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TMC नेता जहांगीर खान की मुश्किलें बढ़ीं, अब पत्नी भी गिरफ्तार; फालता थाने पर हमले का मामला

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चर्चित नेता जहांगीर खान उर्फ ‘पुष्पा’ से जुड़े मामले ने नया मोड़ ले लिया है। दक्षिण 24 परगना जिले के फालता इलाके में पुलिस ने जहांगीर खान की पत्नी सरीना बीबी को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पति को पुलिस हिरासत से छुड़ाने के लिए समर्थकों को इकट्ठा कर फालता थाने पर हमले की योजना बनाई और प्रदर्शन का नेतृत्व किया। पुलिस के अनुसार, जहांगीर खान की गिरफ्तारी के बाद बड़ी संख्या में समर्थक सड़कों पर उतर आए थे। 17 जून को फालता क्षेत्र में प्रदर्शन के दौरान भीड़ थाने की ओर बढ़ी और कथित तौर पर खान को छुड़ाने की कोशिश की गई। प्रशासन को पहले से इसकी जानकारी मिल चुकी थी, इसलिए पुलिस और सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती कर दी गई थी, जिससे स्थिति नियंत्रण से बाहर नहीं गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि सरीना बीबी इस पूरे विरोध प्रदर्शन की प्रमुख आयोजक थीं। पुलिस का कहना है कि उन्होंने समर्थकों को जुटाने और थाने की ओर मार्च निकालने में अहम भूमिका निभाई। मामले में अब तक 25 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और कई अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। पति की गिरफ्तारी और सार्वजनिक परेड से भड़का विवाद जहांगीर खान को हाल ही में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया था। उन पर जबरन वसूली और अन्य आपराधिक मामलों से जुड़े आरोप लगे हैं। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उन्हें सार्वजनिक रूप से कान पकड़कर और सिर झुकाकर इलाके में परेड कराई थी। इस घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं, जिसके बाद समर्थकों में नाराजगी बढ़ गई। बताया जा रहा है कि इसी घटना के बाद विरोध प्रदर्शन तेज हुआ और सरीना बीबी ने पति की रिहाई की मांग को लेकर समर्थकों को संगठित किया। पुलिस का दावा है कि बाद में यही प्रदर्शन हिंसक रूप लेता चला गया। सरीना बीबी पर गंभीर धाराएं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरीना बीबी के खिलाफ पहले से दर्ज मामलों के अलावा नए आरोप भी जोड़े गए हैं। कुछ रिपोर्टों में उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ कानून से संबंधित धाराएं लगाए जाने की बात भी कही गई है। हालांकि इन आरोपों की जांच अभी जारी है और पुलिस साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है। राजनीति में बढ़ी हलचल जहांगीर खान और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर कानून-व्यवस्था को लेकर बहस शुरू हो गई है। विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है, जबकि पुलिस का कहना है कि कानून हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और संभावित नई गिरफ्तारियों पर सबकी नजर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ram Mandir

Ram Mandir Donation Row: SIT रिपोर्ट से मच सकता है हड़कंप, ट्रस्ट में बदलाव की अटकलें तेज

