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ग्वालियर में दोस्त ने ही की दोस्त की पत्थर से हत्या, रेलवे स्टेशन पर मिला शव

ग्वालियर में रविवार की रात एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। यहां एक युवक की उसके ही जिगरी दोस्त ने सिर पर पत्थर पटककर हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी को शहर छोड़ने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। रेलवे स्टेशन पर पड़ा मिला खून से लथपथ शव यह घटना ग्वालियर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 4 के सर्कुलेटिंग एरिया की है। यहां 28 वर्षीय शिवम यादव, निवासी नूरगंज, का शव खून से लथपथ हालत में मिला। उसके सिर पर गहरे घाव थे और पास ही खून से सना पत्थर पड़ा था। शिवम घरों में रंगाई-पुताई का काम करता था। CCTV में दिखा आखिरी वक्त का सच पुलिस को मौके से CCTV फुटेज मिला जिसमें शिवम और उसका दोस्त आकाश जाटव शराब खरीदते नजर आ रहे हैं। फुटेज में दोनों कुछ देर बात करते हैं और फिर सड़क की ओर जाते हैं। इसके बाद आकाश ने पत्थर उठाकर शिवम के सिर पर वार कर दिया। कहासुनी के बाद हत्या की कबूलियत सोमवार रात पुलिस ने आरोपी आकाश को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने बताया कि शिवम शराब पीने के बाद उसे जबरदस्ती घूमने के लिए दबाव डाल रहा था। इसी बात पर गुस्से में आकर उसने पत्थर से हमला कर दिया। पुलिस की सख्त जांच जारी आसपास के लोगों ने बताया कि दोनों काफी देर से झगड़ रहे थे। पुलिस को शक है कि आरोपी की कहानी पूरी सच्चाई नहीं है। जीआरपी थाना नैरोगेज प्रभारी दीप शिखा ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और हत्या के असली कारणों की गहराई से जांच जारी है। 👉 ऐसी और खबरों के लिए विजिट करें: deshharpal.com
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Bihar

Bihar चुनाव 2025 दूसरे फेज की वोटिंग में युवाओं और महिलाओं की बड़ी भागीदारी

Bihar विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण की वोटिंग आज (11 नवंबर) पूरे जोश के साथ जारी है। इस चरण में राज्य की 122 विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है, जहां 3.70 करोड़ से अधिक मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। इनमें लगभग 1.95 करोड़ पुरुष, 1.74 करोड़ महिलाएं और 600 से अधिक थर्ड जेंडर वोटर्स शामिल हैं। Bihar Election 2025 Voting Update सुबह 9 बजे तक 14.55% मतदान दर्ज किया गया था। कई जिलों में सुबह से ही लंबी कतारें दिखाई दीं। हालांकि कुछ मतदान केंद्रों पर EVM में तकनीकी दिक्कत की वजह से थोड़ी देर के लिए मतदान रुका, लेकिन जल्दी ही प्रक्रिया सामान्य कर दी गई। किन जिलों में हो रही वोटिंग दूसरे चरण में 20 जिलों की सीटों पर मतदान चल रहा है, जिनमें शामिल हैं – पटना, भागलपुर, कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, मधेपुरा, मधुबनी, दरभंगा, जमुई, बेगूसराय और मुंगेर जैसे प्रमुख जिले। सीमांचल और अंग क्षेत्र की सीटें इस चरण में सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। NDA vs Mahagathbandhan – किसकी साख दांव पर इस चरण में NDA (BJP + JDU) और महागठबंधन (RJD + Congress + Left) के बीच सीधी टक्कर है। कई दिग्गज नेताओं की साख इस चरण में दांव पर लगी है, जिनमें कई मंत्रियों और पूर्व विधायकों की सीटें भी शामिल हैं। सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था चुनाव आयोग ने निष्पक्ष मतदान के लिए कड़े इंतज़ाम किए हैं। संवेदनशील बूथों पर CCTV कैमरे और वेबकास्टिंग की सुविधा दी गई है। अर्धसैनिक बलों की तैनाती के साथ पुलिस गश्त भी लगातार जारी है। मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह युवाओं और पहली बार वोट डालने वालों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। महिलाएं भी बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों तक पहुंच रही हैं। कई जिलों में सुबह से ही मतदान केंद्रों पर भीड़ उमड़ी हुई है। बिहार चुनाव 2025 का दूसरा चरण बेहद अहम है, क्योंकि इसका असर सीधे तौर पर सत्ता की राह तय करेगा। एनडीए और महागठबंधन दोनों के लिए यह राउंड ‘Make or Break’ साबित हो सकता है। जनता अब विकास, रोजगार और स्थिरता के मुद्दों पर मतदान कर रही है, जिसका नतीजा बिहार की सियासत का भविष्य तय करेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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कोरबा: ईसाई पत्नी का जैन पति पर धर्म बदलने का दबाव डालने का आरोप, हाईकोर्ट ने 12 हजार रुपए भरण-पोषण का आदेश बरकरार रखा

