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क्या राणा सांगा ने बाबर को भारत आने का निमंत्रण दिया था? इतिहासकारों की राय और प्रमाण

देश हरपल एक्सक्लूसिव मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर का भारत आगमन इतिहास के सबसे चर्चित विषयों में से एक है। एक लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि क्या मेवाड़ के राजा राणा सांगा ने वास्तव में बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया था या नहीं। इस सवाल का जवाब खोजने के लिए हमने कई प्रामाणिक ऐतिहासिक स्रोतों और इतिहासकारों की राय को खंगाला। क्या था ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य? 16वीं शताब्दी के प्रारंभ में उत्तर भारत छोटे-छोटे राज्यों में बंटा हुआ था। दिल्ली की सत्ता लोदी वंश के हाथों में थी, लेकिन सुल्तान इब्राहिम लोदी के खिलाफ कई विरोधी शासक थे, जिनमें राणा सांगा प्रमुख थे। दूसरी ओर, बाबर मध्य एशिया का एक शक्तिशाली शासक था, जिसने समरकंद और काबुल पर शासन किया था और उसकी नजरें हिंदुस्तान पर थीं। इतिहासकारों की राय और प्रमुख ग्रंथों का उल्लेख खानवा की लड़ाई: विश्वासघात या गलतफहमी? निष्कर्ष इतिहासकारों और प्रामाणिक ग्रंथों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि राणा सांगा ने बाबर को भारत आने का कोई औपचारिक निमंत्रण नहीं दिया था। हां, इब्राहिम लोदी के खिलाफ एक अनकहा गठबंधन जरूर था, लेकिन बाबर ने भारत पर अपने हितों के कारण आक्रमण किया था, न कि राणा सांगा के निमंत्रण पर। बाद में जब राणा सांगा को एहसास हुआ कि बाबर वापस नहीं जाने वाला, तो उन्होंने उसके खिलाफ युद्ध किया। (लेखक: देश हरपल न्यूज़ डेस्क)
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Kiran Rijiju

वक्फ संशोधन बिल पर किरन रिजिजू का बड़ा बयान: ‘विरोध करने वाले करोड़ों की जमीन पर काबिज’, जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली: वक्फ संशोधन बिल को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। इस बीच, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जा जमाए बैठे हैं। क्या है वक्फ संशोधन बिल? वक्फ संशोधन बिल 2023 को लेकर संसद में चर्चा जोरों पर है। सरकार का कहना है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों को हल करने और पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया है। इस बिल के जरिए वक्फ बोर्डों को दी जाने वाली कुछ विशेष शक्तियों में बदलाव किया गया है, जिससे संपत्ति विवादों को सुलझाने में आसानी होगी। किरन रिजिजू ने क्या कहा? केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक इंटरव्यू में कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों रुपये की जमीन पर अवैध रूप से काबिज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ की आड़ में कई जगहों पर अवैध कब्जे हुए हैं और सरकार इन मामलों को ठीक करने के लिए यह कानून ला रही है। केरल के बिशप का समर्थन केरल के कैथोलिक बिशप ने भी वक्फ संशोधन बिल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों को लेकर कई राज्यों में विवाद हैं और इस बिल से इस समस्या का हल निकल सकता है। विपक्ष का विरोध क्यों? विपक्षी दलों का कहना है कि यह बिल मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों के खिलाफ है और इससे उनके अधिकारों का हनन होगा। वहीं, सरकार का कहना है कि यह बिल केवल पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। सरकार की मंशा क्या है? सरकार का कहना है कि वक्फ संपत्तियों पर अनियमितताओं और अवैध कब्जों को रोकने के लिए इस बिल की जरूरत है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इससे किसी भी धर्म विशेष के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा। आगे क्या होगा? वक्फ संशोधन बिल पर संसद में बहस जारी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बिल पास होता है या विपक्षी विरोध के कारण इसमें और बदलाव किए जाते हैं।
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PM pays tribute to RSS founders in Nagpur

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नागपुर दौरा: संघ संस्थापकों को श्रद्धांजलि, माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में संबोधन

