रायपुर। छत्तीसगढ़ ठोस कचरा प्रबंधन के मामले में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। प्रदेश में हर दिन 2,615.14 टन ठोस कचरा पैदा होता है, जिसमें से 2,612.97 टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा रहा है। यानी उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पैदा होने वाले लगभग पूरे ठोस कचरे का प्रसंस्करण हो रहा है।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की वर्ष 2026 की रिपोर्ट पॉलिसी, प्रैक्टिस एंड प्लास्टिक: कॉस्ट ऑफ मैनेजिंग प्लास्टिक वेस्ट इन इंडियन सिटीज में प्रदेश की कचरा प्रबंधन व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कचरा प्रसंस्करण की दर 100% दर्ज की गई है। प्रदेश के नगरीय निकायों के सभी 3,255 वार्डों में घरों से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र किया जा रहा है।
प्लास्टिक कचरे की मात्रा में आई कमी
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में वर्ष 2022-23 के दौरान 21,170 टन प्लास्टिक कचरा पैदा हुआ। इससे पहले वर्ष 2021-22 में यह मात्रा 51,100 टन और 2020-21 में 47,450 टन दर्ज की गई थी।
आंकड़ों में प्लास्टिक कचरे की मात्रा में उल्लेखनीय कमी दिखाई देती है। हालांकि, केवल इन आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि प्लास्टिक का इस्तेमाल या कचरे की वास्तविक मात्रा भी उसी अनुपात में कम हुई है। इसके लिए आंकड़ों के संकलन, रिपोर्टिंग और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को भी समझना जरूरी है।
कचरा प्रबंधन के खर्च को सार्वजनिक करने की सिफारिश
CSE की रिपोर्ट में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नगरीय निकायों को कचरा संग्रहण से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक होने वाले खर्च का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए।
इसके साथ ही प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन में उत्पादक कंपनियों की जिम्मेदारी के तहत मिलने वाली राशि को वास्तविक खर्च के अनुरूप बनाने की सिफारिश की गई है। कचरे को प्रसंस्करण संयंत्र तक पहुंचाने में लगने वाली लागत को भी इसमें शामिल करने पर जोर दिया गया है।
प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन में जवाबदेही जरूरी
प्लास्टिक कचरे का प्रभावी प्रबंधन केवल संग्रहण और प्रसंस्करण तक सीमित नहीं है। इसके लिए लागत का सही आकलन, पारदर्शी व्यवस्था और उत्पादक कंपनियों की जिम्मेदारी तय करना भी महत्वपूर्ण है।
छत्तीसगढ़ में ठोस कचरे के प्रसंस्करण और घरों से गीला-सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र करने के आंकड़े सकारात्मक तस्वीर पेश करते हैं। अब कचरा प्रबंधन पर होने वाले खर्च और प्लास्टिक कचरे के निस्तारण की व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण होगा।








































