देश सेवा के बाद शांति से खेती करना चाह रहे एक रिटायर्ड फौजी के साथ दिल दहला देने वाला धोखा हुआ है। सेना से रिटायर देवप्रकाश दुबे को मझगवां गांव के रहने वाले रिखीराम और उसके बेटों ने मिलकर ठगा। सरकारी जमीन को अपनी बताकर 25 लाख रुपए ऐंठ लिए और अब जब पैसे वापस मांगे गए तो उल्टा उनके खिलाफ हरिजन थाने में मारपीट और जातिसूचक शब्दों की शिकायत दर्ज करा दी।
कब, क्या हुआ – घटनाक्रम की पूरी कहानी
- 2014: देवप्रकाश की मुलाकात रिखीराम से उमेश पटेल के जरिए हुई। रिखीराम ने बताया कि उसकी मां बीमार है और बच्चे छोटे हैं, इसलिए जमीन किराए पर देना चाहता है। 7 लाख में 2 एकड़ जमीन 2024 तक किराए पर दी गई।
- 2016: रिखीराम ने उसी जमीन को बेचने की बात की। सौदा 13 लाख में तय हुआ। 6.5 लाख रुपए लेकर दस्तावेज भी दे दिए लेकिन रजिस्ट्री कभी नहीं कराई।
- बाद में खुलासा हुआ कि रिखीराम ने यह जमीन 2009 में पहले ही रमेश सोनी को बेच दी थी। जब फेंसिंग के समय रमेश ने दस्तावेज दिखाए तो देवप्रकाश ने उसे भी 3.5 लाख रुपए दे दिए।
- 2016 से 2024 के बीच रिखीराम ने बीमारी और पारिवारिक कारणों का हवाला देकर टुकड़ों में 9 लाख रुपए और ले लिए।
- 2025 में रिंग रोड योजना के तहत जब जमीन की सरकारी जांच हुई, तब पता चला कि यह पूरी जमीन सरकारी है और किसी के नाम पर नहीं है।
शिकायत पर उल्टा केस कर दिया
देवप्रकाश ने जब पैसे वापस मांगे तो रिखीराम ने खुद हरिजन कल्याण थाने में जाकर उनके खिलाफ शिकायत कर दी — कि मारपीट हुई, जातिसूचक गालियां दी गईं और जमीन पर कब्जा किया गया। लेकिन जब दुबे ने चेक और लेनदेन के दस्तावेज दिखाए तो पुलिस ने उस शिकायत को खारिज कर दिया।
जमीन की कहानी भी दोहरी निकली
रिखीराम पहले ही यह जमीन रमेश सोनी को बेच चुका था, और बाद में दुबे को। अब भी वह इसी जमीन को अन्य लोगों को दिखाकर बेचने की कोशिश कर रहा है। इस तरह देवप्रकाश ने कुल मिलाकर 25 लाख रुपए गवां दिए और अब हाथ में कुछ नहीं है।

पुलिस कर रही जांच
थाना प्रभारी उमेश गोल्हानी ने बताया:
“शिकायतकर्ता को सरकारी जमीन बेची गई है और आरोपी ने कई बार अलग-अलग समय पर पैसे लिए हैं। मामला गंभीर धोखाधड़ी का है। जांच शुरू कर दी गई है, जल्द दोनों पक्षों को थाने बुलाया जाएगा।”
🔴 विशेष अपील:
देश की सेवा करने वाले एक ईमानदार फौजी के साथ हुआ यह धोखा समाज के लिए चेतावनी है। इस मामले में दोषी पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई और रिटायर्ड सैनिक इस तरह ठगा न जाए।
अगर आप भी किसी प्रॉपर्टी डील में पैसा लगा रहे हैं तो पहले उसके दस्तावेज और जमीन की स्थिति जरूर जांच लें। सरकारी जमीन को बेचने का अधिकार किसी के पास नहीं होता।
📌 जुड़े रहिए www.deshharpal.comके साथ – आपके हक की आवाज