नागपुर, 30 मार्च: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नागपुर दौरे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और माधव नेत्रालय के एक विशेष कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने चिकित्सा सेवा, सामाजिक योगदान और भारत के दृष्टिहीन नागरिकों के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। संघ संस्थापकों को पुष्पांजलि प्रधानमंत्री मोदी ने नागपुर स्थित केशव कुंज पहुंचकर संघ के संस्थापकों डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) को पुष्पांजलि अर्पित की। यह स्थान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ऐतिहासिक केंद्र माना जाता है, जहां से संघ की विचारधारा और राष्ट्र निर्माण की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में PM मोदी का संबोधन इसके बाद प्रधानमंत्री माधव नेत्रालय के एक कार्यक्रम में पहुंचे, जहां उन्होंने समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए इस संस्थान की सेवाओं की सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा,“माधव नेत्रालय केवल नेत्रों का इलाज करने का केंद्र नहीं, बल्कि समाज की सेवा का एक बड़ा उदाहरण है। दृष्टिहीनता को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।” प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत देशभर में आंखों की बीमारियों से बचाव और इलाज के लिए बड़े स्तर पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना, डिजिटल हेल्थ मिशन और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। राष्ट्रीय सेवा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान प्रधानमंत्री नेत्रालय के डॉक्टरों, विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी प्रशंसा की, जो नि:स्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा और समाज सेवा के क्षेत्र में नागपुर जैसे शहरों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, और यह संस्थान इस दिशा में एक मिसाल कायम कर रहा है। नागपुर दौरे का महत्व प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। संघ के गढ़ नागपुर में उनकी उपस्थिति राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि आने वाले चुनावों में इससे भाजपा और संघ के संबंधों को नई ऊर्जा मिलने की संभावना जताई जा रही है। प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल श्रद्धांजलि और संबोधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने नागपुरवासियों को यह संदेश दिया कि सरकार स्वास्थ्य, सेवा और समाज कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है। (देश हरपल न्यूज के लिए विशेष रिपोर्ट)
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सामूहिक विवाह में भाई-बहन की शादी

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में आयोजित एक महोत्सव के दौरान हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि इस कार्यक्रम में भाई-बहन को दूल्हा-दुल्हन के रूप में बैठाकर उनकी शादी कराई गई। इस सामूहिक विवाह में लगभग 1001 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ था, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए थे। घटना के अनुसार, एक युवक ने अपनी बहन के साथ विवाह मंडप में बैठने के पीछे सफा पहनने की इच्छा का कारण बताया। उसका कहना था कि उसे सफा पहनने का शौक था, इसलिए वह अपनी बहन के साथ विवाह मंडप में बैठ गया। इस मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।  यह घटना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजित कार्यक्रमों में सामने आए फर्जीवाड़े की घटनाओं में से एक है। इससे पहले भी अमरोहा जिले में एक महिला ने अपने चचेरे भाई के साथ शादी करके सरकारी लाभ प्राप्त करने की कोशिश की थी। इन घटनाओं के प्रकाश में आने के बाद प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और जांच के आदेश दिए गए हैं। इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि सामूहिक विवाह योजनाओं में सख्त निगरानी और सत्यापन की आवश्यकता है, ताकि इस तरह के फर्जीवाड़े रोके जा सकें और सरकारी योजनाओं का सही लाभ पात्र लोगों तक पहुंच सके।
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, कहा- ‘टिप्पणी असंवेदनशील और अमानवीय’

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले पर रोक लगाते हुए उसकी कड़ी आलोचना की। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किसी नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को ‘असंवेदनशील’ और ‘अमानवीय दृष्टिकोण’ बताया है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा, “यह बहुत गंभीर मामला है और जिस जज ने यह फैसला दिया, उसकी तरफ से बहुत असंवेदनशीलता दिखाई गई। हमें यह कहते हुए बहुत दुख हो रहा है कि फैसला लिखने वाले में संवेदनशीलता की पूरी तरह से कमी थी।” सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया था। यह फैसला आते ही कानूनी विशेषज्ञों, राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए तुरंत सुनवाई का निर्णय लिया। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सुप्रीम कोर्ट के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने खुद लिया संज्ञान “कुछ फैसलों को रोकने के पीछे महत्वपूर्ण कारण होते हैं, और यह उनमें से एक है।” हाईकोर्ट का विवादास्पद फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था, “किसी लड़की के निजी अंग पकड़ लेना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ देना और जबरन उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश करना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता।” हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद महिला संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि यह पीड़िता के अधिकारों का हनन करता है और यौन उत्पीड़न को हल्के में लेने जैसा है। न्यायपालिका पर उठे सवाल यह मामला देश में महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनी ढांचे को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले अपराधियों को बचाव का आधार दे सकते हैं और महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों के खिलाफ न्याय मिलने में बाधा बन सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अब पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। इस मामले की अगली सुनवाई जल्द ही होने की संभावना है। (देश हरपल की विशेष रिपोर्ट)
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मां कूष्मांडा

