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UP Bank Locker Scam: 96 Gold Packets गायब, करोड़ों की हेराफेरी का शक

उत्तर प्रदेश से एक चौंकाने वाला बैंकिंग मामला सामने आया है, जिसने आम लोगों से लेकर बैंकिंग सिस्टम तक में चिंता बढ़ा दी है। एक बैंक के लॉकर से 96 सोने के पैकेट गायब पाए गए हैं, जिसके बाद करोड़ों रुपये की हेराफेरी और गंभीर गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। इस घटना के बाद बैंक में अफरा-तफरी का माहौल है और पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है। कैसे खुला पूरा मामला? यह मामला तब सामने आया जब बैंक में नियमित ऑडिट और लॉकर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया चल रही थी। जांच के दौरान रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर पाया गया। दस्तावेजों में दर्ज 96 सोने के पैकेट लॉकर में मौजूद नहीं थे। इस गड़बड़ी ने बैंक प्रशासन को तुरंत अलर्ट कर दिया। तीन कर्मचारियों पर FIR, जांच तेज मामले में शुरुआती तौर पर बैंक के तीन कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि लॉकर सिस्टम में लापरवाही या संभावित मिलीभगत के जरिए यह बड़ी गड़बड़ी हुई हो सकती है। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और कई अहम पहलुओं को खंगाला जा रहा है। जांच टीम अब बैंक के CCTV फुटेज, लॉकर एक्सेस लॉग, एंट्री रिकॉर्ड और आंतरिक दस्तावेजों की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह गड़बड़ी कब और कैसे हुई। करोड़ों रुपये की हेराफेरी की आशंका प्रारंभिक अनुमान में इस पूरे मामले में करोड़ों रुपये के सोने की हेराफेरी की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, असली नुकसान कितना है, यह पूरी जांच के बाद ही साफ हो पाएगा। फिलहाल बैंक और पुलिस दोनों ही किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रहे हैं। बैंक प्रशासन का रिएक्शन बैंक अधिकारियों का कहना है कि इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी होगी और अगर किसी कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही ग्राहकों की सुरक्षा और संपत्ति को पूरी तरह सुरक्षित रखने का आश्वासन भी दिया गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Priyanka Gandhi

Priyanka Gandhi का सरकार पर हमला: NEET छात्रों से ₹1.32 लाख करोड़ वसूली, लोन माफी पर छिड़ा विवाद

देश में मेडिकल शिक्षा और NEET परीक्षा व्यवस्था को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि NEET और मेडिकल एडमिशन के नाम पर छात्रों और उनके परिवारों से भारी रकम वसूली जा रही है। ₹1.32 लाख करोड़ वसूली का दावा प्रियंका गांधी ने दावा किया कि NEET सिस्टम के जरिए छात्रों से करीब ₹1.32 लाख करोड़ तक की राशि वसूली गई है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा देश के शिक्षा बजट के लगभग बराबर है, जो चिंता का विषय है। लोन माफी पर भी सवाल उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दूसरी तरफ बड़े उद्योगपतियों के लगभग ₹16 लाख करोड़ तक के लोन माफ किए गए हैं। इस तुलना को लेकर उन्होंने सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। राजनीतिक बहस तेज इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। हालांकि, सरकार की ओर से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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TMC

West Bengal Political Crisis TMC को झटका, ऋतब्रत बनर्जी की LoP कुर्सी बरकरार

पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और TMC को कलकत्ता हाईकोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। इस फैसले के बाद ऋतब्रत बनर्जी का LoP पद पर बने रहना तय माना जा रहा है, जिससे राज्य की सियासत और ज्यादा गरमा गई है। क्या है पूरा राजनीतिक विवाद? पूरा मामला तब शुरू हुआ जब विधानसभा में कुछ विधायकों के समर्थन के बाद ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष घोषित किया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें एक बड़े विधायक समूह का समर्थन मिला, जिससे सदन में शक्ति संतुलन बदल गया। इसके बाद विधानसभा स्पीकर ने उनके नाम पर मुहर लगाई, लेकिन टीएमसी के आधिकारिक गुट ने इस फैसले को असंवैधानिक बताते हुए विरोध दर्ज कराया। हाईकोर्ट का अहम फैसला टीएमसी की ओर से इस नियुक्ति को चुनौती दी गई और अदालत से अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई। हालांकि, कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस पर कोई स्टे देने से साफ इनकार कर दिया। इसका सीधा मतलब है कि मौजूदा स्थिति बनी रहेगी और ऋतब्रत बनर्जी फिलहाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर कार्य करते रहेंगे। कोर्ट ने कहा कि मामले की विस्तृत सुनवाई आगे की तारीख में की जाएगी। टीएमसी में अंदरूनी तनाव बढ़ा इस फैसले के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष और गहरा गया है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पार्टी में मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। राजनीतिक असर क्या होगा? यह मामला सिर्फ एक पद का नहीं, बल्कि बंगाल की पूरी राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के लिए यह स्थिति एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है, क्योंकि इससे पार्टी की एकता और विधानसभा में उसकी रणनीति दोनों पर असर पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अखिलेश यादव