कोरबा जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां प्रेम विवाह करने के बाद ईसाई धर्म की महिला ने अपने जैन पति पर धर्म परिवर्तन का दबाव डालने का आरोप लगाया है। पत्नी का कहना है कि शादी के बाद पति उसे अपने साथ नहीं ले गया और ससुराल वालों ने भी उस पर जैन धर्म अपनाने के लिए दबाव डाला। पत्नी के इनकार के बाद वह मजबूरी में अपने मायके में ही रहने लगी। इसके बाद उसने फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण की याचिका दायर की। कोर्ट को बताया गया कि उसे कमर और सीने में गंभीर दर्द रहता है, जिसका इलाज कराने में हर माह 20 से 25 हजार रुपए खर्च होते हैं। वहीं पति एक इंजीनियर है और उसकी मासिक सैलरी करीब 85,940 रुपए है। पत्नी ने कोर्ट से हर माह 45 हजार रुपए भरण-पोषण की मांग की थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैमिली कोर्ट ने पति को हर महीने 12 हजार रुपए गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया। इस आदेश के खिलाफ पति ने हाईकोर्ट में अपील दायर की, जिसमें उसने कहा कि पत्नी शिक्षित है और खुद का खर्च उठा सकती है। लेकिन हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि पत्नी के पास आय का कोई स्रोत नहीं है, जबकि पति की आमदनी पर्याप्त है। ऐसे में पत्नी को आर्थिक सहायता देना जरूरी है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद पत्नी को हर महीने 12 हजार रुपए भरण-पोषण मिल सकेगा। 👉 ऐसी ही और खबरों के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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खंडवा में आदिवासी विधवा से अन्याय: शादी का झांसा देकर किया रेप, शिकायत पर भी नहीं हुई कार्रवाई — ज़हर खाकर दी जान देने की कोशिश

खंडवा। मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां एक 28 वर्षीय आदिवासी विधवा महिला ने रविवार को ज़हर खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। महिला को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां वह जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है। महिला ने आरोप लगाया है कि एक खेत मालिक ने उससे शादी का झांसा देकर रेप किया, और जब उसने न्याय के लिए पुलिस व अधिकारियों से शिकायत की, तो उसकी एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई। इसी अन्याय से दुखी होकर उसने यह कदम उठाया। ससुराल ने निकाला, मायके में रह रही थी महिला पीड़िता ने बताया कि वह विधवा है और उसकी चार बेटियां हैं। बेटा न होने के कारण ससुराल वालों ने उसे झिरन्या क्षेत्र से निकाल दिया था। अब उसकी बेटियां सास-ससुर के पास हैं और वह खुद मायके में रह रही थी। खेत मालिक ने शादी का झांसा देकर किया रेप महिला के मुताबिक, जुलाई में वह जामला गांव के एक खेत में मजदूरी करने गई थी, जहां खेत मालिक सुखलाल भिलाला ने शादी का वादा कर उसके साथ दुष्कर्म किया। 15 दिन तक साथ रखा, फिर पंचायत में हुआ पैसों का सौदा सुखलाल उसे भगाकर ले गया और करीब 15 दिन तक अपने साथ रखा। जब परिजनों को पता चला, तो पंचायत बुलाई गई। वहां तय हुआ कि शादी के बदले सुखलाल 80 हजार रुपए देगा। उसने पहले 25 हजार दिए, लेकिन बाद में कहा कि “वह विधवा है, कबाड़ हो गई है।” तीन महीने तक साथ रखकर फिर भगा दिया महिला का आरोप है कि सुखलाल ने तीन महीने तक उसे पत्नी की तरह रखा और फिर यह कहकर निकाल दिया कि उसने कोई शादी नहीं की। पुलिस और प्रशासन ने नहीं की कार्रवाई पीड़िता ने 24 अक्टूबर को पंधाना थाने में शिकायत की, लेकिन सिर्फ आवेदन लेकर लौटा दिया गया। 4 नवंबर को उसने जनसुनवाई में कलेक्टर और एसपी से भी मुलाकात की, पर कार्रवाई नहीं हुई। न्याय न मिलने पर उठाया आत्मघाती कदम न्याय न मिलने से निराश महिला ने रविवार को ज़हर खा लिया। भाई ने समय रहते देखा और उसे अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस बोली—मामले की जानकारी नहीं थी टीआई दिलीप देवड़ा ने कहा कि उन्हें इस आवेदन की जानकारी नहीं थी, अब कार्रवाई की जाएगी। वहीं डीएसपी अनिल सिंह चौहान ने कहा कि अगर पुलिस ने लापरवाही की है तो जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी। 👉 ऐसे और सच्चे समाचार पढ़ें: www.deshharpal.com
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कटनी f ग्रामीणों की जिद पर जीता न्याय: कलेक्टर ने ठेकेदार को दी सड़क की लीज, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

