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Supreme Court Decision: धर्म बदलने से क्या खत्म होगा आरक्षण? कोर्ट ने साफ की स्थिति

धर्म बदलने के बाद क्या आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा? इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु से जुड़े एक अहम मामले में अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। यह मामला उन लोगों से जुड़ा है, जिन्होंने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाया और इसके बाद पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) यानी Backward Class (Muslim) श्रेणी में आरक्षण का लाभ लेने का दावा किया था। Supreme Court के फैसले के मुताबिक, केवल इस्लाम अपनाने से कोई व्यक्ति तमिलनाडु की अधिसूचित पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) श्रेणी में अपने आप शामिल नहीं हो सकता। इस फैसले ने धर्म परिवर्तन और आरक्षण की पात्रता से जुड़े कानूनी सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। Supreme Court का क्या है पूरा फैसला? सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें कुछ समुदायों से इस्लाम अपनाने वाले लोगों को Backward Class (Muslim) श्रेणी में आरक्षण देने की व्यवस्था की गई थी। अदालत के फैसले का मुख्य आधार यह है कि किसी व्यक्ति की पहले की जातिगत पहचान के कारण उसे दूसरी धार्मिक श्रेणी में आरक्षण का पात्र अपने आप नहीं माना जा सकता। संबंधित आरक्षण श्रेणी के लिए निर्धारित कानूनी शर्तों को पूरा करना जरूरी है। इस मामले में फैसला तमिलनाडु की विशिष्ट आरक्षण व्यवस्था से जुड़ा है। इसलिए इसे देश में सभी तरह के आरक्षण पर लागू होने वाले एक समान प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कैसे शुरू हुआ धर्म परिवर्तन और Reservation का मामला? इस विवाद की शुरुआत तमिलनाडु सरकार के 9 मार्च 2024 के सरकारी आदेश से हुई थी। इस आदेश के तहत कुछ ऐसे लोगों को पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) श्रेणी में शामिल करने की व्यवस्था की गई थी, जो पहले पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, विमुक्त समुदाय या अनुसूचित जाति से संबंधित थे और बाद में उन्होंने इस्लाम अपना लिया था। सरकार के इस फैसले को मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। 25 जून 2026 को हाई कोर्ट ने सरकारी आदेश को रद्द कर दिया। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। राज्य सरकार का कहना था कि धर्म परिवर्तन करने से किसी व्यक्ति की सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन से जुड़ी परिस्थितियां जरूरी नहीं कि बदल जाएं। इसी आधार पर सरकार ने अपने आदेश का बचाव किया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इसके साथ ही इस मामले में सरकार की चुनौती सफल नहीं रही। क्या धर्म बदलने पर खत्म हो जाएगा SC और OBC Reservation? Supreme Court के फैसले के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों को अब किसी भी तरह का आरक्षण नहीं मिलेगा। लेकिन इस मामले को समझते समय अलग-अलग आरक्षण श्रेणियों के नियमों पर ध्यान देना जरूरी है। यह फैसला मुख्य रूप से तमिलनाडु की Backward Class (Muslim) श्रेणी में पात्रता से संबंधित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने सभी धर्म परिवर्तन करने वालों के लिए हर प्रकार के आरक्षण पर एक समान रोक लगा दी है। अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और राज्य की विशेष पिछड़ा वर्ग श्रेणियों के लिए अलग-अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं। अनुसूचित जाति के दर्जे से जुड़े नियम Constitution (Scheduled Castes) Order, 1950 में दिए गए हैं। वहीं, अन्य श्रेणियों में पात्रता संबंधित कानूनों और अधिसूचनाओं के अनुसार तय होती है। इसलिए किसी व्यक्ति को आरक्षण मिलेगा या नहीं, यह उसकी संबंधित श्रेणी और उस पर लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करता है। तमिलनाडु सरकार की दलील क्यों थी अहम? तमिलनाडु सरकार ने अपने आदेश के समर्थन में सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन का मुद्दा उठाया था। सरकार की दलील थी कि धर्म बदलने से किसी व्यक्ति के सामने मौजूद सामाजिक चुनौतियां अपने आप खत्म नहीं हो जातीं। दूसरी ओर, मामले में सवाल यह था कि क्या पुराने जातिगत दर्जे के आधार पर किसी व्यक्ति को मुस्लिम पिछड़ा वर्ग की अधिसूचित श्रेणी में शामिल किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस विवाद में संबंधित आरक्षण श्रेणी की पात्रता और कानूनी शर्तों के महत्व को रेखांकित किया है। आम लोगों के लिए क्या है इसका मतलब? इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आरक्षण का लाभ पाने के लिए केवल धर्म परिवर्तन या पुरानी जातिगत पहचान को पर्याप्त नहीं माना जा सकता। संबंधित श्रेणी के नियमों के तहत पात्रता साबित करना जरूरी है। धर्म परिवर्तन और आरक्षण से जुड़े मामलों में सामाजिक परिस्थितियों के साथ-साथ कानूनी प्रावधानों की भी अहम भूमिका होती है। इसी वजह से किसी एक मामले के फैसले को सभी राज्यों और सभी आरक्षण श्रेणियों पर सीधे लागू मानना सही नहीं होगा। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। यह फैसला धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण की पात्रता को लेकर चल रही कानूनी बहस में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Retired IAS Murder Case: फरार Caretaker पर ₹50 हजार का इनाम, 5 राज्यों में 12 Police Teams कर रहीं तलाश

