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Marco Rubio Statement: पाकिस्तान से बातचीत जरूरी, भारत-ईरान की दोस्ती का अमेरिका ने किया जिक्र

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अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) का बयान चर्चा में है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए अमेरिका के लिए उसके साथ संपर्क बनाए रखना जरूरी है। रुबियो ने भारत और ईरान के रिश्तों का उदाहरण देते हुए समझाया कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में मतभेद होने के बावजूद देशों को बातचीत के रास्ते खुले रखने पड़ते हैं।

रुबियो ने यह बयान 20 अक्टूबर 2026 को मुंबई में Network18 के ग्रुप एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए इंटरव्यू में दिया। उनके मुताबिक, पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रखने से अमेरिका को उन गतिविधियों को हतोत्साहित करने में मदद मिल सकती है, जिनसे भारत को सुरक्षा संबंधी चिंता है।

पाकिस्तान से रिश्ते बनाए रखना क्यों जरूरी मानता है अमेरिका?

मार्को रुबियो ने कहा कि विदेश मंत्री के तौर पर उनकी जिम्मेदारी केवल किसी एक देश के साथ संबंधों को देखना नहीं, बल्कि अमेरिका की व्यापक विदेश नीति को संभालना है। इसके लिए उन देशों के साथ भी संपर्क बनाए रखना पड़ता है, जिनके साथ कुछ मुद्दों पर मतभेद होते हैं।

उन्होंने साफ किया कि अमेरिका दुनिया में आतंकवाद और आतंकवाद को समर्थन देने वालों के खिलाफ है। इसके बावजूद पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंध बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि उसके पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति भी रणनीतिक रूप से अहम है।

रुबियो का कहना था कि पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रहने से अमेरिका को भारत की चिंताओं से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी भूमिका निभाने का अवसर मिल सकता है।

भारत और ईरान का उदाहरण देकर क्या समझाया?

अपने बयान में रुबियो ने भारत और ईरान के संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत भी ईरान के नेताओं से मिलता है और उसके साथ अपने राजनयिक रिश्ते बनाए रखता है।

इस उदाहरण के जरिए रुबियो ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में हर देश को अपने हितों के हिसाब से फैसले लेने पड़ते हैं। किसी देश के साथ कुछ मुद्दों पर असहमति होने का मतलब यह नहीं है कि उससे बातचीत पूरी तरह बंद कर दी जाए।

हालांकि, भारत की ईरान नीति और अमेरिका की पाकिस्तान नीति अलग-अलग परिस्थितियों से जुड़ी हैं। दोनों देशों के सुरक्षा हित, क्षेत्रीय चुनौतियां और कूटनीतिक प्राथमिकताएं एक जैसी नहीं हैं।

भारत ने आतंकवाद पर क्या रुख रखा?

रुबियो के बयान के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी आतंकवाद को लेकर भारत का रुख दोहराया। 20 अक्टूबर को मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भारत को आतंकवाद से अपनी रक्षा करने का अधिकार है और वह अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से भी आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की अपेक्षा करता है।

जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत बनाने के लिए व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया।

इससे साफ है कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग के कई अहम क्षेत्र हैं, लेकिन आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे भारत के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

India-US Trade Deal पर भी हुई चर्चा

मार्को रुबियो के भारत दौरे में पाकिस्तान से जुड़े बयान के अलावा व्यापार समझौता भी अहम मुद्दा रहा। 20 अक्टूबर को मुंबई में रुबियो और एस. जयशंकर के बीच मुलाकात हुई। दोनों पक्षों ने व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर चर्चा की।

रुबियो ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर उम्मीद जताई कि समझौते के बाकी मुद्दों को जल्द सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं, हालांकि कुछ बिंदुओं पर काम बाकी है।

अमेरिका और भारत के बीच व्यापार वार्ता पिछले कुछ समय से टैरिफ और ऊर्जा खरीद जैसे मुद्दों के कारण प्रभावित रही है। ऐसे में इस दौरे को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

