Govardhan Puja 2025, दिवाली के अगले दिन मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिन्दू त्योहार है। इसे अन्नकूट पूजा या इंदिरा पूजा भी कहा जाता है। यह पर्व भगवान कृष्ण और उनकी लीला, विशेषकर गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा, के लिए प्रसिद्ध है।
गोवर्धन पूजा की कहानी (Govardhan Puja Story in Hindi)
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान कृष्ण ने गोकुलवासियों को समझाया कि केवल प्रकृति और गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए, न कि केवल इन्द्रदेव की, तब इन्द्रदेव क्रोधित होकर भारी वर्षा करने लगे। तब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत अपने छोटे अंगूठे पर उठाकर गोकुलवासियों और उनके पशुओं की रक्षा की।
इस घटना के बाद से हर साल Govardhan Puja मनाई जाती है, जो भक्ति, प्रेम और प्रकृति संरक्षण का संदेश देती है।
Govardhan Puja कब और कैसे मनाई जाती है?
- तारीख: दिवाली के अगले दिन, 2025 में 22 अक्टूबर।
- शुभ मुहूर्त: 6.26 A.M 8.42 A.M बजे तक।
- पूजा सामग्री: मिट्टी का गोवर्धन पर्वत, दालें, चावल, मिठाइयाँ, फल।
- पूजा विधि: घर और गांव में मिट्टी का छोटा गोवर्धन पर्वत बनाकर अन्नकूट चढ़ाया जाता है। महिलाओं और पुरुषों द्वारा इसे सजाकर भगवान कृष्ण को अर्पित किया जाता है।
- विशेष महत्व: इस दिन गायों और मवेशियों की पूजा भी होती है, क्योंकि ये भगवान कृष्ण के प्रिय हैं।
गोवर्धन पूजा का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व
Govardhan Puja केवल भगवान कृष्ण की भक्ति का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह प्रकृति संरक्षण और सामाजिक समरसता का संदेश भी देती है। अन्नकूट बनाकर गांव और शहर के लोग मिलकर भोजन करते हैं और जरूरतमंदों में दान वितरित करते हैं।
Govardhan Puja 2025 प्रेम, भक्ति और प्राकृतिक संतुलन का पर्व है। मिट्टी के गोवर्धन पर्वत का निर्माण कर, अन्नकूट चढ़ाकर और गायों की सेवा करके हम अपने जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति कर सकते हैं।
हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