कटनी जिले की बरही तहसील के तीन गांवों — करौंदी खुर्द, कन्नौर और बिचपुरा — के लोगों के लिए राहत भरी खबर आई है। ग्रामीणों की आवाजाही रोकने वाले मामले में अब हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। दरअसल, इन गांवों को जोड़ने वाली एकमात्र सड़क को कटनी कलेक्टर ने एक ठेकेदार तिलकराज ग्रोवर को लीज पर दे दी थी। ठेकेदार ने उस रास्ते पर गिट्टी डंप करना शुरू कर दिया, जिससे ग्रामीणों का आना-जाना पूरी तरह से बंद हो गया। कलेक्टर से कई बार गुहार लगाने के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। ⚖️ कोर्ट ने जताई नाराजगी मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने पहले प्रशासन को सड़क खोलने के आदेश दिए, लेकिन आदेश के बावजूद रास्ता नहीं खोला गया। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार, कटनी कलेक्टर और ठेकेदार तिलकराज ग्रोवर को नोटिस जारी किया और 10 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जवाब देने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा — “अगर कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं हुआ है, तो यह गंभीर अवमानना का मामला है।” 🛣️ ग्रामीणों का एकमात्र रास्ता यह सड़क वर्षों से ग्रामीणों के लिए जीवन रेखा रही है। लोग इसी रास्ते से तहसील और शहर तक आते-जाते थे।लेकिन 1 जुलाई 2025 को कलेक्टर ने खनिज विभाग की रिपोर्ट पर ग्राम कन्नौर स्थित खसरा नंबर 861 की करीब 65 हेक्टेयर भूमि को ठेकेदार को लीज पर दे दी। महज 300 रुपये वार्षिक किराये में यह जमीन खनन डंपिंग साइट के रूप में दे दी गई। जबकि राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि “सार्वजनिक सड़क” के रूप में दर्ज है। 🧾 ग्रामीणों की याचिका बनी आधार कटनी निवासी संदीप जायसवाल ने 16 सितंबर को हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की।27 सितंबर और 13 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रशासन को सड़क खोलने का आदेश दिया था।लेकिन जब आदेश का पालन नहीं हुआ, तो 4 नवंबर को अवमानना याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अर्पण जे. पवार, अक्षत अरजरिया और चिरंजीवी शर्मा ने दलील दी कि प्रशासन ने “राजनीतिक दबाव” में आकर यह निर्णय लिया। ⚠️ कोर्ट की सख्त चेतावनी कोर्ट ने कहा कि जनता की सुविधा के लिए बनी सड़क को किसी निजी व्यक्ति या कंपनी के हित में नहीं दिया जा सकता।यदि अधिकारियों का जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो कोर्ट कड़ी कार्रवाई करेगी।फिलहाल, अदालत ने सड़क पर डंपिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी है, जिससे ग्रामीणों को अस्थायी राहत मिली है। 📍 ग्रामीणों की एकजुटता और न्याय के प्रति भरोसे ने एक बार फिर दिखा दिया कि जनता की आवाज दबाई नहीं जा सकती। 👉 ऐसी और जनहित से जुड़ी खबरों के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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MP में सब इंस्पेक्टर और सूबेदार भर्ती के लिए आज आखिरी मौका, रात 12 बजे तक भरें फॉर्म

मध्यप्रदेश पुलिस में नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के लिए आज बड़ा दिन है। सब इंस्पेक्टर (SI) और सूबेदार भर्ती के लिए आवेदन भरने का आज आखिरी दिन (10 नवंबर) है। उम्मीदवार रात 12 बजे तक ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। राज्य में कुल 500 पदों पर भर्ती हो रही है। इसके लिए मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) अगले साल 9 जनवरी 2026 से भोपाल, इंदौर सहित 12 शहरों में ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करेगा। 📝 आवेदन और संशोधन की अंतिम तिथि 💰 आवेदन शुल्क (यह शुल्क केवल मध्यप्रदेश के मूल निवासियों के लिए लागू है।) 👮 वेतनमान और योग्यता 📍 परीक्षा केंद्र भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सागर, उज्जैन, रतलाम, खंडवा, सतना, छिंदवाड़ा और बालाघाट सहित 12 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा होगी। यह भर्ती युवाओं के लिए सरकारी नौकरी पाने का सुनहरा अवसर है। इच्छुक उम्मीदवार आज ही अपना आवेदन मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर पूरा करें। 🔸 For more such updates, visit www.deshharpal.com
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Supreme Court

महिला आरक्षण कानून में Delay पर Supreme Court नाराज़ Center को भेजा Notice

देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए लाया गया Women Reservation Bill 2023 (महिला आरक्षण कानून) एक बार फिर सुर्खियों में है। Supreme Court ने इस कानून को लागू करने में हो रही देरी पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और पूछा है कि आखिर महिलाओं को 33% आरक्षण का लाभ कब मिलेगा? क्या है मामला? साल 2023 में संसद ने संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम पारित किया था, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया था।लेकिन इस कानून की एक शर्त यह थी कि इसे तभी लागू किया जाएगा जब नई जनगणना (Census) और परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इस देरी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसमें कहा गया कि महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने में ऐसी शर्त लगाना मनमाना और असंवैधानिक है। Supreme Court की सख्ती सोमवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला महिलाओं के समान अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि आखिर कब तक इंतजार करना होगा?अदालत ने सरकार को चार हफ्तों में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और पूछा कि जनगणना व परिसीमन की प्रक्रिया कब पूरी होगी। क्यों हो रही है देरी? सरकार की ओर से पहले कहा गया था कि Women Reservation Law तभी लागू होगा जब नई जनगणना और परिसीमन पूरी होगी। लेकिन अभी तक जनगणना की तारीख तय नहीं हुई है।इस वजह से कानून के लागू होने की प्रक्रिया अधर में लटकी है, जबकि महिलाओं के अधिकारों की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों की राय संविधान विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का नोटिस सरकार पर दबाव बढ़ा सकता है। अगर अदालत सक्रिय हुई, तो आने वाले वर्षों में Women Reservation Act के लागू होने की राह आसान हो सकती है।विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जनगणना और परिसीमन को बहाना बनाकर महिला आरक्षण में देरी करना न्यायसंगत नहीं है। आगे क्या? अब अगली सुनवाई में केंद्र सरकार को अदालत को बताना होगा कि यह कानून कब लागू किया जा सकता है। अगर कोर्ट सख्त रुख अपनाता है, तो सरकार को Women Reservation Bill के अमल के लिए टाइमलाइन तय करनी पड़ सकती है। महिला आरक्षण कानून को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप देश में महिलाओं की राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में अहम साबित हो सकता है। अगर यह कानून जल्द लागू होता है, तो लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से बढ़ेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बिलासपुर में हाईकोर्ट वकील ने अरपा पुल से लगाई छलांग, प्रेमिका की सगाई से था दुखी

