कटनी जिले की बरही तहसील के तीन गांवों — करौंदी खुर्द, कन्नौर और बिचपुरा — के लोगों के लिए राहत भरी खबर आई है। ग्रामीणों की आवाजाही रोकने वाले मामले में अब हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
दरअसल, इन गांवों को जोड़ने वाली एकमात्र सड़क को कटनी कलेक्टर ने एक ठेकेदार तिलकराज ग्रोवर को लीज पर दे दी थी। ठेकेदार ने उस रास्ते पर गिट्टी डंप करना शुरू कर दिया, जिससे ग्रामीणों का आना-जाना पूरी तरह से बंद हो गया।
कलेक्टर से कई बार गुहार लगाने के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

⚖️ कोर्ट ने जताई नाराजगी
मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने पहले प्रशासन को सड़क खोलने के आदेश दिए, लेकिन आदेश के बावजूद रास्ता नहीं खोला गया।
इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार, कटनी कलेक्टर और ठेकेदार तिलकराज ग्रोवर को नोटिस जारी किया और 10 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जवाब देने के निर्देश दिए।
कोर्ट ने कहा — “अगर कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं हुआ है, तो यह गंभीर अवमानना का मामला है।”
🛣️ ग्रामीणों का एकमात्र रास्ता
यह सड़क वर्षों से ग्रामीणों के लिए जीवन रेखा रही है। लोग इसी रास्ते से तहसील और शहर तक आते-जाते थे।
लेकिन 1 जुलाई 2025 को कलेक्टर ने खनिज विभाग की रिपोर्ट पर ग्राम कन्नौर स्थित खसरा नंबर 861 की करीब 65 हेक्टेयर भूमि को ठेकेदार को लीज पर दे दी।
महज 300 रुपये वार्षिक किराये में यह जमीन खनन डंपिंग साइट के रूप में दे दी गई। जबकि राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि “सार्वजनिक सड़क” के रूप में दर्ज है।
🧾 ग्रामीणों की याचिका बनी आधार
कटनी निवासी संदीप जायसवाल ने 16 सितंबर को हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की।
27 सितंबर और 13 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रशासन को सड़क खोलने का आदेश दिया था।
लेकिन जब आदेश का पालन नहीं हुआ, तो 4 नवंबर को अवमानना याचिका दायर की गई।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अर्पण जे. पवार, अक्षत अरजरिया और चिरंजीवी शर्मा ने दलील दी कि प्रशासन ने “राजनीतिक दबाव” में आकर यह निर्णय लिया।
⚠️ कोर्ट की सख्त चेतावनी
कोर्ट ने कहा कि जनता की सुविधा के लिए बनी सड़क को किसी निजी व्यक्ति या कंपनी के हित में नहीं दिया जा सकता।
यदि अधिकारियों का जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो कोर्ट कड़ी कार्रवाई करेगी।
फिलहाल, अदालत ने सड़क पर डंपिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी है, जिससे ग्रामीणों को अस्थायी राहत मिली है।
📍 ग्रामीणों की एकजुटता और न्याय के प्रति भरोसे ने एक बार फिर दिखा दिया कि जनता की आवाज दबाई नहीं जा सकती।
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