आपका चैनल --
ताज़ा खबर
BREAKINGदेश-हरपलArabian Sea में India-Pakistan Warships की टक्कर, 15 साल पुरानी घटना फिर चर्चा मेंBREAKINGदेश-हरपलJantar Mantar Case Update: सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी बदलने की मांग ठुकराई, जांच रहेगी जारीBREAKINGदेश-हरपलKarnataka कांग्रेस विधायक की भतीजी पर बिना काम ₹70 हजार सैलरी लेने का आरोपBREAKINGदेश-हरपलRajasthan Politics: निकाय चुनाव के बाद तेज हुआ जोड़-तोड़, पार्षदों की Resort Politics चर्चा मेंBREAKINGस्पोर्ट्सIndia vs Afghanistan T20: Sanju Samson का तूफान, Rohit Sharma के खास क्लब में शामिल; Afghanistan फिर हाराBREAKINGप्रदेशग्वालियर जिला न्यायालय में 19 सितंबर को लगेगा नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर, पहले दिन 112 के ब्लड सैंपलBREAKINGदेश-हरपलPM Modi Schoolmate Asgar: 8 दिन बाद BJP MLA ने छोड़ा जमीन का कब्जा, Land Dispute में बड़ा TwistBREAKINGवर्ल्ड न्यूज़Donald Trump Israel Arms Deal: इजराइल को 26 हजार करोड़ के हथियार, 40 हजार Heavy Bombs शामिलBREAKINGदेश-हरपलArabian Sea में India-Pakistan Warships की टक्कर, 15 साल पुरानी घटना फिर चर्चा मेंBREAKINGदेश-हरपलJantar Mantar Case Update: सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी बदलने की मांग ठुकराई, जांच रहेगी जारीBREAKINGदेश-हरपलKarnataka कांग्रेस विधायक की भतीजी पर बिना काम ₹70 हजार सैलरी लेने का आरोपBREAKINGदेश-हरपलRajasthan Politics: निकाय चुनाव के बाद तेज हुआ जोड़-तोड़, पार्षदों की Resort Politics चर्चा मेंBREAKINGस्पोर्ट्सIndia vs Afghanistan T20: Sanju Samson का तूफान, Rohit Sharma के खास क्लब में शामिल; Afghanistan फिर हाराBREAKINGप्रदेशग्वालियर जिला न्यायालय में 19 सितंबर को लगेगा नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर, पहले दिन 112 के ब्लड सैंपलBREAKINGदेश-हरपलPM Modi Schoolmate Asgar: 8 दिन बाद BJP MLA ने छोड़ा जमीन का कब्जा, Land Dispute में बड़ा TwistBREAKINGवर्ल्ड न्यूज़Donald Trump Israel Arms Deal: इजराइल को 26 हजार करोड़ के हथियार, 40 हजार Heavy Bombs शामिल

NE

News Elementor

Banner

बिलासपुर लोक अदालत के फैसले पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, बिना समझौते ठेकेदार को मुआवजे से मुक्त करना गलत

Table of Content

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में लोक अदालत द्वारा बिना किसी आपसी समझौते के मुआवजे से जुड़े मामले को खत्म करने के फैसले को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोक अदालत को किसी मामले के गुण-दोष के आधार पर फैसला सुनाने का अधिकार नहीं है।

जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की अदालत ने कहा कि लोक अदालत का अधिकार क्षेत्र दोनों पक्षों की आपसी सहमति और समझौते के आधार पर विवाद का निपटारा करने तक सीमित है। यदि पक्षों के बीच समझौता नहीं होता है, तो मामले को संबंधित अदालत में वापस भेजना जरूरी है।

हाईकोर्ट ने राज्य विद्युत मंडल (CSPDCL) की याचिका स्वीकार करते हुए लेबर कोर्ट को मामले की दोबारा सुनवाई कर 5 महीने के भीतर कानून के अनुसार फैसला सुनाने का निर्देश दिया है।

सहमति के बिना ठेकेदार को जिम्मेदारी से मुक्त करना गलत

हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक मामले के सभी पक्षों के बीच आपसी सहमति नहीं बनती, तब तक लोक अदालत ठेकेदार को मुआवजा देने के दायित्व से मुक्त नहीं कर सकती।

कोर्ट ने CSPDCL के खिलाफ पारित एकपक्षीय आदेश और लोक अदालत की ओर से 2014 में जारी अवार्ड को रद्द कर दिया। साथ ही लेबर कोर्ट को पूरे मामले की फिर से सुनवाई करने का आदेश दिया।

क्या है लोक अदालत का अधिकार क्षेत्र?

