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वन-वे पर ऑटो-रिक्शा को एंट्री देने की मांग:सागर में चालकों ने हड़ताल की चेतावनी दी; रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे

शहर के मोतीनगर चौराहे से तीनबत्ती तिराहे तक के मार्ग को वन-वे घोषित करने के फैसले का विरोध अब तेज हो गया है। इस मार्ग पर तीन और चार पहिया वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है, जिससे सबसे ज्यादा परेशानी ऑटो चालकों और आम लोगों को हो रही है। कलेक्टर ऑफिस पहुंचे ऑटो चालक, सौंपा ज्ञापन शुक्रवार को ऑटो चालकों ने रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। उनका कहना है कि वन-वे लागू होने के बाद अब उन्हें बड़े बाजार वाले इलाके में एंट्री नहीं मिल रही, जिससे न केवल उनकी आमदनी प्रभावित हो रही है बल्कि मरीजों, बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पैदल चलने को मजबूर लोग, बंद हो रही ऑटो चालकों की कमाई ज्ञापन में बताया गया कि लोग अब तीनबत्ती तक पैदल चलने को मजबूर हैं क्योंकि ऑटो अंदर तक नहीं जा पा रहे। बुजुर्गों और बीमारों के लिए यह बेहद मुश्किल हो गया है। वहीं ऑटो चालकों की रोज़ी-रोटी पर भी असर पड़ रहा है। आंदोलन की चेतावनी, विधायक से करेंगे मुलाकात ऑटो यूनियन के अध्यक्ष पप्पू तिवारी ने कहा, “वन-वे नियम में ऑटो और ई-रिक्शा को भी एंट्री नहीं दी जा रही है। इससे न केवल हमारी कमाई बंद हो रही है बल्कि आम लोग भी बेहद परेशान हैं। हमने प्रशासन को ज्ञापन सौंप दिया है और अब शनिवार को सागर विधायक शैलेंद्र जैन से भी मुलाकात करेंगे। अगर फिर भी हमारी मांगें नहीं मानी गईं, तो हमें मजबूरन हड़ताल करनी पड़ेगी।” जनता भी कर रही समर्थन(deshharpal.com) इस मुद्दे को लेकर सिर्फ ऑटो चालक ही नहीं, आम जनता भी चिंता जता रही है। स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों का कहना है कि इस इलाके में ऑटो की सुविधा न होने से दिक्कतें बढ़ गई हैं। बाजारों तक पहुंचने के लिए अब लंबा पैदल सफर करना पड़ रहा है।
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कान्स के रेड कार्पेट पर छत्तीसगढ़ की जूही:’जलती पृथ्वी’ वाली ड्रेस पहनकर किया वॉक; वियतनाम के डिजाइनर को बनाने में ढाई महीने लगे

दुनिया के सबसे चर्चित फिल्म समारोहों में से एक कांस फिल्म फेस्टिवल में इस बार छत्तीसगढ़ का नाम भी रोशन हुआ। दुर्ग की रहने वाली जूही व्यास ने पहली बार इस मंच पर न सिर्फ अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, बल्कि एक खास संदेश के साथ दुनिया का ध्यान खींचा। जूही व्यास ग्रीनपीस इंडिया संस्था के साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर रेड कार्पेट पर पहुंचीं। संस्था की राष्ट्रीय निदेशक मोहिनी शर्मा के साथ उन्होंने ‘वॉइस ऑफ द प्लैनेट’ अभियान के तहत एक खास ड्रेस पहनकर जलवायु परिवर्तन और धरती की पीड़ा को दर्शाया। इस खास ड्रेस को वियतनाम के मशहूर डिजाइनर गुयेन टीएन ट्रिएन ने डिजाइन किया, जिसे तैयार करने में ढाई महीने लगे। यह ड्रेस ‘जलती हुई पृथ्वी’ की प्रतीक थी – आग जैसे रंग और डिजाइन इस बात की चेतावनी देते हैं कि अगर प्रदूषण यूं ही बढ़ता रहा तो हमारा भविष्य कैसा होगा। “ये सिर्फ एक ड्रेस नहीं, बल्कि एक कहानी है” – जूही दैनिक भास्कर से बात करते हुए जूही ने कहा, “यह सिर्फ एक ड्रेस नहीं है, यह उन करोड़ों लोगों की कहानी है जो जलवायु संकट का खामोशी से सामना कर रहे हैं। एक मां होने के नाते मुझे अगली पीढ़ी के लिए धरती को बचाने की जिम्मेदारी और भी ज्यादा महसूस होती है।” उन्होंने कहा कि वे चाहतीं तो स्टाइलिश ड्रेस पहनकर वहां जातीं, लेकिन उन्होंने इस मंच का इस्तेमाल धरती के दर्द को दिखाने के लिए किया। “हवा, मिट्टी और पानी को बचाना इंसानों की जिम्मेदारी है, लेकिन इस पर कोई बात नहीं कर रहा,” जूही ने कहा। कौन हैं जूही व्यास? भिलाई निवासी जूही व्यास दो बच्चों की मां हैं। उन्होंने करियर की शुरुआत सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में की थी, लेकिन अपने जुनून को पहचानते हुए फैशन और मेकअप की दुनिया में कदम रखा। करीब 12 साल पहले दुर्ग में उन्होंने ‘जूही सैलून एंड स्पा’ की शुरुआत की। जूही एक मेकअप आर्टिस्ट, मॉडल और कई ब्यूटी टाइटल की विजेता भी हैं। कांस फिल्म फेस्टिवल का इतिहास(deshharpal.com) कांस फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत 1939 में हुई थी, जब वेनिस फिल्म फेस्टिवल की तानाशाही से तंग आकर फ्रांस ने खुद का फेस्टिवल शुरू किया। हालांकि उसी साल हिटलर के पोलैंड पर हमले के चलते पहले दिन ही फेस्टिवल रोकना पड़ा।इसके बाद 1946 में यह फेस्टिवल फिर से शुरू हुआ और तब से आज तक यह दुनिया भर की फिल्मों और कलाकारों को एक ग्लोबल मंच देता आ रहा है।
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सीहोर में व्यापारी के घर हुई चोरी का वीडियो:सो रहे परिवार को कमरे में बंद किया; कार समेत 3 लाख नकदी लेकर भागे चोर

