देश की प्रमुख आईटी कंपनियों में शामिल विप्रो ने 15 अक्टूबर को जुलाई-सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी किए। कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 9.1% बढ़कर ₹24,752.7 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹22,697.3 करोड़ था।
हालांकि, रेवेन्यू में बढ़ोतरी के बावजूद कंपनी के मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई। जुलाई-सितंबर तिमाही में विप्रो को ₹3,200.6 करोड़ का मुनाफा हुआ, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह ₹3,246.2 करोड़ था। यानी कंपनी का मुनाफा सालाना आधार पर करीब 1.4% घटा।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि कंपनी की कुल कमाई बढ़ी है, लेकिन खर्चों और अन्य वित्तीय कारकों के कारण अंतिम मुनाफे में मामूली कमी आई है।
विप्रो के तिमाही नतीजों पर एक नजर
| वित्तीय आंकड़ा | जुलाई-सितंबर 2025 | जुलाई-सितंबर 2026 |
|---|---|---|
| रेवेन्यू | ₹22,697.3 करोड़ | ₹24,752.7 करोड़ |
| मुनाफा | ₹3,246.2 करोड़ | ₹3,200.6 करोड़ |
| रेवेन्यू में सालाना बदलाव | — | 9.1% की बढ़ोतरी |
| मुनाफे में सालाना बदलाव | — | 1.4% की गिरावट |
शेयर बाजार में 1.83% की तेजी
तिमाही नतीजों की घोषणा से पहले गुरुवार को विप्रो के शेयर में तेजी देखने को मिली। कंपनी का शेयर 1.83% बढ़कर ₹174.05 पर बंद हुआ।
हालांकि, साल 2026 में अब तक विप्रो के शेयर में करीब 34.9% की गिरावट आ चुकी है। इसी अवधि में निफ्टी 50 में लगभग 12% की गिरावट दर्ज की गई। इस तरह विप्रो के शेयर का प्रदर्शन प्रमुख बाजार सूचकांक के मुकाबले कमजोर रहा है।
कंपनी का बाजार पूंजीकरण यानी मार्केट कैप करीब ₹1.72 लाख करोड़ बताया गया है।
वित्तीय नतीजों से जुड़े शब्दों का आसान मतलब
Q2 FY27: वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही, यानी जुलाई से सितंबर 2026।
Q1 FY27: वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही, यानी अप्रैल से जून 2026।
Q2 FY26: वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही, यानी जुलाई से सितंबर 2025।
रेवेन्यू: कंपनी को अपनी सेवाओं और कारोबार से मिलने वाली कुल आय।
प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT): खर्च, ब्याज और टैक्स सहित संबंधित मदों को घटाने के बाद बचने वाला मुनाफा।
EBITDA: ब्याज, टैक्स और मूल्यह्रास-अमूर्तकरण जैसे खर्चों से पहले की कमाई का एक वित्तीय माप।
EPS: प्रति शेयर कमाई। इससे पता चलता है कि कंपनी ने प्रत्येक शेयर के हिसाब से कितनी कमाई की।
आगे निवेशकों की नजर किन बातों पर रहेगी?
विप्रो के नतीजों में रेवेन्यू की बढ़ोतरी और मुनाफे में गिरावट दोनों महत्वपूर्ण संकेत हैं। निवेशक आगे कंपनी की लागत, नए प्रोजेक्ट्स, आईटी सेवाओं की मांग और भविष्य के कारोबार संबंधी अनुमानों पर नजर रख सकते हैं।
हालांकि, केवल एक तिमाही के नतीजों या शेयर की हालिया गिरावट के आधार पर निवेश का फैसला करना उचित नहीं है। निवेश से पहले कंपनी के आधिकारिक वित्तीय नतीजों और अन्य प्रासंगिक जानकारियों की समीक्षा करना जरूरी है।





