Retired IAS Murder Case: फरार Caretaker पर ₹50 हजार का इनाम, 5 राज्यों में 12 Police Teams कर रहीं तलाश

रिटायर्ड IAS अधिकारी की हत्या के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। वारदात के बाद से फरार चल रहे केयरटेकर की तलाश में पुलिस की 12 टीमें 5 राज्यों में भेजी गई हैं। आरोपी की गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देने वाले के लिए ₹50 हजार का इनाम घोषित किया गया है। पुलिस अब आरोपी तक पहुंचने के लिए उसके मोबाइल और डिजिटल गतिविधियों से जुड़े सुराग भी खंगाल रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि घटना के बाद आरोपी ने किन लोगों से संपर्क किया और कहां-कहां गया। Caretaker की तलाश में 5 राज्यों में दबिश पुलिस के मुताबिक, फरार केयरटेकर की संभावित लोकेशन का पता लगाने के लिए अलग-अलग टीमों को कई राज्यों में भेजा गया है। करीब 12 टीमें संभावित ठिकानों पर तलाश और पूछताछ कर रही हैं। जांच में सामने आए सुरागों के आधार पर पुलिस लगातार अपनी कार्रवाई आगे बढ़ा रही है। आरोपी के रिश्तेदारों और उससे जुड़े लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। Mobile और Digital Footprint की जांच पुलिस ने आरोपी के मोबाइल और डिजिटल फुटप्रिंट को जांच का अहम हिस्सा बनाया है। कॉल डिटेल, संपर्क और अन्य डिजिटल गतिविधियों से जुड़े डेटा की जांच की जा रही है। जांच अधिकारी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि हत्या के बाद आरोपी की गतिविधियां किस दिशा में रहीं और उसने किन लोगों से संपर्क किया। आरोपी की गिरफ्तारी पर ₹50 हजार इनाम फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने ₹50 हजार का इनाम घोषित किया है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि आरोपी के बारे में कोई विश्वसनीय जानकारी मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें। पुलिस का कहना है कि सूचना देने वाले की पहचान को गोपनीय रखा जाएगा।
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Abhijeet Dipke का Delhi Police पर हमला, 10 अक्टूबर को ‘Jantar Mantar 2.0’ का ऐलान

Abhijeet Dipke का Delhi Police पर हमला, 10 अक्टूबर को ‘Jantar Mantar 2.0’ का ऐलान

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में ‘Jantar Mantar 2.0’ प्रदर्शन का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि अगर 10 अक्टूबर तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो CJP समर्थक दिल्ली पहुंचकर प्रदर्शन करेंगे। Mumbai Protest के बाद Delhi का ऐलान यह घोषणा मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए CJP के प्रदर्शन के बाद की गई। वहां दीपके ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई थी। इसके बाद उन्होंने 10 अक्टूबर को दिल्ली में दोबारा बड़े प्रदर्शन की बात कही। दीपके ने सोशल मीडिया पोस्ट में प्रदर्शन को शांतिपूर्ण रखने की बात कही है। उन्होंने दिल्ली पुलिस से भी प्रदर्शन के दौरान शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का सम्मान करने की अपील की। Delhi Police को लेकर क्या बोले दीपके? दीपके ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर पुलिस प्रदर्शनकारियों को रोकती है, तो जिस जगह उन्हें रोका जाएगा, वहीं विरोध जारी रखने की बात कही गई है। यह उनका दावा और राजनीतिक बयान है; प्रदर्शन की अनुमति और पुलिस की व्यवस्था अलग प्रशासनिक प्रक्रिया का विषय है। क्यों हो रहा है प्रदर्शन? प्रदर्शन के केंद्र में Special Intensive Revision (SIR) और चुनावी प्रक्रिया को लेकर CJP की आपत्तियां हैं। संगठन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। इन आरोपों और मांगों पर संबंधित संस्थाओं का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण रहेगा।
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Nushrratt Bharuccha की Surgery होगी, Bollywood की इन Actresses ने भी झेले गंभीर हादसे

Nushrratt Bharuccha की Surgery होगी, Bollywood की इन Actresses ने भी झेले गंभीर हादसे