सीहोर जिले के छिदगांव में एक दिल दहला देने वाली चोरी की घटना सामने आई है। बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात, अज्ञात नकाबपोश चोरों ने एक व्यापारी के घर में घुसकर करीब डेढ़ घंटे तक लूटपाट मचाई। चोर न सिर्फ 3.20 लाख रुपये नकद और सामान लेकर भागे, बल्कि पांच लाख रुपये की कार भी ले उड़े। सीसीटीवी में कैद हुए तीन नकाबपोश चोर व्यापारी कमलेश शर्मा के घर और दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों में तीन नकाबपोश चोर साफ दिखाई दे रहे हैं, जिन्होंने पहले घर के मेन गेट की जाली काटी और फिर अंदर घुसकर इत्मीनान से चोरी की। कमलेश शर्मा ने बताया: “चोरों ने हमारे घर को पूरी तरह खंगाल डाला। जिस कमरे में हम सो रहे थे, वहीं से उन्होंने कैश और गाड़ी की चाबी उठाई और हमें कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद दुकान से तेल के डिब्बे, नकदी और कोल्ड ड्रिंक व ड्राय फ्रूट्स तक लेकर चले गए।” बच्चे उठे तो खुला राज – दरवाजा बाहर से था बंद रात करीब 4 बजे जब बच्चे पानी पीने के लिए उठे, तो उन्होंने देखा कि कमरा बाहर से बंद है। पड़ोसियों की मदद से दरवाजा खोला गया। बाहर निकलते ही परिवार के होश उड़ गए – सामान बिखरा पड़ा था और घर की कार गायब थी। वारदात से एक दिन पहले ही निकाले थे पैसे कमलेश शर्मा ने बताया कि उन्होंने गेहूं की बिक्री के पैसे केसीसी खाते में जमा कराने के लिए एक दिन पहले ही बैंक से पैसे निकाले थे और शाम को घर लाए थे। उन्हें शक है कि किसी ने बैंक से लेकर घर तक उनकी रेकी की और फिर रात में वारदात को अंजाम दिया। 36 घंटे बाद भी चोर फरार, जांच में जुटी पुलिस घटना को हुए 36 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन अब तक चोरों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेब) की टीम ने घटनास्थल से फिंगरप्रिंट और अन्य साक्ष्य इकट्ठे किए हैं। टीआई घनश्याम सिंह दांगी ने बताया: “हम सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच तेजी से चल रही है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।” 👉 चिंता की बात (deshharpal.com)इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस तरह से चोरों ने डेढ़ घंटे तक घर और दुकान में आराम से चोरी की, वह पुलिस की गश्त और सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
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भोपाल में पेड़ से टकराई कार, 3 की मौत:गाड़ी के परखच्चे उडे़, एयरबैग फटे; चेसिस टूटने से दो हिस्सों में बंट गई

भोपाल के खजूरी सड़क थाना क्षेत्र में गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात एक भयानक सड़क हादसा हुआ। तेज रफ्तार से जा रही हुंडई वेन्यू कार पहले एक गुमटी से टकराई, फिर सीधे पेड़ से जा भिड़ी। हादसे में तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। मरने वालों की पहचान प्रीत आहूजा, विशाल डाबी और पंकज सिसोदिया के रूप में हुई है। घायल युवक राहुल कंडारे का इलाज चिरायु अस्पताल में चल रहा है। खाना खाकर लौट रहे थे दोस्त, बीच रास्ते मौत ने घेरा परिजनों के मुताबिक, चारों दोस्त सीहोर के दरबार होटल में खाना खाने गए थे। रात में भोपाल लौटते समय, इंदौर-भोपाल हाईवे पर उनकी कार अनियंत्रित होकर गुमटी और फिर पेड़ से टकरा गई। कार चला रहा था प्रीत, उसके बगल में विशाल बैठा था, जबकि पीछे राहुल और पंकज थे। कार के परखच्चे उड़ गए, दो टुकड़ों में बंट गई हादसा इतना भीषण था कि कार दो टुकड़ों में बंट गई। एयरबैग तक फट गए, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि स्पीड 120 किमी/घंटे से ज्यादा रही होगी। प्रीत और विशाल कार के डैशबोर्ड के नीचे बुरी तरह फंस गए थे। रेस्क्यू टीम को गेट और डैशबोर्ड काटकर शव निकालने में एक घंटे से ज्यादा का समय लगा। परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़ पंकज अपने परिवार का इकलौता सहारा था। मां की पहले ही बीमारी से मौत हो चुकी है, और उसके पिता नेत्रहीन हैं। बड़ी बहन की शादी हो चुकी है। पंकज ही घर की पूरी जिम्मेदारी निभा रहा था। उसकी मौत ने पिता को पूरी तरह बेसहारा कर दिया। प्रीत भोपाल में कपड़ों की दुकान चलाता था, जबकि विशाल उसी दुकान में काम करता था। दोनों 12वीं तक पढ़े थे। तीनों स्कूल के दोस्त थे। दुख की बात ये है कि प्रीत अपने भाई कमलेश आहूजा की गाड़ी (MP04 EA 6004) बिना बताए लेकर निकला था। चश्मदीद बोले- एक घंटे बाद पहुंची पुलिस और एम्बुलेंस स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे की सूचना देने के करीब एक घंटे बाद पुलिस और एम्बुलेंस मौके पर पहुंची। समय रहते मदद मिल जाती, तो शायद किसी की जान बच सकती थी। थाना प्रभारी का बयान खजूरी थाना प्रभारी नीरज वर्मा ने कहा कि हादसे का मुख्य कारण तेज रफ्तार है। उन्होंने देरी के आरोपों को खारिज किया और बताया कि “मैं उस समय फंदा टोल नाके पर वाहनों की चेकिंग कर रहा था, जो घटनास्थल से करीब 20 किमी दूर है। हमारी प्राथमिकता घायल को तुरंत अस्पताल पहुंचाना था, जिससे उसकी जान बच सकी।” 👉 सोचने वाली बात(deshharpal.com)हर बार की तरह इस हादसे में भी लापरवाही और तेज रफ्तार ने तीन जिंदगियों को लील लिया। एक पल की जल्दबाज़ी ने तीन परिवारों को मातम में डुबो दिया। ये हादसा एक सबक है – सड़क पर सावधानी ही सुरक्षा है।
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सड़क पर बिखरे टमाटर.. लूटने मची होड़:बिलासपुर-कोटा मार्ग में टमाटर से भरी पिकअप पलटी, लोग उठा-उठाकर ले गए, हादसे में नहीं हुई जनहानि