ईरान के साथ बातचीत में पाकिस्तान की भूमिका

पाकिस्तान की भूमिका केवल अमेरिका के साथ उसके संबंधों तक सीमित नहीं है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की कोशिशों में भी इस्लामाबाद कूटनीतिक संपर्क बनाए हुए है।

20 अक्टूबर को पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने से पहले अपनी शर्तें रखीं। इनमें प्रतिबंध हटाने, बंदरगाहों की नाकेबंदी समाप्त करने और क्षेत्र में जारी संघर्ष रोकने जैसे मुद्दे शामिल थे।

इस घटनाक्रम से पता चलता है कि पाकिस्तान पश्चिम एशिया से जुड़े कूटनीतिक प्रयासों में भी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का आगे क्या परिणाम होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

आगे भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा क्या होगी?

मार्को रुबियो का बयान बताता है कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक जरूरतों के आधार पर देख रहा है। वहीं, भारत आतंकवाद के मुद्दे पर अपनी चिंताओं को लगातार सामने रखता रहा है।

दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिशें भी जारी हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ बातचीत बनाए रखते हुए भारत की सुरक्षा चिंताओं को किस तरह संबोधित करता है।

फिलहाल, रुबियो के बयान का मुख्य संदेश यही है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में देशों को अपने हितों और मतभेदों के बीच संतुलन बनाकर चलना पड़ता है। भारत, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंधों की दिशा आने वाले कूटनीतिक फैसलों और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।

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India vs New Zealand: कभी जीतना था मुश्किल, अब न्यूजीलैंड में तीसरी T20 Series जीतने का मौका

