोतों के बीच समुद्र में ऐसी घटना पहले भी हो चुकी है। करीब 15 साल पहले 2011 में Gulf of Aden में भारतीय नौसेना के INS Godavari और पाकिस्तानी नौसेना के PNS Babur के बीच भी टक्कर की घटना सामने आई थी। उस समय दोनों देशों के जहाज MV Suez से जुड़े anti-piracy operation के दौरान क्षेत्र में मौजूद थे। घटना के बाद भारत ने पाकिस्तान के सामने विरोध दर्ज कराया था। 2011 की घटना में INS Godavari के helicopter deck की safety net को मामूली नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। 2011 से 2026 तक फिर वही समुद्री तनाव करीब डेढ़ दशक बाद दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों से जुड़ी ऐसी घटना का सामने आना ध्यान खींच रहा है। हालांकि, दोनों घटनाओं की परिस्थितियां एक जैसी नहीं थीं और इनके बीच सीधे तौर पर समानता निकालना उचित नहीं होगा। फिलहाल 2026 की घटना में सबसे अहम बात यह है कि भारत ने राजनयिक स्तर पर पाकिस्तान के सामने आपत्ति दर्ज करा दी है। अरब सागर रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है। ऐसे में वहां भारतीय और पाकिस्तानी नौसैनिक जहाजों की गतिविधियों के दौरान छोटी-सी घटना भी diplomatic discussion का विषय बन सकती है। अब आगे क्या? ताजा मामले में भारत की ओर से विरोध दर्ज कराया जा चुका है। अब आगे दोनों देशों के संबंधित अधिकारी इस घटना से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों पर चर्चा कर सकते हैं। फिलहाल किसी बड़े नुकसान की जानकारी नहीं है, लेकिन यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि India-Pakistan के बीच समुद्री क्षेत्र में communication, navigation और safety protocols कितने महत्वपूर्ण हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Jantar Mantar

Jantar Mantar Case Update: सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी बदलने की मांग ठुकराई, जांच रहेगी जारी

जंतर-मंतर (Jantar Mantar) से जुड़े छात्र प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाई-पावर्ड कमेटी को लेकर तस्वीर साफ कर दी है। अदालत ने कमेटी के पुनर्गठन और उसके सदस्यों में बदलाव की मांग को स्वीकार नहीं किया। इसका मतलब है कि पहले से बनाई गई पांच सदस्यीय कमेटी ही अब मामले की जांच आगे बढ़ाएगी। इस मामले में प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। इन्हीं पहलुओं की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को High-Powered Inquiry Committee का गठन किया था। जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में बनी है कमेटी सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित कमेटी की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। कमेटी में कुल पांच सदस्य हैं, जिन्हें मामले से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जांच की जिम्मेदारी दी गई है। हाल की सुनवाई में कमेटी के एक सदस्य को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई। याचिकाकर्ता की ओर से सदस्य की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए हितों के टकराव की आशंका जताई गई और कमेटी में बदलाव की मांग की गई। हालांकि, अदालत ने इस मांग को मंजूरी नहीं दी। अब मौजूदा कमेटी ही अपनी तय जिम्मेदारियों के अनुसार जांच करेगी। Protest के दौरान हुई घटनाओं की होगी पड़ताल High-Powered Committee को जंतर-मंतर समेत अन्य स्थानों पर हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े घटनाक्रम की जांच करनी है। प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, पुलिस कार्रवाई और सामने आई शिकायतों से जुड़े तथ्यों को जांच के दायरे में रखा गया है। कमेटी संबंधित लोगों की बात सुन सकती है और मामले से जुड़े दस्तावेज या अन्य सामग्री भी देख सकती है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी जाएगी। 17 Metro Stations बंद करने का मामला भी उठा सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में दिल्ली के 17 मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने का मुद्दा भी सामने आया। प्रदर्शन के दौरान इन स्टेशनों को बंद रखने के फैसले पर सवाल उठाए गए। इस मुद्दे पर अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। ऐसे में अब जांच और आगे की सुनवाई में मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के फैसले से जुड़े कारणों पर भी चर्चा हो सकती है। नाबालिगों की सुरक्षा पर भी हुई बात मामले में सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े दो नाबालिगों की सुरक्षा का मुद्दा भी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा गया। उनकी ओर से कथित धमकियों और पुलिस कार्रवाई को लेकर चिंता जताई गई। अदालत ने मामले से जुड़े लोगों की सुरक्षा के पहलू पर भी ध्यान देने की बात कही है। इससे साफ है कि सुनवाई में केवल प्रदर्शन की घटना ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े दूसरे मानवीय पहलुओं पर भी गौर किया जा रहा है। अब कमेटी की Report का इंतजार सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद हाई-पावर्ड कमेटी में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। कमेटी अपने मौजूदा स्वरूप में जांच जारी रखेगी और अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपेगी। अब सबकी नजर कमेटी की जांच और उसकी रिपोर्ट पर रहेगी। रिपोर्ट सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट मामले में आगे के निर्देश दे सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Karnataka कांग्रेस विधायक की भतीजी पर बिना काम ₹70 हजार सैलरी लेने का आरोप