सड़क पर बिखरे टमाटर, लोगों की जुटी भीड़ पिकअप के पलटने से उसमें भरे टमाटर सड़क पर बिखर गए। इस हादसे के बाद वहां लोगों की भीड़ जुट गई। पिकअप में कैरेट में रखे टमाटर को सड़क पर बिखरे देख लोगों की भीड़ उठा-उठाकर ले जाने लगी। इसके चलते वहां अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। सब्जी व्यापारी की मदद करते रहे लोग(https://deshharpal.com/) वहीं, इस दौरान कुछ लोग सब्जी व्यापारी की मदद करते हुए बिखरे टमाटर को समेटने लगे। उन्होंने टमाटर ले जा रहे लोगों को भी रोकने की कोशिश की। गनीमत रही कि इस हादसे में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। पिकअप का ड्राइवर भी सुरक्षित है।
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BJP की सागर नगर मंडल की कार्यकारिणी घोषित:6 मंडल उपाध्यक्ष-2 महामंत्री बनाए; आईटी सेल की जिम्मेदारी जयश्री को सौंपी

भारतीय जनता पार्टी ने सागर विधानसभा के अंतर्गत सागर नगर मंडल की नई कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है। यह सूची मंडल अध्यक्ष अमित बैसाखिया ने भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी की सहमति से जारी की। नई टीम में प्रमुख जिम्मेदारियां इस प्रकार हैं: इसके अलावा मंडल की कार्यकारिणी में 43 अन्य सदस्यों को भी शामिल किया गया है। पार्टी संगठन ने इन नियुक्तियों के जरिए मंडल को और अधिक सक्रिय और सशक्त बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। — देश हरपल https://deshharpal.com/ पल-पल की खबर हरपल
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ब्लैकमेलिंग से तंग आकर हेड f ने किया सुसाइड:इंदौर में युवती रुपए मांग रही थी,झूठे केस में फंसाने की दे रही थी धमकी

इंदौर के एमआईजी थाना क्षेत्र में उस समय सनसनी फैल गई जब वहां स्थित सरकारी क्वार्टर में तैनात हेड कांस्टेबल विनोद यादव ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस जांच में सामने आया है कि कनाड़िया क्षेत्र की एक युवती उन्हें ब्लैकमेल कर रही थी। वह रुपये नहीं देने पर झूठे केस में फंसाने की धमकी दे रही थी। बुधवार देर रात पुलिस ने युवती को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। घटना की जानकारी मिलते ही एडिशनल डीसीपी अमरेंद्र सिंह, एएसपी सोनू डाबर, टीआई आर.डी. कानवा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। डिप्रेशन में थे कांस्टेबल पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, विनोद यादव काफी समय से मानसिक तनाव यानी डिप्रेशन में थे। टीआई सीबी सिंह ने दी जानकारी: “घटना एमआईजी थाने के पीछे बने सरकारी क्वार्टर की है। विनोद यादव परदेशीपुरा थाने में पदस्थ थे और बुधवार को ड्यूटी खत्म करने के बाद उन्होंने फांसी लगा ली।” मौके पर एफएसएल टीम भी पहुंची और साक्ष्य जुटाए। पुलिस की प्राथमिक जांच में यह साफ हो गया है कि आत्महत्या के पीछे मानसिक तनाव और ब्लैकमेलिंग एक बड़ी वजह रही है। पुलिस अब युवती से पूछताछ कर रही है और पूरे मामले की गहराई से जांच जारी है। deshharpal.com — पल-पल की खबर हरपल
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NEET UG रिजल्ट मामले में आज सुनवाई:अब उज्जैन सहित 50 से ज्यादा याचिककर्ता; रिज्वाइंडर के लिए मांगा जाएगा समय, रिएक्जाम कराने की मांग भी