भारतीय क्रिकेट टीम के लिए न्यूजीलैंड की धरती पर टी-20 क्रिकेट का सफर हमेशा आसान नहीं रहा। एक समय ऐसा भी था, जब टीम इंडिया को कीवी टीम के खिलाफ उसकी घरेलू जमीन पर पहली टी-20 इंटरनेशनल जीत दर्ज करने के लिए करीब 10 साल इंतजार करना पड़ा था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड में अपनी ताकत दिखाई है और अब उसके पास लगातार तीसरी टी-20 सीरीज जीतने का मौका है। भारत और न्यूजीलैंड (India vs New Zealand) के बीच होने वाली पांच मैचों की T20 Series को लेकर क्रिकेट फैंस की नजरें दोनों टीमों पर टिकी हैं। भारतीय टीम जहां अपने पुराने प्रदर्शन को दोहराना चाहेगी, वहीं न्यूजीलैंड घरेलू मैदान का फायदा उठाकर सीरीज जीतने की कोशिश करेगा। India vs New Zealand: कैसे बदली टीम इंडिया की कहानी? भारत और न्यूजीलैंड के बीच न्यूजीलैंड की धरती पर पहला टी-20 इंटरनेशनल मुकाबला 2008-09 में खेला गया था। उस समय भारतीय टीम को दोनों मैचों में हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद भी न्यूजीलैंड में जीत दर्ज करना भारत के लिए आसान नहीं रहा। 2018-19 के दौरे पर टीम इंडिया ने आखिरकार अपनी पहली टी-20 इंटरनेशनल जीत दर्ज की। तीन मैचों की सीरीज का दूसरा मुकाबला जीतकर भारत ने इतिहास रचा। हालांकि, भारतीय टीम सीरीज 1-2 से हार गई थी। इस जीत ने भारतीय टीम के लिए न्यूजीलैंड में आगे का रास्ता जरूर खोला, लेकिन सीरीज जीतने के लिए उसे अभी और इंतजार करना था। 2019-20 में भारत ने किया कमाल साल 2019-20 में भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड दौरे पर शानदार प्रदर्शन किया। पांच मैचों की टी-20 सीरीज में भारत ने न्यूजीलैंड को 5-0 से हराकर क्लीन स्वीप किया। यह सीरीज भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए खास रही, क्योंकि टीम इंडिया ने मुश्किल परिस्थितियों में भी अपना संयम बनाए रखा। कुछ मुकाबलों में मैच का फैसला सुपर ओवर तक पहुंचा, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने दबाव में भी बेहतर प्रदर्शन किया। इसके बाद 2022-23 में भारत ने न्यूजीलैंड में तीन मैचों की टी-20 सीरीज 1-0 से जीती। बारिश के कारण एक मैच रद्द हुआ, जबकि दूसरा मुकाबला टाई रहा था। इस तरह भारत ने न्यूजीलैंड की धरती पर अपनी दूसरी टी-20 सीरीज जीत दर्ज की। अब भारतीय टीम के सामने लगातार तीसरी टी-20 सीरीज जीतने का लक्ष्य है। IND vs NZ Head-to-Head: किसका पलड़ा भारी? भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट में कई यादगार मुकाबले हुए हैं। भारत का कुल रिकॉर्ड बेहतर रहा है, लेकिन न्यूजीलैंड को उसके घरेलू मैदान पर हल्के में नहीं लिया जा सकता। दोनों टीमों के बीच मुकाबलों में भारतीय बल्लेबाजों की आक्रामकता और न्यूजीलैंड की तेज