Navratri 2026: चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा, जानें कथा, भोग और मंत्र

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें सृष्टि की रचनात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि उनकी आराधना से भक्तों को उत्साह, सकारात्मकता और नई शुरुआत की प्रेरणा मिलती है। मां कूष्मांडा की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब चारों ओर अंधकार था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है। यह कथा सृजन और ऊर्जा के महत्त्व को दर्शाती है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः। भोग: मां को मालपुआ या मीठे फल अर्पित करने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gandhinagar

Gandhinagar Municipal Election: भाजपा को बहुमत, कांग्रेस को फायदा; AAP को एक भी सीट नहीं

Gandhinagar Municipal Election गुजरात की राजधानी गांधीनगर के नगर निगम चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखा है। 44 सीटों वाले नगर निगम में भाजपा ने 38 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। वहीं, कांग्रेस 5 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) इस बार अपना खाता भी नहीं खोल पाई। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। 13 अक्टूबर को सामने आए चुनाव परिणामों में भाजपा के लिए राहत की बात यह रही कि नगर निगम की सत्ता उसके पास बनी रही। हालांकि, पिछली बार के मुकाबले पार्टी की सीटें कम हुई हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस ने अपनी सीटों की संख्या बढ़ाकर स्थानीय राजनीति में अपनी मौजूदगी मजबूत की है। Gandhinagar Election Result: BJP को 38, कांग्रेस को मिलीं 5 सीटें गांधीनगर नगर निगम की 44 सीटों के लिए 11 अक्टूबर को मतदान हुआ था। चुनाव में अलग-अलग राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई। मतगणना के बाद भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। पार्टीवार नतीजे इस प्रकार रहे: इन आंकड़ों से साफ है कि भाजपा ने नगर निगम में बहुमत बनाए रखा है। वहीं, कांग्रेस को मिली पांच सीटें और AAP का खाता नहीं खुलना इस चुनाव के प्रमुख नतीजे रहे। पिछली बार से BJP की सीटें घटीं, कांग्रेस ने बढ़ाई ताकत गांधीनगर नगर निगम के पिछले चुनाव अक्टूबर 2021 में हुए थे। उस समय भाजपा ने 44 में से 41 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस को दो सीटें मिली थीं, जबकि आम आदमी पार्टी ने भी एक सीट हासिल की थी। इस बार तस्वीर में कुछ बदलाव देखने को मिला। भाजपा की सीटें 41 से घटकर 38 रह गईं, जबकि कांग्रेस दो से बढ़कर पांच सीटों तक पहुंच गई। AAP पिछले चुनाव में मिली अपनी एकमात्र सीट भी नहीं बचा सकी। यानी भाजपा ने अपनी सत्ता कायम रखी, लेकिन कांग्रेस ने पिछली बार के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। इन नतीजों ने गांधीनगर की स्थानीय राजनीति में दोनों प्रमुख दलों की स्थिति को फिर चर्चा में ला दिया है। Ward No. 6 Result: कांग्रेस ने चारों सीटों पर दर्ज की जीत गांधीनगर नगर निगम चुनाव में वार्ड नंबर 6 का परिणाम भी खास रहा। यहां कांग्रेस ने सभी चार सीटों पर जीत दर्ज की। वार्ड नंबर 7 में भी कांग्रेस को एक सीट मिली, जबकि बाकी तीन सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार विजयी रहे। इसके अलावा, वार्ड नंबर 2 में निर्दलीय उम्मीदवार दीपिका वाघेला ने जीत हासिल की। यह परिणाम दिखाता है कि भाजपा को कुल मिलाकर स्पष्ट बहुमत मिलने के बावजूद कुछ वार्डों में मुकाबला अलग रहा। Gandhinagar Municipal Election: कितना रहा मतदान? गांधीनगर नगर निगम चुनाव में 59.25 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। चुनाव के लिए 11 वार्डों की 44 सीटों पर कुल 130 उम्मीदवार मैदान में थे। 11 अक्टूबर को मतदान के बाद 13 अक्टूबर को मतगणना हुई। नतीजे सामने आने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि भाजपा नगर निगम में अपना बहुमत बरकरार रखने में सफल रही है। Gujarat Civic Polls: थारा और ओखा में भी BJP को बढ़त गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में गांधीनगर के अलावा थारा और ओखा नगरपालिका के नतीजे भी चर्चा में रहे। थारा नगरपालिका की 24 सीटों में भाजपा ने 19 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को पांच सीटें मिलीं। वहीं, ओखा नगरपालिका में मतदान वाली 32 सीटों में भाजपा ने 29 और कांग्रेस ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की। ओखा में चार अन्य सीटें भाजपा पहले ही निर्विरोध जीत चुकी थी। इस तरह गांधीनगर, थारा और ओखा के चुनाव परिणामों में भाजपा ने अपनी स्थिति बनाए रखी। हालांकि, गांधीनगर में कांग्रेस की सीटें बढ़ना भी इन नतीजों का एक अहम पहलू रहा। Gandhinagar Election Result 2026: आगे किस पर रहेगी नजर? चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अब गांधीनगर नगर निगम में नई परिषद के गठन और महापौर के चयन की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। महापौर पद को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल, चुनाव का सबसे बड़ा नतीजा यही है कि भाजपा ने 38 सीटों के साथ नगर निगम में अपना बहुमत बरकरार रखा है। कांग्रेस को पिछले चुनाव के मुकाबले तीन सीटों का फायदा हुआ, जबकि AAP इस बार एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी। गांधीनगर के ये नतीजे स्थानीय निकाय की राजनीति में भाजपा की स्थिति और कांग्रेस की बढ़ी हुई सीटों, दोनों को सामने रखते हैं। आने वाले समय में नगर निगम के फैसलों और नई परिषद के कामकाज पर लोगों की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UPI