Karnataka कांग्रेस विधायक की भतीजी पर बिना काम ₹70 हजार सैलरी लेने का आरोप

Karnataka में कांग्रेस विधायक की भतीजी को लेकर सरकारी नौकरी से जुड़ा एक मामला सामने आया है। आरोप है कि उन्हें बिना नियमित रूप से काम किए हर महीने करीब 70 हजार रुपये की सैलरी मिल रही है। बताया जा रहा है कि वह पिछले करीब 6 महीने से सरकारी क्लीनिक नहीं गईं, जहां उनकी नियुक्ति बताई गई है। मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि सरकारी नौकरी के साथ वह अपनी पढ़ाई भी कर रही हैं। इसको लेकर सरकारी व्यवस्था और नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, संबंधित महिला की नियुक्ति एक सरकारी क्लीनिक में की गई थी। हालांकि, आरोप है कि लंबे समय से वह क्लीनिक में अपनी ड्यूटी पर नहीं पहुंच रही हैं, इसके बावजूद उनका वेतन जारी है। मामला सामने आने के बाद संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली और उपस्थिति व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक जांच और उसके निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यह मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में है, क्योंकि महिला का संबंध एक कांग्रेस विधायक के परिवार से बताया जा रहा है। संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया और विभागीय जांच के बाद मामले में आगे की स्थिति साफ होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rajasthan

Rajasthan Politics: निकाय चुनाव के बाद तेज हुआ जोड़-तोड़, पार्षदों की Resort Politics चर्चा में