बॉलीवुड एक्ट्रेस Nushrratt Bharuccha की सर्जरी होने की खबर सामने आई है। अभिनेत्री की सेहत को लेकर यह अपडेट सामने आने के बाद उनके फैंस के बीच चिंता बढ़ गई है। हालांकि, सर्जरी से जुड़ी पूरी जानकारी और उनकी मौजूदा स्थिति को लेकर आधिकारिक अपडेट का इंतजार है। इसी बीच बॉलीवुड की कुछ ऐसी अभिनेत्रियों के पुराने हादसे भी चर्चा में आ गए हैं, जिन्होंने मुश्किल समय का सामना किया और बाद में अपनी जिंदगी और करियर को फिर से संभाला। अनु अग्रवाल 29 दिन तक कोमा में थीं फिल्म आशिकी से लोकप्रिय हुईं अभिनेत्री अनु अग्रवाल वर्ष 1999 में एक सड़क हादसे का शिकार हुई थीं। हादसे के बाद उनकी हालत बेहद गंभीर हो गई थी और वह करीब 29 दिनों तक कोमा में रहीं। इस हादसे के बाद उन्हें लंबे समय तक इलाज और रिकवरी से गुजरना पड़ा। उनकी जिंदगी में आए इस मुश्किल दौर ने उनके करियर पर भी गहरा असर डाला। महिमा चौधरी के चेहरे से निकाले गए कांच के टुकड़े अभिनेत्री महिमा चौधरी भी एक गंभीर सड़क हादसे का सामना कर चुकी हैं। हादसे के दौरान कार की विंडस्क्रीन टूट गई थी और कांच के टुकड़ों से उनके चेहरे पर चोट लगी थी। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उनके चेहरे से कांच के टुकड़े निकाले थे। इस हादसे के बाद महिमा ने भी लंबे समय तक स्वास्थ्य और करियर से जुड़ी चुनौतियों का सामना किया। Nushrratt Bharuccha की Surgery पर नजर अब नुसरत भरूचा की सर्जरी की खबर ने एक बार फिर बॉलीवुड सितारों की सेहत और हादसों से जुड़ी कहानियों को चर्चा में ला दिया है। फैंस अभिनेत्री के जल्द ठीक होने की उम्मीद कर रहे हैं। उनकी सर्जरी और स्वास्थ्य को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद स्थिति और साफ होगी।
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Mika Singh ने Diljit Dosanjh पर उठाए सवाल, ‘Border 2’ Promotion को लेकर बोले- क्यों नहीं किया प्रमोट?

Mika Singh ने Diljit Dosanjh पर उठाए सवाल, ‘Border 2’ Promotion को लेकर बोले- क्यों नहीं किया प्रमोट?

सिंगर Mika Singh ने अभिनेता और सिंगर Diljit Dosanjh को लेकर सवाल उठाए हैं। मीका सिंह ने दावा किया कि दिलजीत ने फिल्म ‘Border 2’ के प्रमोशन में हिस्सा नहीं लिया, जबकि उन्होंने पाकिस्तानी एक्ट्रेस के साथ बनी एक फिल्म को प्रमोट किया था। मीका सिंह के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री में इस मुद्दे को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, दिलजीत दोसांझ की ओर से इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया सामने आई है या नहीं, इसकी पुष्टि आधिकारिक तौर पर होना बाकी है। Mika Singh ने क्या कहा? मीका सिंह ने दिलजीत के प्रमोशनल फैसलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर उन्होंने किसी फिल्म को प्रमोट किया है तो फिर ‘Border 2’ के प्रमोशन से दूरी क्यों बनाई? मीका के मुताबिक, ‘Border 2’ भारतीय सेना और देश से जुड़े विषय पर आधारित फिल्म है। ऐसे में उन्होंने दिलजीत के प्रमोशन को लेकर सवाल उठाया। पाकिस्तानी Actress वाली फिल्म का किया Promotion? मीका सिंह ने अपने बयान में एक ऐसी फिल्म का भी जिक्र किया, जिसमें पाकिस्तानी अभिनेत्री के काम करने की बात कही गई। उनका सवाल था कि दिलजीत ने उस प्रोजेक्ट को प्रमोट किया, लेकिन ‘Border 2’ के लिए ऐसा नहीं किया। हालांकि, किसी कलाकार के किसी फिल्म को प्रमोट करने या न करने के पीछे कई व्यक्तिगत और पेशेवर कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल प्रमोशनल गतिविधियों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा। ‘Border 2’ को लेकर पहले से चर्चा ‘Border 2’ को लेकर दर्शकों के बीच पहले से काफी उत्सुकता है। फिल्म को भारत-पाकिस्तान युद्ध की पृष्ठभूमि से जुड़ी कहानी के तौर पर देखा जा रहा है। दिलजीत दोसांझ फिल्म का हिस्सा हैं और उनके किरदार को लेकर भी दर्शकों में दिलचस्पी बनी हुई है। अब Diljit Dosanjh के जवाब का इंतजार मीका सिंह के बयान के बाद अब नजर दिलजीत दोसांझ की प्रतिक्रिया पर है। अगर दिलजीत इस मामले पर अपनी तरफ से कोई सफाई या जवाब देते हैं, तो विवाद को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
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Gyanesh Kumar के खिलाफ Uddhav-Raj Thackeray का Protest, Mumbai में जुटी हजारों की भीड़

