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WPL Auction 2026 RCB, DC और MI की रिटेंशन लिस्ट व पर्स विवरण– मेगा नीलामी

Table of Content

महिला प्रीमियर लीग (Women’s Premier League) का WPL Auction 2026 इस बार पहले से भी बड़ा, रोमांचक और रणनीतिक होने वाला है। 27 नवंबर को नई दिल्ली में होने जा रही इस मेगा नीलामी में कुल 277 खिलाड़ी शामिल होंगी, जिनमें 194 भारतीय और 83 विदेशी खिलाड़ी हैं। BCCI के नए नियम, खासकर RTM Card (Right-to-Match) के शामिल होने से टीमों की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

WPL Auction 2026 क्यों है Mega Special?

RTM Card पहली बार लागू

अब टीमें किसी रिलीज़ किए गए खिलाड़ी को नीलामी में सबसे ऊँची बोली मिलते ही उसी कीमत पर वापस अपनी टीम में ले सकती हैं।
यह नीलामी को और भी प्रतिस्पर्धी और रोमांचक बनाता है।

277 खिलाड़ियों का सबसे बड़ा Player Pool

142 अनकैप्ड भारतीय खिलाड़ियों के साथ यह अब तक का सबसे बड़ा टैलेंट पूल है—कई युवा खिलाड़ियों के लिए WPL 2026 career-changing साबित हो सकता है।

₹15 Crore Purse + Limited Slots

रिटेंशन के बाद हर टीम के पास अलग-अलग पर्स बैलेंस है, जो उनकी नीलामी रणनीति तय करेगा।

Team-wise Retention List और Remaining Purse

RCB – Royal Challengers Bengaluru

Retained Players:

  • स्मृति मंधाना
  • एलिस पेरी
  • ऋचा घोष
  • श्रेयंका पाटिल

Remaining Purse: ₹6.15 करोड़
RTM Card: 1

RCB की नजर मिडल ऑर्डर और तेज गेंदबाजी में मजबूत विकल्पों पर होगी।

DC – Delhi Capitals

Retained Players:

  • जेमिमा रोड्रिग्ज़
  • शैफाली वर्मा
  • एनेबल सदरलैंड
  • मारिज़ान कैप
  • निकी प्रसाद

Remaining Purse: ₹5.75 करोड़
RTM Card: 0

DC पहले से ही संतुलित टीम लेकर नीलामी में उतर रही है। उन्हें सिर्फ टार्गेटेड स्लॉट भरने हैं।

MI – Mumbai Indians

Retained Players:

  • हरमनप्रीत कौर
  • नेट स्किवर–ब्रंट
  • अमनजोत कौर
  • जी. कमलिनी
  • हेली मैथ्यूज

Remaining Purse: ₹5.75 करोड़
RTM Card: 0

MI ऑलराउंडर और फिनिशर सेक्शन को और मजबूत करना चाहेगी।

Other Teams – UPW और Gujarat Giants

  • UP Warriorz के पास सबसे बड़ा पर्स है—टीम नीलामी में आक्रामक बोली लगा सकती है।
  • Gujarat Giants के पास भी कई स्लॉट खाली हैं, जिसके कारण यह टीम नीलामी में “Big Spender” साबित हो सकती है।

WPL Auction 2026 में किन बातों पर रहेगी नजर?

  • Uncapped Indian all-rounders पर टीमों की भारी नजर
  • Pace attack और death overs specialists की मांग बढ़ेगी
  • विदेशी power-hitters और spinners के लिए बड़ी बोली लग सकती है
  • RTM कार्ड कई बड़े ट्विस्ट ला सकता है

WPL Auction कब और कहां होगा?

  • Date: 27 नवंबर
  • Venue: नई दिल्ली
  • Live Streaming: Digital और TV प्लेटफॉर्म्स
  • Post-Auction: पूरी टीम लिस्ट और टॉप बिड्स तुरंत जारी होंगी