UPI Charges Update: ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% फीस, दिवाली तक टला फैसला

UPI Transaction Charges में डिजिटल पेमेंट करने वाले दुकानदारों और कारोबारियों के लिए UPI चार्ज से जुड़ा अहम अपडेट सामने आया है। ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस लगाने की व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होनी थी, लेकिन त्योहारी सीजन को देखते हुए इसे दिवाली तक टालने की जानकारी सामने आई है। इससे त्योहारों के दौरान डिजिटल पेमेंट करने वाले कारोबारियों को फिलहाल राहत मिल सकती है। हालांकि, इस फैसले से जुड़ी नई तारीख और लागू होने वाली शर्तों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। इसलिए ग्राहकों और दुकानदारों को किसी भी बदलाव से पहले संबंधित दिशानिर्देशों पर ध्यान देना चाहिए। UPI Payment Charges: क्या है पूरा मामला? आज देश में छोटी दुकानों से लेकर बड़े शोरूम तक UPI के जरिए भुगतान किया जाता है। सब्जी खरीदने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग और बड़े बिलों का भुगतान करने तक, QR कोड स्कैन करना लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है। इसी बीच ₹2,000 से ज्यादा के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की चर्चा है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने वाली थी, लेकिन दिवाली के दौरान बाजार में बढ़ने वाली खरीदारी और डिजिटल लेनदेन को देखते हुए इसे आगे बढ़ाने की बात कही गई है। यहां समझना जरूरी है कि MDR का संबंध कारोबारी भुगतान से है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर UPI यूजर को पैसे भेजने या प्राप्त करने पर अतिरिक्त फीस देनी होगी। क्या PhonePe और Google Pay से पेमेंट करना होगा महंगा? UPI चार्ज की खबर सामने आने के बाद कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या PhonePe, Google Pay और दूसरे UPI ऐप से भुगतान करने पर अब अतिरिक्त पैसे देने होंगे। फिलहाल आम ग्राहकों को यह समझना चाहिए कि प्रस्तावित मर्चेंट चार्ज और व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI ट्रांसफर अलग-अलग हैं। सामान्य P2P ट्रांजैक्शन पर इस तरह का MDR लागू नहीं होता। इसी तरह, निर्धारित नियमों के तहत आने वाले छोटे मूल्य के मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी इस चार्ज से बाहर रह सकते हैं। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि ₹2,000 से अधिक का हर UPI पेमेंट महंगा हो जाएगा। दुकानदारों को क्यों मिल सकती है राहत? दिवाली के समय बाजारों में ग्राहकों की भीड़ बढ़ जाती है। कपड़े, मिठाई, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल और घरेलू सामान की दुकानों पर डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ता है। ऐसे में ट्रांजैक्शन चार्ज से जुड़े फैसले को आगे बढ़ाने से कारोबारियों को त्योहार के दौरान भुगतान व्यवस्था में बदलाव के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है। खासकर छोटे दुकानदारों के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके कारोबार में UPI पेमेंट की बड़ी भूमिका होती है। हालांकि, चार्ज किस पर और किन शर्तों के तहत लागू होगा, यह संबंधित आधिकारिक नियमों पर निर्भर करेगा। UPI Transaction Fee: कब लागू होगा नया नियम? ₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस से जुड़े फैसले को दिवाली तक टालने की खबर सामने आई है। लेकिन नई लागू तारीख और अंतिम नियमों की पुष्टि आधिकारिक घोषणा से ही की जानी चाहिए। इसलिए ग्राहकों और कारोबारियों को फिलहाल किसी भी अपुष्ट जानकारी के आधार पर यह नहीं मानना चाहिए कि सभी UPI पेमेंट पर चार्ज लगने वाला है। UPI यूजर्स के लिए जरूरी सलाह UPI ने देश में डिजिटल भुगतान को आसान और तेज बनाया है। ऐसे में चार्ज से जुड़ी किसी भी नई व्यवस्था का असर समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि नियम किस प्रकार के ट्रांजैक्शन पर लागू होता है। आम यूजर्स को अपने सामान्य डिजिटल पेमेंट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। वहीं, दुकानदारों को किसी भी संभावित चार्ज के बारे में अपने बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर से जानकारी लेनी चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
SIR