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील राहुल अग्रवाल (30) ने अरपा नदी पुल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि राहुल अपनी प्रेमिका से शादी करना चाहता था, लेकिन उसकी सगाई किसी और से हो गई, जिससे वह मानसिक तनाव में था। यह घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र की है। गुरुवार रात से लापता, शुक्रवार को नदी में मिला शव राहुल अग्रवाल भाटापारा का रहने वाला था और पिछले कई सालों से बिलासपुर की ग्रीन गार्डन कॉलोनी, मंगला में रह रहा था। गुरुवार को वह रोज़ की तरह हाईकोर्ट गया था। शाम को उसने अपने दोस्त मुकेश राठिया से मुलाकात की और दोनों ने सिरगिट्टी और ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में साथ समय बिताया। देर रात 1.30 बजे राहुल ने घर जाने की बात कही और बाइक से निकल गया, लेकिन घर नहीं पहुंचा। सुबह जब राहुल का फोन बंद मिला तो परिजनों को शक हुआ। उन्होंने सिविल लाइन थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने तलाश शुरू की और रामसेतु ब्रिज पर राहुल की बाइक लावारिस हालत में खड़ी मिली। इसके बाद उसके नदी में कूदने की आशंका जताई गई। अरपा नदी से बरामद हुआ शव शुक्रवार की रात करीब 10.30 बजे कुछ युवकों ने अरपा नदी में एक शव देखा और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची सिटी कोतवाली पुलिस और SDRF टीम ने रात करीब 1 बजे शव को बाहर निकाला। दोस्तों ने टी-शर्ट देखकर शव की पहचान राहुल अग्रवाल के रूप में की। प्रेमिका की सगाई से टूट गया था राहुल पुलिस जांच में पता चला कि राहुल का एक लड़की से प्रेम संबंध था और वह उससे शादी करना चाहता था। लेकिन लड़की के परिवार ने उसकी सगाई किसी और जगह तय कर दी, जिससे राहुल गहरे तनाव में था।परिवार और दोस्तों का कहना है कि यही कारण हो सकता है कि उसने यह कदम उठाया। पढ़ाई और करियर राहुल ने गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई (2013–2018) की थी। कुछ साल तक वह एक महिला वकील के साथ एसोसिएट के रूप में काम करता रहा, बाद में उसने स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस शुरू की थी। पुलिस जांच जारी सिटी कोतवाली टीआई देवेश सिंह राठौर ने बताया कि शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का लग रहा है। शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया है, और रिपोर्ट आने के बाद ही सटीक कारणों का पता चल सकेगा। 🔸 For more such news and updates, visit www.deshharpal.com
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गुना बायपास पर भीषण सड़क हादसा: उज्जैन जा रहे परिवार की कार को ट्रक ने मारी टक्कर, 2 की मौत, 4 गंभीर घायल

शनिवार सुबह गुना बायपास पर RTO कार्यालय के सामने एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार ट्रक ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के एक परिवार की कार को जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। परिवार उज्जैन महाकालेश्वर दर्शन के लिए जा रहा था। उज्जैन दर्शन के रास्ते हुआ हादसा जानकारी के मुताबिक, शिवलाल शुक्ला अपने परिवार के साथ कार (क्रमांक UP78-EF-9805) से उज्जैन जा रहे थे। सुबह करीब 11 बजे वे गुना बायपास पहुंचे, तभी सामने से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयंकर थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और मौके पर ही हाहाकार मच गया। सड़क पर एक ही लेन खुली थी, आमने-सामने की भिड़ंत बायपास पर फिलहाल सड़क का पेंचवर्क चल रहा है, जिसके कारण केवल एक लेन खुली थी। ट्रक और कार दोनों उसी रास्ते पर चल रहे थे। बताया जा रहा है कि ट्रक ने ओवरटेक करने की कोशिश की, जिससे आमने-सामने टक्कर हो गई। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर लिया है और आगे की जांच शुरू कर दी है। दो की मौत, चार घायल — दो को ग्वालियर रेफर हादसे में शिवलाल शुक्ला और कुंज शुक्ला (10) की मौके पर ही मौत हो गई।घायलों में स्वाति शुक्ला (25), दीपा शुक्ला, रीता शुक्ला और डेढ़ साल की मान्या शुक्ला शामिल हैं।पुलिस ने सभी घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां से दो की हालत नाजुक होने पर ग्वालियर रेफर किया गया है। बाकी दो का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। कैंट थाना प्रभारी टीआई अनूप भार्गव ने बताया कि हादसे की जांच जारी है और मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए हैं। पुलिस ट्रक चालक और दुर्घटना के सही कारणों की पड़ताल कर रही है। 🔸 For more such news and updates, visit www.deshharpal.com
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सीहोर में मेडिकल दुकानों पर औचक जांच: 6 दुकानों से दवाओं के सैंपल लैब भेजे गए

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफडीए) ने जिले में मेडिकल दुकानों का औचक निरीक्षण किया। यह कार्रवाई दवाओं की बिक्री में पारदर्शिता बनाए रखने और अनियमितताओं को रोकने के उद्देश्य से की गई। जांच टीम ने बकतरा और बुधनी क्षेत्र की कई दुकानों का दौरा किया। रिकॉर्ड और साफ-सफाई की जांच निरीक्षण के दौरान टीम ने दुकानों की साफ-सफाई, दवाओं के खरीद-बिक्री रिकॉर्ड, एक्सपायर्ड दवाओं के रख-रखाव और प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री की स्थिति की बारीकी से जांच की। 6 मेडिकल दुकानों से लिए गए सैंपल टीम ने कुल 6 मेडिकल दुकानों से दवाओं के सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा है। जिन दुकानों का निरीक्षण किया गया उनमें शामिल हैं –सतेंद्र मेडिकल, जीवनरक्षा मेडिकल, लक्ष्मी मेडिकल, बालाजी मेडिकल, आरके मेडिकल और पीयूष मेडिकल। प्रशासन ने बताया कि अगर जांच रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी मिलती है, तो संबंधित दुकानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 🔸 For more such updates, visit www.deshharpal.com
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X पर अब लाइक बटन दबाकर भेज सकेंगे $1 की टिप, मस्क ने नए फीचर का किया ऐलान