राजस्थान (Rajasthan) में निकाय चुनाव खत्म हो चुके हैं, नतीजे भी सामने आ गए हैं, लेकिन सियासी हलचल अभी थमी नहीं है। अब नजरें नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं में बोर्ड बनाने पर टिक गई हैं। जहां किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, वहां निर्दलीय और बागी पार्षदों की भूमिका अचानक काफी अहम हो गई है। इसी के साथ राजस्थान में एक बार फिर ‘Resort Politics’ यानी पार्षदों की बाड़ेबंदी की चर्चा तेज हो गई है। कई जगह राजनीतिक दल अपने पार्षदों को होटल और रिसॉर्ट में ठहरा रहे हैं। इस बीच कुछ जगहों पर पार्षदों को अपने पक्ष में करने के लिए करोड़ों रुपये की कथित बोली लगाए जाने की चर्चाएं भी सामने आई हैं। हालांकि, इन रकमों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बोर्ड बनाने के लिए शुरू हुआ नंबर गेम निकाय चुनाव के बाद अब राजनीतिक दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बहुमत जुटाने की है। जिन निकायों में बीजेपी या कांग्रेस बहुमत से पीछे रह गई हैं, वहां निर्दलीय पार्षदों का समर्थन निर्णायक हो सकता है। यही वजह है कि चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद पार्षदों से संपर्क साधने का दौर शुरू हो गया। कई जगह पार्टी नेतृत्व अपने निर्वाचित पार्षदों को एक साथ रख रहा है, ताकि बोर्ड गठन तक राजनीतिक समीकरण में कोई बड़ा बदलाव न हो। होटल और रिसॉर्ट बने सियासी ठिकाने राजस्थान में Resort Politics कोई नई बात नहीं है। जब भी किसी चुनाव के बाद बहुमत का आंकड़ा उलझता है, तब राजनीतिक दल अपने समर्थक पार्षदों को एक जगह रखने की रणनीति अपनाते हैं। अजमेर समेत कई शहरों में पार्षदों की बाड़ेबंदी की खबरें सामने आई हैं। जयपुर में भी पार्टी उम्मीदवारों को रिसॉर्ट में ठहराने की जानकारी सामने आई। इसका मकसद पार्षदों को एकजुट रखना और विरोधी खेमे की संभावित सेंध को रोकना बताया जा रहा है। निर्दलीय पार्षदों की बढ़ी अहमियत इस पूरे सियासी खेल में सबसे ज्यादा चर्चा निर्दलीय पार्षदों की है। कई जगह मुकाबला इतना करीबी है कि कुछ निर्दलीय पार्षदों का समर्थन पूरे बोर्ड का गणित बदल सकता है। ऐसे में जिन पार्षदों को चुनाव के दौरान ज्यादा महत्व नहीं मिला, वे अब बोर्ड गठन के समय ‘किंगमेकर’ की भूमिका में नजर आ सकते हैं। राजनीतिक दलों के लिए उनका समर्थन हासिल करना इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है। करोड़ों की बोली की चर्चा कितनी सच? निकाय चुनाव के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में पार्षदों को अपने पक्ष में करने के लिए बड़ी रकम की पेशकश की चर्चाएं चल रही हैं। कुछ रिपोर्टों में करोड़ों रुपये तक की कथित बोली लगाए जाने का जिक्र है। हालांकि, किस पार्षद को कितनी रकम की पेशकश हुई, इसका कोई स्वतंत्र और ठोस प्रमाण सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आया है। इसलिए इन दावों को फिलहाल आरोप या राजनीतिक चर्चा के तौर पर ही देखा जा रहा है। 21 सितंबर पर टिकी नजरें अब राजस्थान की स्थानीय राजनीति में अगला बड़ा पड़ाव 21 सितंबर है। इसी दिन कई निकायों में महापौर और चेयरमैन पद के चुनाव होने हैं। इन चुनावों से पहले पार्षदों की बाड़ेबंदी और जोड़-तोड़ की कोशिशें तेज रहने की संभावना है। खासकर उन निकायों में जहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीटों का अंतर कम है, वहां हर पार्षद का वोट महत्वपूर्ण हो गया है। चुनाव जीतने के बाद भी जारी है सियासी मुकाबला निकाय चुनाव का मतदान और मतगणना भले ही खत्म हो गई हो, लेकिन स्थानीय सत्ता की असली तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। अब मुकाबला बोर्ड बनाने और बहुमत साबित करने का है। रिसॉर्ट में ठहराए जा रहे पार्षद, निर्दलीयों से संपर्क और करोड़ों की कथित बोली की चर्चाओं ने राजस्थान की स्थानीय राजनीति को फिर सुर्खियों में ला दिया है। आने वाले दिनों में तस्वीर तब साफ होगी, जब महापौर और चेयरमैन चुनाव के नतीजे सामने आएंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
India vs Afghanistan T20

India vs Afghanistan T20: Sanju Samson का तूफान, Rohit Sharma के खास क्लब में शामिल; Afghanistan फिर हारा

