अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) का बयान चर्चा में है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए अमेरिका के लिए उसके साथ संपर्क बनाए रखना जरूरी है। रुबियो ने भारत और ईरान के रिश्तों का उदाहरण देते हुए समझाया कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में मतभेद होने के बावजूद देशों को बातचीत के रास्ते खुले रखने पड़ते हैं।
रुबियो ने यह बयान 20 अक्टूबर 2026 को मुंबई में Network18 के ग्रुप एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए इंटरव्यू में दिया। उनके मुताबिक, पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रखने से अमेरिका को उन गतिविधियों को हतोत्साहित करने में मदद मिल सकती है, जिनसे भारत को सुरक्षा संबंधी चिंता है।
पाकिस्तान से रिश्ते बनाए रखना क्यों जरूरी मानता है अमेरिका?
मार्को रुबियो ने कहा कि विदेश मंत्री के तौर पर उनकी जिम्मेदारी केवल किसी एक देश के साथ संबंधों को देखना नहीं, बल्कि अमेरिका की व्यापक विदेश नीति को संभालना है। इसके लिए उन देशों के साथ भी संपर्क बनाए रखना पड़ता है, जिनके साथ कुछ मुद्दों पर मतभेद होते हैं।
उन्होंने साफ किया कि अमेरिका दुनिया में आतंकवाद और आतंकवाद को समर्थन देने वालों के खिलाफ है। इसके बावजूद पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंध बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि उसके पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति भी रणनीतिक रूप से अहम है।
रुबियो का कहना था कि पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रहने से अमेरिका को भारत की चिंताओं से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी भूमिका निभाने का अवसर मिल सकता है।
भारत और ईरान का उदाहरण देकर क्या समझाया?
अपने बयान में रुबियो ने भारत और ईरान के संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत भी ईरान के नेताओं से मिलता है और उसके साथ अपने राजनयिक रिश्ते बनाए रखता है।
इस उदाहरण के जरिए रुबियो ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में हर देश को अपने हितों के हिसाब से फैसले लेने पड़ते हैं। किसी देश के साथ कुछ मुद्दों पर असहमति होने का मतलब यह नहीं है कि उससे बातचीत पूरी तरह बंद कर दी जाए।
हालांकि, भारत की ईरान नीति और अमेरिका की पाकिस्तान नीति अलग-अलग परिस्थितियों से जुड़ी हैं। दोनों देशों के सुरक्षा हित, क्षेत्रीय चुनौतियां और कूटनीतिक प्राथमिकताएं एक जैसी नहीं हैं।
भारत ने आतंकवाद पर क्या रुख रखा?
रुबियो के बयान के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी आतंकवाद को लेकर भारत का रुख दोहराया। 20 अक्टूबर को मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भारत को आतंकवाद से अपनी रक्षा करने का अधिकार है और वह अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से भी आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की अपेक्षा करता है।
जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत बनाने के लिए व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
इससे साफ है कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग के कई अहम क्षेत्र हैं, लेकिन आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे भारत के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
India-US Trade Deal पर भी हुई चर्चा
मार्को रुबियो के भारत दौरे में पाकिस्तान से जुड़े बयान के अलावा व्यापार समझौता भी अहम मुद्दा रहा। 20 अक्टूबर को मुंबई में रुबियो और एस. जयशंकर के बीच मुलाकात हुई। दोनों पक्षों ने व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर चर्चा की।
रुबियो ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर उम्मीद जताई कि समझौते के बाकी मुद्दों को जल्द सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं, हालांकि कुछ बिंदुओं पर काम बाकी है।
अमेरिका और भारत के बीच व्यापार वार्ता पिछले कुछ समय से टैरिफ और ऊर्जा खरीद जैसे मुद्दों के कारण प्रभावित रही है। ऐसे में इस दौरे को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
ईरान के साथ बातचीत में पाकिस्तान की भूमिका
पाकिस्तान की भूमिका केवल अमेरिका के साथ उसके संबंधों तक सीमित नहीं है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की कोशिशों में भी इस्लामाबाद कूटनीतिक संपर्क बनाए हुए है।
20 अक्टूबर को पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने से पहले अपनी शर्तें रखीं। इनमें प्रतिबंध हटाने, बंदरगाहों की नाकेबंदी समाप्त करने और क्षेत्र में जारी संघर्ष रोकने जैसे मुद्दे शामिल थे।
इस घटनाक्रम से पता चलता है कि पाकिस्तान पश्चिम एशिया से जुड़े कूटनीतिक प्रयासों में भी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का आगे क्या परिणाम होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
आगे भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा क्या होगी?
मार्को रुबियो का बयान बताता है कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक जरूरतों के आधार पर देख रहा है। वहीं, भारत आतंकवाद के मुद्दे पर अपनी चिंताओं को लगातार सामने रखता रहा है।
दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिशें भी जारी हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ बातचीत बनाए रखते हुए भारत की सुरक्षा चिंताओं को किस तरह संबोधित करता है।
फिलहाल, रुबियो के बयान का मुख्य संदेश यही है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में देशों को अपने हितों और मतभेदों के बीच संतुलन बनाकर चलना पड़ता है। भारत, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंधों की दिशा आने वाले कूटनीतिक फैसलों और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।
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