NEET-UG परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ियों और बिजली कटौती के चलते प्रभावित हुए छात्रों की याचिका पर आज मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से आज रिवाइंडर दाखिल किया जाएगा। इस मामले में 25 से अधिक परीक्षा केंद्रों से जुड़े 50 से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं। इन छात्रों की प्रमुख मांग है कि दोबारा परीक्षा (Re-exam) कराई जाए ताकि उनका भविष्य खराब न हो। याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट मृदुल भटनागर ने बताया कि इन छात्रों में कई ऐसे हैं जिन्होंने तीन-चार बार परीक्षा दी है और उन्होंने कड़ी मेहनत की थी। क्या है मामला? 4 मई को हुई NEET-UG परीक्षा के दौरान इंदौर और उज्जैन सहित कई शहरों में तेज आंधी और बारिश के कारण बिजली गुल हो गई थी। इंदौर के 49 सेंटरों में से लगभग 25 केंद्रों पर छात्रों को अंधेरे में परीक्षा देनी पड़ी। कई जगहों पर छात्रों ने मोमबत्तियों और मोबाइल टॉर्च की रोशनी में पेपर हल किया। घुप्प अंधेरे में कई छात्र प्रश्नपत्र तक ठीक से नहीं पढ़ पाए। उज्जैन के शासकीय माधव महाविद्यालय में भी बिजली जाने से परीक्षा बाधित हुई। यहां छात्रों ने आरोप लगाया कि कुछ कक्षों में लाइट जाने के बाद अतिरिक्त समय मिला, लेकिन रूम नंबर 212 के छात्रों को न तो अतिरिक्त समय मिला और न ही समय पर परीक्षा शुरू हो सकी। अब उज्जैन के भी 5 से ज्यादा छात्र याचिकाकर्ताओं में शामिल हो चुके हैं। NTA की दलील क्या रही? 16 मई को हुई पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने NTA की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए कोर्ट में पक्ष रखा था। उन्होंने कहा था कि पूरे परिणाम पर रोक लगाने से सैकड़ों छात्रों पर असर पड़ेगा। हालांकि NTA ने यह स्वीकार किया कि कुछ केंद्रों पर बिजली की समस्या हुई थी, लेकिन वहां मोमबत्ती और जनरेटर के जरिए व्यवस्था की गई थी। NTA का यह भी कहना है कि परीक्षा समर सीज़न में थी और सभी जरूरी इंतजाम किए गए थे। लेकिन याचिकाकर्ताओं का दावा है कि वास्तविक हालात NTA के दावों से काफी अलग थे। क्या है छात्रों की मांग? प्रभावित छात्रों की स्पष्ट मांग है कि जिन 25 परीक्षा केंद्रों में परीक्षा प्रभावित हुई, वहां फिर से परीक्षा कराई जाए। छात्रों का कहना है कि खराब व्यवस्था के कारण उनका एक साल बर्बाद होने की कगार पर है, क्योंकि NEET के अलावा उनके पास कोई और विकल्प नहीं है—न मेडिकल, न नर्सिंग, न आयुर्वेद या होम्योपैथी। क्या हो सकता है अगला कदम? आज की सुनवाई में याचिकाकर्ता पक्ष कोर्ट से दोबारा परीक्षा की मांग को लेकर मजबूत तर्क पेश करेगा। साथ ही कोर्ट से अनुरोध किया जाएगा कि रिवाइंडर दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। अब यह देखना होगा कि हाईकोर्ट NTA और बिजली कंपनी के जवाबों के आधार पर क्या फैसला सुनाता है। “देश हरपल”https://deshharpal.com/ इस अहम मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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मारुति वैन में आग लगी, जिंदा जला ड्राइवर:खेत की फेंसिंग में फंसा था ड्राइविंग सीट का गेट; शव की पहचान भी मुश्किल

बीना में बुधवार दोपहर एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां चलते-चलते एक मारुति वैन में अचानक आग लग गई। आग इतनी भीषण थी कि ड्राइवर जिंदा जल गया और शव की हालत इतनी खराब है कि उसकी पहचान तक नहीं हो सकी है। खेत की फेंसिंग में फंसी वैन, बाहर नहीं निकल सका ड्राइवर यह हादसा आगासौद थाना क्षेत्र में देहरी और सेमरखेड़ी गांव के बीच दोपहर करीब 12 बजे हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वैन सड़क किनारे एक खेत की फेंसिंग में फंस गई थी। ड्राइवर की ओर का दरवाजा फेंसिंग में अटक गया, जिससे वह बाहर नहीं निकल पाया और वैन में ही फंस गया। गैस किट की वजह से तेजी से भड़की आग! स्थानीय लोगों ने बताया कि वैन में शायद गैस किट लगी थी। आग लगते ही महज 10-15 मिनट में पूरी वैन जलकर खाक हो गई। लोगों ने बताया कि उन्होंने ड्राइवर की चीखें सुनीं, लेकिन आग की तेज़ी और हालात की वजह से कोई भी उसकी मदद नहीं कर सका। कौन था ड्राइवर, अब तक रहस्य पुलिस ने बताया कि जल चुकी वैन का रजिस्ट्रेशन नंबर MP04 CB 2153 है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह वैन अक्सर इलाके में किराना का सामान बेचने आती थी, लेकिन वैन चलाने वाले शख्स का नाम या पता उन्हें नहीं मालूम। जिस खेत की फेंसिंग में वैन फंसी, वह देहरी गांव के किसान कैलाश पटेल का बताया जा रहा है। जांच जारी, आग लगने की वजह अभी स्पष्ट नहीं फिलहाल आग लगने की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। आगासौद थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैन के रजिस्ट्रेशन से अब मृतक की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। देशहरपाल(deshharpal.com)की संवेदना: ये हादसा एक दर्दनाक चेतावनी है कि वाहनों में गैस किट का इस्तेमाल सावधानीपूर्वक किया जाए और सुरक्षा उपायों की अनदेखी न की जाए। देशहरपाल मृतक के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करता है।
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जबलपुर के पूर्व शहर युवक कांग्रेस अध्यक्ष पर इनाम घोषित:कांग्रेसी नेता के साथ मिलकर किया था JDA की जमीन का फर्जीवाड़ा, एक माह से फरार