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Yukta

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भोपाल। मध्य प्रदेश में एक बड़े ठगी के मामले ने पुलिस को भी हैरान कर दिया है। गुजरात से आकर मध्य प्रदेश में छिपे एक आरोपी पर करीब 14 करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोप है। बताया जा रहा है कि आरोपी लोगों के बीच अपना रुतबा दिखाने के लिए लग्जरी कार और महंगे iPhone का इस्तेमाल करता था। जांच आगे बढ़ी तो इस पूरे मामले के तार सिर्फ मध्य प्रदेश और गुजरात तक सीमित नहीं मिले। पुलिस को आरोपी से जुड़े 65 बैंक खातों और करीब 20 शेल कंपनियों की जानकारी मिली है। इसके अलावा उसके नेटवर्क के हांगकांग तक जुड़े होने की बात भी सामने आई है। लग्जरी लाइफस्टाइल से बनाता था भरोसा आरोपी कथित तौर पर महंगी कार और iPhone के जरिए लोगों के बीच अपनी मजबूत आर्थिक स्थिति की छवि बनाता था। इसी तरह की लाइफस्टाइल देखकर कई लोग उस पर भरोसा कर लेते थे। पुलिस की जांच में सामने आया कि ठगी से जुड़े पैसों को अलग-अलग बैंक खातों और कंपनियों के जरिए घुमाया जाता था। इससे पैसों के लेन-देन को समझना जांच एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया। 65 बैंक अकाउंट और 20 शेल कंपनियां जांच के दौरान आरोपी से जुड़े 65 बैंक खातों का पता चला है। इसके साथ ही करीब 20 शेल कंपनियों के इस्तेमाल की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस अब इन खातों और कंपनियों के जरिए हुए लेन-देन की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इन कंपनियों के जरिए कितनी रकम ट्रांसफर की गई और इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। हांगकांग तक जुड़े ठगी के तार मामले की जांच में नेटवर्क के हांगकांग तक जुड़े होने की जानकारी सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। अब एजेंसियां विदेशी लेन-देन और नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। फिलहाल जांच जारी है। 14 करोड़ रुपये की ठगी, कई बैंक खातों और शेल कंपनियों के सामने आने से यह मामला एक संगठित वित्तीय अपराध की ओर इशारा करता है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और रकम के इस्तेमाल की तस्वीर साफ हो पाएगी।
Bhopal बड़ा तालाब की हद जानने Drone Survey, गौहर महल के पास से हुई शुरुआत

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भोपाल। राजधानी भोपाल के मशहूर बड़ा तालाब यानी भोजताल की वास्तविक सीमा और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति जानने के लिए ड्रोन सर्वे शुरू किया गया है। इस सर्वे के जरिए तालाब के उन हिस्सों की भी ग्राउंड रिकॉर्डिंग की जा रही है, जहां पहुंचकर जांच करना मुश्किल है। ड्रोन को गौहर महल के पास से उड़ाया गया, जहां से भोजताल के अलग-अलग क्षेत्रों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड किए गए। सर्वे के दौरान तालाब के आसपास के इलाकों की मौजूदा स्थिति को बारीकी से दर्ज किया जा रहा है। संवेदनशील इलाकों की होगी रिकॉर्डिंग ड्रोन सर्वे का मुख्य उद्देश्य बड़ा तालाब की सीमा और उसके आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों की सही स्थिति सामने लाना है। इसके लिए ऊपर से पूरे इलाके की रिकॉर्डिंग की जा रही है, ताकि जमीन पर मौजूद स्थिति का बेहतर आकलन किया जा सके। इस रिकॉर्डिंग से अधिकारियों को तालाब की सीमा, आसपास हुए बदलाव और अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी। ग्राउंड रिकॉर्डिंग से सामने आएगी वास्तविक स्थिति ड्रोन से मिली तस्वीरों और वीडियो को आगे की जांच में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे उन स्थानों की भी जानकारी मिल सकेगी, जहां सामान्य सर्वे के दौरान पहुंचना आसान नहीं होता। बड़ा तालाब भोपाल की पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण जलस्रोत है। ऐसे में उसकी सीमा और आसपास के क्षेत्रों का सही रिकॉर्ड तैयार करना प्रशासन के लिए काफी अहम माना जा रहा है। फिलहाल ड्रोन सर्वे के जरिए जुटाई जा रही जानकारी का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई या निर्णय लिए जा सकते हैं।

Bhopal में डुप्लीकेट चाबी से 4 लाख की चोरी, किरायेदार युवती 48 घंटे में गिरफ्तार

भोपाल। राजधानी भोपाल में चोरी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक घर में डुप्लीकेट चाबी की मदद से करीब 4 लाख रुपये की चोरी की गई। पुलिस ने मामले की जांच करते हुए वारदात के सिर्फ 48 घंटे के अंदर किरायेदार युवती को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, चोरी की शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की गई। आसपास के लोगों और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाने के साथ पुलिस ने मामले की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं। जांच के दौरान किरायेदार युवती पर शक गहराया और पूछताछ में पुलिस को अहम जानकारी मिली। डुप्लीकेट चाबी से खोला घर जांच में सामने आया कि घर में प्रवेश करने के लिए डुप्लीकेट चाबी का इस्तेमाल किया गया था। चोरी के बाद आरोपी युवती ने नकदी और सोने के आभूषण अपने पास रख लिए थे। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की और चोरी का सामान बरामद कर लिया। 3.79 लाख रुपये कैश और सोने का हार बरामद पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 3.79 लाख रुपये नकद और सोने का हार बरामद किया है। बरामद सामान की कुल कीमत करीब 4 लाख रुपये बताई जा रही है। 48 घंटे में खुला चोरी का मामला मामले में पुलिस की तेज कार्रवाई देखने को मिली। शिकायत दर्ज होने के करीब 48 घंटे के भीतर आरोपी युवती को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी की पूरी योजना कैसे बनाई गई और डुप्लीकेट चाबी किस तरह हासिल की गई। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी है। इस घटना के बाद घरों में चाबी और जरूरी सामान की सुरक्षा को लेकर भी लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...

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