UP Politics: अखिलेश यादव का ओपी राजभर पर हमला, कहा- ‘अफ़वाह मंत्री’ बने बैठे हैं

उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर बयानबाज़ी और तकरार के केंद्र में आ गई है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) प्रमुख Om Prakash Rajbhar के हालिया बयानों पर तीखा पलटवार करते हुए उन्हें “अफ़वाह मंत्री” कह दिया है। इस टिप्पणी के बाद यूपी की सियासत में नया विवाद खड़ा हो गया है। OP Rajbhar के बयान से शुरू हुआ विवाद दरअसल, ओपी राजभर लगातार समाजवादी पार्टी और विपक्षी नेताओं पर हमलावर रहे हैं। उनके कुछ बयानों को लेकर सियासी हलकों में बहस तेज हो गई थी। राजभर ने ऐसे दावे किए थे जिन पर सपा खेमे ने सवाल उठाए। इन्हीं बयानों के जवाब में अखिलेश यादव ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि ओपी राजभर बार-बार बिना आधार की बातें करते हैं और जनता के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश करते हैं। Akhilesh Yadav का तीखा तंज अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए ओपी राजभर को “अफ़वाह मंत्री” कहकर निशाना साधा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल और बढ़ गई है। सपा समर्थकों का कहना है कि अखिलेश यादव ने केवल जवाब दिया है, जबकि दूसरी तरफ राजभर समर्थक इसे राजनीतिक हमला बता रहे हैं। UP Politics में बढ़ी हलचल यूपी की राजनीति में पहले से ही गठबंधन और विपक्ष के बीच तनाव बना हुआ है। ऐसे में यह बयानबाज़ी आने वाले चुनावी माहौल को और प्रभावित कर सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के तीखे बयान दोनों दलों के बीच दूरी को और बढ़ा सकते हैं। गठबंधन और विपक्ष की खींचतान ओपी राजभर वर्तमान में एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं, जबकि अखिलेश यादव विपक्ष की मजबूत आवाज बने हुए हैं। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच यह टकराव सिर्फ बयानबाज़ी नहीं बल्कि राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

Monsoon Delay in India: 8 जून से थमा मानसून, MP-UP-Rajasthan में अब 22 जून के बाद एंट्री

देशभर में मानसून (Monsoon)इस समय सुस्त पड़ गया है और करोड़ों लोग आसमान की ओर उम्मीद से देख रहे हैं। भीषण गर्मी और उमस के बीच मानसून की रफ्तार थमने से किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताज़ा अपडेट के अनुसार 8 जून के बाद मानसून की प्रगति लगभग रुक गई है और अब मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बारिश की बड़ी एंट्री 22 जून के बाद होने की संभावना जताई जा रही है। देश में 37.8% कम बारिश, हालात सामान्य से नीचे मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इस साल 1 जून से अब तक देश में सामान्य से करीब 37.8% कम बारिश दर्ज की गई है। यह गिरावट सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर खेतों, फसलों और आम जीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। गर्मी बढ़ रही है, नमी कम है और कई राज्यों में बारिश का लंबा इंतजार लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। क्यों रुका हुआ है मानसून? मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार मानसून की रफ्तार रुकने के पीछे कई कारण हैं: इन्हीं कारणों से दिल्ली, यूपी, एमपी, राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों में बारिश काफी कम हो रही है। MP, UP और राजस्थान में कब होगी बारिश? IMD के मुताबिक सबसे बड़ी राहत 22 जून के बाद मिल सकती है। बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम बनने के संकेत हैं, जो मानसून को फिर से सक्रिय कर सकता है। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो: किसानों की बढ़ती चिंता इस देरी का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ रहा है। खरीफ सीजन की बुवाई लगभग तैयार है, लेकिन बारिश न होने से काम रुक रहा है। कई किसान अब हर दिन मौसम अपडेट पर नजर रख रहे हैं और खेतों में उम्मीद के साथ तैयारी कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में यह इंतजार अब चिंता में बदलता जा रहा है। लगातार तीसरे साल जून में मानसून ब्रेक यह लगातार तीसरा साल है जब जून के मध्य में मानसून ने लंबा ब्रेक लिया है। हालांकि मौसम वैज्ञानिक इसे पूरी तरह असामान्य नहीं मानते, लेकिन यह ट्रेंड चिंता जरूर बढ़ा रहा है। क्या आगे सुधरेगा मौसम? विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव संभव है। बंगाल की खाड़ी में बनने वाला सिस्टम मानसून को दोबारा गति दे सकता है। अगर यह अनुमान सही साबित हुआ तो जून के आखिरी सप्ताह में मध्य और उत्तर भारत में अच्छी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Chamba