जबलपुर विकास प्राधिकरण (JDA) की जमीनों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पने वाले गिरोह के दो मुख्य आरोपियों—यूथ कांग्रेस के पूर्व नगर अध्यक्ष जतिन राज और उनके सहयोगी मनोज नामदेव—की गिरफ्तारी के लिए अब पुलिस ने कमर कस ली है। एसपी संपत उपाध्याय ने दोनों फरार आरोपियों पर 5-5 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। कांग्रेस से जुड़ा चेहरा, अब भगोड़ा जतिन राज पहले एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस में पदाधिकारी रह चुके हैं। वे पार्षद भी रह चुके हैं और कांग्रेस के कई चुनाव अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। लेकिन अब वही चेहरा जमीन के गोरखधंधे में मुख्य साजिशकर्ता बन चुका है। मनोज नामदेव के साथ मिलकर जतिन राज ने JDA की एक योजना में शामिल जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे लाखों में बेच डाला। पुलिस ने इस मामले में सैफ नगर निवासी कयाज उर्फ शुभम उर्फ शिवम को गिरफ्तार किया है, जिसने पूछताछ में कई बड़े खुलासे किए हैं। ऐसे हुआ खुलासा दरअसल, एक माह पहले कयाज उर्फ शुभम JDA दफ्तर पहुंचा और खुद को विजय नगर निवासी केपी लटोरिया का बेटा बताकर एक जमीन को अपने नाम करने की कोशिश की। उसने नकली आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज लगाए। लेकिन JDA के CEO दीपक वैद्य को शक हुआ। जब दस्तावेजों की जांच करवाई गई तो मालूम पड़ा कि जिनके नाम पर शुभम जमीन लेना चाहता था, वे दोनों पति-पत्नी पहले ही गुजर चुके हैं और उनकी कोई संतान भी नहीं थी। इसके बाद JDA ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और शुभम को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में शुभम ने कबूल किया कि वह जतिन राज और मनोज नामदेव के साथ मिलकर JDA की खाली पड़ी जमीनों की जानकारी निकालता था। फिर नकली वारिस तैयार कर जमीनों पर कब्जा किया जाता था और उन्हें लाखों में बेच दिया जाता था। पुलिस की दबिश, लेकिन अभी तक आरोपी लापता ओमती थाना पुलिस जतिन और मनोज को पकड़ने के लिए लगातार दबिश दे रही है, लेकिन अब तक दोनों फरार हैं। पुलिस ने उनके घरों पर भी छापे मारे, लेकिन वहां से कोई सुराग नहीं मिला। एसपी ने ओमती थाना प्रभारी को दोनों की जल्द गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं। साथ ही इनाम घोषित कर आम जनता से भी सूचना देने की अपील की है। देशहरपाल(deshharpal.com)की अपील: अगर आपके पास जतिन राज या मनोज नामदेव के संबंध में कोई भी जानकारी है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करें। जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े और घोटाले रोकने के लिए नागरिकों की सतर्कता बेहद जरूरी है।
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Supreme Court on CJP Protest: प्रदर्शन पर रोक से इनकार, ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर का दावा

दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के अधिकार और व्यापारियों की रोजी-रोटी का मुद्दा चर्चा में रहा। अदालत ने फिलहाल प्रदर्शन रोकने का आदेश देने से इनकार कर दिया। वहीं, व्यापारियों की ओर से दावा किया गया कि प्रदर्शन और उससे जुड़ी पाबंदियों के कारण रोजाना करीब ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ सकता है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने यह मामला रखा गया। याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क और आसपास के बाजारों में कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई। उनका कहना था कि बाजारों में लोगों की आवाजाही बाधित होने से छोटे दुकानदारों और दूसरे कारोबारियों को परेशानी हो सकती है। CJI की टिप्पणी: किसी के लिए प्रदर्शन, किसी के लिए मूंगफली बेचना जरूरी सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदर्शन के अधिकार और आम लोगों की आजीविका के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति के लिए प्रदर्शन करना जरूरी हो सकता है, जबकि किसी दूसरे के लिए मूंगफली बेचकर अपना परिवार चलाना महत्वपूर्ण है। CJI सूर्यकांत ने भी छोटे व्यापारियों की आर्थिक स्थिति का जिक्र किया। त्योहारों के समय दुकानदारों की कमाई बढ़ने की उम्मीद रहती है। ऐसे में यदि बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर उनकी रोजाना की आमदनी पर पड़ सकता है। अदालत की टिप्पणियों से साफ है कि इस मामले में केवल प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि आम लोगों की आजीविका और कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है। Delhi Business Loss: रोजाना ₹200 करोड़ के नुकसान का दावा व्यापारियों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि कनॉट प्लेस और आसपास के व्यावसायिक इलाकों में प्रदर्शन के कारण रोजाना करीब ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ सकता है। इसका प्रभाव बड़े कारोबारियों के साथ-साथ छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों पर भी पड़ सकता है। बाजार में ग्राहकों की संख्या कम होने या आवाजाही प्रभावित होने से उनकी कमाई पर असर पड़ने की आशंका जताई गई। हालांकि, ₹200 करोड़ का आंकड़ा व्यापारियों की ओर से पेश किया गया दावा है। इसे वास्तविक नुकसान का प्रमाणित आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए। Central Park को बंद करने का मुद्दा भी उठा सुनवाई के दौरान कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद करने से जुड़े प्रशासनिक फैसले का मुद्दा भी उठाया गया। याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि इस कदम से आसपास के बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि किसी प्रतिबंध के कारण कारोबार या लोगों की आजीविका को अनुचित नुकसान पहुंचता है, तो उचित राहत देने के सवाल पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, तत्काल सुनवाई में प्रदर्शन पर रोक लगाने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया। CJP Protest: क्यों किया गया प्रदर्शन का ऐलान? CJP ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च और प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में यह कदम उठाने की बात कही थी। प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था, बाजारों में आवाजाही और कारोबार पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई गई। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट में भी प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इनकार किया था, जबकि दिल्ली पुलिस ने कानून के अनुसार जरूरी कदम उठाने की बात कही थी। Supreme Court Hearing: अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने मामले को तत्काल आदेश के जरिए निपटाने के बजाय दशहरा अवकाश के बाद 26 या 27 अक्टूबर को सूचीबद्ध किए जाने का संकेत दिया। फिलहाल, प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया गया है। आगे की सुनवाई में प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था और व्यापारियों की आजीविका से जुड़े पहलुओं पर चर्चा महत्वपूर्ण रहेगी। इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि विरोध दर्ज कराने के अधिकार और आम लोगों की रोजी-रोटी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। अदालत की अगली सुनवाई से इस मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