Gyanesh Kumar के खिलाफ Uddhav-Raj Thackeray का Protest, Mumbai में जुटी हजारों की भीड़

Mumbai में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के नेतृत्व में बड़ा प्रदर्शन हुआ। दोनों नेताओं के समर्थक बड़ी संख्या में सड़क पर उतरे और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध जताया। मुंबई में हुए इस प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव व्यवस्था और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। Uddhav और Raj Thackeray पहली बार साथ नजर आए इस प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे लंबे समय बाद एक ही मंच पर साथ दिखाई दिए। दोनों नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। प्रदर्शन में दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में समर्थक भी शामिल हुए। मुंबई की सड़कों पर भीड़ के कारण सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था के लिए पुलिस को भी अतिरिक्त इंतजाम करने पड़े। तीन दिन में CEC के खिलाफ तीन बड़े प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पिछले तीन दिनों में तीन बड़े प्रदर्शन होने की बात सामने आई है। अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। मुंबई में हुआ यह प्रदर्शन इसी कड़ी का हिस्सा रहा। प्रदर्शनकारियों की ओर से चुनाव व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की गई। चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए सवाल प्रदर्शन के दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल उठाए। उनका कहना है कि मतदाता सूची और चुनाव से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है। वहीं, इन आरोपों और दावों पर चुनाव आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। किसी भी विवाद में अंतिम स्थिति संबंधित आधिकारिक जांच और तथ्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
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MP में 8 अक्टूबर से Ayushman Yojana का Boycott, बकाया भुगतान को लेकर Private Doctors का बड़ा फैसला

MP में 8 अक्टूबर से Ayushman Yojana का Boycott, बकाया भुगतान को लेकर Private Doctors का बड़ा फैसला

मध्य प्रदेश में Ayushman Bharat Yojana को लेकर प्राइवेट अस्पतालों और डॉक्टरों के बीच नाराजगी सामने आई है। बकाया राशि के भुगतान की मांग को लेकर प्राइवेट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने 8 अक्टूबर से आयुष्मान योजना का बहिष्कार करने का फैसला लिया है। एसोसिएशन का कहना है कि लंबे समय से अस्पतालों का भुगतान अटका हुआ है। इसी मुद्दे को लेकर डॉक्टरों ने सरकार के सामने अपनी मांग रखने और जल्द समाधान की अपील की है। बकाया राशि को लेकर डॉक्टरों में नाराजगी प्राइवेट डॉक्टरों का कहना है कि आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज करने के बाद अस्पतालों को मिलने वाली राशि का भुगतान समय पर नहीं हो रहा है। बकाया राशि बढ़ने से अस्पतालों के संचालन पर भी असर पड़ने की बात कही गई है। एसोसिएशन ने सरकार से लंबित भुगतान जल्द जारी करने की मांग की है। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे योजना से जुड़े काम को रोकने के फैसले पर आगे बढ़ेंगे। 8 अक्टूबर से योजना के बहिष्कार का ऐलान एसोसिएशन के फैसले के मुताबिक, 8 अक्टूबर से प्राइवेट अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज नहीं करने का फैसला ले सकते हैं। इससे आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को परेशानी होने की आशंका है। हालांकि, अंतिम स्थिति सरकार और प्राइवेट अस्पतालों के बीच होने वाली बातचीत पर भी निर्भर करेगी। 1000 Ambulances से Delhi कूच की चेतावनी प्राइवेट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने अपनी मांगों को लेकर दिल्ली तक आंदोलन करने की भी बात कही है। एसोसिएशन का दावा है कि जरूरत पड़ने पर 1000 एम्बुलेंस के साथ दिल्ली कूच किया जाएगा। डॉक्टरों का कहना है कि उनका उद्देश्य अपनी मांग सरकार तक पहुंचाना और बकाया भुगतान का समाधान करवाना है।
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MPPSC Assistant Professor Exam: इंदौर में 30 Centers पर 12 हजार Candidates, Three-Layer Security में परीक्षा

MPPSC Assistant Professor Exam: इंदौर में 30 Centers पर 12 हजार Candidates, Three-Layer Security में परीक्षा