Chamba Accident गहरी खाई में समाई कार, एक ही गांव के 7 लोगों की मौत

हिमाचल प्रदेश के चंबा (Chamba) जिले से एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है। एक परिवार में मुंडन संस्कार की खुशियां उस समय मातम में बदल गईं, जब समारोह से लौट रही एक कार गहरी खाई में जा गिरी। इस हादसे में एक ही गांव के सात लोगों की जान चली गई। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है और पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। खुशी के समारोह से लौट रहे थे सभी जानकारी के मुताबिक, कार में सवार लोग एक रिश्तेदार के यहां आयोजित मुंडन संस्कार में शामिल होकर अपने गांव वापस लौट रहे थे। परिवार में उत्सव का माहौल था और सभी खुशी-खुशी घर लौट रहे थे। लेकिन रास्ते में एक खतरनाक मोड़ पर वाहन चालक का संतुलन बिगड़ गया और कार सीधे गहरी खाई में जा गिरी। हादसा इतना भयानक कि बचने का मौका नहीं मिला प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार कई फीट नीचे खाई में गिरने के बाद बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पुलिस व प्रशासन को जानकारी दी। बचाव दल ने घंटों की मशक्कत के बाद वाहन तक पहुंचकर राहत कार्य चलाया। एक ही गांव के 7 लोगों की मौत से सदमे में लोग दुर्घटना में जान गंवाने वाले सभी लोग एक ही गांव के निवासी बताए जा रहे हैं। एक साथ सात लोगों की मौत की खबर से पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। जिन घरों में कुछ घंटे पहले खुशी का माहौल था, वहां अब मातम छाया हुआ है। गांव के लोग भी इस घटना से गहरे सदमे में हैं। प्रशासन ने शुरू की जांच पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, पहाड़ी सड़क पर वाहन अनियंत्रित होने से यह हादसा हुआ। हालांकि दुर्घटना के सही कारणों का पता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। पहाड़ी सड़कों पर सफर के दौरान बरतें सावधानी हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रहे सड़क हादसे चिंता का विषय बने हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि संकरी सड़कें, तीखे मोड़ और तेज रफ्तार अक्सर दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बनते हैं। ऐसे में यात्रियों और वाहन चालकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है। यह हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि कई परिवारों के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गया है। मुंडन संस्कार की खुशियों के साथ शुरू हुआ सफर सात लोगों की मौत के साथ खत्म हो गया, जिसने पूरे गांव को गम में डुबो दिया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UBT

Maharashtra Political Drama: UBT में बगावत की आहट, संसदीय दल की बैठक से मिले बड़े संकेत

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े घटनाक्रम की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। शिवसेना (UBT) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आती नजर आ रही है। दिल्ली में आयोजित संसदीय दल की अहम बैठक में पार्टी के 9 सांसदों में से केवल 3 सांसदों का पहुंचना कई सवाल खड़े कर रहा है। इस बैठक में राज्यसभा सांसद संजय राउत मौजूद रहे, लेकिन अधिकांश सांसदों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कई सांसद नेतृत्व की कार्यशैली और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि अब उद्धव ठाकरे गुट में एक और बड़ी टूट की संभावना पर चर्चा तेज हो गई है। बैठक में कम उपस्थिति ने बढ़ाई चिंता संसदीय दल की बैठक को संगठनात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। ऐसे में अधिकांश सांसदों का बैठक से दूर रहना केवल सामान्य घटना नहीं माना जा रहा। राजनीतिक जानकार इसे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत बता रहे हैं। चर्चा यह भी है कि लोकसभा में UBT के 9 सांसदों में से 6 सांसद अलग रुख अपना सकते हैं। हालांकि अभी तक किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से बगावत का ऐलान नहीं किया है, लेकिन घटनाक्रम तेजी से बदलता नजर आ रहा है। संजय राउत ने किया डैमेज कंट्रोल बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए संजय राउत ने पार्टी में किसी भी प्रकार की टूट की खबरों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि शिवसेना UBT पूरी तरह एकजुट है और विरोधी दल जानबूझकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। राउत ने दावा किया कि सभी सांसद पार्टी नेतृत्व के संपर्क में हैं और जल्द ही स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल बयानबाजी से पार्टी के भीतर की नाराजगी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उद्धव ठाकरे के सामने बढ़ी राजनीतिक चुनौती एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद शिवसेना पहले ही बड़े विभाजन का सामना कर चुकी है। ऐसे में यदि सांसदों का एक बड़ा वर्ग भी पार्टी से दूरी बनाता है, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ स्थानीय निकाय चुनावों और विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है। पार्टी की संसदीय ताकत कमजोर होने की स्थिति में उद्धव ठाकरे के राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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G7

G7 Meeting 2026: होर्मुज में भारतीयों की मौत पर PM Modi ने उठाई आवाज, Trump भी रहे मौजूद

फ्रांस में आयोजित G7 Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक नेताओं के सामने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) में भारतीय नागरिकों की मौत का मुद्दा मजबूती से उठाया। खास बात यह रही कि जब प्रधानमंत्री मोदी यह बात रख रहे थे, तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी बैठक में मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में समुद्री सुरक्षा केवल किसी एक देश का विषय नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। होर्मुज में भारतीयों की मौत पर जताई चिंता हाल के दिनों में होर्मुज क्षेत्र में बढ़े सैन्य तनाव के बीच कुछ भारतीय नागरिकों और नाविकों की मौत की खबरों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। G7 के वर्किंग सेशन में प्रधानमंत्री मोदी ने इस संवेदनशील मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि समुद्र में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जो लोग समुद्री व्यापार को सुचारु बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं, उन्हें किसी भी तरह के संघर्ष का शिकार नहीं बनना चाहिए। Global Trade पर पड़ रहा है असर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। यहां किसी भी प्रकार का तनाव या अवरोध केवल क्षेत्रीय समस्या नहीं रह जाता, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की सप्लाई चेन, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार पर दिखाई देता है। विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया के बड़े हिस्से में पहुंचने वाला कच्चा तेल इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए यहां अस्थिरता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन जाती है। संवाद और कूटनीति पर दिया जोर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज दुनिया कई चुनौतियों का सामना कर रही है, लेकिन इन समस्याओं का समाधान युद्ध नहीं बल्कि संवाद और सहयोग में छिपा है। उन्होंने देशों से आपसी विश्वास बढ़ाने और कूटनीतिक रास्तों को प्राथमिकता देने की अपील की। मोदी ने कहा कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए यह जरूरी है कि सभी देश मिलकर काम करें और संघर्ष की जगह बातचीत को महत्व दें। ट्रम्प की मौजूदगी में भारत ने रखा अपना पक्ष G7 बैठक में डोनाल्ड ट्रम्प समेत कई बड़े वैश्विक नेता मौजूद थे। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा भारतीय नागरिकों की मौत और समुद्री सुरक्षा का मुद्दा उठाना भारत की सक्रिय कूटनीति का संकेत माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत ने इस मंच के जरिए साफ संदेश दिया है कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों और समुद्री क्षेत्र में कार्यरत नागरिकों की सुरक्षा उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। G7 Summit में Middle East Crisis रहा प्रमुख मुद्दा इस वर्ष G7 Summit में मध्य पूर्व का तनाव, ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक व्यापार और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहे। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत ने भी अपने हितों और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Shiv Sena