अयोध्या के Ram Mandir से जुड़े चढ़ावा विवाद ने एक बार फिर सुर्खियां बटोर ली हैं। श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र बने राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर उठे सवालों के बीच अब जांच अपने अहम पड़ाव पर पहुंच गई है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) आज अपनी रिपोर्ट लखनऊ में उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप सकती है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक भी पहुंचेगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा की गई है। इसी वजह से ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के नाम चर्चा में हैं। हालांकि अभी तक किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कैसे शुरू हुआ पूरा मामला? राम मंदिर में हर दिन देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दान और चढ़ावा अर्पित करते हैं। कुछ समय पहले चढ़ावे के रखरखाव और रिकॉर्ड से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। शिकायतों के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए SIT जांच के आदेश दिए थे। जांच टीम ने बीते दिनों कई दस्तावेजों की जांच की, संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ की तथा वित्तीय रिकॉर्ड का भी परीक्षण किया। अब सभी की निगाहें अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। रिपोर्ट से तय हो सकती है आगे की दिशा राजनीतिक गलियारों से लेकर धार्मिक संगठनों तक, हर कोई SIT की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। माना जा रहा है कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है। कुछ सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट में प्रशासनिक बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि अंतिम फैसला सरकार और संबंधित अधिकारियों की समीक्षा के बाद ही होगा। आस्था से जुड़ा मामला, इसलिए बढ़ी संवेदनशीलता राम मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। ऐसे में चढ़ावे और उसके प्रबंधन को लेकर उठे सवाल स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। श्रद्धालु भी चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और सच्चाई सामने आए। अब सबकी नजर योगी सरकार के फैसले पर SIT की रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद यह स्पष्ट होगा कि जांच में क्या निष्कर्ष निकले हैं और सरकार आगे क्या कदम उठाने वाली है। फिलहाल अयोध्या से लेकर लखनऊ तक इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। आने वाले दिनों में रिपोर्ट के आधार पर लिए गए फैसले इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Shiv Sena

Shiv Sena Foundation Day Clash शिंदे बनाम उद्धव रैली, 6 बागी सांसदों पर सबकी नजर

शिवसेना (Shiv Sena) के 60वें स्थापना दिवस पर महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा सियासी घमासान देखने को मिला। एक तरफ उद्धव ठाकरे गुट ने अपनी पारंपरिक शिवसेना की विचारधारा और संघर्ष को सामने रखा, तो दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे गुट ने अपनी बढ़ती राजनीतिक ताकत का जोरदार प्रदर्शन किया। दोनों गुटों की अलग-अलग रैलियों ने साफ कर दिया कि पार्टी का संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि नया मोड़ ले चुका है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा 6 बागी सांसदों को लेकर रही, जिनके शिंदे गुट के कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया। दो गुट, दो रैलियां, एक ही पार्टी का बंटा हुआ जश्न शिवसेना का यह स्थापना दिवस इस बार एकता का नहीं बल्कि बंटवारे का प्रतीक बन गया। यह पूरा माहौल दिखा रहा था कि शिवसेना अब दो अलग राजनीतिक रास्तों पर चल चुकी है। 6 Rebel MPs पर क्यों मचा है बवाल? इस पूरे राजनीतिक ड्रामे का सबसे बड़ा केंद्र 6 बागी सांसद बन गए हैं। सूत्रों के मुताबिक: इनकी संभावित एंट्री शिंदे गुट के लिए संसद में बड़ी ताकत साबित हो सकती है, जबकि उद्धव गुट के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है। उद्धव ठाकरे गुट के सामने बढ़ती चुनौतियां उद्धव गुट के लिए यह समय आसान नहीं दिख रहा है। स्थापना दिवस के मंच से भी उद्धव गुट ने अपनी “विचारधारा और विरासत” को बचाने की बात कही, लेकिन जमीन पर चुनौती साफ दिखाई दी। Shinde Camp की बढ़ती ताकत और आत्मविश्वास एकनाथ शिंदे गुट इस मौके को अपनी राजनीतिक जीत के रूप में पेश कर रहा है। शिंदे खेमे का संदेश साफ था—“जनता और विधायक हमारे साथ हैं।” महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ इस पूरे घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET

NEET RE-Exam 2026 Guidelines: ड्रेस कोड से लेकर एग्जाम हॉल तक पूरे नियम जानें

NEET री-एग्जाम को लेकर लाखों छात्रों के बीच तैयारी तेज है, लेकिन इसी बीच National Testing Agency (NTA) ने परीक्षा को लेकर सख्त गाइडलाइन जारी कर दी है। इसमें खासकर ड्रेस कोड और परीक्षा हॉल नियमों पर ज्यादा ध्यान दिया गया है, ताकि एग्जाम पूरी तरह पारदर्शी और नकल-रहित हो सके। छात्रों के लिए यह जरूरी है कि वे परीक्षा सेंटर जाने से पहले सभी नियम अच्छे से समझ लें, क्योंकि छोटी सी गलती भी एंट्री रोक सकती है। NEET Exam Dress Code 2026: क्या पहनना सही रहेगा? NTA ने साफ कहा है कि उम्मीदवारों को सिंपल और हल्के कपड़े पहनकर आना चाहिए: NEET Exam में क्या नहीं पहनना चाहिए? NTA ने कुछ चीजों पर सख्त रोक लगाई है: NEET Exam Hall Rules: क्या लेकर जा सकते हैं? परीक्षा हॉल में सिर्फ जरूरी चीजों की अनुमति है: परीक्षा केंद्र में क्या बिल्कुल मना है? छात्रों के लिए जरूरी सलाह (Important Tips) NEET जैसी बड़ी परीक्षा में छोटी तैयारी भी बड़ा फर्क डालती है:
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Ram Mandir

Ram Mandir Donation Case: चढ़ावा विवाद के बीच Ayodhya पहुंचे CM Yogi, SIT जांच पर दिया बड़ा बयान

राम मंदिर (Ram Mandir) में चढ़ावे को लेकर सामने आए कथित गड़बड़ी और चोरी के आरोपों के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे। मामले के सार्वजनिक होने के बाद यह उनका पहला दौरा माना जा रहा है। अयोध्या पहुंचते ही उन्होंने रामलला के दर्शन किए और जांच को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि SIT पूरी निष्पक्षता के साथ काम कर रही है और जल्द ही सच सामने आएगा। राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़े विवाद ने श्रद्धालुओं के बीच भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री के दौरे को इसी वजह से काफी अहम माना जा रहा है। रामलला के दर्शन के बाद अधिकारियों के साथ समीक्षा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले रामलला के दर्शन किए। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर और अयोध्या में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और चल रही जांच की स्थिति पर भी चर्चा की गई। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जांच प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बनाए रखी जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। “दूध का दूध, पानी का पानी करेगी SIT” मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से देख रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि विशेष जांच दल (SIT) तथ्यों के आधार पर जांच कर रही है और रिपोर्ट आने के बाद सच्चाई सबके सामने होगी। योगी ने कहा कि अगर जांच में किसी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दोहराया कि राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता है। क्या है पूरा मामला? राम मंदिर के चढ़ावे और उससे जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की गई थी। SIT पिछले कई महीनों के दस्तावेजों, खातों और लेन-देन की बारीकी से जांच कर रही है। जानकारी के अनुसार, अब तक करीब 100 कर्मचारियों और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। जांच टीम ने लगभग 11 महीने के रिकॉर्ड और दस्तावेजों को खंगाला है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं चढ़ावे के प्रबंधन में कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई। हालांकि अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की नजर जांच रिपोर्ट पर राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस मामले की जांच को लेकर लोगों की दिलचस्पी लगातार बनी हुई है। श्रद्धालु चाहते हैं कि जो भी सच्चाई हो, वह पूरी पारदर्शिता के साथ सामने आए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद यह साफ संकेत मिला है कि सरकार मामले को अंत तक पहुंचाने के पक्ष में है और किसी भी तरह की अनियमितता को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jharkhand