नई दिल्ली। इलॉन मस्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को फाइनेंशियल सर्विसेज से जोड़ने की दिशा में एक और कदम उठा रहे हैं। मस्क ने ऐलान किया है कि X पर यूजर्स लाइक बटन को लॉन्ग-प्रेस करके किसी यूजर या क्रिएटर को 1 डॉलर की टिप भेज सकेंगे। यह पेमेंट कंपनी के फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म X मनी के जरिए किया जाएगा। मस्क ने X पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि X मनी के माध्यम से किसी को भी 1 डॉलर भेजने के लिए लाइक बटन पर लॉन्ग-प्रेस करने का विकल्प जोड़ा जा रहा है। कैसे काम करेगा नया टिपिंग फीचर? इस फीचर के जरिए यूजर्स किसी पोस्ट के लेखक या क्रिएटर को सीधे आर्थिक मदद दे सकेंगे। इसके लिए लाइक बटन को कुछ देर तक दबाना होगा। इसके बाद X मनी के पेमेंट सिस्टम के जरिए 1 डॉलर ट्रांसफर करने का विकल्प मिलेगा। इस व्यवस्था का मकसद क्रिएटर्स को सपोर्ट करने की प्रक्रिया आसान बनाना है, ताकि यूजर्स को अलग से पेमेंट ऐप या लंबी प्रक्रिया का सहारा न लेना पड़े। हालांकि, X ने अभी तक इस फीचर के लॉन्च की तारीख और इसकी उपलब्धता से जुड़ी शर्तों की जानकारी नहीं दी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि यूजर्स 1 डॉलर की तय रकम को बदल सकेंगे या भविष्य में अलग-अलग रकम भेजने के विकल्प भी मिलेंगे। क्या है X मनी और इसमें कौन-सी सुविधाएं हैं? X मनी, X का फाइनेंशियल सर्विस प्लेटफॉर्म है। इसके जरिए यूजर्स के बीच पैसे ट्रांसफर करने, डिपॉजिट अकाउंट और X-ब्रांडेड वीजा डेबिट कार्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसका पेमेंट और बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर क्रॉस रिवर बैंक के साथ जुड़ा है। X मनी खुद बैंक नहीं है, बल्कि बैंकिंग पार्टनर के माध्यम से वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने वाला प्लेटफॉर्म है। इससे जुड़ी सुविधाओं में पात्र डिपॉजिट पर ब्याज, खरीदारी पर कैशबैक और डेबिट कार्ड को Apple Pay से कनेक्ट करने जैसे विकल्प शामिल हैं। इन सुविधाओं की उपलब्धता यूजर की पात्रता और लागू शर्तों पर निर्भर करती है। X को ‘एवरीथिंग ऐप’ बनाना चाहते हैं मस्क इलॉन मस्क लंबे समय से X को सिर्फ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखना चाहते। उनका लक्ष्य इसे ‘एवरीथिंग ऐप’ यानी सुपर ऐप के रूप में विकसित करना है, जहां सोशल मीडिया, मैसेजिंग और वित्तीय सेवाएं एक ही जगह मिल सकें। X मनी के जरिए टिप भेजने का फीचर इसी रणनीति का हिस्सा है। अगर यह सुविधा व्यापक स्तर पर शुरू होती है, तो क्रिएटर्स को अपने कंटेंट के जरिए सीधे आर्थिक सहयोग पाने का एक और माध्यम मिल सकता है। भारत में कब शुरू होगा X मनी? X ने भारत में X मनी या नए टिपिंग फीचर को लॉन्च करने की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है। फिलहाल भारतीय यूजर्स के लिए इसकी उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। भारत में पहले से ही UPI आधारित डिजिटल पेमेंट का बड़ा नेटवर्क मौजूद है। ऐसे में X मनी को भारत में वित्तीय सेवाएं शुरू करने के लिए देश के लागू बैंकिंग, भुगतान और नियामकीय नियमों का पालन करना होगा। क्या होता है ‘एवरीथिंग ऐप’? एवरीथिंग ऐप या सुपर ऐप ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म होता है, जिसमें एक ही ऐप के जरिए कई तरह की सेवाएं इस्तेमाल की जा सकती हैं। इनमें सोशल मीडिया, मैसेजिंग, डिजिटल पेमेंट, शॉपिंग और बैंकिंग जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। चीन का WeChat इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां मैसेजिंग के साथ भुगतान और कई अन्य डिजिटल सेवाएं भी मिलती हैं। मस्क X को भी इसी तरह का बहुउद्देशीय प्लेटफॉर्म बनाना चाहते हैं।

पूर्व जज संजय किशन कौल का पूर्व CJI चंद्रचूड़ पर निशाना, बोले- जजों की नियुक्ति में सरकार के प्रति ज्यादा झुके थे