गेंदबाजी अक्सर निर्णायक भूमिका निभाती है। यही वजह है कि आगामी सीरीज में भी क्रिकेट फैंस को कड़े मुकाबलों की उम्मीद रहेगी। भारतीय टीम की कोशिश होगी कि वह शुरुआती मैचों से ही लय हासिल करे, ताकि सीरीज में बढ़त बनाना आसान हो सके। Vaibhav Sooryavanshi पर रहेंगी सबकी नजरें इस सीरीज में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी भी चर्चा में हैं। अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के कारण उन्होंने क्रिकेट जगत का ध्यान खींचा है। न्यूजीलैंड के गेंदबाजों के सामने उनके प्रदर्शन को लेकर भी उत्सुकता बनी हुई है। न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज जैकब डफी ने वैभव की बल्लेबाजी क्षमता की तारीफ की है और उनके खिलाफ रणनीति तैयार करने की बात कही है। न्यूजीलैंड की परिस्थितियां भारतीय बल्लेबाजों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। ऐसे में वैभव के साथ-साथ टीम के अनुभवी खिलाड़ियों की भूमिका भी अहम रहेगी। अगर भारतीय बल्लेबाज शुरुआती ओवरों में संभलकर खेलते हैं और बाद में रन गति बढ़ाते हैं, तो टीम को बड़ा स्कोर बनाने में मदद मिल सकती है। IND vs NZ T20 Series 2026: शेड्यूल और मुकाबलों पर नजर भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की सीरीज को लेकर क्रिकेट फैंस उत्साहित हैं। सीरीज के मुकाबलों में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के साथ-साथ टीम संयोजन और गेंदबाजी रणनीति भी अहम होगी। न्यूजीलैंड की टीम घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाना चाहेगी, जबकि भारत की नजर अपनी पिछली सीरीज जीतों की लय को बरकरार रखने पर होगी। मैचों की तारीख, मैदान और प्रसारण की जानकारी के लिए आधिकारिक क्रिकेट बोर्ड के अपडेट देखना बेहतर रहेगा। क्या भारत जीत की हैट्रिक लगा पाएगा? एक समय न्यूजीलैंड में पहली टी-20 जीत के लिए करीब एक दशक इंतजार करने वाली टीम इंडिया अब वहां अपनी तीसरी लगातार सीरीज जीतने का लक्ष्य लेकर उतरने की तैयारी में है। यह बदलाव भारतीय टी-20 क्रिकेट में आए सुधार और टीम के बढ़ते आत्मविश्वास को भी दिखाता है। हालांकि, क्रिकेट में पुराने रिकॉर्ड मैदान पर जीत की गारंटी नहीं होते। न्यूजीलैंड की टीम अपने घरेलू मैदान पर कड़ी चुनौती दे सकती है। ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों को बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में अच्छा प्रदर्शन करना होगा। अब फैंस को इंतजार है कि टीम इंडिया न्यूजीलैंड में अपनी जीत का सिलसिला आगे बढ़ा पाती है या नहीं। अगर भारतीय खिलाड़ी अपनी क्षमता के मुताबिक प्रदर्शन करते हैं, तो यह सीरीज एक बार फिर यादगार बन सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Marco Rubio