इंदौर में MPPSC Assistant Professor Exam का आयोजन किया गया। परीक्षा के लिए शहर में कुल 30 परीक्षा केंद्र बनाए गए, जहां करीब 12 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए। परीक्षा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से कराने के लिए केंद्रों पर सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए। परीक्षा में शामिल होने वाले कई अभ्यर्थी निर्धारित समय से करीब डेढ़ घंटे पहले ही परीक्षा केंद्रों पर पहुंच गए। सुबह से ही केंद्रों के बाहर उम्मीदवारों की आवाजाही देखने को मिली। 30 परीक्षा केंद्रों पर करीब 12 हजार अभ्यर्थी MPPSC Assistant Professor परीक्षा के लिए इंदौर में 30 केंद्र निर्धारित किए गए थे। इन केंद्रों पर लगभग 12 हजार अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। दूर-दराज के इलाकों से आने वाले कई उम्मीदवारों ने समय से पहले पहुंचना बेहतर समझा, ताकि ट्रैफिक या किसी अन्य वजह से परीक्षा केंद्र पहुंचने में परेशानी न हो। Three-Layer Security में निगरानी परीक्षा को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा की तीन स्तर की व्यवस्था की। केंद्रों पर अभ्यर्थियों की जांच और निगरानी के लिए अलग-अलग स्तर पर व्यवस्था रखी गई। परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश से पहले जरूरी जांच की गई। अधिकारियों और सुरक्षा कर्मचारियों ने परीक्षा के दौरान भी व्यवस्थाओं पर नजर बनाए रखी। डेढ़ घंटे पहले पहुंचने लगे Students परीक्षा शुरू होने से काफी पहले ही अभ्यर्थी केंद्रों पर पहुंचने लगे थे। कई स्टूडेंट्स ने बताया कि वे किसी तरह की देरी का जोखिम नहीं लेना चाहते थे। केंद्रों के बाहर उम्मीदवारों में परीक्षा को लेकर उत्सुकता और तैयारी का माहौल दिखाई दिया। समय से पहले पहुंचने के कारण अभ्यर्थियों को प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने में भी सुविधा मिली।
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Navy Jawan Honeytrap Case: पाकिस्तानी एजेंट के जाल में फंसा नौसेना जवान, Secret Information Leak करने का आरोप

Navy Jawan Honeytrap Case: पाकिस्तानी एजेंट के जाल में फंसा नौसेना जवान, Secret Information Leak करने का आरोप

तमिलनाडु के कोयंबटूर से नौसेना के एक जवान को गिरफ्तार किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि जवान एक पाकिस्तानी एजेंट के हनीट्रैप में फंस गया था और उसने संवेदनशील खुफिया जानकारी साझा की। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि जवान ने किस तरह की जानकारी और किन लोगों के साथ साझा की थी। सोशल मीडिया के जरिए संपर्क का आरोप जांच के मुताबिक, जवान की कथित तौर पर सोशल मीडिया के जरिए एक महिला से पहचान हुई। बातचीत धीरे-धीरे बढ़ी और इसी दौरान उसे कथित हनीट्रैप में फंसाया गया। एजेंसियों को शक है कि संपर्क में आई महिला का संबंध पाकिस्तानी खुफिया नेटवर्क से हो सकता है। हालांकि, मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच अभी जारी है। कोयंबटूर से हुई गिरफ्तारी नौसेना के जवान को कोयंबटूर से गिरफ्तार किया गया। उस पर संवेदनशील जानकारी लीक करने का आरोप लगाया गया है। सुरक्षा एजेंसियां उसके मोबाइल फोन, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य संपर्कों की जांच कर रही हैं। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि कथित तौर पर कौन-सी जानकारी साझा की गई और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा सकता था। 2026 में तीसरा मामला रिपोर्ट के अनुसार, इस साल पाकिस्तानी एजेंट के कथित हनीट्रैप से जुड़ा यह तीसरा मामला बताया जा रहा है। इससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ी है। ऐसे मामलों में एजेंसियां सोशल मीडिया के जरिए होने वाले संदिग्ध संपर्कों और संवेदनशील संस्थानों से जुड़े कर्मचारियों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखती हैं। जांच में सामने आएगी पूरी सच्चाई फिलहाल मामले की जांच जारी है और गिरफ्तार जवान से पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित तौर पर जानकारी कब, कैसे और किसे भेजी गई। आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही इस मामले से जुड़े बाकी तथ्य पूरी तरह स्पष्ट हो पाएंगे।
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Shivraj Singh Chouhan Statement: ‘एक कचौड़ी, दो समोसा’ पर बोले शिवराज, ऐसी नौबत क्यों आई?

Shivraj Singh Chouhan Statement: ‘एक कचौड़ी, दो समोसा’ पर बोले शिवराज, ऐसी नौबत क्यों आई?