लोक अदालत विवादों को आपसी सहमति और समझौते के जरिए सुलझाने का वैकल्पिक मंच है। इसे विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत वैधानिक दर्जा प्राप्त है।

लोक अदालत का उद्देश्य अदालतों में लंबित मामलों या मुकदमा दायर होने से पहले के विवादों का शांतिपूर्ण तरीके से समाधान करना है।

समझौता होने पर लोक अदालत का फैसला सिविल कोर्ट की डिक्री के समान माना जाता है और संबंधित पक्षों पर बाध्यकारी होता है। सामान्य परिस्थितियों में इसके खिलाफ अपील का प्रावधान नहीं होता।

हालांकि, यदि पक्षों के बीच समझौता नहीं होता है तो लोक अदालत को मामले के गुण-दोष पर फैसला सुनाने के बजाय उसे संबंधित कोर्ट में वापस भेजना होता है।

2012-13 में करंट की चपेट में आने से हुई थी युवक की मौत

मामला CSPDCL से जुड़ा है। कंपनी ने बिजली मेंटेनेंस और अन्य कार्यों के लिए अभिनव तिवारी को ठेका दिया था। ठेकेदार ने छोटू उर्फ शत्रुहन नाम के युवक को काम पर रखा था।

साल 2012-13 में काम के दौरान छोटू करंट की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौत हो गई।

इसके बाद छोटू के माता-पिता ने कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के तहत लेबर कोर्ट में दावा पेश किया। उन्होंने करीब 9 लाख 880 रुपएमुआवजे की मांग की थी।

CSPDCL ने यह रकम कोर्ट में जमा कर दी थी। हालांकि, कंपनी का कहना था कि मुआवजा देने की वास्तविक जिम्मेदारी ठेकेदार अभिनव तिवारी की है और जमा की गई राशि ठेकेदार से वसूल की जानी चाहिए।

वहीं, ठेकेदार ने छोटू को अपना कर्मचारी मानने से इनकार कर दिया और मुआवजा देने की जिम्मेदारी भी स्वीकार नहीं की।

लोक अदालत में बिना समझौते के बंद कर दिया गया मामला

CSPDCL और ठेकेदार के बीच विवाद लेबर कोर्ट में चल रहा था। इसी दौरान ठेकेदार ने मामला लोक अदालत में पेश किया।

लोक अदालत में छोटू के परिजनों ने कहा कि मुआवजे की राशि पहले ही कोर्ट में जमा हो चुकी है, इसलिए वे मामले को मेरिट के आधार पर आगे नहीं बढ़ाना चाहते।

इसके बाद 6 दिसंबर 2014 को लोक अदालत ने मामले को बंद कर दिया। साथ ही ठेकेदार को मुआवजा देने की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया।

हालांकि, इस दौरान CSPDCL और ठेकेदार के बीच कोई आपसी समझौता नहीं हुआ था।

CSPDCL ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

लोक अदालत के इस फैसले के खिलाफ CSPDCL ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कंपनी ने अपनी याचिका में कहा कि लोक अदालत ने उसका पक्ष सुने बिना एकपक्षीय आदेश जारी किया, जबकि मामले में पक्षकारों के बीच कोई समझौता भी नहीं हुआ था।

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद CSPDCL की अपील स्वीकार कर ली और लोक अदालत के 2014 के अवार्ड को रद्द कर दिया।

अब लेबर कोर्ट इस मामले की दोबारा सुनवाई करेगा और हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार 5 महीने के भीतर मामले का फैसला करना होगा।