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अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) का बयान चर्चा में है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए अमेरिका के लिए उसके साथ संपर्क बनाए रखना जरूरी है। रुबियो ने भारत और ईरान के रिश्तों का उदाहरण देते हुए समझाया कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में मतभेद होने के बावजूद देशों को बातचीत के रास्ते खुले रखने पड़ते हैं। रुबियो ने यह बयान 20 अक्टूबर 2026 को मुंबई में Network18 के ग्रुप एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए इंटरव्यू में दिया। उनके मुताबिक, पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रखने से अमेरिका को उन गतिविधियों को हतोत्साहित करने में मदद मिल सकती है, जिनसे भारत को सुरक्षा संबंधी चिंता है। पाकिस्तान से रिश्ते बनाए रखना क्यों जरूरी मानता है अमेरिका? मार्को रुबियो ने कहा कि विदेश मंत्री के तौर पर उनकी जिम्मेदारी केवल किसी एक देश के साथ संबंधों को देखना नहीं, बल्कि अमेरिका की व्यापक विदेश नीति को संभालना है। इसके लिए उन देशों के साथ भी संपर्क बनाए रखना पड़ता है, जिनके साथ कुछ मुद्दों पर मतभेद होते हैं। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका दुनिया में आतंकवाद और आतंकवाद को समर्थन देने वालों के खिलाफ है। इसके बावजूद पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंध बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि उसके पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति भी रणनीतिक रूप से अहम है। रुबियो का कहना था कि पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रहने से अमेरिका को भारत की चिंताओं से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी भूमिका निभाने का अवसर मिल सकता है। भारत और ईरान का उदाहरण देकर क्या समझाया? अपने बयान में रुबियो ने भारत और ईरान के संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत भी ईरान के नेताओं से मिलता है और उसके साथ अपने राजनयिक रिश्ते बनाए रखता है। इस उदाहरण के जरिए रुबियो ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में हर देश को अपने हितों के हिसाब से फैसले लेने पड़ते हैं। किसी देश के साथ कुछ मुद्दों पर असहमति होने का मतलब यह नहीं है कि उससे बातचीत पूरी तरह बंद कर दी जाए। हालांकि, भारत की ईरान नीति और अमेरिका की पाकिस्तान नीति अलग-अलग परिस्थितियों से जुड़ी हैं। दोनों देशों के सुरक्षा हित, क्षेत्रीय चुनौतियां और कूटनीतिक प्राथमिकताएं एक जैसी नहीं हैं। भारत ने आतंकवाद पर क्या रुख रखा? रुबियो के बयान के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी आतंकवाद को लेकर भारत का रुख दोहराया। 20 अक्टूबर को मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भारत को आतंकवाद से अपनी रक्षा करने का अधिकार है और वह अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से भी आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की अपेक्षा करता है। जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत बनाने के लिए व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। इससे साफ है कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग के कई अहम क्षेत्र हैं, लेकिन आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे भारत के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। India-US Trade Deal पर भी हुई चर्चा मार्को रुबियो के भारत दौरे में पाकिस्तान से जुड़े बयान के अलावा व्यापार समझौता भी अहम मुद्दा रहा। 20 अक्टूबर को मुंबई में रुबियो और एस. जयशंकर के बीच मुलाकात हुई। दोनों पक्षों ने व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर चर्चा की। रुबियो ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर उम्मीद जताई कि समझौते के बाकी मुद्दों को जल्द सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं, हालांकि कुछ बिंदुओं पर काम बाकी है। अमेरिका और भारत के बीच व्यापार वार्ता पिछले कुछ समय से टैरिफ और ऊर्जा खरीद जैसे मुद्दों के कारण प्रभावित रही है। ऐसे में इस दौरे को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। ईरान के साथ बातचीत में पाकिस्तान की भूमिका पाकिस्तान की भूमिका केवल अमेरिका के साथ उसके संबंधों तक सीमित नहीं है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की कोशिशों में भी इस्लामाबाद कूटनीतिक संपर्क बनाए हुए है। 20 अक्टूबर को पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने से पहले अपनी शर्तें रखीं। इनमें प्रतिबंध हटाने, बंदरगाहों की नाकेबंदी समाप्त करने और क्षेत्र में जारी संघर्ष रोकने जैसे मुद्दे शामिल थे। इस घटनाक्रम से पता चलता है कि पाकिस्तान पश्चिम एशिया से जुड़े कूटनीतिक प्रयासों में भी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का आगे क्या परिणाम होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। आगे भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा क्या होगी? मार्को रुबियो का बयान बताता है कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक जरूरतों के आधार पर देख रहा है। वहीं, भारत आतंकवाद के मुद्दे पर अपनी चिंताओं को लगातार सामने रखता रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिशें भी जारी हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ बातचीत बनाए रखते हुए भारत की सुरक्षा चिंताओं को किस तरह संबोधित करता है। फिलहाल, रुबियो के बयान का मुख्य संदेश यही है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में देशों को अपने हितों और मतभेदों के बीच संतुलन बनाकर चलना पड़ता है। भारत, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंधों की दिशा आने वाले कूटनीतिक फैसलों और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