Shiv Sena UBT Crisis: उद्धव ठाकरे गुट में बड़ी टूट, 9 में से 6 सांसद बागी

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी तूफान देखने को मिल रहा है। Shiv Sena (UBT) खेमे में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी के 9 में से 6 सांसदों के बागी होने की खबर ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। यह घटनाक्रम सीधे तौर पर Uddhav Thackeray के नेतृत्व वाले गुट के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं। संजय राउत का तीखा रिएक्शन, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बढ़ा तनाव इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता Sanjay Raut ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद कड़ा रुख अपनाया। बताया जा रहा है कि इस दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया और राउत ने बगावत को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उनकी यह प्रतिक्रिया सोशल और राजनीतिक दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि वे हमेशा से उद्धव गुट के सबसे मुखर चेहरों में रहे हैं। चार साल पहले भी टूटी थी शिवसेना, शिंदे ने किया था बड़ा विद्रोह यह पहली बार नहीं है जब शिवसेना में इतनी बड़ी टूट देखने को मिली हो। लगभग 4 साल पहले Eknath Shinde के नेतृत्व में 39 विधायकों ने अलग होकर राजनीतिक समीकरण बदल दिए थे। उस समय हुई बगावत के बाद महाराष्ट्र की सत्ता में बड़ा बदलाव आया था और शिवसेना दो गुटों में बंट गई थी। उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा संकट ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर उद्धव ठाकरे गुट की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 9 में से 6 सांसदों के अलग होने की खबरों से पार्टी संगठन कमजोर होता दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह बगावत आगे बढ़ती है, तो इसका असर आने वाले चुनावी समीकरणों पर भी साफ दिखाई दे सकता है। महाराष्ट्र पॉलिटिक्स में बढ़ी हलचल महाराष्ट्र की राजनीति पहले से ही अस्थिर दौर से गुजर रही है और इस नई टूट ने इसे और ज्यादा गर्मा दिया है। लगातार बदलते गठबंधन और अंदरूनी मतभेदों के बीच यह घटनाक्रम राज्य की सियासत में नए सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि उद्धव ठाकरे इस राजनीतिक संकट को कैसे संभालते हैं और पार्टी को एकजुट रखने में कितने सफल होते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Shiv Sena

₹50-50 Crore Offer Claim: Shiv Sena UBT Split Row से सियासी हलचल तेज, Delhi तक पहुंचा मामला

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भारी हलचल देखने को मिल रही है। Shiv Sena (UBT) को लेकर दावा किया जा रहा है कि पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद बगावत के रास्ते पर चले गए हैं। इस खबर ने न सिर्फ मुंबई बल्कि दिल्ली की सियासत को भी गर्मा दिया है। बागी सांसदों की स्पीकर से मुलाकात की संभावना हालांकि अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसद आज लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर सकते हैं, जिसके बाद इस पूरे मामले की दिशा तय हो सकती है। Sanjay Raut का बड़ा आरोप: ₹50-50 करोड़ का ऑफर इस बीच शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Sanjay Raut ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनकी पार्टी के सांसदों को तोड़ने के लिए ₹50-50 करोड़ रुपये तक का ऑफर दिया गया है। राउत ने यह भी दावा किया कि कुछ सांसदों को चार्टर्ड विमान से दिल्ली लाया गया, जिससे राजनीतिक माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया है। Uddhav Thackeray खेमे में चिंता पार्टी प्रमुख Uddhav Thackeray के नेतृत्व वाले गुट में इस कथित टूट को लेकर चिंता गहराती जा रही है। पार्टी का कहना है कि यह सब एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा हो सकता है, जिसका मकसद संगठन को कमजोर करना है। Delhi और Maharashtra दोनों जगह नजरें टिकी दिल्ली और महाराष्ट्र दोनों जगह इस मामले पर नजरें टिकी हुई हैं, खासकर लोकसभा स्पीकर के अगले कदम पर सभी की निगाहें हैं। अगर यह मामला आगे बढ़ता है तो संसद में भी शिवसेना (UBT) की स्थिति पर बड़ा असर पड़ सकता है। राजनीतिक असर और भविष्य की तस्वीर राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये दावे सही साबित होते हैं, तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इसका असर आने वाले चुनावी समीकरणों और विपक्षी गठबंधन पर भी पड़ सकता है। स्थिति अभी अनिश्चित फिलहाल स्थिति पूरी तरह अनिश्चित बनी हुई है और सभी पक्षों के आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।
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मां कात्यायनी