Muskan Negi

muskannegi1302@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Editor's Picks

Pakistan

Arabian Sea में India-Pakistan Warships की टक्कर, 15 साल पुरानी घटना फिर चर्चा में

भारत (India) और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच रिश्तों में तनाव के बीच अरब सागर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने दोनों देशों की नौसेनाओं को फिर चर्चा में ला दिया है। 15 सितंबर 2026 की शाम उत्तरी अरब सागर में पाकिस्तानी नौसेना के एक जहाज की भारतीय नौसेना के युद्धपोत से टक्कर हो गई। घटना के बाद भारत ने इसे गंभीरता से लेते हुए नई दिल्ली में पाकिस्तान के Charge d’Affaires को तलब किया और औपचारिक विरोध दर्ज कराया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, टक्कर में किसी बड़े नुकसान या भारतीय नौसैनिक के घायल होने की खबर नहीं है। Surveillance Mission पर था भारतीय युद्धपोत रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय नौसेना का युद्धपोत समुद्र में अपने नियमित surveillance mission पर था। इसी दौरान पाकिस्तानी नौसेना का जहाज भारतीय युद्धपोत के करीब पहुंचा। भारतीय पक्ष के अनुसार, पाकिस्तानी जहाज तेज गति से आगे बढ़ रहा था और उसके maneuver के दौरान दोनों नौसैनिक जहाज आपस में टकरा गए। घटना अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में हुई। टक्कर के बाद भारतीय युद्धपोत ने अपना मिशन जारी रखा। शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े structural damage की जानकारी सामने नहीं आई है। भारत ने Pakistan के सामने जताया Strong Protest घटना के बाद विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के Charge d’Affaires को तलब किया। भारत ने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों के व्यवहार को “unacceptable and unprofessional” बताया। भारत की ओर से कहा गया कि समुद्र में सैन्य जहाजों को अंतरराष्ट्रीय maritime safety practices और दोनों देशों के बीच लागू समझौतों का ध्यान रखना चाहिए। भारत ने इस्लामाबाद में मौजूद अपने Charge d’Affaires को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने यह मामला उठाने का निर्देश दिया है। 1991 के Agreement का भी हुआ जिक्र इस पूरे मामले में 1991 India-Pakistan Agreement का भी जिक्र सामने आया है। भारत ने समझौते के Article 10 का हवाला देते हुए सैन्य गतिविधियों के दौरान जरूरी सावधानी और निर्धारित नियमों के पालन पर जोर दिया है। इस घटना को लेकर अब दोनों देशों के अधिकारियों के बीच diplomatic level पर बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ सकता है। 15 साल पहले भी टकराए थे दोनों देशों के Warships भारत और पाकिस्तान के युद्धपोतों के बीच समुद्र में ऐसी घटना पहले भी हो चुकी है। करीब 15 साल पहले 2011 में Gulf of Aden में भारतीय नौसेना के INS Godavari और पाकिस्तानी नौसेना के PNS Babur के बीच भी टक्कर की घटना सामने आई थी। उस समय दोनों देशों के जहाज MV Suez से जुड़े anti-piracy operation के दौरान क्षेत्र में मौजूद थे। घटना के बाद भारत ने पाकिस्तान के सामने विरोध दर्ज कराया था। 2011 की घटना में INS Godavari के helicopter deck की safety net को मामूली नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। 2011 से 2026 तक फिर वही समुद्री तनाव करीब डेढ़ दशक बाद दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों से जुड़ी ऐसी घटना का सामने आना ध्यान खींच रहा है। हालांकि, दोनों घटनाओं की परिस्थितियां एक जैसी नहीं थीं और इनके बीच सीधे तौर पर समानता निकालना उचित नहीं होगा। फिलहाल 2026 की घटना में सबसे अहम बात यह है कि भारत ने राजनयिक स्तर पर पाकिस्तान के सामने आपत्ति दर्ज करा दी है। अरब सागर रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है। ऐसे में वहां भारतीय और पाकिस्तानी नौसैनिक जहाजों की गतिविधियों के दौरान छोटी-सी घटना भी diplomatic discussion का विषय बन सकती है। अब आगे क्या? ताजा मामले में भारत की ओर से विरोध दर्ज कराया जा चुका है। अब आगे दोनों देशों के संबंधित अधिकारी इस घटना से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों पर चर्चा कर सकते हैं। फिलहाल किसी बड़े नुकसान की जानकारी नहीं है, लेकिन यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि India-Pakistan के बीच समुद्री क्षेत्र में communication, navigation और safety protocols कितने महत्वपूर्ण हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Jantar Mantar