फेस्टिव सीजन में भी स्मार्टफोन की बिक्री 26% गिरी, 10 साल के निचले स्तर पर बाजार; सैमसंग बनी नंबर-1

फेस्टिव सीजन के बावजूद भारत में स्मार्टफोन बाजार की रफ्तार धीमी पड़ गई है। मार्केट रिसर्च फर्म Omdia के मुताबिक, जुलाई से सितंबर 2026 के बीच देश में 3.58 करोड़ स्मार्टफोन बिके। पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले बिक्री में 26% की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, 2016 के बाद यह किसी भी तिमाही में स्मार्टफोन बिक्री का सबसे निचला स्तर है। फोन की बढ़ती कीमतें और पुराने स्मार्टफोन को लंबे समय तक इस्तेमाल करने का चलन इसकी प्रमुख वजहों में शामिल हैं। सैमसंग बनी नंबर-1, ढाई साल बाद हासिल किया पहला स्थान सैमसंग ने तीसरी तिमाही में करीब 67 लाख स्मार्टफोन बेचकर बाजार में पहला स्थान हासिल किया। कंपनी करीब ढाई साल बाद दोबारा नंबर-1 पर पहुंची है। सैमसंग की बिक्री को किफायती Galaxy A सीरीज के फोन, प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग और आसान किस्तों जैसे ऑफर्स से फायदा मिला। एक्सचेंज ऑफर्स ने भी ग्राहकों को नए फोन खरीदने के लिए आकर्षित किया। वीवो, ओप्पो और शाओमी की बिक्री में गिरावट तीसरी तिमाही में चीनी स्मार्टफोन कंपनियों को बिक्री के मोर्चे पर नुकसान उठाना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रमुख कंपनियों का प्रदर्शन इस तरह रहा: आईफोन 16 और 17 की मांग से एपल टॉप-5 में एपल ने तीसरी तिमाही में करीब 39 लाख स्मार्टफोन बेचकर पांचवां स्थान हासिल किया। रिपोर्ट के मुताबिक, iPhone 16 और iPhone 17 मॉडल की मांग से कंपनी को फायदा मिला। इसके अलावा, कीमतें बढ़ने की आशंका के चलते दुकानदारों की ओर से पहले से स्टॉक जुटाने का भी बिक्री पर असर पड़ा। नए iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max की लॉन्चिंग को भी बाजार में कंपनी की गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। चीनी ब्रांड्स की बाजार हिस्सेदारी 75% से घटकर 68% Omdia की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में चीनी स्मार्टफोन ब्रांड्स की संयुक्त बाजार हिस्सेदारी एक साल पहले के 75% से घटकर 68% रह गई है। दूसरी ओर, सैमसंग और एपल जैसी कंपनियों को अपने प्रीमियम फोन, मजबूत रिटेल नेटवर्क और आसान EMI व एक्सचेंज ऑफर्स से फायदा मिला। इससे प्रतिस्पर्धी बाजार में उनकी स्थिति मजबूत हुई है। 2027 में भी सुस्ती की आशंका, AI फीचर्स से उम्मीद रिपोर्ट के मुताबिक, 2027 में भी भारतीय स्मार्टफोन बाजार में सुस्ती बनी रह सकती है। फोन की बढ़ती कीमतों के कारण ग्राहक अपने पुराने डिवाइस को ज्यादा समय तक इस्तेमाल कर रहे हैं और नया फोन खरीदने का फैसला टाल रहे हैं। हालांकि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े फीचर्स बाजार के लिए नई उम्मीद बन सकते हैं। Omdia के अनुसार, करीब 40% भारतीय यूजर्स उपयोगी AI फीचर्स वाले स्मार्टफोन के लिए ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार हैं। ऐसे में आने वाले समय में AI फीचर्स फोन की मांग बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
Jio Platforms IPO