PM Modi Canada Tour दिसंबर में होगी अहम बातचीत, Trade Deal से दोनों देशों को उम्मीद

PM Modi 11 दिसंबर को कनाडा के दौरे पर जा सकते हैं। इस यात्रा को भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच ट्रेड डील यानी व्यापार समझौते को लेकर बातचीत होने की संभावना है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के बीच कनाडा भी अपने कारोबार के लिए नए बाजार तलाश रहा है। कनाडा लंबे समय से अमेरिकी बाजार पर काफी हद तक निर्भर रहा है। ऐसे में भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार के साथ व्यापार बढ़ाना उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। दूसरी ओर, भारत की भी कोशिश है कि दूसरे देशों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़े और भारतीय कारोबारियों को नए अवसर मिलें। India-Canada Trade Deal पर क्यों है सबकी नजर? भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) को लेकर काफी उम्मीदें हैं। इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाना, निवेश के अवसर खोलना और कारोबार से जुड़ी बाधाओं को कम करना है। अगर ट्रेड डील पर सहमति बनती है, तो दोनों देशों की कंपनियों को एक-दूसरे के बाजार में कारोबार बढ़ाने का मौका मिल सकता है। इससे कृषि, ऊर्जा, तकनीक, शिक्षा और कई दूसरे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में प्रस्तावित समझौता इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है। Trump के Tariff दबाव के बीच कनाडा क्यों खोज रहा नए बाजार? डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है। इसका असर उन देशों पर भी पड़ता है, जिनका कारोबार अमेरिकी बाजार पर ज्यादा निर्भर है। कनाडा भी अपने व्यापारिक रिश्तों में विविधता लाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत इस लिहाज से कनाडा के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है। भारत की बड़ी आबादी, बढ़ती अर्थव्यवस्था और अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़ती मांग कनाडाई कंपनियों को आकर्षित करती है। हालांकि, भारत के साथ व्यापार बढ़ाना केवल अमेरिका पर निर्भरता कम करने तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच निवेश और कारोबारी सहयोग बढ़ने से लंबे समय में आर्थिक रिश्तों को भी मजबूती मिल सकती है। Energy और Technology सेक्टर में भी बढ़ सकते हैं मौके भारत और कनाडा के बीच कारोबार की संभावनाएं केवल ट्रेड डील तक सीमित नहीं हैं। ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाया जा सकता है। कनाडा के पास प्राकृतिक संसाधन और ऊर्जा क्षेत्र में अनुभव है, जबकि भारत तेजी से बढ़ता हुआ बड़ा बाजार है। दोनों देश अपनी जरूरतों और क्षमताओं के आधार पर साझेदारी को आगे बढ़ा सकते हैं। व्यापार समझौते पर बातचीत आगे बढ़ने से कंपनियों और निवेशकों को भी सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। हालांकि, वास्तविक फायदा समझौते की शर्तों और उसके लागू होने पर निर्भर करेगा। पुराने तनाव के बाद रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश भारत और कनाडा के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कूटनीतिक तनाव भी देखने को मिला। इस वजह से दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग को लेकर कई सवाल उठे थे। अब व्यापार और आर्थिक सहयोग जैसे साझा हितों पर बातचीत बढ़ाना दोनों देशों के लिए अहम हो सकता है। प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित यात्रा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। फिर भी, व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कई मुद्दों पर सहमति जरूरी होगी। इसलिए इस दौरे के दौरान होने वाली बातचीत और आधिकारिक घोषणाओं पर सबकी नजर रहेगी। भारत और कनाडा के लिए क्या होंगे इसके मायने? भारत-कनाडा ट्रेड डील आगे बढ़ती है, तो इससे दोनों देशों के कारोबारियों को नए बाजार मिल सकते हैं। निवेश बढ़ने, व्यापारिक अवसर पैदा होने और अलग-अलग क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत होने की संभावना भी रहेगी। कनाडा के लिए भारत के साथ व्यापार बढ़ाना अपने आर्थिक रिश्तों में विविधता लाने का अवसर है। वहीं, भारत के लिए यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश के क्षेत्र में अपनी पहुंच मजबूत करने का एक और रास्ता हो सकता है। अब नजर 11 दिसंबर की प्रस्तावित यात्रा पर है। क्या प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के नेतृत्व के बीच ट्रेड डील को लेकर कोई ठोस सहमति बन पाएगी? इसका जवाब दोनों देशों की बातचीत और आगे होने वाली आधिकारिक घोषणाओं से ही साफ होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Starlink

Reliance-Starlink Controversy: मस्क के आरोपों पर अंबानी की कंपनी का जवाब, कहा- Competition से नहीं डरते