Jantar Mantar Case Update: सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी बदलने की मांग ठुकराई, जांच रहेगी जारी

जंतर-मंतर (Jantar Mantar) से जुड़े छात्र प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाई-पावर्ड कमेटी को लेकर तस्वीर साफ कर दी है। अदालत ने कमेटी के पुनर्गठन और उसके सदस्यों में बदलाव की मांग को स्वीकार नहीं किया। इसका मतलब है कि पहले से बनाई गई पांच सदस्यीय कमेटी ही अब मामले की जांच आगे बढ़ाएगी। इस मामले में प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। इन्हीं पहलुओं की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को High-Powered Inquiry Committee का गठन किया था। जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में बनी है कमेटी सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित कमेटी की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। कमेटी में कुल पांच सदस्य हैं, जिन्हें मामले से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जांच की जिम्मेदारी दी गई है। हाल की सुनवाई में कमेटी के एक सदस्य को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई। याचिकाकर्ता की ओर से सदस्य की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए हितों के टकराव की आशंका जताई गई और कमेटी में बदलाव की मांग की गई। हालांकि, अदालत ने इस मांग को मंजूरी नहीं दी। अब मौजूदा कमेटी ही अपनी तय जिम्मेदारियों के अनुसार जांच करेगी। Protest के दौरान हुई घटनाओं की होगी पड़ताल High-Powered Committee को जंतर-मंतर समेत अन्य स्थानों पर हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े घटनाक्रम की जांच करनी है। प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, पुलिस कार्रवाई और सामने आई शिकायतों से जुड़े तथ्यों को जांच के दायरे में रखा गया है। कमेटी संबंधित लोगों की बात सुन सकती है और मामले से जुड़े दस्तावेज या अन्य सामग्री भी देख सकती है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी जाएगी। 17 Metro Stations बंद करने का मामला भी उठा सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में दिल्ली के 17 मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने का मुद्दा भी सामने आया। प्रदर्शन के दौरान इन स्टेशनों को बंद रखने के फैसले पर सवाल उठाए गए। इस मुद्दे पर अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। ऐसे में अब जांच और आगे की सुनवाई में मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के फैसले से जुड़े कारणों पर भी चर्चा हो सकती है। नाबालिगों की सुरक्षा पर भी हुई बात मामले में सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े दो नाबालिगों की सुरक्षा का मुद्दा भी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा गया। उनकी ओर से कथित धमकियों और पुलिस कार्रवाई को लेकर चिंता जताई गई। अदालत ने मामले से जुड़े लोगों की सुरक्षा के पहलू पर भी ध्यान देने की बात कही है। इससे साफ है कि सुनवाई में केवल प्रदर्शन की घटना ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े दूसरे मानवीय पहलुओं पर भी गौर किया जा रहा है। अब कमेटी की Report का इंतजार सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद हाई-पावर्ड कमेटी में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। कमेटी अपने मौजूदा स्वरूप में जांच जारी रखेगी और अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपेगी। अब सबकी नजर कमेटी की जांच और उसकी रिपोर्ट पर रहेगी। रिपोर्ट सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट मामले में आगे के निर्देश दे सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Karnataka कांग्रेस विधायक की भतीजी पर बिना काम ₹70 हजार सैलरी लेने का आरोप