Navratri 2026: छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा, जानें महिषासुर वध की कथा और मंत्र

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। देवी दुर्गा का यह स्वरूप शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में मां कात्यायनी को महिषासुर का वध करने वाली देवी के रूप में भी पूजा जाता है। मां कात्यायनी की पौराणिक कथा पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने देवी की कठोर आराधना की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके यहां पुत्री रूप में जन्म लिया और कात्यायनी कहलायीं। मान्यता है कि देवी ने महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः। भोग: मां को शहद अर्पित करने की परंपरा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

लिव-इन पार्टनर की हत्या कर दर्ज कराई गुमशुदगी, पुलिस पूछताछ में खुला राज

मध्यप्रदेश के भिंड में लिव-इन पार्टनर की हत्या का मामला सामने आया है। आरोप है कि भिंड निवासी सत्यप्रकाश उर्फ बादशाह जाटव ने बिहार निवासी नर्सिंग ऑफिसर स्नेहलता की हत्या कर शव उत्तर प्रदेश के पचनदा में नदी में फेंक दिया। इसके बाद उसने पुलिस को गुमशुदगी का आवेदन देकर मामले को छिपाने की कोशिश की। पुलिस की पूछताछ में उसने हत्या की बात कबूल कर ली। फिलहाल पुलिस टीम नदी में शव की तलाश कर रही है। कॉलेज में हुई थी पहचान, लिव-इन में रहने लगे दोनों जानकारी के मुताबिक, सत्यप्रकाश पहले से शादीशुदा था और उसकी कोई संतान नहीं थी। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उसका संपर्क स्नेहलता से हुआ। बाद में दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे। इस दौरान उनका एक बेटा भी हुआ। बताया जा रहा है कि सत्यप्रकाश का अपनी पत्नी से विवाद चल रहा था। इसी के चलते उसने स्नेहलता की हत्या की साजिश रची। 8 अक्टूबर को उसने अपने बेटे को पत्नी के हवाले कर दिया। कानपुर घुमाने के बहाने ले गया, रास्ते में हत्या का आरोप आरोप है कि बेटे को पत्नी को सौंपने के बाद सत्यप्रकाश स्नेहलता को कानपुर घुमाने के बहाने अपने साथ ले गया। इस दौरान एंबुलेंस चालक राजवीर खन्ना और एक अन्य साथी भी उसके साथ थे। पुलिस के मुताबिक, रास्ते में स्नेहलता की हत्या कर दी गई और शव उत्तर प्रदेश के पचनदा में नदी में फेंक दिया गया। गुमशुदगी का आवेदन देकर छिपाने की कोशिश हत्या के बाद सत्यप्रकाश ने सिटी कोतवाली पुलिस को लिखित आवेदन देकर स्नेहलता के लापता होने की सूचना दी। बताया गया है कि उसने गुमशुदगी को लेकर पर्चे भी छपवाए थे, ताकि किसी को उस पर शक न हो। हालांकि, पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और पूछताछ के दौरान सत्यप्रकाश ने हत्या की बात कबूल कर ली। अब पुलिस नदी में शव की तलाश कर रही है। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका और घटना से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है। पुलिस ने क्या कहा? सिटी कोतवाली थाना प्रभारी मुकेश शाक्य के मुताबिक, लापता युवती की हत्या किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस टीम शव की तलाश कर रही है और मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।
PM Modi

