ब्राजील (Brazil) में राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण के लिए आज, 25 अक्टूबर 2026 को मतदान हो रहा है। Brazil Election में मौजूदा राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा और सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो आमने-सामने हैं। पहले चरण में फ्लावियो ने लूला को करीब 2 प्रतिशत अंकों से पीछे छोड़ दिया था। अब दोनों नेताओं की नजर राष्ट्रपति पद पर है। इस चुनाव को लेकर ब्राजील में राजनीतिक माहौल गर्म है। महंगाई, अपराध, रोजगार और आम लोगों पर बढ़ते आर्थिक दबाव जैसे मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में रहे हैं। वहीं, अमेरिका के साथ ब्राजील के रिश्तों को लेकर भी इस चुनाव को अहम माना जा रहा है। पहले चरण में फ्लावियो बोल्सोनारो को मिली बढ़त ब्राजील में 4 अक्टूबर को हुए पहले चरण के मतदान में फ्लावियो बोल्सोनारो को 47.03 प्रतिशत वैध वोट मिले थे, जबकि लूला दा सिल्वा को 45.16 प्रतिशत वोट हासिल हुए। दोनों उम्मीदवारों के बीच करीब 1.87 प्रतिशत अंकों का अंतर रहा। ब्राजील के चुनावी नियमों के अनुसार, राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार पहले चरण में 50 प्रतिशत से अधिक वैध वोट हासिल नहीं कर पाता, तो सबसे ज्यादा वोट पाने वाले दो उम्मीदवारों के बीच दूसरे चरण का मतदान कराया जाता है। इसी नियम के तहत लूला और फ्लावियो एक बार फिर आमने-सामने हैं। कौन हैं लूला और फ्लावियो बोल्सोनारो? लूला दा सिल्वा ब्राजील के अनुभवी नेताओं में शामिल हैं। वह 2003 से 2010 तक राष्ट्रपति रह चुके हैं और 2023 में तीसरी बार सत्ता में लौटे थे। इस बार उनका जोर सामाजिक कल्याण योजनाओं, गरीबी कम करने और आम लोगों की आर्थिक स्थिति सुधारने पर रहा है। दूसरी ओर, फ्लावियो बोल्सोनारो ब्राजील के सीनेटर और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। वह पहली बार राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। उनके अभियान में अपराध पर सख्त कार्रवाई, सरकारी खर्च पर नियंत्रण और कारोबार को बढ़ावा देने जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं। दोनों नेताओं की राजनीतिक विचारधारा अलग है। ऐसे में यह चुनाव ब्राजील के भविष्य की आर्थिक और राजनीतिक दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महंगाई और अपराध बने बड़े चुनावी मुद्दे चुनाव प्रचार के दौरान बढ़ते घरेलू खर्च, महंगाई, कर्ज और अपराध को लेकर दोनों उम्मीदवारों के बीच बहस हुई। लूला ने अपनी सरकार की सामाजिक योजनाओं और आर्थिक नीतियों को सामने रखा, जबकि फ्लावियो ने कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने और आर्थिक बदलावों पर जोर दिया। आम मतदाताओं के लिए इन मुद्दों का सीधा संबंध रोजमर्रा की जिंदगी से है। खाने-पीने की चीजों का खर्च, रोजगार के अवसर और सुरक्षा जैसे सवाल यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं कि जनता किस उम्मीदवार को अपना समर्थन देती है। जायर बोल्सोनारो का मामला भी चर्चा में फ्लावियो बोल्सोनारो के चुनाव अभियान में उनके पिता जायर बोल्सोनारो की राजनीतिक विरासत भी अहम रही है। जायर बोल्सोनारो को 2022 के चुनाव के बाद सत्ता में बने रहने की साजिश से जुड़े मामले में 2025 में दोषी ठहराया गया था। फ्लावियो ने अपने पिता के समर्थकों को साथ लाने की कोशिश की है। वहीं, लूला ने लोकतांत्रिक संस्थाओं और अपनी सरकार के कामकाज को चुनावी बहस का हिस्सा बनाया है। इससे चुनाव में आर्थिक मुद्दों के साथ राजनीतिक स्थिरता और न्यायपालिका की भूमिका पर भी चर्चा हुई है। अमेरिका के साथ रिश्तों पर भी रहेगी नजर ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसलिए यहां राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीतिक संबंधों पर भी पड़ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और बोल्सोनारो परिवार के बीच राजनीतिक नजदीकी चर्चा में रही है। वहीं, लूला ने अमेरिका के साथ व्यापारिक विवादों और टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर अपनी आपत्ति जताई है। चुनाव के बाद ब्राजील की सरकार अमेरिका के साथ संबंधों को किस दिशा में ले जाती है, इस पर भी दुनिया की नजर रहेगी। चीन के साथ ब्राजील के बड़े व्यापारिक संबंधों को देखते हुए उसकी विदेश नीति का रुख भी महत्वपूर्ण होगा। चुनाव से पहले सर्वे में कांटे की टक्कर मतदान से पहले जारी कई सर्वेक्षणों में फ्लावियो बोल्सोनारो और लूला दा सिल्वा के बीच बेहद करीबी मुकाबला दिखाई दिया। 24 अक्टूबर को प्रकाशित Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग सर्वेक्षणों में फ्लावियो को मामूली बढ़त मिली थी, लेकिन यह अंतर संबंधित सर्वेक्षणों की त्रुटि सीमा के भीतर था। इसका मतलब है कि सर्वेक्षणों के आधार पर किसी उम्मीदवार की जीत तय नहीं मानी जा सकती। मतदाताओं की वास्तविक पसंद का पता मतदान और मतगणना पूरी होने के बाद ही चलेगा। अब सबकी नजर Brazil Election Result पर दूसरे चरण के मतदान के साथ ब्राजील की राजनीति एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। लूला अपनी सरकार को फिर से जनादेश दिलाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो पहली बार राष्ट्रपति पद हासिल करने के लिए मैदान में हैं। पहले चरण में फ्लावियो को बढ़त मिली थी, लेकिन दूसरे चरण में अंतिम फैसला मतदाताओं के वोट से होगा। मतदान के बाद मतगणना और आधिकारिक नतीजे तय करेंगे कि ब्राजील में मौजूदा नेतृत्व जारी रहेगा या देश को नया राष्ट्रपति मिलेगा। ब्राजील के इस चुनाव का असर केवल देश की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। अर्थव्यवस्था, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिहाज से भी इसके नतीजे महत्वपूर्ण होंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!