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज संजय किशन कौल ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ के रवैए पर सवाल उठाए हैं। अपनी आगामी किताब ‘विदाउट फियर ऑर फेवर’ में कौल ने आरोप लगाया है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले में चंद्रचूड़ सरकार के प्रति जरूरत से ज्यादा झुके हुए थे। कौल के मुताबिक, नियुक्तियों से पहले सरकार की राय लेने की प्रवृत्ति न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए चिंता का विषय है। कौल ने किताब में कॉलेजियम की उस बैठक का जिक्र किया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की छह रिक्तियों को भरने के लिए नामों पर विचार किया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार से निपटने के तरीके को लेकर मतभेदों के कारण चंद्रचूड़ के साथ उनके संबंधों में तनाव आया। कॉलेजियम बैठक में छठे नाम को लेकर मतभेद कौल के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के छह जजों की नियुक्ति पर विचार के दौरान पांच नामों पर पहले सहमति बन चुकी थी। बैठक से ठीक पहले तत्कालीन CJI चंद्रचूड़ ने छठे उम्मीदवार का नाम उनके सामने रखा। कौल ने बताया कि चंद्रचूड़ उन्हें एक अलग कमरे में ले गए और पूछा कि क्या उन्हें सरकार का रुख जानने के लिए फोन करना चाहिए। कौल ने द वायर से बातचीत में कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह सरकार को खुश करने का मामला था, लेकिन नामों पर पहले उनके साथ चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि छठे उम्मीदवार के नाम पर उनकी सहमति नहीं थी और उन्हें लगा कि कॉलेजियम के अन्य सदस्य भी उस नाम को स्वीकार नहीं करेंगे। कौल के अनुसार, बैठक में वही हुआ और छठे नाम पर सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने आशंका जताई कि शायद चंद्रचूड़ ने इस नाम सहित अन्य नामों को लेकर सरकार से पहले ही किसी तरह की मंजूरी ले ली थी। नियुक्तियों से पहले सरकार की राय लेने पर आपत्ति जस्टिस कौल ने कहा कि कॉलेजियम की औपचारिक चर्चा से पहले सरकार के साथ नामों पर विचार-विमर्श करने की परंपरा चिंता पैदा करती है। उनके मुताबिक, सरकार से सलाह लेना और पहले से मंजूरी लेना दो अलग-अलग बातें हैं। कौल का मानना है कि कॉलेजियम को न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए सरकार के दबाव का विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर नियुक्तियों से पहले सरकार की सहमति लेने की प्रक्रिया परंपरा बन जाती है, तो भविष्य में आने वाले मुख्य न्यायाधीशों के लिए इससे अलग चलना मुश्किल हो सकता है। NJAC पर भी रखी अपनी राय किताब में कौल ने 2015 में केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गए नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट्स कमीशन (NJAC) का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि उस समय नियुक्ति व्यवस्था को लेकर आमने-सामने बैठकर चर्चा की जा सकती थी। कौल के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में सुधार और उसके तौर-तरीकों में बदलाव की गुंजाइश थी। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुधार के नाम पर नियुक्तियों से पहले सरकार की मंजूरी लेने की परंपरा को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए। PMLA मामले को दूसरी बेंच में भेजने पर भी सवाल कौल ने अपनी बेंच के एक फैसले से जुड़े मामले को दूसरी बेंच में भेजे जाने पर भी आपत्ति जताई। यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) से जुड़े फैसले के कुछ हिस्सों पर दोबारा विचार करने से संबंधित था। कौल का कहना था कि किसी मामले को इस आशंका के आधार पर एक बेंच से दूसरी बेंच में नहीं भेजा जाना चाहिए कि फैसला किस दिशा में जा सकता है। कांग्रेस ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया कौल की किताब अभी बाजार में नहीं आई है, लेकिन उनके बयानों के आधार पर कांग्रेस ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि कौल ने न्यायाधीशों की नियुक्ति में सरकार के दखल से जुड़ी चिंताएं सामने रखी हैं। रमेश के मुताबिक, इनमें कॉलेजियम की बैठकों से पहले सरकार की मंजूरी लेने की कोशिश और अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले एक न्यायाधीश की जाति को लेकर सरकार की ओर से पूछताछ का मुद्दा भी शामिल है। उन्होंने कहा कि कौल ने इन विषयों को नपे-तुले शब्दों में दर्ज किया है। कांग्रेस ने इसे न्यायपालिका को सत्ता में बैठे लोगों के दबाव से मुक्त रखने की जरूरत से जोड़कर देखा है। कौल बोले- भविष्य के CJI के लिए परंपरा बदलना मुश्किल होगा कौल ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल सीमित होता है, लेकिन उनके फैसलों से बनी परंपराएं आगे भी जारी रह सकती हैं। उनके मुताबिक, यदि नियुक्तियों से पहले सरकार से चर्चा करने की प्रक्रिया सामान्य बन जाती है, तो बाद में आने वाले मुख्य न्यायाधीशों के लिए उससे अलग रास्ता अपनाना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से उन्होंने चंद्रचूड़ को इस तरह की प्रक्रिया से बचने की सलाह देने की कोशिश की।

भोपाल में 1.50 लाख की MD ड्रग्स के साथ दो युवक गिरफ्तार, बाइक-मोबाइल समेत 3 लाख का सामान जब्त