PM Modi Ladakh Visit: लद्दाख की नई पीढ़ी पर फोकस, ₹3,350 करोड़ के Projects शुरू

लद्दाख में विकास को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने 15 अक्टूबर 2026 को लद्दाख में करीब ₹3,350 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि लद्दाख का विकास केंद्र सरकार की प्राथमिकता है और यहां की नई पीढ़ी का भविष्य सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इन परियोजनाओं का सीधा संबंध लद्दाख की कनेक्टिविटी, बिजली, पानी, पर्यटन और स्थानीय लोगों की सुविधाओं से है। सरकार का जोर सिर्फ बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर नहीं, बल्कि युवाओं को शिक्षा, खेल और रोजगार के बेहतर अवसर देने पर भी है। लद्दाख के युवाओं के लिए क्या है सरकार का Plan? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में लद्दाख के युवाओं की क्षमता और उनके भविष्य पर जोर दिया। उनका कहना है कि क्षेत्र के युवाओं को बेहतर शिक्षा, आधुनिक तकनीक और खेलों में आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए। लद्दाख में पर्यटन के विस्तार, विंटर टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं। इससे होटल, परिवहन, स्थानीय कारोबार और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। सरकार ग्रीनहाउस खेती को भी बढ़ावा दे रही है। लद्दाख जैसे ठंडे क्षेत्र में खेती करना आसान नहीं है, इसलिए ग्रीनहाउस तकनीक किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। Leh Airport पर ₹640 करोड़ का बड़ा Investment लद्दाख में पर्यटन और हवाई यात्रा को बेहतर बनाने के लिए लेह के कुशोक बकुला रिम्पोछे एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का उद्घाटन किया गया। इस परियोजना पर करीब ₹640 करोड़ खर्च किए गए हैं। लगभग 23,800 वर्ग मीटर में बने इस टर्मिनल की सालाना यात्री क्षमता 35 लाख बताई गई है। यहां आधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ लद्दाख की स्थानीय संस्कृति और वास्तुकला की झलक भी देखने को मिलेगी। टर्मिनल में ऊर्जा की खपत कम करने के लिए जियोथर्मल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। बेहतर एयरपोर्ट से पर्यटकों को सुविधा मिलने के साथ लद्दाख के पर्यटन कारोबार को भी बढ़ावा मिल सकता है। Nimmu-Padum-Darcha Road से आसान होगा सफर लद्दाख की कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए 298 किलोमीटर लंबी निमू-पदुम-दरचा सड़क भी महत्वपूर्ण है। यह मार्ग लेह के निमू को हिमाचल प्रदेश के दरचा से जोड़ता है और जांस्कर घाटी से होकर गुजरता है। इस सड़क का सबसे बड़ा फायदा यह है कि लद्दाख पहुंचने के लिए एक अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध होगा। इससे स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों और सुरक्षा बलों की आवाजाही भी आसान हो सकती है। इस क्षेत्र में बेहतर सड़क संपर्क का मतलब सिर्फ कम समय में सफर पूरा करना नहीं है। इससे दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और जरूरी सामान तक पहुंच बनाने में भी मदद मिल सकती है। Power Projects से मजबूत होगी बिजली की व्यवस्था लद्दाख में बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए हाइड्रोपावर और ट्रांसमिशन से जुड़ी परियोजनाओं पर भी ध्यान दिया गया है। 9 मेगावाट क्षमता वाला हानू स्मॉल हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट स्थानीय स्तर पर बिजली उत्पादन बढ़ाने की दिशा में अहम कदम है। वहीं, 66 केवी की दाह-हानू-खाल्त्सी ट्रांसमिशन लाइन बिजली नेटवर्क को मजबूत करने में मदद करेगी। इन परियोजनाओं से बिजली की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। इससे घरों के साथ स्थानीय कारोबार और दूसरी जरूरी सेवाओं को भी फायदा मिल सकता है। लद्दाख की ऐतिहासिक विरासत को मिलेगा संरक्षण विकास परियोजनाओं के बीच लद्दाख की प्राचीन विरासत को सुरक्षित रखने पर भी ध्यान दिया गया है। लेह के सिंधु घाट पर पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क का उद्घाटन किया गया। पेट्रोग्लिफ ऐसी प्राचीन आकृतियां होती हैं, जिन्हें चट्टानों पर उकेरा जाता है। इनमें उस दौर के लोगों के जीवन, जानवरों और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारियां मिल सकती हैं। ऐसी ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है। इससे लद्दाख के इतिहास को समझने और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने में भी मदद मिल सकती है। Project Him Sarovar: 40 गांवों में बने जल निकाय लद्दाख में पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है। खासकर खेती के मौसम में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी जुटाना कई इलाकों में मुश्किल हो सकता है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए Project Him Sarovar के तहत 40 गांवों में 40 जल निकाय विकसित किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य पानी को संरक्षित करना और जरूरत के समय उसका इस्तेमाल आसान बनाना है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए मदद मिल सकती है। साथ ही, जल संरक्षण की बेहतर व्यवस्था क्षेत्र की दीर्घकालिक जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी हो सकती है। Tourism और रोजगार पर भी रहेगा जोर लद्दाख अपनी प्राकृतिक सुंदरता, बौद्ध मठों, पहाड़ों और एडवेंचर गतिविधियों के लिए जाना जाता है। बेहतर एयरपोर्ट और सड़क संपर्क से यहां आने वाले पर्यटकों की यात्रा आसान हो सकती है। पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए गाइड, होटल, होमस्टे, परिवहन और स्थानीय उत्पादों से जुड़े काम के अवसर भी बढ़ सकते हैं। हालांकि, पर्यटन का विस्तार पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति को ध्यान में रखकर करना जरूरी होगा। लद्दाख जैसे संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती है। लद्दाख के लिए क्यों अहम हैं ₹3,350 करोड़ के Projects? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से घोषित और शुरू की गई इन परियोजनाओं का महत्व केवल बड़ी रकम तक सीमित नहीं है। इनका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है। बेहतर सड़कें और एयरपोर्ट सफर को आसान बना सकते हैं। बिजली परियोजनाएं ऊर्जा व्यवस्था मजबूत कर सकती हैं, जबकि जल निकाय खेती में मदद कर सकते हैं। दूसरी ओर, शिक्षा, खेल और पर्यटन पर ध्यान देने से युवाओं के लिए नए अवसर तैयार हो सकते हैं। निष्कर्ष: लद्दाख में ₹3,350 करोड़ की विकास परियोजनाएं क्षेत्र को बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाएं देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। अब इनकी सफलता इस बात से तय होगी कि इनका लाभ स्थानीय लोगों, किसानों, कारोबारियों और युवाओं तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंचता है। प्रधानमंत्री का लद्दाख की नई पीढ़ी पर जोर इस बात को रेखांकित करता है कि विकास...

