झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच JSSC-CGL को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ी की जांच कर रही CID को गिरफ्तार किए गए अभय तिवारी से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिलने का दावा किया गया है। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों को सवाल-जवाब उपलब्ध कराने के बदले मोटी रकम लिए जाने की बात सामने आई है।
इस पूरे मामले ने उन हजारों छात्रों की चिंता बढ़ा दी है, जो महीनों और वर्षों की मेहनत के बाद सरकारी भर्ती परीक्षाओं में शामिल होते हैं।
15 अभ्यर्थियों से 12-12 लाख रुपये लेने का दावा
CID की पूछताछ से सामने आई जानकारी के मुताबिक, बोकारो में करीब 15 अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 12-12 लाख रुपये लिए गए थे। इस हिसाब से रकम लगभग 1.80 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
जांच में यह भी दावा किया गया है कि इन अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले करीब 65 सवाल और उनके जवाब उपलब्ध कराए गए थे। कथित तौर पर उम्मीदवारों को इन्हें याद कराया गया, ताकि परीक्षा के दौरान उन्हें सीधा फायदा मिल सके।
हालांकि, इन दावों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पेपर लीक की जांच में एजेंसियों की भूमिका पर भी नजर
मामला सामने आने के बाद CID की जांच अब केवल अभय तिवारी तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा से जुड़े सवाल या सामग्री बाहर कैसे पहुंची और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
JSSC-CGL की परीक्षा प्रक्रिया में अलग-अलग एजेंसियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारियां थीं। ऐसे में जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि परीक्षा से जुड़े संवेदनशील काम तक किन लोगों की पहुंच थी।
CID कथित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने के साथ-साथ पैसों के लेन-देन की भी जानकारी जुटा रही है।
अभय तिवारी पर पहले से भी उठते रहे हैं सवाल
अभय तिवारी की गिरफ्तारी के बाद उसकी शैक्षणिक और प्रतियोगी परीक्षा से जुड़ी पृष्ठभूमि भी जांच के केंद्र में आ गई है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि उसने खुद भी कई प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं।
JSSC-CGL में उसकी रैंक और उसके परिवार के कुछ सदस्यों के चयन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। CID इन सभी पहलुओं को जांच का हिस्सा बनाकर जानकारी जुटा रही है।
JPSC-JSSC विवाद के बीच बढ़ी छात्रों की बेचैनी
झारखंड में पहले से ही JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का गुस्सा देखने को मिल रहा है। छात्र संगठनों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में बार-बार विवाद सामने आने से मेहनत करने वाले उम्मीदवारों का भरोसा कमजोर हो रहा है।
कई अभ्यर्थी पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि अगर परीक्षा में किसी तरह की गड़बड़ी साबित होती है तो सरकार को प्रभावित उम्मीदवारों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट फैसला लेना चाहिए।
अब CID की जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं?
अभय तिवारी से पूछताछ के बाद जांच एजेंसी के सामने कई अहम सवाल हैं। मसलन, कथित तौर पर सवाल-जवाब कहां से मिले? इन्हें अभ्यर्थियों तक किसने पहुंचाया? कितने उम्मीदवारों को इसका फायदा मिला? और इस पूरे मामले में पैसों का लेन-देन किन लोगों के बीच हुआ?
इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही कथित पेपर लीक के पूरे नेटवर्क की तस्वीर साफ हो पाएगी।
फिलहाल CID की जांच जारी है। ऐसे में सामने आई जानकारियों को जांच में किए गए दावों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। किसी भी आरोपी को अदालत से दोष सिद्ध होने से पहले दोषी नहीं माना जा सकता।
छात्रों के लिए सबसे बड़ा सवाल
JSSC-CGL जैसी परीक्षा सिर्फ एक एग्जाम नहीं होती। इसके पीछे हजारों युवाओं की मेहनत, समय और उम्मीद जुड़ी होती है। ऐसे में अगर परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप सामने आते हैं तो सबसे ज्यादा चिंता उन उम्मीदवारों को होती है, जिन्होंने पूरी ईमानदारी से परीक्षा दी है।
अब सबकी नजर CID की अगली कार्रवाई और सरकार के फैसले पर है। जांच में अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह झारखंड की भर्ती व्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगा और परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर कई गंभीर सवालों का जवाब देना पड़ेगा।
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