भोपाल। राजधानी भोपाल में परवलिया सड़क थाना पुलिस ने बायपास रोड पर घेराबंदी कर दो युवकों को MD ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 12.63 ग्राम MD ड्रग्स बरामद हुई है, जिसकी कीमत करीब 1.50 लाख रुपए बताई गई है। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल बाइक और मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 3 लाख रुपए आंकी गई है। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने की घेराबंदी पुलिस के मुताबिक, 24 अक्टूबर की रात मुखबिर से सूचना मिली थी कि दो युवक बाइक से MD ड्रग्स लेकर थाना क्षेत्र से गुजरने वाले हैं। सूचना मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया। थाना प्रभारी के नेतृत्व में पांच पुलिस टीमें गठित कर बायपास रोड पर घेराबंदी की गई। रात करीब 1:40 बजे पुलिस को बाइक पर सवार दो संदिग्ध युवक दिखाई दिए। पुलिस को देखकर दोनों ने बाइक मोड़कर भागने की कोशिश की, लेकिन घेराबंदी के चलते उन्हें पकड़ लिया गया। तरुण सराठे और अखिलेश मेहरा गिरफ्तार पुलिस के अनुसार, तलाशी के दौरान तरुण सराठे (24), निवासी छावनी पठार, बिलखिरिया के पास से 12.63 ग्राम MD ड्रग्स बरामद हुई। बाइक पर उसके साथ मौजूद अखिलेश मेहरा (24), निवासी छावनी पठार को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से ड्रग्स के अलावा तस्करी में इस्तेमाल बाइक और मोबाइल फोन जब्त किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 3 लाख रुपए बताई गई है। दोनों आरोपियों पर पहले से दर्ज हैं मामले पुलिस के मुताबिक, तरुण सराठे के खिलाफ बिलखिरिया थाने में मारपीट और आर्म्स एक्ट के दो मामले दर्ज हैं। वहीं, अखिलेश मेहरा के खिलाफ मारपीट के चार प्रकरण पहले से दर्ज हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क की जांच जारी गिरफ्तारी के बाद पुलिस दोनों युवकों से पूछताछ कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि MD ड्रग्स कहां से लाई गई थी और इसे किसे सप्लाई किया जाना था। पुलिस ड्रग्स की खरीद-फरोख्त से जुड़े नेटवर्क की जानकारी भी जुटा रही है।

हरमनप्रीत और दीप्ति के शतक, भारत ने जिम्बाब्वे को दिया 329 रन का टारगेट

वडोदरा। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे वनडे मुकाबले में शानदार बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 6 विकेट पर 328 रन बनाए। वडोदरा के कोटांबी स्टेडियम में रविवार को टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की ओर से कप्तान हरमनप्रीत कौर और दीप्ति शर्मा ने शतक लगाए। दोनों के बीच छठे विकेट के लिए 153 रन की अहम साझेदारी हुई। भारत की शुरुआत खराब, 19 रन पर गिरे 2 विकेट भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। स्मृति मंधाना पारी की चौथी गेंद पर बिना खाता खोले आउट हो गईं। इसके बाद शेफाली वर्मा भी 8 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। तीसरे ओवर में भारत का स्कोर 19 रन पर 2 विकेट हो गया। मुश्किल समय में प्रतीका रावल और हरमनप्रीत कौर ने पारी को संभाला। दोनों ने संभलकर बल्लेबाजी करते हुए टीम को शुरुआती झटकों से उबारा। प्रतीका रावल ने 67 गेंदों पर 61 रन बनाए। उनकी पारी में 4 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। वह 22.2 ओवर में 143 रन के स्कोर पर आउट हुईं। हरमनप्रीत कौर ने 121 गेंदों पर बनाए 126 रन कप्तान हरमनप्रीत कौर ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 121 गेंदों पर 126 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी में 15 चौके लगाए। यह उनके वनडे करियर का आठवां शतक रहा। हालांकि, पारी के दौरान उनके तीन कैच भी छूटे। हरमनप्रीत का विकेट 46.2 ओवर में गिरा। उस समय भारतीय टीम 301 रन बना चुकी थी। पारी के बाद उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद धूप में खेलना आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि जब दूसरे छोर पर बल्लेबाज अच्छी लय में रन बना रही हो, तो स्ट्राइक बदलते रहना और साझेदारी को आगे बढ़ाना जरूरी होता है। दीप्ति शर्मा ने 86 गेंदों में जड़ा शतक छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरीं दीप्ति शर्मा ने 86 गेंदों पर 106 रन की पारी खेली। उन्होंने 15 चौके लगाए। दीप्ति ने 37 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और पारी के आखिरी ओवर में चौका लगाकर वनडे करियर का दूसरा शतक पूरा किया। दीप्ति ने हरमनप्रीत के साथ मिलकर भारतीय पारी को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 137 गेंदों पर 153 रन की साझेदारी की। इस दौरान दोनों ने विकेट बचाने के साथ रन गति भी बनाए रखी। दीप्ति शर्मा ने बनाए तीन रिकॉर्ड आखिरी 10 ओवर में बने 72 रन भारतीय टीम ने आखिरी 10 ओवर में 72 रन जोड़े और इस दौरान 2 विकेट गंवाए। हरमनप्रीत के आउट होने के बाद ऋचा घोष भी ज्यादा देर नहीं टिक सकीं। वह 9 गेंदों पर 7 रन बनाकर 47.6 ओवर में आउट हुईं। भारत ने निर्धारित 50 ओवर में 6 विकेट पर 328 रन बनाकर जिम्बाब्वे के सामने 329 रन का लक्ष्य रखा। दोनों टीमों की प्लेइंग-11 भारत: प्रतीका रावल, स्मृति मंधाना (कप्तान), शेफाली वर्मा, हरमनप्रीत कौर, तेजल हसब्निस, दीप्ति शर्मा, ऋचा घोष (विकेटकीपर), श्री चरणी, जिंतिमणि कलिता, सयाली सतघरे और वैष्णवी शर्मा। जिम्बाब्वे: मोडेस्टर मुपाचिकवा (विकेटकीपर), लोरिन फिरी, चिपो मुगेरी-तिरिपानो, बिलव्ड बिजा, जोसेफिन नकोमो (कप्तान), न्याशा ग्वांजुरा, चिएद्जा धुरुरु, मिशेल मावुंगा, नोमवेलो सिबांडा, तेंदाई मकुशा और ओलिंडर चारे।
BSF