केंद्रीय मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने महिलाओं की सुरक्षा और समाज में पुरुषों की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। ‘एक कचौड़ी, दो समोसा’ वाली घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी, इस पर समाज को आत्ममंथन करने की जरूरत है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अगर बेटियां पुरुषों पर भरोसा नहीं कर पाएंगी तो समाज आगे कैसे बढ़ेगा। उन्होंने महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और पुरुषों की जिम्मेदारी को लेकर लोगों से सोचने की अपील की। ‘ऐसी नौबत क्यों आई?’ शिवराज ने ‘एक कचौड़ी, दो समोसा’ वाली घटना का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई। उनका कहना था कि समाज में ऐसा माहौल होना चाहिए जहां महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस करें और पुरुषों पर भरोसा कर सकें। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं को सिर्फ एक मामले के तौर पर देखने के बजाय समाज को इनके पीछे की वजहों पर भी विचार करना चाहिए। ‘बेटियां पुरुषों पर भरोसा नहीं करेंगी तो समाज कैसे बढ़ेगा’ शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि समाज में महिलाओं और पुरुषों के बीच विश्वास जरूरी है। उनके मुताबिक, अगर बेटियां पुरुषों पर भरोसा नहीं कर पाएंगी तो सामाजिक विकास प्रभावित होगा। उन्होंने पुरुषों से भी अपनी जिम्मेदारी समझने और महिलाओं के सम्मान व सुरक्षा के प्रति संवेदनशील रहने की बात कही। समाज को करना होगा आत्ममंथन शिवराज ने कहा कि महिलाओं के साथ होने वाली घटनाओं पर सिर्फ प्रतिक्रिया देने के बजाय समाज को आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने पुरुषों के व्यवहार और सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल देना पूरे समाज की जिम्मेदारी है। महिला सुरक्षा पर फिर चर्चा शिवराज सिंह चौहान का यह बयान ऐसे समय आया है जब महिलाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर उनके साथ होने वाले व्यवहार को लेकर लगातार चर्चा होती रहती है।
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Delhi-NCR Weather Update: दिल्ली में धूल भरी आंधी के बाद बारिश का Alert, ओले गिरने की संभावना

Delhi-NCR में मौसम का मिजाज बदल गया है। कई इलाकों में धूल भरी आंधी चलने के बाद अब बारिश और ओलावृष्टि की संभावना ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम में इस बदलाव से तापमान में गिरावट आ सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विभाग (IMD) ने 15 अक्टूबर को दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान जताया है। कुछ स्थानों पर ओले गिरने की भी आशंका है। ऐसे में लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। Delhi Weather Today: तेज हवाओं के साथ बारिश का अनुमान दिल्ली-NCR में मौसम बदलने के पीछे पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ी गतिविधियां अहम मानी जा रही हैं। इसके प्रभाव से आसमान में बादल छाने, गरज-चमक होने और कई जगह बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। तेज झोंकों के दौरान यह गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की आशंका है। ऐसे में खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों और वाहन चालकों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है। Delhi-NCR Rain Alert: किन इलाकों में दिखेगा असर? दिल्ली के साथ नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। अलग-अलग इलाकों में बारिश की तीव्रता अलग रह सकती है। कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और ओले गिरने की आशंका भी जताई गई है। हालांकि, हर इलाके में एक जैसी बारिश होना जरूरी नहीं है। इसलिए घर से निकलने से पहले स्थानीय मौसम अपडेट जरूर देख लें। तापमान में गिरावट से मिलेगी राहत? अक्टूबर के महीने में दिल्ली-NCR में मौसम आमतौर पर धीरे-धीरे सुहावना होने लगता है। ऐसे में बारिश और बादलों के कारण तापमान में गिरावट आ सकती है। इससे दिन की गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, बारिश के बाद उमस और स्थानीय मौसम की स्थिति के आधार पर लोगों को अलग-अलग अनुभव हो सकता है। तापमान में कितनी गिरावट आएगी, यह आने वाले दिनों के मौसम पर निर्भर करेगा। आंधी और बारिश के दौरान इन बातों का रखें ध्यान मौसम में अचानक बदलाव के दौरान छोटी-सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। इसलिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहतर रहेगा। 16 अक्टूबर से मौसम में बदलाव की उम्मीद मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 16 अक्टूबर से उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां कम हो सकती हैं। इसके बाद दिल्ली-NCR में भी मौसम धीरे-धीरे सामान्य होने की संभावना है। हालांकि, स्थानीय परिस्थितियों के कारण पूर्वानुमान में बदलाव हो सकता है। फिलहाल दिल्ली-NCR के लोगों के लिए जरूरी है कि वे मौसम को हल्के में न लें। बारिश से राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन तेज हवाओं, बिजली चमकने और ओलावृष्टि की आशंका के बीच सतर्क रहना सबसे बेहतर होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Supreme Court

Supreme Court Decision: धर्म बदलने से क्या खत्म होगा आरक्षण? कोर्ट ने साफ की स्थिति