India vs Afghanistan T20 के बीच खेले गए दूसरे T20 मुकाबले में टीम इंडिया ने शानदार जीत दर्ज की। मैच में सबसे ज्यादा चर्चा Sanju Samson की रही, जिन्होंने सिर्फ 22 गेंदों में 57 रन बनाकर अफगानिस्तान के गेंदबाजों की मुश्किलें बढ़ा दीं। उनकी इस तेज पारी ने न सिर्फ मैच का रुख बदला, बल्कि उन्हें Rohit Sharma और KL Rahul के खास रिकॉर्ड क्लब में भी पहुंचा दिया। भारत ने इस मुकाबले को 7 विकेट से अपने नाम किया। इसके साथ ही तीन मैचों की T20 सीरीज में टीम इंडिया ने 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। Sanju Samson ने आते ही बदला मैच का रंग लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को Sanju Samson ने आक्रामक शुरुआत दी। उन्होंने मैदान के चारों तरफ शॉट लगाए और महज 22 गेंदों में अपनी फिफ्टी पूरी कर ली। सैमसन ने अपनी 57 रन की पारी में 7 चौके और 4 छक्के लगाए। उनकी बल्लेबाजी देखकर ऐसा लगा कि वह अफगानिस्तान के गेंदबाजों को कोई मौका देने के मूड में नहीं थे। हालांकि उनकी पारी ज्यादा देर नहीं चली, लेकिन इतने कम समय में उन्होंने मैच पर अपनी छाप छोड़ दी। Rohit Sharma और KL Rahul के क्लब में पहुंचे Samson Sanju Samson के लिए यह मुकाबला रिकॉर्ड के लिहाज से भी खास रहा। उन्होंने T20I में बतौर ओपनर भारत के लिए 1,000 रन पूरे कर लिए। इस उपलब्धि के साथ वह Rohit Sharma और KL Rahul के बाद भारत के तीसरे ऐसे बल्लेबाज बन गए, जिन्होंने T20I में ओपनर के तौर पर 1,000 रन बनाए हैं। यह रिकॉर्ड सैमसन के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि लंबे समय से उनकी बल्लेबाजी और टीम में भूमिका को लेकर चर्चा होती रही है। 159 रन के लक्ष्य को भारत ने आसानी से किया हासिल अफगानिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 159/8 रन बनाए। भारत के सामने 160 रन का लक्ष्य था। टीम इंडिया ने इस लक्ष्य को सिर्फ 14.5 ओवर में 3 विकेट खोकर 163 रन बनाते हुए हासिल कर लिया। भारतीय बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही रन बनाने की रफ्तार बनाए रखी और अफगानिस्तान को दबाव से बाहर निकलने का ज्यादा मौका नहीं मिला। Afghanistan के खिलाफ भारत का दबदबा जारी इस हार के साथ अफगानिस्तान के खिलाफ भारत का दबदबा एक बार फिर देखने को मिला। सीरीज के शुरुआती दोनों मुकाबले जीतकर भारत ने 2-0 की बढ़त हासिल कर ली है। अफगानिस्तान के लिए अब तीसरा मुकाबला काफी अहम होगा। टीम की कोशिश हार का सिलसिला रोककर सीरीज का अंत जीत के साथ करने की होगी। वहीं भारत की नजर अब सीरीज में क्लीन स्वीप पर रहेगी। Sanju Samson की पारी बनी मैच की बड़ी Highlight दूसरे T20I में भारत की जीत के कई कारण रहे, लेकिन Sanju Samson की तूफानी पारी सबसे बड़ी Highlight रही। 22 गेंदों में 57 रन ने भारतीय पारी को तेज रफ्तार दी और टीम को लक्ष्य तक पहुंचने में मदद की। सैमसन के रिकॉर्ड और उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने इस मुकाबले को उनके लिए यादगार बना दिया। अब क्रिकेट फैंस की नजरें अगले T20I पर हैं, जहां भारतीय टीम अपनी जीत की लय बरकरार रखना चाहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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