Karnataka कांग्रेस विधायक की भतीजी पर बिना काम ₹70 हजार सैलरी लेने का आरोप

Karnataka में कांग्रेस विधायक की भतीजी को लेकर सरकारी नौकरी से जुड़ा एक मामला सामने आया है। आरोप है कि उन्हें बिना नियमित रूप से काम किए हर महीने करीब 70 हजार रुपये की सैलरी मिल रही है। बताया जा रहा है कि वह पिछले करीब 6 महीने से सरकारी क्लीनिक नहीं गईं, जहां उनकी नियुक्ति बताई गई है। मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि सरकारी नौकरी के साथ वह अपनी पढ़ाई भी कर रही हैं। इसको लेकर सरकारी व्यवस्था और नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, संबंधित महिला की नियुक्ति एक सरकारी क्लीनिक में की गई थी। हालांकि, आरोप है कि लंबे समय से वह क्लीनिक में अपनी ड्यूटी पर नहीं पहुंच रही हैं, इसके बावजूद उनका वेतन जारी है। मामला सामने आने के बाद संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली और उपस्थिति व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक जांच और उसके निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यह मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में है, क्योंकि महिला का संबंध एक कांग्रेस विधायक के परिवार से बताया जा रहा है। संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया और विभागीय जांच के बाद मामले में आगे की स्थिति साफ होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rajasthan

Rajasthan Politics: निकाय चुनाव के बाद तेज हुआ जोड़-तोड़, पार्षदों की Resort Politics चर्चा में

राजस्थान (Rajasthan) में निकाय चुनाव खत्म हो चुके हैं, नतीजे भी सामने आ गए हैं, लेकिन सियासी हलचल अभी थमी नहीं है। अब नजरें नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं में बोर्ड बनाने पर टिक गई हैं। जहां किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, वहां निर्दलीय और बागी पार्षदों की भूमिका अचानक काफी अहम हो गई है। इसी के साथ राजस्थान में एक बार फिर ‘Resort Politics’ यानी पार्षदों की बाड़ेबंदी की चर्चा तेज हो गई है। कई जगह राजनीतिक दल अपने पार्षदों को होटल और रिसॉर्ट में ठहरा रहे हैं। इस बीच कुछ जगहों पर पार्षदों को अपने पक्ष में करने के लिए करोड़ों रुपये की कथित बोली लगाए जाने की चर्चाएं भी सामने आई हैं। हालांकि, इन रकमों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बोर्ड बनाने के लिए शुरू हुआ नंबर गेम निकाय चुनाव के बाद अब राजनीतिक दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बहुमत जुटाने की है। जिन निकायों में बीजेपी या कांग्रेस बहुमत से पीछे रह गई हैं, वहां निर्दलीय पार्षदों का समर्थन निर्णायक हो सकता है। यही वजह है कि चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद पार्षदों से संपर्क साधने का