BSF Action: कच्छ के Sir Creek में पकड़े गए 4 Pakistani Fishermen

गुजरात के कच्छ से भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को सर क्रीक के संवेदनशील इलाके में चार पाकिस्तानी मछुआरों को पकड़ लिया। इस दौरान उनकी फाइबर से बनी मछली पकड़ने वाली नाव भी जब्त की गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, चारों मछुआरे कथित तौर पर केकड़े पकड़ने के लिए भारतीय जलक्षेत्र में दाखिल हुए थे। यह कार्रवाई खुफिया जानकारी मिलने के बाद की गई। घटना के बाद एक बार फिर कच्छ के समुद्री सीमा क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, मछुआरों के भारतीय जलक्षेत्र में पहुंचने की परिस्थितियों और उनकी गतिविधियों की पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। BSF ने कैसे पकड़े चार पाकिस्तानी मछुआरे? India Today की 25 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, BSF को सूचना मिली थी कि कुछ पाकिस्तानी मछुआरे भारतीय जलक्षेत्र में मौजूद हैं। इसके बाद जवानों ने सर क्रीक इलाके में कार्रवाई करते हुए चारों को पकड़ लिया। पकड़े गए मछुआरों की पहचान कादिर थैमोर, मुहम्मद मूसा, अजगर थैमोर और अहसान जाट के रूप में बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, चारों पाकिस्तान के सिंध प्रांत के निवासी हैं। कार्रवाई के दौरान उनकी फाइबर की नाव भी जब्त की गई। फिलहाल, पूछताछ और आगे की कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। आखिर क्या है मछुआरों का अपराध? इस मामले में सबसे अहम सवाल है कि चारों मछुआरे भारतीय जलक्षेत्र में क्यों पहुंचे थे। शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया है कि वे केकड़े पकड़ने के लिए सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में दाखिल हुए थे। भारत के जलक्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करना या वहां अवैध रूप से मछली पकड़ना संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई का कारण बन सकता है। हालांकि, इस मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और उपलब्ध सबूतों के आधार पर तय होगी। अभी तक सामने आई रिपोर्ट में चारों मछुआरों के जासूसी या किसी अन्य गंभीर गतिविधि में शामिल होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मामले को लेकर किसी अपुष्ट दावे को तथ्य मानना सही नहीं होगा। कच्छ का Sir Creek इलाका क्यों है संवेदनशील? गुजरात का कच्छ क्षेत्र भारत और पाकिस्तान की समुद्री सीमा के पास स्थित है। सर क्रीक एक ज्वारीय जलमार्ग है, जो अपनी भौगोलिक स्थिति और दलदली इलाके के कारण सीमा पर निगरानी के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इस क्षेत्र में मछली पकड़ने के लिए नावों की आवाजाही होती है। समुद्री सीमा के आसपास होने के कारण किसी दूसरे देश की नाव का भारतीय जलक्षेत्र में प्रवेश करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए जांच का विषय बन जाता है। BSF यहां नियमित गश्त और निगरानी करती है। संदिग्ध नाव या गतिविधि दिखाई देने पर जवान संबंधित लोगों से पूछताछ करते हैं और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई की जाती है। Kutch Border पर हाल की घटनाओं से बढ़ी निगरानी कच्छ के समुद्री सीमा क्षेत्र में अक्टूबर 2026 के दौरान पाकिस्तानी नागरिकों और नावों से जुड़े दूसरे मामले भी रिपोर्ट किए गए हैं। 19 अक्टूबर को कोटेश्वर के पास क्रीक क्षेत्र में गश्त के दौरान BSF ने एक पाकिस्तानी नागरिक को नाव के साथ पकड़ा था। शुरुआती जांच में नाव से मछली पकड़ने के उपकरण मिलने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद इलाके में तलाशी अभियान चलाए जाने की खबर भी सामने आई। 20 अक्टूबर को कच्छ के लखपत और आसपास के क्रीक क्षेत्र से जुड़ी अन्य घटनाओं की भी रिपोर्ट आई थी। इन मामलों में नावों, पाकिस्तानी नागरिकों और तलाशी अभियान का जिक्र किया गया था। हालांकि, ये अलग-अलग घटनाएं हैं और इन्हें 25 अक्टूबर को पकड़े गए चार मछुआरों के मामले से अलग समझना जरूरी है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बीच समुद्री सीमा पर निगरानी का महत्व बढ़ जाता है। फिर भी, केवल इन घटनाओं के आधार पर किसी बड़ी साजिश का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। क्या पाकिस्तानी नाव से कोई संदिग्ध सामान मिला? 25 अक्टूबर की घटना से जुड़ी शुरुआती रिपोर्ट में फाइबर की नाव जब्त किए जाने की पुष्टि हुई है। हालांकि, नाव से किसी हथियार, नशीले पदार्थ या अन्य संदिग्ध सामान की बरामदगी के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए फिलहाल ऐसी किसी बरामदगी का दावा नहीं किया जा सकता। आगे की जांच में नाव, मछुआरों की गतिविधियों और भारतीय जलक्षेत्र में उनकी मौजूदगी से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा सकती है। अब आगे क्या होगा? चारों मछुआरों को पकड़े जाने के बाद अब जांच और कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण महत्वपूर्ण होंगे। संबंधित अधिकारी उनकी पहचान, भारतीय जलक्षेत्र में प्रवेश की परिस्थितियों और घटना से जुड़े दूसरे पहलुओं की जांच कर सकते हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, BSF ने गुजरात के कच्छ स्थित सर क्रीक इलाके में चार पाकिस्तानी मछुआरों को पकड़ा है और उनकी नाव जब्त की है। वे भारतीय जलक्षेत्र में किन परिस्थितियों में पहुंचे और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी, इसकी पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित इस संवेदनशील क्षेत्र में BSF की निगरानी सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है। मामले में आधिकारिक अपडेट आने पर आगे की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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