Jio Platforms IPO: QIB कैटेगरी में जबरदस्त मांग, Retail Investors का कैसा रहा रिस्पॉन्स?

Jio Platforms IPO को लेकर शेयर बाजार में हलचल तेज हो गई है। 21 अक्टूबर 2026 को पब्लिक इश्यू खुलने के साथ ही बड़े संस्थागत निवेशकों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई। शुरुआती कारोबार के दौरान Qualified Institutional Buyers (QIB) कैटेगरी में मजबूत मांग देखने को मिली। दूसरी ओर, रिटेल निवेशकों की भागीदारी पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। करीब ₹30,213 करोड़ के इस IPO को देश के बड़े पब्लिक इश्यू में गिना जा रहा है। निवेशकों के बीच इस बात को लेकर उत्सुकता है कि आने वाले दिनों में इश्यू को कितना सब्सक्रिप्शन मिलता है और शेयर बाजार में इसकी लिस्टिंग कैसी रहती है। Jio Platforms IPO Subscription Status: QIB कैटेगरी में मजबूत मांग IPO खुलने के शुरुआती घंटों में संस्थागत निवेशकों की ओर से अच्छी मांग दर्ज की गई। QIB कैटेगरी में मिले मजबूत रिस्पॉन्स ने इस इश्यू को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, रिटेल और Non-Institutional Investors (NII) कैटेगरी में शुरुआती प्रतिक्रिया तुलनात्मक रूप से धीमी रही। यहां ध्यान देने वाली बात है कि IPO का सब्सक्रिप्शन स्टेटस लगातार बदलता रहता है। इसलिए निवेशकों को आवेदन करने से पहले NSE और BSE पर उपलब्ध ताजा आंकड़े देखने चाहिए। QIB कैटेगरी में म्यूचुअल फंड, बैंक और अन्य बड़े संस्थागत निवेशक शामिल होते हैं। इस श्रेणी में ज्यादा मांग कंपनी के इश्यू में बड़े निवेशकों की दिलचस्पी दिखाती है, लेकिन इससे लिस्टिंग पर मुनाफे की गारंटी नहीं मिलती। ₹30,213 करोड़ का है Jio Platforms IPO Jio Platforms इस IPO के जरिए करीब ₹30,213 करोड़ जुटाने की योजना के साथ बाजार में आई है। कंपनी ने शेयरों के लिए ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से एक शेयर की कीमत ₹1,119 है। अगर लॉट साइज 12 शेयर है, तो एक लॉट के लिए ₹13,428 की रकम चाहिए। निवेशकों को आवेदन से पहले आधिकारिक IPO दस्तावेजों में इन जानकारियों की पुष्टि कर लेनी चाहिए। Anchor Investors ने भी दिखाई दिलचस्पी पब्लिक इश्यू से पहले एंकर निवेशकों की भागीदारी भी चर्चा में रही। एंकर निवेशक वे बड़े संस्थागत निवेशक होते हैं, जिन्हें IPO खुलने से पहले निर्धारित नियमों के तहत शेयर आवंटित किए जाते हैं। बड़े निवेशकों की भागीदारी से किसी इश्यू को लेकर बाजार की दिलचस्पी का अंदाजा मिल सकता है। हालांकि, आम निवेशकों को सिर्फ एंकर निवेशकों के नाम देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। कंपनी का मूल्यांकन, वित्तीय स्थिति और भविष्य की कारोबारी संभावनाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। Retail Investors के लिए क्या है जरूरी? Jio Platforms IPO में आवेदन करने से पहले रिटेल निवेशकों को कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना चाहिए। सबसे पहले कंपनी का रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) पढ़ें और उसमें दी गई वित्तीय जानकारी को समझें। इसके अलावा, कंपनी के कारोबार, प्रतिस्पर्धा, संभावित जोखिम और शेयर की कीमत का आकलन करना जरूरी है। IPO में ज्यादा सब्सक्रिप्शन मिलने का मतलब यह नहीं है कि लिस्टिंग के दिन शेयर का भाव जरूर बढ़ेगा। ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) के आधार पर भी मुनाफे का पक्का अनुमान नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि यह अनौपचारिक बाजार का संकेत होता है। Jio Platforms IPO की जरूरी तारीखें IPO से जुड़ी प्रमुख तारीखों के अनुसार, इश्यू 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर 2026 तक खुला रहने का कार्यक्रम है। अलॉटमेंट 26 अक्टूबर और शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को प्रस्तावित है। इन तारीखों की पुष्टि कंपनी के अंतिम आधिकारिक अपडेट से करना जरूरी है। Jio Platforms IPO पर क्यों है बाजार की नजर? Jio Platforms टेलीकॉम और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में काम करती है। कंपनी की डिजिटल मौजूदगी और बड़े ग्राहक आधार के कारण इस IPO पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। इस इश्यू का प्रदर्शन भारतीय शेयर बाजार में बड़े IPO और डिजिटल कारोबार से जुड़ी कंपनियों के मूल्यांकन को लेकर चर्चा को भी प्रभावित कर सकता है। फिर भी, निवेश का फैसला करने से पहले कंपनी के कारोबारी प्रदर्शन और शेयर की कीमत को समझना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Bhagwant Mann