भोपाल न्यू मार्केट आग मामले में छोले-भटूरे दुकान संचालक पर FIR, आज से हॉकर्स की शिफ्टिंग

भोपाल। न्यू मार्केट में 8 अक्टूबर को लगी भीषण आग के मामले में पुलिस ने बालाजी छोले-भटूरे दुकान के संचालक दीप उर्फ दीपू अग्रवाल के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस की जांच में सामने आया कि दुकान में भट्टी के पास रखे कपड़े में आग लगी थी, जिसके बाद लपटें फैल गईं। हादसे में आसपास की चार अन्य दुकानों और 12 से ज्यादा रेहड़ियों को नुकसान पहुंचा था। आग से करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान है। घटना के बाद नगर निगम ने न्यू मार्केट को नो-हॉकर्स जोन बनाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। गुरुवार से हॉकर्स को टीटी नगर स्टेडियम के पास हाट बाजार में शिफ्ट करने की तैयारी है। निगम ने चेतावनी दी है कि तय स्थान पर नहीं जाने वाले हॉकर्स का सामान जब्त किया जा सकता है। भट्टी के पास रखे कपड़े में लगी थी आग पुलिस की जांच के मुताबिक, बालाजी छोले-भटूरे दुकान में भट्टी जल रही थी। इसके पास रखे कपड़े में आग लगने के बाद लपटें फैल गईं और आसपास की दुकानें भी इसकी चपेट में आ गईं। हादसे में आम्रपाली रेस्टोरेंट, विजय स्टोर, एक कैफे और मोबाइल दुकान को नुकसान पहुंचा था। घटना के बाद आम्रपाली रेस्टोरेंट के संचालक पवन अग्रवाल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के आधार पर टीटी नगर पुलिस ने दुकान संचालक के खिलाफ लापरवाही और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। टीटी नगर थाना प्रभारी गौरव सिंह दोहर के मुताबिक, आग भट्टी के पास रखे कपड़े से शुरू हुई थी। वहीं, दुकान में अग्नि सुरक्षा के जरूरी इंतजाम मौजूद थे या नहीं, इसकी जांच नगर निगम कर रहा है। न्यू मार्केट में दमकल की पहुंच जांचने के लिए मॉकड्रिल आग की घटना के बाद नगर निगम ने न्यू मार्केट में दमकल की पहुंच और रास्तों में आने वाली बाधाओं की जांच शुरू की है। बुधवार को करीब तीन घंटे तक मॉकड्रिल की गई। इस दौरान दो दमकल वाहनों को पूरे मार्केट में घुमाया गया। जहां दमकल को रुकना पड़ा, वहां से निगम ने सामान जब्त किया। 8 अक्टूबर को आग लगने के दौरान दुकानों के सामने रखा सामान दमकल वाहनों के रास्ते में बाधा बना था। इसी को देखते हुए निगम ने बाजार में अतिक्रमण हटाने और रास्ते खाली रखने की कार्रवाई तेज की है। टीटी नगर स्टेडियम के पास शिफ्ट होंगे हॉकर्स नगर निगम ने बुधवार को पूरे दिन मुनादी कराकर हॉकर्स को गुरुवार से निर्धारित स्थान पर जाने की सूचना दी। अतिक्रमण अधिकारी शैलेंद्र सिंह भदौरिया के मुताबिक, न्यू मार्केट के नो-व्हीकल जोन में रेहड़ी लगाकर व्यवसाय करने वाले हॉकर्स को टीटी नगर स्टेडियम के पास स्थित हाट बाजार में विस्थापित किया जाएगा। निगम की योजना न्यू मार्केट को नो-हॉकर्स जोन बनाने की है, ताकि बाजार के रास्ते खुले रहें और आपात स्थिति में दमकल वाहनों को पहुंचने में परेशानी न हो। दुकानों के सामने पीली लाइन की दोबारा मार्किंग नगर निगम दुकानों के सामने पीली लाइन की दोबारा मार्किंग भी कर रहा है। बुधवार से यह प्रक्रिया शुरू की गई। दुकानदारों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पीली लाइन से आगे सामान रखने पर जब्ती की कार्रवाई की जाएगी। निगम का उद्देश्य दुकानों के सामने का रास्ता खाली रखना है, ताकि आग या किसी अन्य आपात स्थिति में बचाव कार्य प्रभावित न हो। आग वाली जगह से 100 फीट दूर भी जलती हैं भट्टियां आग लगने वाली जगह से करीब 100 फीट की दूरी पर छोले-भटूरे की दो अन्य दुकानें भी संचालित हो रही हैं। आसपास दो से तीन नमकीन की दुकानें भी हैं, जहां सुबह से रात तक भट्टियां जलती हैं। ऐसे में आग से बचाव के इंतजामों और भट्टियों के आसपास रखे सामान की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दुकानों में अग्नि सुरक्षा के नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी नियमित जांच जरूरी मानी जा रही है। चौक बाजार में 22 लाख का फायर हाइड्रेंट सिस्टम भी सवालों में शहर के पुराने बाजारों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंताएं सामने आई हैं। जानकारी के मुताबिक, चौक बाजार और इब्राहिमपुरा की 10 से 12 फीट चौड़ी गलियों में आग बुझाने के लिए नगर निगम ने करीब 22 लाख रुपये की लागत से अंडरग्राउंड फायर हाइड्रेंट सिस्टम लगाया था। जुलाई 2026 में नेमा डिजाइनर स्टूडियो में आग लगने के दौरान इस सिस्टम के काम नहीं करने की बात सामने आई थी। इसके बाद सिस्टम की प्रेशर टेस्टिंग और रखरखाव को लेकर सवाल उठे। जुमेराती, इब्राहिमपुरा, नदीम रोड और घोड़ा नक्कास समेत शहर के आठ प्रमुख बाजारों में भी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच और रखरखाव की जरूरत बताई जा रही है। बैरागढ़ के फायर सेफ्टी सिस्टम के रखरखाव पर भी सवाल 17 दिसंबर 2017 को बैरागढ़ के संत हिरदाराम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में भीषण आग लगी थी, जिसमें 100 से ज्यादा कपड़े की दुकानें जलकर खाक हो गई थीं। घटना के बाद होज-रील पाइप, ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर और फायर वाटर पंप लगाने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सिस्टम लगाने के बाद उसके रखरखाव में कमी और उपकरणों पर जंग लगने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। मेन कॉरिडोर में अतिक्रमण और मॉकड्रिल नहीं होने की बात भी कही गई है। न्यू मार्केट की आग के बाद अब सवाल केवल अतिक्रमण हटाने का नहीं, बल्कि बाजारों में अग्नि सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच, रखरखाव और आपातकालीन रास्ते खुले रखने का भी है।