Jharkhand Election राज्यसभा नतीजों के बाद INDIA गठबंधन में दरार की चर्चा तेज

Jharkhand Rajya Sabha Election Result 2026 ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस उम्मीदवार की हार के बाद INDIA गठबंधन के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। चुनाव परिणाम आते ही कांग्रेस नेताओं ने सहयोगी दलों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए, जबकि RJD और CPI(ML) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। ऐसे में यह चुनाव सिर्फ एक सीट की हार-जीत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गठबंधन की एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर गया है। कांग्रेस को लगा बड़ा झटका झारखंड की राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में JMM उम्मीदवार बैजनाथ राम और NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने जीत हासिल की। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार को उम्मीद के विपरीत हार का सामना करना पड़ा। यह नतीजा इसलिए चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि विधानसभा में INDIA गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल होने का दावा किया जा रहा था। चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस खेमे में निराशा साफ दिखाई दी। पार्टी नेताओं का मानना है कि कहीं न कहीं वोटों का गणित बिगड़ा, जिसके कारण यह हार सामने आई। हार के बाद शुरू हुआ आरोपों का दौर राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग हुई। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने संकेत दिए कि गठबंधन के भीतर से ही पार्टी को पूरा समर्थन नहीं मिला। हालांकि किसी दल का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया, लेकिन RJD और CPI(ML) के विधायकों को लेकर सवाल उठने लगे। कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि अगर सभी वोट तय रणनीति के अनुसार पड़े होते, तो परिणाम अलग हो सकता था। RJD ने दिया जवाब कांग्रेस के आरोपों के बाद RJD ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। पार्टी नेताओं ने साफ कहा कि उनके सभी विधायकों ने गठबंधन धर्म का पालन किया और कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में ही मतदान किया। RJD का कहना है कि हार के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय कांग्रेस को अपने राजनीतिक प्रबंधन की समीक्षा करनी चाहिए। पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि बिना किसी ठोस सबूत के आरोप लगाना सही नहीं है। CPI(ML) ने भी आरोपों को बताया बेबुनियाद CPI(ML) ने भी कांग्रेस की आशंकाओं को खारिज कर दिया। पार्टी का दावा है कि उसके विधायकों ने पहले से तय रणनीति के अनुसार मतदान किया था। नेताओं का कहना है कि चुनाव परिणाम के बाद पैदा हुई निराशा में इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। परिमल नाथवानी की जीत बनी चर्चा का विषय इस चुनाव का सबसे बड़ा आकर्षण NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की जीत रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी जीत ने झारखंड की राजनीति में कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनाव से पहले भी राजनीतिक हलकों में यह चर्चा थी कि मुकाबला अपेक्षा से ज्यादा दिलचस्प हो सकता है। नतीजों ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है। INDIA Alliance के सामने नई चुनौती झारखंड राज्यसभा चुनाव का परिणाम INDIA गठबंधन के लिए एक चेतावनी की तरह देखा जा रहा है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहले सहयोगी दलों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत महसूस की जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि गठबंधन के भीतर मौजूद असंतोष को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो आने वाले चुनावों में इसका असर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tej Pratap Yadav

Tej Pratap Controversy: गर्लफ्रेंड की बेटी से मिलने पहुंचे तेजप्रताप? FIR के बाद बढ़ा विवाद

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता तेजप्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार मामला उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा है, जिसने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। कथित गर्लफ्रेंड अनुष्का के भाई आकाश द्वारा दर्ज कराई गई FIR के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तेजप्रताप यादव कथित तौर पर अनुष्का की बेटी से मिलने के लिए उनके घर पहुंचे और बिना अनुमति अंदर प्रवेश करने की कोशिश की। मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इसकी चर्चा हो रही है। FIR में क्या लगाए गए हैं आरोप? आकाश द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में कहा गया है कि तेजप्रताप यादव अचानक उनके घर पहुंचे। परिवार का आरोप है कि उन्होंने घर में जबरन प्रवेश किया, जिससे परिवार के सदस्यों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल अधिकारियों द्वारा दोनों पक्षों की बात सुनी जा रही है और तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। तेजप्रताप यादव ने आरोपों को बताया बेबुनियाद विवाद बढ़ने के बाद तेजप्रताप यादव ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है और यह सब उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। तेजप्रताप का कहना है कि वे किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं और उन्हें कानून पर पूरा भरोसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर उनके नाम को विवादों में घसीटने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज तेजप्रताप यादव बिहार के सबसे चर्चित राजनीतिक चेहरों में से एक हैं। ऐसे में उनसे जुड़ा कोई भी मामला तेजी से सुर्खियां बन जाता है। इस विवाद के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि अभी तक मामले को लेकर किसी प्रमुख राजनीतिक दल की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी हुई है। जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई फिलहाल पूरा मामला पुलिस जांच के अधीन है। जांच एजेंसियां शिकायत, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं। मामले में एक पक्ष गंभीर आरोप लगा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे साजिश करार दे रहा है। ऐसे में अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे इस विवाद की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Telegram