Bhagwant Mann Airport Controversy: ₹50 हजार की Customs Duty पर AAP ने उठाए सवाल

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) के फ्रांस दौरे से लौटने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर रोके जाने का मामला चर्चा में है। आम आदमी पार्टी (AAP) का दावा है कि मुख्यमंत्री को करीब तीन घंटे तक एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ा और 50 हजार रुपये की राशि का चालान लगाया गया। इस घटना के बाद पार्टी ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स में कस्टम जांच के दौरान सामान से जुड़ी जानकारी सामने आई है। ऐसे में इस पूरे मामले में दो पहलू चर्चा में हैं—एक तरफ AAP के राजनीतिक आरोप और दूसरी तरफ कस्टम ड्यूटी लगाए जाने की खबर। आइए जानते हैं कि भगवंत मान के फ्रांस दौरे से लौटने के बाद क्या हुआ और विवाद क्यों बढ़ा। France Visit के बाद Delhi Airport पर क्या हुआ? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भगवंत मान 19 अक्टूबर 2026 को फ्रांस से भारत लौटे थे। वह पंजाब के प्रतिनिधिमंडल के साथ पेरिस में आयोजित SIAL Paris 2026 फूड ट्रेड शो में शामिल होने गए थे। इस दौरे का मकसद पंजाब के कृषि और खाद्य उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा देना था। AAP के पंजाब मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने आरोप लगाया कि दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री को करीब तीन घंटे तक रोका गया। उनके मुताबिक, शुरुआत में अधिकारियों ने सामान आने और उसकी जांच होने की बात कही। बाद में 50 हजार रुपये का चालान लगाए जाने की जानकारी सामने आई। पार्टी ने इस घटनाक्रम पर नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि मुख्यमंत्री को इतनी देर तक इंतजार क्यों करना पड़ा। हालांकि, एयरपोर्ट पर हुई पूरी कार्रवाई और देरी के कारणों को लेकर आधिकारिक जानकारी स्पष्ट होना अभी बाकी है। ₹50,000 की Customs Duty पर क्यों उठे सवाल? इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा 50 हजार रुपये की राशि को लेकर हो रही है। मीडिया रिपोर्ट्स में कस्टम विभाग के सूत्रों के हवाले से बताया गया कि सामान की जांच के दौरान कुछ ऐसी वस्तुएं मिलीं, जिनकी जानकारी कथित तौर पर अधिकारियों को नहीं दी गई थी। इसी वजह से कस्टम ड्यूटी लगाए जाने की बात सामने आई। हालांकि, सामान की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि 50 हजार रुपये की राशि केवल कस्टम ड्यूटी थी या इसमें किसी तरह का जुर्माना भी शामिल था। इसलिए इस मामले में AAP के आरोपों और कस्टम जांच से जुड़ी रिपोर्टों को अलग-अलग समझना जरूरी है। आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही कार्रवाई की वजह को लेकर स्थिति साफ हो सकेगी। AAP ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना एयरपोर्ट पर हुई इस घटना के बाद आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार की आलोचना की। पार्टी नेताओं का आरोप है कि भगवंत मान के विदेशी दौरे से जुड़े मामलों में लगातार बाधाएं पैदा की जा रही हैं। AAP ने कहा कि मुख्यमंत्री फ्रांस में पंजाब के कारोबार और खाद्य उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गए थे। ऐसे में उनके साथ हुए घटनाक्रम पर सवाल उठना स्वाभाविक है। पार्टी ने इस मामले को पंजाब के सम्मान से जोड़ते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। हालांकि, एयरपोर्ट पर हुई कार्रवाई के पीछे राजनीतिक दबाव होने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। France जाने की अनुमति पर भी हुआ था विवाद भगवंत मान के फ्रांस दौरे से पहले भी उनकी यात्रा को लेकर विवाद सामने आया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार ने शुरुआत में उनके दौरे के लिए राजनीतिक मंजूरी नहीं दी थी। इसके बाद पंजाब सरकार ने इस फैसले पर आपत्ति जताई। मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा। रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने 16 अक्टूबर को मान को फ्रांस जाने की अनुमति दी। इसके बाद मुख्यमंत्री पेरिस में आयोजित SIAL Paris 2026 कार्यक्रम में शामिल हुए। यह दौरा पंजाब के कृषि और खाद्य कारोबार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था। ऐसे में वापसी के बाद एयरपोर्ट पर रोके जाने की खबर ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया। अब किन सवालों के जवाब का इंतजार? भगवंत मान से जुड़े इस मामले में फिलहाल कुछ सवालों पर स्थिति साफ होना बाकी है। इन सवालों के जवाब संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक बयान से ही स्पष्ट हो सकेंगे। फिलहाल, AAP ने इस घटना को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि मीडिया रिपोर्ट्स में कस्टम जांच को कार्रवाई की संभावित वजह बताया गया है। पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आने के लिए आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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