भारत की हार पर भड़के सुनील गावस्कर, बोले- पिच नहीं, खराब गेंदबाजी जिम्मेदार

हैदराबाद। वेस्टइंडीज के खिलाफ चौथे टी-20 मुकाबले में भारतीय टीम की 24 रन से हार के बाद पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने गेंदबाजों के प्रदर्शन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने साफ कहा कि भारत की हार की वजह पिच नहीं, बल्कि खराब गेंदबाजी थी। गावस्कर के मुताबिक, भारतीय गेंदबाजों ने कई फुलटॉस और खराब लेंथ की गेंदें डालीं, जिससे वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों को बड़ा स्कोर बनाने का मौका मिला। गावस्कर ने कहा कि अगर गेंदबाज अपनी रणनीति को सही तरीके से लागू नहीं कर पाते, तो इसके लिए पिच को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने भी माना कि गेंदबाजी में तय योजनाओं को सही तरीके से लागू नहीं कर पाना टीम पर भारी पड़ा। गावस्कर बोले- फुलटॉस डालकर पिच को दोष नहीं दे सकते गावस्कर ने जियोहॉटस्टार पर कहा कि भारतीय गेंदबाजों की कमियों के कारण वेस्टइंडीज बड़ा स्कोर बनाने में सफल रहा। उन्होंने कहा कि अक्सर पिच को लेकर शिकायत की जाती है और कहा जाता है कि वह गेंदबाजों की मदद नहीं कर रही, लेकिन फुलटॉस डालने पर पिच को दोष देना सही नहीं है। उन्होंने गेंदबाजों को सलाह दी कि परिस्थितियों का फायदा उठाने के लिए सही लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी करना जरूरी है। फुलटॉस और बल्लेबाजों के लिए अनुकूल लेंथ पर गेंद डालने से उन्हें आसानी से रन बनाने का मौका मिलता है। गावस्कर के मुताबिक, वेस्टइंडीज के गेंदबाजों ने बाद में सही लेंथ और यॉर्कर का इस्तेमाल किया, जिससे भारतीय बल्लेबाजों पर दबाव बनाया जा सका। दोबारा बिछाई गई पिच पर गेंद रुककर आने की शिकायत हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम की दोबारा बिछाई गई पिच से गेंदबाजों को कुछ मदद मिलने की बात सामने आई। खिलाड़ियों ने बताया कि कुछ मौकों पर गेंद पिच पर रुककर आई और उछाल में भी बदलाव देखने को मिला। हालांकि, गावस्कर का मानना था कि गेंदबाजों को इन परिस्थितियों का बेहतर इस्तेमाल करना चाहिए था। उनके अनुसार, पिच से मिलने वाली संभावित मदद तभी उपयोगी साबित होती है, जब गेंदबाज सही जगह गेंद डालें। इससे पहले भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर भी ऐसी पिचों की जरूरत पर जोर दे चुके हैं, जिन पर बल्लेबाज और गेंद के बीच बेहतर मुकाबला देखने को मिले। शमार जोसेफ की गेंदबाजी पर भी उठाए सवाल गावस्कर ने वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज शमार जोसेफ की गेंदबाजी के तरीके पर भी सवाल उठाए। मैच के दौरान जोसेफ की एक बाउंसर भारतीय तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह के कंधे पर लगी। इसके बाद अर्शदीप विकेट छोड़कर बल्लेबाजी करने लगे, लेकिन जोसेफ ने उनके खिलाफ बॉडीलाइन पर गेंदबाजी जारी रखी और एक और बाउंसर डाल दी। इस पर कमेंट्री के दौरान गावस्कर ने कहा कि जोसेफ स्टंप्स पर गेंदबाजी करने के बजाय अर्शदीप को निशाना बना रहे थे, जबकि उस समय स्टंप्स असुरक्षित थे। दूसरी बार चोटिल होने से बाल-बाल बचने के बाद अर्शदीप आगे बल्लेबाजी जारी नहीं रख सके और 5 रन पर रिटायर हर्ट हो गए। 24 रन से हारा भारत बुधवार को हैदराबाद में खेले गए चौथे टी-20 मुकाबले में वेस्टइंडीज ने भारत को 24 रन से हराया। मैच के बाद भारतीय गेंदबाजी की रणनीति और पिच की भूमिका पर चर्चा तेज हो गई है। गावस्कर की टिप्पणी ने साफ कर दिया कि उनके मुताबिक, हार के लिए परिस्थितियों से ज्यादा गेंदबाजों का प्रदर्शन जिम्मेदार था।

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