Telegram को बड़ा झटका! Delhi High Court ने बैन हटाने से किया साफ इनकार

मैसेजिंग ऐप Telegram को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अदालत ने केंद्र सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए कंपनी की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ कहा कि राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण परीक्षा की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और जरूरत पड़ने पर वह ऐसे कदम उठा सकती है। इस फैसले के बाद Telegram पर लगा अस्थायी प्रतिबंध फिलहाल जारी रहेगा। मामला केवल एक ऐप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल स्वतंत्रता और सरकारी अधिकारों के बीच संतुलन की बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है। क्या है पूरा विवाद? केंद्र सरकार ने हाल ही में Telegram पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला लिया था। सरकार का कहना है कि प्लेटफॉर्म के कुछ चैनलों और बॉट्स के जरिए NEET-UG री-एग्जाम से जुड़ी कथित लीक सामग्री, फर्जी प्रश्नपत्र और भ्रामक जानकारी फैलाए जाने की आशंका थी। सरकार का तर्क था कि ऐसी गतिविधियां लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं और परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकती हैं। इसी कारण एहतियाती कदम के रूप में यह फैसला लिया गया। हाई कोर्ट ने क्या कहा? सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के आदेश की वैधता पर विचार किया। अदालत ने माना कि यह फैसला सार्वजनिक हित और परीक्षा सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। कोर्ट ने कहा कि जब किसी राष्ट्रीय परीक्षा की विश्वसनीयता दांव पर हो, तब सरकार को आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है। इसी आधार पर Telegram की याचिका खारिज कर दी गई। Telegram की दलील क्या थी? Telegram ने अदालत में कहा कि कुछ लोगों की गलत गतिविधियों के कारण करोड़ों सामान्य उपयोगकर्ताओं को परेशानी नहीं होनी चाहिए। कंपनी ने दावा किया कि उसने संदिग्ध चैनलों और लिंक के खिलाफ कार्रवाई की है और जांच एजेंसियों के साथ सहयोग भी किया है। कंपनी का यह भी कहना था कि प्लेटफॉर्म पर पूरी तरह रोक लगाने से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संचार के अधिकार पर असर पड़ता है। करोड़ों यूजर्स के अधिकारों पर भी हुई चर्चा सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठा कि क्या कुछ संदिग्ध गतिविधियों के कारण बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं के अधिकार सीमित किए जा सकते हैं। इस पर सरकार ने जवाब दिया कि Telegram की तकनीकी संरचना और बॉट सिस्टम का दुरुपयोग तेजी से जानकारी फैलाने में किया जा सकता है, जिससे परीक्षा सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। सरकार का मानना है कि ऐसी असाधारण परिस्थितियों में अस्थायी प्रतिबंध जरूरी हो जाता है। NEET परीक्षा बनी फैसले की बड़ी वजह इस पूरे मामले का केंद्र NEET-UG री-एग्जाम है। पिछले कुछ समय से परीक्षा से जुड़े विवाद और कथित पेपर लीक के आरोप चर्चा में रहे हैं। ऐसे माहौल में सरकार किसी भी संभावित जोखिम से बचना चाहती है। शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे लाखों छात्रों का भविष्य जुड़ा होता है। डिजिटल Freedom बनाम National Interest Telegram मामले ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। एक तरफ सरकार परीक्षा सुरक्षा और कानून व्यवस्था की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल अधिकारों के पक्षधर सवाल उठा रहे हैं कि क्या पूरे प्लेटफॉर्म पर रोक लगाना उचित कदम है। आगे क्या होगा? फिलहाल हाई कोर्ट के फैसले के बाद Telegram को तत्काल राहत नहीं मिली है। अब सभी की नजर केंद्र सरकार के अगले कदम और NEET री-एग्जाम के सफल आयोजन पर टिकी हुई है। यह मामला आने वाले समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही, ऑनलाइन कंटेंट मॉडरेशन और सरकारी हस्तक्षेप से जुड़ी नीतियों पर भी असर डाल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Telegram

Telegram Controversy: सरकार बोली- आतंकी नेटवर्क के लिए आसान माध्यम बनता जा रहा ऐप

लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप Telegram एक बार फिर कानूनी और सुरक्षा बहस के केंद्र में आ गया है। हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने दावा किया कि इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कई मामलों में आतंकी गतिविधियों, कट्टरपंथी प्रचार और अवैध नेटवर्किंग के लिए किया जा रहा है। सरकार ने अदालत से कहा कि Telegram धीरे-धीरे ऐसे तत्वों के लिए एक सुरक्षित डिजिटल माध्यम बनता जा रहा है, जो देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। केंद्र सरकार ने कोर्ट में क्या कहा? सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश वकीलों ने बताया कि Telegram के कुछ फीचर्स, खासकर एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और बड़े पैमाने पर संचालित चैनल, सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि कई बार जांच एजेंसियों को जरूरी जानकारी समय पर नहीं मिल पाती, जिससे संवेदनशील मामलों की जांच प्रभावित होती है। केंद्र ने यह भी कहा कि तकनीक का उद्देश्य लोगों को सुविधा देना है, लेकिन जब उसी तकनीक का उपयोग कानून-विरोधी गतिविधियों के लिए होने लगे तो सरकार का हस्तक्षेप जरूरी हो जाता है। सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चिंता सरकारी पक्ष के अनुसार, हाल के वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें Telegram का उपयोग संदिग्ध गतिविधियों के लिए किया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि कुछ आतंकी और आपराधिक संगठन इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अपने नेटवर्क को सक्रिय रखने और संदेशों के आदान-प्रदान के लिए कर रहे हैं। यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अधिक जवाबदेही और सहयोग की मांग करती रही हैं। प्राइवेसी बनाम सुरक्षा की बहस Telegram को दुनियाभर में सुरक्षित और निजी संवाद के लिए जाना जाता है। लाखों लोग इसका इस्तेमाल रोजमर्रा की बातचीत, बिजनेस और सूचना साझा करने के लिए करते हैं। लेकिन जब किसी प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग की खबरें सामने आती हैं, तो निजता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूजर्स की प्राइवेसी भी महत्वपूर्ण है और सुरक्षा भी। इसलिए दोनों के बीच संतुलित समाधान निकालना सबसे बड़ी चुनौती है। आगे क्या होगा? हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है और आने वाले दिनों में इस पर और महत्वपूर्ण बहस हो सकती है। अदालत का फैसला सिर्फ Telegram तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में अन्य सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है। फिलहाल, इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि डिजिटल युग में राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी स्वतंत्रता और यूजर प्राइवेसी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET

NEET की दर्दनाक सच्चाई: 2 दिन में 4 मौतें, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ी बहस

देश में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर बढ़ता मानसिक दबाव एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पिछले 48 घंटों में अलग-अलग राज्यों से सामने आए दर्दनाक मामलों ने न सिर्फ परिवारों को तोड़ दिया, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी बहस छेड़ दी है। गुजरात और तमिलनाडु से सामने आए दर्दनाक मामले गुजरात में एक छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर सामने आई है। वहीं तमिलनाडु की एक छात्रा ने अपने आखिरी संदेश में दोबारा परीक्षा देने के डर और लगातार बढ़ते मानसिक दबाव का जिक्र किया, जिसने सभी को भावुक कर दिया। इसी दौरान अन्य राज्यों से भी ऐसे ही दुखद मामले सामने आए हैं, जिससे कुल मिलाकर दो दिनों में कम से कम चार छात्रों की मौत की स्थिति बनी है। परिवारों ने बताया— लंबे समय से था तनाव परिजनों का कहना है कि बच्चे लंबे समय से NEET की तैयारी में दिन-रात मेहनत कर रहे थे, लेकिन लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कोचिंग का दबाव और भविष्य की अनिश्चितता उन्हें अंदर ही अंदर तोड़ रही थी। कई माता-पिता ने बताया कि बच्चे तनाव में रहते थे, लेकिन खुलकर अपनी बात साझा नहीं कर पा रहे थे। विशेषज्ञों की चिंता: मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ परीक्षा का दबाव नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी भी एक बड़ा कारण है। छात्रों के लिए समय रहते काउंसलिंग, भावनात्मक सपोर्ट और सुरक्षित माहौल बेहद जरूरी है, ताकि वे दबाव को संभाल सकें। शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल इन घटनाओं के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था केवल रैंक और मार्क्स पर ही केंद्रित रह गई है? समाज के कई वर्ग अब मांग कर रहे हैं कि परीक्षा प्रणाली के साथ-साथ छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को भी उतनी ही गंभीरता से लिया जाए। देश में गहराता संकट और बढ़ती चिंता फिलहाल इन मामलों ने पूरे देश को झकझोर दिया है और एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सफलता की दौड़ में कहीं हम अपने बच्चों को खो तो नहीं रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मां स्कंदमाता