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर रिलायंस (Reliance) इंडस्ट्रीज और एलन मस्क की कंपनी Starlink के बीच चर्चा तेज हो गई है। स्टारलिंक की भारत में एंट्री में देरी को लेकर मस्क ने सवाल उठाए थे। अब मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि वह प्रतिस्पर्धा से कभी नहीं डरी और भारत में स्टारलिंक का स्वागत करती है। Reliance के इस बयान के बाद देश के टेलीकॉम और सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में मुकाबले को लेकर चर्चा बढ़ गई है। एक तरफ एलन मस्क की स्टारलिंक भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ जियो भी सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। Reliance ने Starlink को लेकर क्या कहा? Reliance इंडस्ट्रीज ने अपने बयान में कहा कि कंपनी ने हमेशा प्रतिस्पर्धा का सामना किया है और वह नई कंपनियों के बाजार में आने से नहीं घबराती। कंपनी के मुताबिक, भारत में कारोबार करने वाली सभी कंपनियों को देश के नियमों का पालन करना चाहिए। रिलायंस ने स्टारलिंक का स्वागत करते हुए यह भी संकेत दिया कि सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में मुकाबला ग्राहकों के लिए फायदेमंद हो सकता है। कंपनी का मानना है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सेवाओं की गुणवत्ता और ग्राहकों के अनुभव में सुधार की गुंजाइश बनती है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत को लेकर कई कंपनियां तैयारी कर रही हैं। Elon Musk ने Mukesh Ambani पर क्यों उठाए सवाल? एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग में हो रही देरी को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी हित कंपनी की भारतीय बाजार में एंट्री को मुश्किल बना रहे हैं। इस विवाद में रिलायंस और मुकेश अंबानी का नाम भी सामने आया। मस्क का कहना है कि स्टारलिंक जैसी कंपनियों को भारतीय बाजार में काम करने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि ग्राहकों के पास इंटरनेट सेवा चुनने के अधिक विकल्प हों। हालांकि, इन आरोपों से यह साबित नहीं होता कि स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी के पीछे रिलायंस की भूमिका है। इसके लिए किसी ठोस प्रमाण की जरूरत होगी। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए कंपनियों को लाइसेंस के साथ-साथ दूसरी जरूरी मंजूरियां भी हासिल करनी होती हैं। Jio भी Satellite Internet Market में उतरने को तैयार Reliance जियो ने साल 2016 में भारतीय टेलीकॉम बाजार में कदम रखा था। सस्ते डेटा और किफायती सेवाओं के कारण कंपनी ने तेजी से ग्राहक जोड़े और देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों में अपनी जगह बनाई। अब जियो की नजर सैटेलाइट इंटरनेट बाजार पर भी है। इस तकनीक के जरिए उन इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क या ब्रॉडबैंड कनेक्शन उपलब्ध कराना मुश्किल है। दूसरी तरफ, स्टारलिंक अपने सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए भारत में इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराना चाहती है। ऐसे में आने वाले समय में दोनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। Starlink की India Launch में देरी की वजह क्या है? भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करना केवल लाइसेंस मिलने तक सीमित नहीं है। कंपनियों को सुरक्षा मानकों, तकनीकी आवश्यकताओं और सरकारी नियमों से जुड़ी प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होती हैं। स्टारलिंक के अलावा जियो और भारती समूह से जुड़ी Eutelsat OneWeb भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन कंपनियों की सेवाओं की शुरुआत जरूरी मंजूरियों और नियामकीय शर्तों पर निर्भर करती है। इसलिए स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी को किसी एक कंपनी से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी। वास्तविक स्थिति समझने के लिए सरकारी मंजूरियों और संबंधित कंपनियों की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी है। आम लोगों को क्या होगा फायदा? अगर भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू होती हैं, तो इसका फायदा खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को मिल सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों और उन जगहों पर, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है, यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि, ग्राहकों के लिए सबसे अहम सवाल इंटरनेट की कीमत, स्पीड और उपलब्धता का होगा। स्टारलिंक और जियो की सेवाएं कितनी किफायती होंगी, यह उनकी व्यावसायिक योजनाओं और लॉन्च के समय घोषित किए जाने वाले प्लान पर निर्भर करेगा। अब आगे क्या? रिलायंस के बयान से साफ है कि कंपनी सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है। वहीं, एलन मस्क की स्टारलिंक भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू करने का इंतजार कर रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जरूरी सरकारी प्रक्रियाएं कब पूरी होती हैं और कंपनियां ग्राहकों के लिए अपनी सेवाएं कब पेश करती हैं। अगर बाजार में कई कंपनियां उतरती हैं, तो भारतीय ग्राहकों को इंटरनेट के नए विकल्प मिल सकते हैं। फिलहाल, रिलायंस और स्टारलिंक के बीच जारी यह बहस भारत के तेजी से बदलते डिजिटल और टेलीकॉम बाजार की एक अहम तस्वीर पेश करती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Weather

Weather Update राजस्थान में बारिश के साथ गिरे ओले, Kedarnath-Badrinath में बर्फबारी

देश के कई हिस्सों में मौसम (Weather) का मिजाज बदल गया है। राजस्थान में तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई है, जबकि उत्तराखंड के केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब में बर्फबारी देखने को मिली है। वहीं, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में बारिश को लेकर अलर्ट की खबर है। मौसम में आए इस बदलाव से कहीं गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है, तो कहीं किसानों और यात्रियों की चिंता बढ़ सकती है। Rajasthan Weather: बारिश के साथ ओलावृष्टि राजस्थान के कई इलाकों में बारिश के साथ ओले गिरने से मौसम सुहावना होने के साथ ठंडा भी हो गया है। अचानक बदले मौसम का असर आम जनजीवन पर पड़ सकता है। जिन इलाकों में ओलावृष्टि हुई है, वहां खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान होने की आशंका भी रहती है। ऐसे में किसानों को स्थानीय मौसम विभाग की सलाह पर ध्यान देना चाहिए। बारिश और तेज हवाओं के दौरान लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। Kedarnath-Badrinath में बर्फबारी, पहाड़ों पर बढ़ी ठंड उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम ने अलग ही रंग दिखाया है। केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब में बर्फबारी के बाद ठंड बढ़ गई है। पहाड़ों पर मौसम तेजी से बदलता है, इसलिए यहां जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यात्रा की तैयारी सावधानी से करनी चाहिए। खासतौर पर धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले लोगों को सड़क की स्थिति, मौसम का पूर्वानुमान और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों की जानकारी लेकर ही आगे बढ़ना चाहिए। UP-Bihar Rain Alert: इन राज्यों में भी बदल सकता है मौसम राजस्थान और उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में बारिश की संभावना को लेकर अलर्ट की खबर सामने आई है। बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। हालांकि, बारिश का असर हर जिले में एक जैसा नहीं होगा। इसलिए अपने इलाके के लिए मौसम विभाग की ताजा चेतावनी जरूर देखें। किसानों और आम लोगों के लिए जरूरी सलाह बदलते मौसम को देखते हुए कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है। आंधी या बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों में रुकने से बचें। किसान अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह लें। वहीं, पहाड़ी इलाकों में जाने वाले यात्री मौसम और रास्तों की स्थिति की जानकारी पहले ही हासिल कर लें। Weather Update Today: आगे कैसा रहेगा मौसम? अक्टूबर के मध्य में बारिश और पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी ने मौसम का रुख बदल दिया है। राजस्थान में ओलावृष्टि और उत्तराखंड में बर्फ गिरने के बीच दूसरे राज्यों के लोगों की नजर भी बारिश के पूर्वानुमान पर है। मौसम से जुड़ी योजनाएं बनाने से पहले अपने शहर का ताजा अपडेट देखना बेहतर रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Parliament

