कैंसर (Cancer) जैसी गंभीर बीमारी का इलाज सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी परिवारों की परीक्षा लेता है। लंबे इलाज, महंगी दवाओं और बार-बार अस्पताल जाने के खर्च के बीच सरकार का एक नया फैसला मरीजों के लिए राहत लेकर आया है। Cancer की 543 ब्रांडेड दवाओं की कीमतों में बदलाव किया गया है। इनमें एक ऐसा इंजेक्शन भी शामिल है, जिसकी कीमत करीब ₹80 हजार से घटकर ₹7,150.33 रह गई है। नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) की ओर से जारी संशोधित कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। हालांकि, सभी दवाओं की कीमतों में एक जैसी कटौती नहीं हुई है। मरीजों को यह देखना होगा कि उनकी दवा नई सूची में शामिल है या नहीं। Cancer Injection Price: ₹80 हजार का इंजेक्शन अब ₹7,150 में इस फैसले में सबसे ज्यादा चर्चा Samtepa इंजेक्शन की हो रही है। 100 mg वाले इस इंजेक्शन की एक शीशी की कीमत पहले ₹80,071.86 थी, जिसे घटाकर ₹7,150.33 कर दिया गया है। इस तरह इसकी कीमत में लगभग 91% की कमी हुई है। Samtepa में Thiotepa दवा होती है। इसका इस्तेमाल कुछ विशेष प्रकार के कैंसर के इलाज और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट से जुड़ी प्रक्रियाओं में किया जाता है। इस तरह की बड़ी कीमत कटौती से संबंधित उपचार करा रहे मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है। कैंसर की दवाओं की नई कीमतें क्या हैं? 543 ब्रांडेड दवाओं की संशोधित सूची में कई इंजेक्शन, टैबलेट और कैप्सूल शामिल हैं। कुछ प्रमुख उदाहरण नीचे दिए गए हैं। दवा का नाम पुरानी कीमत नई कीमत Samtepa 100 mg इंजेक्शन ₹80,071.86 ₹7,150.33 Palbopro 125 mg, 21 कैप्सूल ₹40,421.33 ₹2,720 Bevacizab 100 mg/4 ml इंजेक्शन ₹21,767.70 ₹5,930.13 Fulbreca 5 ml इंजेक्शन ₹26,072.16 ₹5,491 Azacytin 100 mg इंजेक्शन ₹6,337 ₹1,495.04 Fludanox इंजेक्शन ₹14,235 ₹2,432 Anarzole 1 mg, 10 टैबलेट ₹695.76 ₹73 Enuta 40 mg, 28 कैप्सूल ₹6,578.20 ₹2,232 ध्यान रखें कि कीमतें संबंधित दवा की निर्धारित स्ट्रेंथ और पैक साइज के अनुसार हैं। दवा खरीदने से पहले पैक पर लिखी MRP और नई दर की पुष्टि जरूर करें। NPPA ने कैंसर की दवाओं के दाम क्यों घटाए? दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 17 अक्टूबर 2026 को 137 गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन सीमित करने का फैसला किया था। इस व्यवस्था के तहत संबंधित दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30% तक सीमित किया गया। आसान शब्दों में समझें तो दवा बनाने वाली कंपनी से लेकर मरीज तक दवा पहुंचने के दौरान वितरण और बिक्री से जुड़े मार्जिन पर नियंत्रण रखने की कोशिश की गई है। इसका उद्देश्य दवाओं की कीमतों में अनुचित बढ़ोतरी रोकना और मरीजों को कम कीमत पर जरूरी दवाएं उपलब्ध कराना है। इस फैसले के बाद संबंधित दवाओं की कीमतों में कटौती की गई है। हालांकि, हर दवा की कीमत में बदलाव उसकी मौजूदा कीमत और लागू नियमों पर निर्भर करता है। क्या सभी कैंसर की दवाएं सस्ती हो गई हैं? इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली हर दवा की कीमत कम हो गई है। कुछ दवाओं की कीमतों में बड़ी कटौती हुई है, जबकि कुछ दवाओं के दाम में मामूली बदलाव हुआ है या कीमत पहले जैसी बनी हुई है। उदाहरण के लिए, मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ दवाओं की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ। वहीं, Keytruda जैसी महंगी दवा की 100 mg शीशी की कीमत करीब ₹2.16 लाख बताई गई है। इसलिए मरीजों और उनके परिजनों को अपनी दवा का नाम, ब्रांड, स्ट्रेंथ और पैक साइज देखकर ही नई कीमत की जानकारी लेनी चाहिए। 9 नवंबर से लागू होंगी नई कीमतें NPPA की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, संशोधित कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। दवा कंपनियों को नई कीमतों की जानकारी वितरकों और दवा विक्रेताओं तक पहुंचानी होगी। मरीज भी दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत की जानकारी आधिकारिक माध्यमों से जांच सकते हैं। इसके लिए NPPA की वेबसाइट और सरकार के Pharma Sahi Daam ऐप की मदद ली जा सकती है। कैंसर के इलाज का खर्च कितना कम होगा? कैंसर के इलाज में दवाओं के साथ जांच, अस्पताल में भर्ती, डॉक्टर की फीस और दूसरी चिकित्सा प्रक्रियाओं पर भी खर्च होता है। इसलिए किसी एक दवा की कीमत कम होने का मतलब यह नहीं है कि मरीज का पूरा इलाज भी उतने ही प्रतिशत सस्ता हो जाएगा। फिर भी, जिन मरीजों की दवाओं की कीमतों में बड़ी कटौती हुई है, उनके लिए यह बदलाव राहत देने वाला हो सकता है। खासकर लंबे समय तक इलाज कराने वाले परिवारों के लिए दवाओं पर होने वाली बचत मायने रखती है। मरीजों के लिए जरूरी सलाह: अपनी दवा की नई MRP जरूर जांचें। केवल कम कीमत देखकर डॉक्टर की सलाह के बिना दवा का ब्रांड, खुराक या इलाज न बदलें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!