दौर शुरू हो गया। कई जगह पार्टी नेतृत्व अपने निर्वाचित पार्षदों को एक साथ रख रहा है, ताकि बोर्ड गठन तक राजनीतिक समीकरण में कोई बड़ा बदलाव न हो। होटल और रिसॉर्ट बने सियासी ठिकाने राजस्थान में Resort Politics कोई नई बात नहीं है। जब भी किसी चुनाव के बाद बहुमत का आंकड़ा उलझता है, तब राजनीतिक दल अपने समर्थक पार्षदों को एक जगह रखने की रणनीति अपनाते हैं। अजमेर समेत कई शहरों में पार्षदों की बाड़ेबंदी की खबरें सामने आई हैं। जयपुर में भी पार्टी उम्मीदवारों को रिसॉर्ट में ठहराने की जानकारी सामने आई। इसका मकसद पार्षदों को एकजुट रखना और विरोधी खेमे की संभावित सेंध को रोकना बताया जा रहा है। निर्दलीय पार्षदों की बढ़ी अहमियत इस पूरे सियासी खेल में सबसे ज्यादा चर्चा निर्दलीय पार्षदों की है। कई जगह मुकाबला इतना करीबी है कि कुछ निर्दलीय पार्षदों का समर्थन पूरे बोर्ड का गणित बदल सकता है। ऐसे में जिन पार्षदों को चुनाव के दौरान ज्यादा महत्व नहीं मिला, वे अब बोर्ड गठन के समय ‘किंगमेकर’ की भूमिका में नजर आ सकते हैं। राजनीतिक दलों के लिए उनका समर्थन हासिल करना इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है। करोड़ों की बोली की चर्चा कितनी सच? निकाय चुनाव के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में पार्षदों को अपने पक्ष में करने के लिए बड़ी रकम की पेशकश की चर्चाएं चल रही हैं। कुछ रिपोर्टों में करोड़ों रुपये तक की कथित बोली लगाए जाने का जिक्र है। हालांकि, किस पार्षद को कितनी रकम की पेशकश हुई, इसका कोई स्वतंत्र और ठोस प्रमाण सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आया है। इसलिए इन दावों को फिलहाल आरोप या राजनीतिक चर्चा के तौर पर ही देखा जा रहा है। 21 सितंबर पर टिकी नजरें अब राजस्थान की स्थानीय राजनीति में अगला बड़ा पड़ाव 21 सितंबर है। इसी दिन कई निकायों में महापौर और चेयरमैन पद के चुनाव होने हैं। इन चुनावों से पहले पार्षदों की बाड़ेबंदी और जोड़-तोड़ की कोशिशें तेज रहने की संभावना है। खासकर उन निकायों में जहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीटों का अंतर कम है, वहां हर पार्षद का वोट महत्वपूर्ण हो गया है। चुनाव जीतने के बाद भी जारी है सियासी मुकाबला निकाय चुनाव का मतदान और मतगणना भले ही खत्म हो गई हो, लेकिन स्थानीय सत्ता की असली तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। अब मुकाबला बोर्ड बनाने और बहुमत साबित करने का है। रिसॉर्ट में ठहराए जा रहे पार्षद, निर्दलीयों से संपर्क और करोड़ों की कथित बोली की चर्चाओं ने राजस्थान की स्थानीय राजनीति को फिर सुर्खियों में ला दिया है। आने वाले दिनों में तस्वीर तब साफ होगी, जब महापौर और चेयरमैन चुनाव के नतीजे सामने आएंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
India vs Afghanistan T20