धर्म बदलने के बाद क्या आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा? इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु से जुड़े एक अहम मामले में अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। यह मामला उन लोगों से जुड़ा है, जिन्होंने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाया और इसके बाद पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) यानी Backward Class (Muslim) श्रेणी में आरक्षण का लाभ लेने का दावा किया था। Supreme Court के फैसले के मुताबिक, केवल इस्लाम अपनाने से कोई व्यक्ति तमिलनाडु की अधिसूचित पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) श्रेणी में अपने आप शामिल नहीं हो सकता। इस फैसले ने धर्म परिवर्तन और आरक्षण की पात्रता से जुड़े कानूनी सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। Supreme Court का क्या है पूरा फैसला? सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें कुछ समुदायों से इस्लाम अपनाने वाले लोगों को Backward Class (Muslim) श्रेणी में आरक्षण देने की व्यवस्था की गई थी। अदालत के फैसले का मुख्य आधार यह है कि किसी व्यक्ति की पहले की जातिगत पहचान के कारण उसे दूसरी धार्मिक श्रेणी में आरक्षण का पात्र अपने आप नहीं माना जा सकता। संबंधित आरक्षण श्रेणी के लिए निर्धारित कानूनी शर्तों को पूरा करना जरूरी है। इस मामले में फैसला तमिलनाडु की विशिष्ट आरक्षण व्यवस्था से जुड़ा है। इसलिए इसे देश में सभी तरह के आरक्षण पर लागू होने वाले एक समान प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कैसे शुरू हुआ धर्म परिवर्तन और Reservation का मामला? इस विवाद की शुरुआत तमिलनाडु सरकार के 9 मार्च 2024 के सरकारी आदेश से हुई थी। इस आदेश के तहत कुछ ऐसे लोगों को पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) श्रेणी में शामिल करने की व्यवस्था की गई थी, जो पहले पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, विमुक्त समुदाय या अनुसूचित जाति से संबंधित थे और बाद में उन्होंने इस्लाम अपना लिया था। सरकार के इस फैसले को मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। 25 जून 2026 को हाई कोर्ट ने सरकारी आदेश को रद्द कर दिया। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। राज्य सरकार का कहना था कि धर्म परिवर्तन करने से किसी व्यक्ति की सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन से जुड़ी परिस्थितियां जरूरी नहीं कि बदल जाएं। इसी आधार पर सरकार ने अपने आदेश का बचाव किया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इसके साथ ही इस मामले में सरकार की चुनौती सफल नहीं रही। क्या धर्म बदलने पर खत्म हो जाएगा SC और OBC Reservation? Supreme Court के फैसले के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों को अब किसी भी तरह का आरक्षण नहीं मिलेगा। लेकिन इस मामले को समझते समय अलग-अलग आरक्षण श्रेणियों के नियमों पर ध्यान देना जरूरी है। यह फैसला मुख्य रूप से तमिलनाडु की Backward Class (Muslim) श्रेणी में पात्रता से संबंधित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने सभी धर्म परिवर्तन करने वालों के लिए हर प्रकार के आरक्षण पर एक समान रोक लगा दी है। अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और राज्य की विशेष पिछड़ा वर्ग श्रेणियों के लिए अलग-अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं। अनुसूचित जाति के दर्जे से जुड़े नियम Constitution (Scheduled Castes) Order, 1950 में दिए गए हैं। वहीं, अन्य श्रेणियों में पात्रता संबंधित कानूनों और अधिसूचनाओं के अनुसार तय होती है। इसलिए किसी व्यक्ति को आरक्षण मिलेगा या नहीं, यह उसकी संबंधित श्रेणी और उस पर लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करता है। तमिलनाडु सरकार की दलील क्यों थी अहम? तमिलनाडु सरकार ने अपने आदेश के समर्थन में सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन का मुद्दा उठाया था। सरकार की दलील थी कि धर्म बदलने से किसी व्यक्ति के सामने मौजूद सामाजिक चुनौतियां अपने आप खत्म नहीं हो जातीं। दूसरी ओर, मामले में सवाल यह था कि क्या पुराने जातिगत दर्जे के आधार पर किसी व्यक्ति को मुस्लिम पिछड़ा वर्ग की अधिसूचित श्रेणी में शामिल किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस विवाद में संबंधित आरक्षण श्रेणी की पात्रता और कानूनी शर्तों के महत्व को रेखांकित किया है। आम लोगों के लिए क्या है इसका मतलब? इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आरक्षण का लाभ पाने के लिए केवल धर्म परिवर्तन या पुरानी जातिगत पहचान को पर्याप्त नहीं माना जा सकता। संबंधित श्रेणी के नियमों के तहत पात्रता साबित करना जरूरी है। धर्म परिवर्तन और आरक्षण से जुड़े मामलों में सामाजिक परिस्थितियों के साथ-साथ कानूनी प्रावधानों की भी अहम भूमिका होती है। इसी वजह से किसी एक मामले के फैसले को सभी राज्यों और सभी आरक्षण श्रेणियों पर सीधे लागू मानना सही नहीं होगा। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। यह फैसला धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण की पात्रता को लेकर चल रही कानूनी बहस में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi

Delhi Protest Case: इंटरनेट बंदी पर केंद्र ने मांगी माफी, आज Supreme Court में सुनवाई