Parliament Special Session: इसी महीने बुलाया जा सकता है संसद का सत्र, लोकसभा सीटें बढ़ाने पर नजर

संसद (Parliament) के गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज होने की चर्चा है। केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। इस सत्र में लोकसभा की सीटें बढ़ाने, परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावों पर आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक विशेष सत्र की तारीखों का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार इस बार जरूरी समर्थन जुटा पाएगी? अप्रैल 2026 में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला था। ऐसे में सरकार के सामने अब राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने की चुनौती है। लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने की चर्चा फिलहाल लोकसभा में 543 निर्वाचित सीटें हैं। प्रस्तावित योजना के तहत इनकी संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 करने की बात सामने आई है। इस बदलाव का संबंध महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया से भी जोड़ा जा रहा है। अगर लोकसभा की सीटों में बढ़ोतरी होती है, तो संसदीय क्षेत्रों और राज्यों के प्रतिनिधित्व में बदलाव हो सकता है। हालांकि, सीटों की अंतिम संख्या और उनके बंटवारे को लेकर स्थिति विधेयक के प्रावधानों तथा संवैधानिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। Delimitation Bill क्या है और इससे क्या बदलेगा? परिसीमन यानी Delimitation का मतलब लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का दोबारा निर्धारण करना है। इसके जरिए निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और प्रतिनिधित्व से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया जा सकता है। यह मुद्दा इसलिए अहम है, क्योंकि परिसीमन का असर संसद में अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक भागीदारी पर पड़ सकता है। दक्षिण भारत के कुछ राज्यों ने चिंता जताई है कि आबादी के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण होने से उनका मौजूदा प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर, सरकार की प्रस्तावित योजना में लोकसभा की सीटें बढ़ाने का मुद्दा शामिल है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए प्रस्ताव में राज्यों के प्रतिनिधित्व से जुड़ी चिंताओं का किस तरह समाधान किया जाता है। महिला आरक्षण 2029 से लागू करने की तैयारी? महिला आरक्षण भी इस पूरे मामले का एक अहम हिस्सा है। संसद ने 2023 में महिला आरक्षण से जुड़ा कानून पारित किया था। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। हालांकि, इस कानून के क्रियान्वयन को जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। इसी वजह से परिसीमन और संविधान संशोधन से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा महत्वपूर्ण हो गई है। अप्रैल में क्यों पास नहीं हो पाया था बिल? अप्रैल 2026 में लोकसभा में संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पर मतदान हुआ था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे। इसके बावजूद जरूरी विशेष बहुमत नहीं मिल सका और विधेयक पारित नहीं हुआ। संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई मतों की जरूरत होती है। कुछ संविधान संशोधनों के लिए कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं से मंजूरी लेना भी जरूरी होता है। यानी सरकार के लिए केवल सांसदों की साधारण बहुमत संख्या पर्याप्त नहीं होगी। उसे संवैधानिक नियमों के मुताबिक जरूरी समर्थन हासिल करना होगा। DMK समेत दूसरे दलों से संपर्क की चर्चा मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सरकार विधेयकों के समर्थन में राजनीतिक दलों से बातचीत कर रही है। इसमें डीएमके (DMK) और कुछ छोटे दलों से संपर्क किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन दलों के अंतिम रुख को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी नहीं है। विपक्षी दलों की प्रमुख चिंताओं में परिसीमन की प्रक्रिया, राज्यों का प्रतिनिधित्व और प्रस्तावित बदलावों पर व्यापक चर्चा शामिल है। ऐसे में विशेष सत्र बुलाए जाने पर संसद में इस मुद्दे पर बहस तेज हो सकती है। कब हो सकता है संसद का Special Session? मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर सकती है। 26 और 27 अक्टूबर को प्रस्तावित BRICS Parliamentary Forum के कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए सत्र की तारीखें तय किए जाने की संभावना भी जताई गई है। लेकिन अभी तक विशेष सत्र का आधिकारिक कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है। इसलिए तारीखों और विधेयकों को लेकर सामने आ रही जानकारियों को संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अब सरकार के सामने क्या चुनौती है? सरकार के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं—पहली, विधेयकों के लिए जरूरी संवैधानिक समर्थन जुटाना और दूसरी, परिसीमन को लेकर राज्यों की चिंताओं पर सहमति बनाना। अगर विशेष सत्र बुलाया जाता है, तो लोकसभा की सीटों में बढ़ोतरी, महिला आरक्षण और राज्यों के प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे फिर से चर्चा के केंद्र में आ सकते हैं। फिलहाल सभी की नजर सरकार की आधिकारिक घोषणा और राजनीतिक दलों के रुख पर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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