India vs Afghanistan T20: Sanju Samson का तूफान, Rohit Sharma के खास क्लब में शामिल; Afghanistan फिर हारा

India vs Afghanistan T20 के बीच खेले गए दूसरे T20 मुकाबले में टीम इंडिया ने शानदार जीत दर्ज की। मैच में सबसे ज्यादा चर्चा Sanju Samson की रही, जिन्होंने सिर्फ 22 गेंदों में 57 रन बनाकर अफगानिस्तान के गेंदबाजों की मुश्किलें बढ़ा दीं। उनकी इस तेज पारी ने न सिर्फ मैच का रुख बदला, बल्कि उन्हें Rohit Sharma और KL Rahul के खास रिकॉर्ड क्लब में भी पहुंचा दिया। भारत ने इस मुकाबले को 7 विकेट से अपने नाम किया। इसके साथ ही तीन मैचों की T20 सीरीज में टीम इंडिया ने 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। Sanju Samson ने आते ही बदला मैच का रंग लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को Sanju Samson ने आक्रामक शुरुआत दी। उन्होंने मैदान के चारों तरफ शॉट लगाए और महज 22 गेंदों में अपनी फिफ्टी पूरी कर ली। सैमसन ने अपनी 57 रन की पारी में 7 चौके और 4 छक्के लगाए। उनकी बल्लेबाजी देखकर ऐसा लगा कि वह अफगानिस्तान के गेंदबाजों को कोई मौका देने के मूड में नहीं थे। हालांकि उनकी पारी ज्यादा देर नहीं चली, लेकिन इतने कम समय में उन्होंने मैच पर अपनी छाप छोड़ दी। Rohit Sharma और KL Rahul के क्लब में पहुंचे Samson Sanju Samson के लिए यह मुकाबला रिकॉर्ड के लिहाज से भी खास रहा। उन्होंने T20I में बतौर ओपनर भारत के लिए 1,000 रन पूरे कर लिए। इस उपलब्धि के साथ वह Rohit Sharma और KL Rahul के बाद भारत के तीसरे ऐसे बल्लेबाज बन गए, जिन्होंने T20I में ओपनर के तौर पर 1,000 रन बनाए हैं। यह रिकॉर्ड सैमसन के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि लंबे समय से उनकी बल्लेबाजी और टीम में भूमिका को लेकर चर्चा होती रही है। 159 रन के लक्ष्य को भारत ने आसानी से किया हासिल अफगानिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 159/8 रन बनाए। भारत के सामने 160 रन का लक्ष्य था। टीम इंडिया ने इस लक्ष्य को सिर्फ 14.5 ओवर में 3 विकेट खोकर 163 रन बनाते हुए हासिल कर लिया। भारतीय बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही रन बनाने की रफ्तार बनाए रखी और अफगानिस्तान को दबाव से बाहर निकलने का ज्यादा मौका नहीं मिला। Afghanistan के खिलाफ भारत का दबदबा जारी इस हार के साथ अफगानिस्तान के खिलाफ भारत का दबदबा एक बार फिर देखने को मिला। सीरीज के शुरुआती दोनों मुकाबले जीतकर भारत ने 2-0 की बढ़त हासिल कर ली है। अफगानिस्तान के लिए अब तीसरा मुकाबला काफी अहम होगा। टीम की कोशिश हार का सिलसिला रोककर सीरीज का अंत जीत के साथ करने की होगी। वहीं भारत की नजर अब सीरीज में क्लीन स्वीप पर रहेगी। Sanju Samson की पारी बनी मैच की बड़ी Highlight दूसरे T20I में भारत की जीत के कई कारण रहे, लेकिन Sanju Samson की तूफानी पारी सबसे बड़ी Highlight रही। 22 गेंदों में 57 रन ने भारतीय पारी को तेज रफ्तार दी और टीम को लक्ष्य तक पहुंचने में मदद की। सैमसन के रिकॉर्ड और उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने इस मुकाबले को उनके लिए यादगार बना दिया। अब क्रिकेट फैंस की नजरें अगले T20I पर हैं, जहां भारतीय टीम अपनी जीत की लय बरकरार रखना चाहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

About Me

देशहरपल सिर्फ खबरों का मंच नहीं, बल्कि आपकी आवाज़ को सामने लाने का एक सशक्त माध्यम भी है। यहां आपको ताज़ातरीन खबरों के साथ-साथ नौकरी, शिक्षा, और नए भारत की बदलती आर्थिक तस्वीर पर उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी मिलेगी।

Phone: +91 9406783569, +91 755 484 8829
Email: support@deshharpal.com
Address : A-23 Sakshi Bunglow Trilanga Near Aura Mall Bhopal M.P

Recent Posts

  • All Post
  • Breaking News
  • Education
  • More News
  • Web Story
  • एंटरटेनमेंट
  • देश-हरपल
  • धर्म-कर्म
  • प्रदेश
  • बिज़नेस
  • वर्ल्ड न्यूज़
  • वीडियो
  • स्पोर्ट्स
    •   Back
    • एक्सक्लूसिव
    • Editorial
    •   Back
    • IPL 2026
    • T20 वर्ल्ड कप
    • FIFA 2026
    •   Back
    • सोच-विचार
    • हेल्थ
    • ट्रैवल
    • कल्चर
    • एनवायरनमेंट
    • Impact Feature
    •   Back
    • राशिफल
    • पंचांग
    • पर्व-त्यौहार
    • पूजा-पाठ
    • चैत्र नवरात्रि 2025
    •   Back
    • मध्य प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    •   Back
    • टीवी
    • वेब-सीरीज
    • फिल्म रिव्यू
    • बॉलीवुड
    •   Back
    • लाइफस्टाइल
    •   Back
    • स्टॉक-मार्केट

© 2023 Deshharpal. All Rights Reserved.