Delhi में CJP (Cockroach Janta Party) के प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट सेवाएं बंद करने और मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां लगाने का मामला लगातार चर्चा में है। 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखना पड़ा। तीनों की ओर से अदालत में बिना शर्त माफी मांगी गई है। अब गुरुवार, 15 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए थे। अब अदालत यह देखेगी कि इन कदमों से उसके पहले के निर्देशों का उल्लंघन हुआ या नहीं। Internet Shutdown: केंद्र सरकार ने क्या सफाई दी? केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी है। सरकार ने कहा कि अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने का कोई इरादा नहीं था। केंद्र के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर रायसीना हिल्स के चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक बंद की गई थीं। सरकार ने इसके पीछे संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला दिया। केंद्र ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि प्रतिबंध सीमित इलाके और तय समय के लिए लगाया गया था। साथ ही, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अवमानना नोटिस वापस लेने का अनुरोध किया है। Delhi Metro के 45 स्टेशनों पर क्यों लगी पाबंदी? प्रदर्शन के दिन दिल्ली मेट्रो के कुछ स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकास को सीमित कर दिया गया था। इस फैसले के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और मेट्रो सेवाओं पर लगे प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठने लगे। DMRC ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि दिल्ली के कुल 303 मेट्रो स्टेशनों में से 45 पर पाबंदियां लगाई गई थीं। कॉर्पोरेशन के मुताबिक, उस दिन 271 ट्रेनों ने कुल 4,157 चक्कर लगाए। DMRC ने अपने हलफनामे में कहा कि संबंधित पाबंदियां दिल्ली पुलिस के निर्देशों के बाद लागू की गई थीं। मेट्रो प्रबंधन ने भी बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि उसका उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। CJP Protest में 7 हजार लोगों को हिरासत में लेने का दावा इस पूरे विवाद में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का मुद्दा भी अहम है। याचिकाकर्ताओं की ओर से करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया है। उन्होंने कार्रवाई के तरीके और उसकी वैधता पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान संभावित अव्यवस्था को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए गए थे। पुलिस के मुताबिक, लोगों को अस्थायी केंद्रों में ले जाया गया और कुछ घंटों के भीतर रिहा कर दिया गया। हालांकि, हिरासत में लिए गए लोगों की सटीक संख्या और कार्रवाई की वैधता को लेकर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या कहा था? प्रदर्शन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को आम लोगों की आवाजाही और सार्वजनिक परिवहन को बाधित नहीं करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से संचालित करने तथा इंटरनेट सेवाओं को बाधित न करने पर भी जोर दिया था। इसके बाद अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगते हुए अवमानना नोटिस जारी किए। अब केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और DMRC ने अपने हलफनामे दाखिल कर माफी मांगी है और अपने फैसलों के पीछे की परिस्थितियों को स्पष्ट किया है। CJP प्रदर्शन की वजह क्या थी? CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शन से जुड़ी मांगों में SIR यानी Special Intensive Revision के तहत मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया का विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग शामिल थी। प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई और कुछ मेट्रो स्टेशनों पर आवाजाही सीमित कर दी गई। इंटरनेट बंद होने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया, क्योंकि इससे आम लोगों के संचार और रोजमर्रा के कामकाज पर असर पड़ने को लेकर सवाल उठे। आज की Supreme Court Hearing में क्या होगा? 15 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में अदालत केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और DMRC के जवाबों पर विचार करेगी। इस दौरान इंटरनेट बंद करने, मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदी लगाने और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने से जुड़े मुद्दे अहम रहेंगे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट अधिकारियों की माफी स्वीकार करेगा या कथित अवमानना के मामले में आगे की कार्रवाई करेगा। अदालत भविष्य में ऐसी परिस्थितियों में इंटरनेट सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े निर्देशों पर भी विचार कर सकती है। फिलहाल, अधिकारियों ने अपना पक्ष रख दिया है। अब अदालत के फैसले से साफ होगा कि सुरक्षा के नाम पर लगाए गए प्रतिबंधों और आम नागरिकों की सुविधाओं के बीच संतुलन को लेकर आगे क्या दिशा तय होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
मां स्कंदमाता

Navratri 2026: पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा, जानें महत्त्व, कथा और मंत्र

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। भगवान कार्तिकेय को स्कंद भी कहा जाता है। उन्हें गोद में धारण करने के कारण देवी पार्वती के इस स्वरूप का नाम स्कंदमाता पड़ा। मां का यह रूप मातृत्व, प्रेम और करुणा का प्रतीक है। मां स्कंदमाता की कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय को जन्म दिया, जो देवताओं की सेना के सेनापति बने। स्कंदमाता का स्वरूप एक मां की शक्ति और अपने संतान के प्रति अटूट स्नेह को दर्शाता है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः। भोग: मां को केला अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

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