Patna SIR Protest: पटना में छात्रों का हंगामा, बैरिकेडिंग तोड़ी; छात्राओं को खींचकर ले जाने का आरोप

बिहार की राजधानी पटना (Patna) में SIR (Special Intensive Revision) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में सड़क पर उतरे छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की खबर सामने आई। वहीं, पुलिस की गाड़ी की चाबी लेकर भागने और प्रदर्शन कर रही छात्राओं को खींचकर ले जाने के आरोपों ने भी इस मामले को चर्चा में ला दिया है। प्रदर्शन की इन घटनाओं के बीच अब पुलिस की कार्रवाई और SIR की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर सबकी नजर है। Patna में SIR के खिलाफ प्रदर्शन, सड़क पर उतरे छात्र पटना में SIR के विरोध में छात्रों और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की नाराजगी मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलती से मतदाता सूची से न हटे। SIR यानी Special Intensive Revision का उद्देश्य मतदाता सूची की विशेष जांच और उसे अपडेट करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। Protest के दौरान टूटी बैरिकेडिंग, पुलिस से टकराव प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी। इसके बाद मौके पर तनाव बढ़ गया और पुलिस के साथ टकराव की स्थिति बन गई। इसी दौरान पुलिस की गाड़ी की चाबी लेकर भागने की घटना भी सामने आई है। हालांकि, इस घटना की परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों के बारे में आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। छात्राओं को खींचकर ले जाने का आरोप पटना में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि प्रदर्शन कर रही कुछ छात्राओं को पुलिसकर्मी खींचकर वहां से ले गए। इस घटना को लेकर प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार पर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, छात्राओं की संख्या, उन्हें हिरासत में लिए जाने की स्थिति और इस मामले में पुलिस का पक्ष स्पष्ट होने के बाद ही घटनाक्रम की पूरी जानकारी सामने आएगी। क्या है SIR और क्यों हो रहा है इसका विरोध? SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision है। यह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाताओं के विवरण की जांच की जाती है और सूची को अपडेट किया जाता है। इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे संगठनों की प्रमुख चिंता यह है कि जांच के दौरान किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए। उनका जोर पारदर्शिता, सही दस्तावेजों और मतदाताओं को अपनी शिकायत दर्ज कराने का उचित अवसर देने पर है। वहीं, मतदाता सूची को अपडेट करना चुनावी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। ऐसे में इस मुद्दे पर स्पष्ट दिशा-निर्देश और शिकायतों का समय पर समाधान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Patna Protest के बाद पुलिस की कार्रवाई पर नजर पटना में SIR के खिलाफ हुए इस प्रदर्शन के बाद अब पुलिस की कार्रवाई और घटनास्थल से सामने आने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी। बैरिकेडिंग तोड़ने, पुलिस की गाड़ी की चाबी लेकर भागने और छात्राओं को खींचकर ले जाने के आरोपों की पुष्टि के लिए आधिकारिक बयान और उपलब्ध वीडियो अहम होंगे। फिलहाल, इस घटना से जुड़ी सभी जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष और हिरासत से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Today: सेंसेक्स 600 अंक उछला, Nifty में 200 अंकों की तेजी; IT और Banking Stocks में खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में मंगलवार, 13 अक्टूबर को कारोबार के दौरान अच्छी तेजी देखने को मिली। शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स ने जोरदार वापसी की और 600 अंकों से ज्यादा की बढ़त दर्ज की। वहीं, निफ्टी भी करीब 200 अंक चढ़ गया। IT और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी बढ़ने से