Navratri 2026: पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा, जानें महत्त्व, कथा और मंत्र

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। भगवान कार्तिकेय को स्कंद भी कहा जाता है। उन्हें गोद में धारण करने के कारण देवी पार्वती के इस स्वरूप का नाम स्कंदमाता पड़ा। मां का यह रूप मातृत्व, प्रेम और करुणा का प्रतीक है। मां स्कंदमाता की कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय को जन्म दिया, जो देवताओं की सेना के सेनापति बने। स्कंदमाता का स्वरूप एक मां की शक्ति और अपने संतान के प्रति अटूट स्नेह को दर्शाता है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः। भोग: मां को केला अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप

नई दिल्ली। SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी और छात्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ हुई कथित घटनाओं की जानकारी दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रा ने कान पर चोट लगने का लगाया आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान कथित ज्यादती और मारपीट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर हिरासत का आरोप एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी। यह आरोप भी प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया है। राहुल गांधी ने सबूत सुरक्षित रखने को कहा राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

बांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका

क्रिकेट न्यूज। वेस्टइंडीज को बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के बल्लेबाज शाई होप और तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ सीरीज से बाहर हो गए हैं। क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। CWI के मुताबिक, मेडिकल जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद अल्जारी जोसेफ को सीरीज से हटाने का फैसला लिया गया। बोर्ड उनके कार्यभार को नियंत्रित कर चोट के जोखिम को कम करना चाहता है। वहीं, तीनों फॉर्मेट में लगातार खेलने के बाद शाई होप को आराम दिया गया है। चोट के खतरे को देखते हुए जोसेफ को आराम क्रिकेट वेस्टइंडीज ने बताया कि अल्जारी जोसेफ को टीम से बाहर रखने का फैसला उनकी सहमति से लिया गया है। बोर्ड के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाजों को लंबे स्पेल में लगातार गेंदबाजी करनी पड़ती है। इससे छोटे फॉर्मेट की तुलना में कार्यभार और चोट का जोखिम बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जोसेफ के वर्कलोड को कम करने का फैसला किया गया है, ताकि उनके स्वास्थ्य और फिटनेस का ध्यान रखा जा सके। शाई होप को भी दिया गया आराम CWI ने कहा कि शाई होप तीनों फॉर्मेट में लगातार खेल रहे थे। ऐसे में उनके कार्यभार और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। बोर्ड का यह फैसला फरवरी 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स को ध्यान में रखकर भी लिया गया है। टीम प्रबंधन चाहता है कि खिलाड़ी आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए फिट रहें। केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में मौका शाई होप की गैरमौजूदगी में 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। अब देखना होगा कि बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में वेस्टइंडीज की टीम नए संयोजन के साथ कैसा प्रदर्शन करती है। कोच डैरेन सैमी ने सीरीज जीत को बताया अहम वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने कुछ लक्ष्य तय किए थे। इनमें टेस्ट रैंकिंग के ऊपरी आधे हिस्से में जगह बनाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी के मुताबिक, बांग्लादेश को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हराना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन टीम इसके लिए तैयार है। 28 अक्टूबर से शुरू होगा पहला टेस्ट बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से ढाका में शुरू होगा, जबकि दूसरा टेस्ट 5 नवंबर से सिलहट में खेला जाएगा।

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