बाजार को सहारा मिला। सुबह करीब 10 बजे BSE Sensex 72,500 के ऊपर कारोबार कर रहा था, जबकि NSE Nifty 50 भी 22,500 के पार पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों को राहत मिली। हालांकि, कई शेयरों में बिकवाली जारी रहने से बाजार की तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं रही। Sensex-Nifty में तेजी, निवेशकों को मिली राहत शेयर बाजार में मंगलवार को खरीदारी का माहौल मजबूत होता दिखाई दिया। सेंसेक्स करीब 660 अंक चढ़कर 72,585 के आसपास पहुंच गया। दूसरी ओर, निफ्टी में लगभग 202 अंकों की बढ़त दर्ज की गई और यह 22,565 के स्तर के करीब कारोबार करता नजर आया। पिछले सत्रों में बाजार पर दबाव देखने को मिला था। ऐसे में प्रमुख सूचकांकों में आई इस तेजी ने निवेशकों को कुछ राहत दी। हालांकि, बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। IT Stocks में सबसे ज्यादा हलचल मंगलवार को IT सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। HCL Technologies और Tata Consultancy Services (TCS) के शेयरों में मजबूत बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा Infosys और Tech Mahindra के शेयरों पर भी निवेशकों की नजर रही। IT कंपनियों के तिमाही नतीजों और कारोबार से जुड़े अपडेट का असर शेयरों पर दिखाई दिया। खासकर HCLTech के नतीजों से जुड़ी सकारात्मक खबरों ने सेक्टर में खरीदारी को बढ़ावा दिया। IT शेयरों में आई तेजी ने सेंसेक्स और निफ्टी को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई। Banking Stocks ने भी दिया बाजार का साथ IT शेयरों के साथ बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में भी निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई। HDFC Bank, State Bank of India (SBI), Bajaj Finance और Bajaj Finserv जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। बैंकिंग शेयरों में बढ़त का असर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर भी पड़ा। हालांकि, सभी सेक्टरों में एक जैसी तेजी नहीं रही। कुछ शेयरों में कमजोरी बनी रही, जिससे पता चलता है कि निवेशक चुनिंदा कंपनियों में ही पैसा लगा रहे थे। रुपये की मजबूती से बाजार को सहारा शेयर बाजार के अलावा मुद्रा बाजार में भी हलचल देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती से निवेशकों की धारणा को कुछ समर्थन मिला। रुपये की चाल पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कदमों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और डॉलर की वैश्विक स्थिति का असर पड़ता है। हालांकि, आने वाले दिनों में रुपये की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक हालात पर निर्भर करेगी। महंगाई और कच्चे तेल पर भी रहेगी नजर बाजार में तेजी के बावजूद निवेशकों की चिंताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। खुदरा महंगाई, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे समय में कंपनियों के तिमाही नतीजे भी महत्वपूर्ण हैं। बेहतर नतीजे पेश करने वाली कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाले शेयरों पर दबाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? सेंसेक्स और निफ्टी में आई तेजी बाजार के लिए राहत की खबर है, लेकिन इसे लगातार तेजी की गारंटी नहीं माना जा सकता। बाजार में निवेश करने से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, शेयर की कीमत और उससे जुड़े जोखिमों को समझना जरूरी है। कुल मिलाकर, 13 अक्टूबर को IT और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के दम पर भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती दिखाई। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि बाजार अपनी बढ़त को कितना बरकरार रखता है और आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेत किस तरह असर डालते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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